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नीलम के फायदे ?

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ᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎᙎ नीलम रत्न की वजह से बढ़ती है एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता, इसके शुभ असर से मिल सकता है धन लाभ और मान-सम्मानज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु ये नौ ग्रह हैं और इन ग्रहों के लिए अलग-अलग रत्न बताए गए हैं। ग्रहों के अनुसार रत्न पहनने से संबंधित ग्रह के दोष दूर हो सकते हैं और शुभ प्रभाव बढ़ सकते हैं। वास्तु विशेषज्ञ , लालकिताब और वैदिक ज्योतिषाचार्य पं: अभिषेक शास्त्री जी के अनुसार शनि के अशुभ असर को दूर करने के लिए नीलम धारण करना चाहिए। जानिए नीलम रत्न से जुड़ी खास बातें... शनि बदल सकता है किस्मत  ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश माना गया है। शनि किसी भी व्यक्ति का भाग्य बदल सकता है। कुंडली में शनि शुभ हो तो सफलता मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नीलम शनि का प्रिय रत्न माना जाता है, इसके प्रभाव से कमजोर शनि का बल बढ़ सकता है। नीलम की वजह से सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।  ये रत्न मन की अशांति दूर करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। जिन लोगों को नीलम फल जाता है यानी जिनके लिए ये र...

ग्रहों का प्रभाव

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  ग्रहों का प्रभाव देता है अच्छे व बुरे परिणाम   व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है। हर व्यक्ति की कुण्डली में ग्रहों के कुछ विशेष योग होते हैं।  ज्योतिषशास्त्र के माध्यम से इन योगों से व्यक्ति के जीवन में कब कैसा उतार चढ़ाव आएगा, इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जन्म कुण्डली में योग का अध्ययन करते समय योग बनाने वाले ग्रहों की स्थिति का आंकलन बहुत ही सूक्ष्मता पूर्वक किया जाना होता है। योग के दौरान जो ग्रह प्रबल होता है उसका फल ही प्रमुख रूप से प्राप्त होता है। अगर आप जानना चाहते हैं, अपने उज्जवल भविषय के बारे में तो संपर्क करें।   शास्त्री जी  http://astronarayan.com/

ग्रह योग

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  क्या होता है ग्रह योग  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  ग्रह योग की जब हम बात कर रहे हैं तो सबसे पहले यह जानना होगा कि ग्रह योग क्या है और यह बनता कैसे है। विज्ञान की भाषा में बात करें तो दो तत्वों के मेल से योग बनता है ठीक इसी प्रकार दो ग्रहों के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रह योग बनने के लिए कम से कम किन्हीं दो ग्रहों के बीच संयोग, सहयोग अथवा सम्बन्ध बनना आवश्यक होता है।  ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों के बीच योग बनने के लिए कुछ विशेष स्थितियों का होना आवश्यक होता है।जैसे: दो या दो से अधिक ग्रह मिलकर एक दूसरे से दृष्टि सम्बन्ध बनाते हों। भाव विशेष में कोई अन्य ग्रह आकर संयोग करते हों। कारक तत्व शुभ स्थिति में हों।  कारक ग्रह का अकारक ग्रह से सम्बन्ध बन रहा हो। एक भाव दूसरे भाव से सम्बन्ध बना रहे हों। नीच ग्रहों से मेल हो अथवा शुभ ग्रहों से मेल हो। इन सभी स्थितियों के होने पर या कोई एक स्थिति होने पर योग का निर्माण होता है।

Role of various bhaavs

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 "Role of various  Bhaavas  Narayan Jyotish Paramarsh" #astro, #astronarayan, #bestastrologer, #jpastro #astriyogi, #jyotish, #Narayan, #narayan jyotish, #narayanjyotishparamarsh,       💐"Lagna"💐 👉🏻It represents body of the nation, its environment, cooperation, morality, public health, general well-being and home-ministry. If afflicted, there will be disturbance, anarchy, class-struggle and failure of administration.       💐"2nd Bhaav"💐  👉🏻It represents financial state of the nation, foreign exchange, national budget revenue, tax, planning, banking, internal trade, total national production/ wealth and stock-exchange.  In this bhaav, there may be emergency situation.      💐"3rd bhaav"💐  👉🏻It represents communications, transport, information collection/ broadcasting, military strength, neighbours and mental state of its people. If afflicted, it denotes loss of food-grains, water-tragedies, train- acc...

True love

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!!!Astro !!! Astro Narayan !!! Jp Astro !!! Best Astrologer !!! Narayan !!! !!! Narayan Jyatish !!! AstroYogi!!!  🌷 True love & bond is inseparable & always exists within one's soul.... 👁️This is the launguage of the eyes which read other eyes heal entirely & nurture the soul that makes one feel alive...And gives the new optimism about the life.😇🙏 🌍World is really big but the heart who can understand urs is rare to meet !! ✨That deep belonging & soul spark has no wordly defination but an eternal experience in itself which leaves imprint on ur existence. 💜If you find one in any form take it as God's token of love for you... Understand them, value them & keep them closer to your heart... 😇Only luckiest one gets the chance to love & being loved & understood so deeply on such pious soul level.... 👩‍❤️‍👨When you respect & accept eachother from the core & love unconditionally every day is day of Love & bliss.... 🌹 Pt.AbhishekShastri...

कैसे बनें करोड़पति !!!

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  ऐसा योग है तो आप बनेंगे करोड़पति... astroyogi !!! astro !!! astronarayan !!! bestastrologer !!! blog !!! jpastro !!! jyotish !!! Narayan !!! narayan !!! jyotish !!! narayanjyotishparamarsh   👉ज्योतिषशास्त्र में कुछ विशेष शुभ योग भी बताए जाते हैं, ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग हैं, तो व्यक्ति को जीवनभर धन की कमी नहीं रहती है। ऐसे ही शुभ योगों में से एक योग है रुचक योग।  👉 कुंडली में मंगल ग्रह अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण या उच्च का होकर केंद्र में स्थित हो तो रुचक योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से बलवान होता है। अपने कार्यों से वह संसार में प्रसिद्ध होता है और स्वयं के अतिरिक्त देश का नाम भी ऊंचा करता है।  👉वह स्वयं राजा होता है या उसका जीवन राजा की तरह होता है। सामान्यत: आज के समय में ऐसे योग वाले व्यक्ति करोड़पति हो सकते हैं। अपनी संस्कृति के प्रति वह आस्थावान होता है। देश की उन्नति के लिए प्रयास करता है। वह भावना से युक्त होता है व उसके साथ कई लोग रहते हैं। उसके मित्र सच्चे होते हैं व चरित्र उज्जवल होता है। ...

राजनेता बनने के योग

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  आपकी कुंडली में हैं ये योग, तो आपको बड़ा राजनेता बनाकर छोड़ेगें।  व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है।  ज्योतिषशास्त्र एक ऐसी विद्या है जो लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को उजागर करने में सक्षम है। कुंडली अध्ययन के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु)के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भी गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।    किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह 'स्व' अर्थात स्वयं को सूचित करता है और इस पर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है। जानकारों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के योगों का बड़ा महत्व है। पराशर से लेकर जैमनी तक सभी ने ग्रह योग को ज्योतिष फलदेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है। अपने कुंडली से संबधित और अधिक जानकारी के लिए कृपया पेज को सब्स्क्राइब करें।...

बुध अरिष्ट शांति के विशेष उपाय एवं टोटके

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ १👉 ब्रह्मी बूटी या तुलसी की जड़ हरे वस्त्र में रखकर बुध के नक्षत्रो (अश्लेशा,ज्येष्ठा, एवं रेवती) में बुध के बीज मंत्र की कम से कम ३ माला जप करने के बाद हरे रंग के धागे में गंगा जल के छींटे लगा कर पुरुष दाहिनी तथा स्त्री बाहिनी भुजा में धारण करने से बुध कृत अरिष्ट की शांति होगी। २👉 किसी भी शुक्ल पक्ष के  प्रथम बुधवार से शुरू करके लगातार २१ दिन तक श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ नियमित रूप से करें अंतिम दिन उद्यापन में पांच कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र ५ फल एवं मिठाई दक्षिणा सहित दान करने से बुध के शुभत्व में वृद्धि होती है। ३👉 विद्या में बाधा या वाणी में दोष होने की स्तिथि में सरस्वती स्त्रोत्र का शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ करके २१ दिन लगातार माँ सरस्वती को इलाईची, मिश्री एवं केले का भोग अर्पण करने के बाद पाठ करने से दोषों की शांति होती है। पाठ के बाद प्रसाद को बाँट कर स्वयं ग्रहण करे। सायं काल तुलसी जी के आगे घी का दीप जलाएं। ४👉 व्यापार में हानि अथवा संतान कष्ट की स्थिति में प्रत्येक बुधवार या प्रतिदिन गोपाल सहस्त्रनाम का ...

गोचर में बुध

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〰️〰️〰️〰️ जन्म या नाम राशि से २' ४' ६' ८' १० व ११ वें स्थान पर बुध शुभ फल देता है। शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है। जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग, चुगलखोरी, धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है। दूसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है। तीसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है। चौथे👉 स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है। पांचवें👉 स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है। छठे👉 स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता है लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है। सातवें👉 स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है। आठवें👉 स्थान पर ...

बुध का सामान्य दशा फल

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध स्वग्रही, मित्र, उच्च राशि, नवांश का, शुभ भावाधिपति, षड्बली, शुभ युक्त, दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुद्धि की प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता, हास्य में रूचि, सुख-सौभाग्य, गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है। लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है। जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है। यदि बुध अस्त , नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार मे...

बुद्ध ग्रह का आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव

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〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :- मेष👉 बुध हो तो जातक कृश देह वाला, धूर्त, विग्रह प्रिय, नास्तिक, दाम्भिक, मद्यपान करने वाला, जुआरी,,नृत्य संगीत में रूचि रखने वाला, असत्य भाषी ,लिपि का ज्ञाता, परिश्रम से प्राप्त धन को नष्ट करने वाला,रति प्रिय,ऋण व बंधन भोगने वाला,कभी चंचल तो कभी स्थिर स्वभाव का होता है। वृष👉 बुध  हो तो जातक कार्य में दक्ष, विख्यात, शास्त्र का ज्ञाता, वस्त्र अलंकार व सुगंध प्रेमी, स्थिर प्रकृति,उत्तम स्त्री व धन से युक्त, मनोहर वाणी वाला, हास्य प्रेमी व वचन का पालन करने वाला होता है। मिथुन👉   बुध हो तो जातक ,बहुत विषयों का ज्ञाता ,शिल्प कला में कुशल,धर्मात्मा,बुद्धिमान, प्रिय भाषी,कवि,अल्प रतिमान, स्वतंत्र, दानी,पुत्र-मित्र युक्त,प्रवक्ता एवम अधिक कार्यों में लीन होता है। कर्क👉 बुध हो तो जातक प्राज्ञ,विदेश निरत, रति व गीत संगीत में चित्त वाला,स्त्री द्वेष के कारण नष्ट धन वाला,कुत्सित,चंचल,अधिक कार्यों में रत,अपने कुल कि कीर्ति के कारण प्रसिद्ध,बहु प्रलापी जल से धन लाभ प्राप्त करने वाला तथा अपने बन्धु-बां...

बुध ग्रह एक परिचय

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बुध👉 ग्रह रजोगुणी, पृथ्वी तत्त्व प्रधान,क्षुद्र जाति, गोलाकृति, त्रिधातु प्रकृति, उत्तर दिशा का स्वामी, दूर्वा की भांति हरा रंग, चर प्रकृति, मिश्रित रस, धातु स्वर्ण तथा इसके अधिपति देवता भगवान् श्री विष्णु हैं। ग्रह मंडल में बुध युवा राजकुमार का प्रतिक है। बुध मिथुन एवं कन्या राशि का स्वामी है तथा यह कन्या राही के १५° अंश पर परमोच्च और मीन के १५° अंश पर परम नीच का माना जाता है।तथा कन्या राशि के १६° से २०° तक मूल त्रिकोणस्थ होता है।इसकी सूर्य-शुक्र के साथ मैत्री भाव , चंद्र के साथ शत्रु भावी, मंगल-गुरु-शनि के साथ समभाव रखता है।बुध एक राशि चक्र को लगभग १८ दिन में पूरा कर लेता है। कारकत्व👇 〰️〰️〰️ बुध बुद्धि-चातुर्य, वाक् शक्ति(वाणी), त्वचा, मित्र-सुख, विद्या, शिल्प, व्यवसाय, लेखन, गणित, कला आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त बुध से ज्योतिष, निपुणता, चिकित्सा, क़ानून, व्यापर, बंधु सुख, अध्यापन, संपादन, चित्रकला, चाची, मामी, मौसी, भानजा, भानजी, आदि बंधु वर्ग,भगवान् विष्णु संबंधी धार्मिक कार्य,विवेक, बुद्धि, तर्क-वितर्क, प्रकाशन, अभिनय, वकालत आदि बौद्धिक कार्यो का विच...

शारदीय नवरात्र

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***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***    ***   ***   ***    ***    ***    ***   *** आप सभी को यह जानकर अति प्रसन्नता होगी, कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नारायण ज्योतिष परामर्श के द्वारा शारदीय नवरात्र के शतचण्डी महायज्ञ के अनुष्ठान की तैयारियां पूरे जोर - शोर से चल रही हैं। आप सभी इस अनुष्ठान में अपना सक्रिय योगदान दे सकते हैं। मै पं:अभिषेक शास्त्री आप सभी से अनुरोध करता हूँ , कि आप अपने परिवार की सुख - शांति व समृद्धि हेतु इस स्वर्णिंम शुभ अवसर का लाभ उठावें तथा माँ भगवती की कृपा प्राप्त कर जीवन को कृतार्थ करें। 😐🙏🙏 So please click the link . http://astronarayan.com/

AstroSuccess

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जन्मकुण्डली में शनि

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  शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति को प्राप्त होते हैं. आईये उन्हें जानते हैं। ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***    ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***  ज्योतिष संबंधित  समस्त जानकारी के लिए इस पेज को फॉलो करें लाइक करें और शेयर जरूर करें अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें। शनि + सूर्य – कुण्डली में शनि और सूर्य का योग बहुत शुभ नहीं माना गया है यह जीवन में संघर्ष बढ़ाने वाला योग माना गया है फलित ज्योतिष में सूर्य, शनि को परस्पर शत्रु ग्रह माना गया है कुंडली में शनि और सूर्य का योग होने पर व्यक्ति को आजीविका पक्ष में संघर्ष का सामना करना पड़ता है विशेष रूप से करियर का आरंभिक पक्ष संघर्षपूर्ण होता है और यदि शनि अंशों में सूर्य के बहुत अधिक निकट हो तो आजीविका में बार बार उत्तर चढाव रहते है, शनि और सूर्य का योग होने पर जातक को या तो ...

हस्तरेखा शास्त्र:

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 हाथ की ये तीन रेखांए बताती हैं जीवन का पूरा हाल, आपने देखी क्या ... हथेली में कई ऐसी रेखांए होती है जो आपके पूरे जीवन का हाल बता देती हैं। जैसे आप मन से कैसे है,आपका दिमाग कितना तेज है, आपकी आयु कितनी है और आपको जीवन में प्रेम मिलेगा की नहीं । यह सब बातें हृदय रेखा , मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा से जानी जा सकती है। हथेली में कई ऐसी रेखांए होती है जो आपके पूरे जीवन का हाल बता देती हैं। जैसे आप मन से कैसे है,आपका दिमाग कितना तेज है, आपकी आयु कितनी है और आपको जीवन में प्रेम मिलेगा की नहीं । यह सब बातें हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा से जानी जा सकती है। आज के समय में हर किसी के पास ये इतना समय नहीं होता कि वो ज्‍योतिषी के पास जाकर अपने बारें में जान सकें। लेकिन आज हम आपको इन्ही सब रेखाओं के बारे में बतायेंगे। जीवन रेखा ... जीवन रेखा की बात करें तो यह तर्जनी एवं अंगूठे के मध्य से होकर गुजरती है या यह कह सकते है की जीवन रेखा गुरु पर्वत के नीचे से तथा मंगल पर्वत के ऊपर से निकलती है। जीवन रेखा शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबंध के पास तक जाती है। जीवन के ल...

मेरा/आपका किचन !!

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त्रिशूल रेखा

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बेहद खास व्यक्ति के हाथ में होते हैं त्रिशूल रेखा ...  यदि हस्तरेखा में त्रिशूल रेखा हो तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है तथा सामाजिक मान-सम्मान पद प्रतिष्ठा या उच्च पद की प्राप्ति होती है राजनीति या सरकारी या राज्य या केंद्र से जुड़ा हुआ अनेक प्रकार के लाभ होता है तथा समाज में अनेक प्रकार के भौतिक सुख सुविधा आदि की प्राप्ति होती है तथा धन संपदा से परिपूर्ण होता है आपके हाथ में भी इस तरह की किसी भी प्रकार की रेखाएं बन रही है तो आप संपर्क करें और हस्तरेखा से जुड़ा हुआ जानकारी प्राप्त करके जीवन में अनेकों लाभ लें और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग कुंडली विश्लेषण हस्तरेखा विश्लेषण यंत्र मंत्र तंत्र के लिए संपर्क करें ..   सम्पर्क सूत्र - +91-8788381356 परामर्श शुल्क 351 ₹           

अपने चेहरे के आकार से जानिए कितने भाग्‍यशाली हैं आप ...

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श्री गणेश की जी काल्पनिक कुंडली

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श्री गणेश की जी  काल्पनिक कुंडली से जानें उनके व्यक्तित्व को  सर्वप्रथम पूजनीय व हर कार्य में प्रथम माने जाने वाले भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को मेष लग्न में हुआ। यह कुंडली कल्पना से बनाई गई है, जो गणेशजी के व्यक्तित्व पर आधारित है। लग्न को सिर माना गया है। लग्न में केतु है, शनि की चतुर्थ भाव से लग्न पर नीच की दृष्टि आ रही है। यानी शनि की कुदृष्टि पड़ने से उनका सिर धड़ से अलग हुआ। केतु पृथकता का कारक भी है। पौराणिक कथा के अनुसार माता का आदेश था कि किसी को भी स्नान करते वक्त नहीं आने दिया जाए। कर्क राशि, माता भाव में विराजमान है वहीं शनि भी है। शनि की दशम दृष्टि लग्न पर है  अत: शनि की कुदृष्टि के कारण सिर धड़ से अलग हुआ। यह उन्हीं के पिता भगवान शिव ने किया। ऐसा कुंडली के अनुसार देखें तो मंगल की दृष्टि लग्न व केतु पर पड़ रही है। शनि, मंगल का दृष्टि संबंध भी बन रहा है। चतुर्थ यानी माता व दशम यानी पिता भाव में स्थित ग्रहों के कारण यह संयोग बना। श्री गणेश माता-पिता के भक्त हैं। इसकी वजह सूर्य पर गुरु की कृपादृष्टि होना मान सकते ह...