Wednesday, July 29, 2020


Loneliness is a state of mind.  it means with out companions. One  important factor in loneliness is a person’s social lifes & contacts.  We depend on various people for different reasons. For instance, our family give us emotional supports, our parents and teachers give us guidance ,our friends share similar interest .

It needs to be emphasized here that but loneliness is not about how many friends /social contacts you have, it is about how many friends /social contacts we think or expect we should have.For instance lonely people may have many social contacts, they some times feel they should have more. They question their own popularity .Loneliness is a subjective experience. If you think you are lonely, then you are lonely. Even though if you are in a middle of party, u can feel lonely. Conversely a person can be alone, and not feel lonely if he has no desire for social interaction. Loneliness is an emotion, a lack, a feeling that something is missing, a pain, a depression, a need , an incompleteness, an absence.

Saturn, Venus, Ketu, 3rd,8th & 12th houses and lords are responsible for loneliness.
Planet  Saturn is father of loneliness, main reason is loneliness is our social connection with friends, family, if your Saturn is melefic then loneliness come.
Planet Venus means is god of love. Loneliness can occur in situations when some one unsucces in love so Planet Venus is important for this.
Planet Ketu is spiritual releted so it can give you loneliness if he is not in good position in horoscope.
When lords of 3rd ,8th and 12th houses are afflicting the houses of 1st ,4th and 9th or their lords, they are likely to cause loneliness.
Planet Saturn and Planet Ketu is responsible for natural  loneliness.
Lord of 3rd, 8th or 12th houses is also responsible for loneliness so try propitiating them.
If you are wearing blue sapphire, cats eye or other gemstones related to Planet Saturn & Planet Ketu or lords of 3rd, 8th and 12th houses remove them ,unless you are really sure they are good for you. Devotion towards God through sincere prayers, spells and meditation is important and safe remedies for loneliness.

Monday, July 27, 2020


Vedic Astrology Planet Moon is releted for mind, so when planet Moon is weak with other malefics like Planet Saturn, Planet Rahu,Planet Ketu and Planet Mars then person will be generally weak in mind and fearful.
In your horoscope when 6th house, 8th house and 12th house is affected by bad cusps lords and planet then it plays a crucial roles in fear anxiety, depression, low confidence . Planet Moon goes to enemy house with affliction from Planet Rahu or Planet Saturn then native will be always with fear and anxiety.
Important role in horoscope is Accendent lord, it important to access native mental stability, when Accendent lord becomes weak and occupies with bad house aspected by planet Rahu or Planet Saturn will make native anxious.

Planet Moon is play important role in our life so you always do some precostions about this planet, drink lots of water every day, because moon is watery planet so you do this, White and watery Planet Moon can cause a lot of spiritual and emotional problems that go a long way in weakening our body. Remember mind and body are inter-related. If your mind is unhealthy then you're bound to have lots of physical problems sooner or later. Pains, migraines, tremors, pain in the neck, body and joints are some of the most common illnesses that a bad moon causes. It causes deficiency of calcium. So, you must increase the intake of those calcium rich food items in your diet and drink milk. Please drink a cup of milk preferably with, green cardamoms  every day. If you're an Insomnia patient, then drink this milk half an hour before going to sleep.

Wear Silver Ornaments always, donate milk, rice, sugar on monday to needy people, most important

remedy for Anxiety is do Meditation and Pranayama on regular
 "AnulomVilom" pranayam is considered one of the best remedies to improve mind and soul, and get rid of problems like, insomnia, unhappiness, stress and anxiety. You can also simply recite- Om for 10 minutes. Do this daily either in the morning within an hour of sunrise  or evening  within in an hour of sunset.
More information, contact to use constitution remedy method and after horoscope analysis, get many types of information and there will definitely be a solution and you will definitely get benefits.

Tuesday, July 21, 2020

रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है ?

शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा।

जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै
दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।
मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।
पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।
बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।
जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।
घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।
तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः।
प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।
केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः।
शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।
श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!
सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!
पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।।
जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।
पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।
महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा।
कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।

जल से रुद्राभिषेक करने पर — वृष्टि होती है।
कुशा जल से अभिषेक करने पर — रोग, दुःख से छुटकारा मिलती है।
दही से अभिषेक करने पर — पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
गन्ने के रस से अभिषेक करने पर — लक्ष्मी प्राप्ति
मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर — धन वृद्धि के लिए।
तीर्थ जल से अभिषेकक करने पर — मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इत्र मिले जल से अभिषेक करने से — बीमारी नष्ट होती है ।
दूध् से अभिषेककरने से — पुत्र प्राप्ति,प्रमेह रोग की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण
गंगाजल से अभिषेक करने से — ज्वर ठीक हो जाता है।
दूध् शर्करा मिश्रित अभिषेक करने से — सद्बुद्धि प्राप्ति हेतू।
घी से अभिषेक करने से — वंश विस्तार होती है।
सरसों के तेल से अभिषेक करने से — रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
शुद्ध शहद रुद्राभिषेक करने से —- पाप क्षय हेतू।
इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से जाने-अनजाने होने वाले पापाचरण से भक्तों को शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है और साधक में शिवत्व रूप सत्यं शिवम सुन्दरम् का उदय हो जाता है उसके बाद शिव के शुभाशीर्वाद सेसमृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति।

Saturday, July 18, 2020

मंगला गौरी व्रत

श्रावण मास में जिस प्रकार सोमवार का महत्व होता है ठीक उसी प्रकार से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार का भी एक अलग महत्व है हमारे सनातन शास्त्र के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा करनी चाहिए संभव हो तो व्रत कीजिए या फिर पूजा अर्चना के बाद बिना लहसुन प्याज का वैष्णो भोजन कर लीजिए या मीठा भोजन कीजिए या फलाहार कर लीजिए.

मंगला गौरी व्रत वैसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनके जीवन में मंगल ग्रह के कारण मंगल दोष के कारण अशांति आर्थिक क्षति व्यवसायिक हानि बिना गलती किए दंड मिलते हैं और मंगल के कारण जिनका दांपत्य जीवन अच्छा नहीं चल रहा है अथवा मंगल ग्रह के दोष के कारण जिनके विवाह नहीं हो रहे हैं ऐसे लोग लड़के या लड़की दोनों हैं श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा अर्चना करें यह पूजा सबसे पहले माता जानकी ने त्रेता युग में किया था और अपने मनोवांछित पति श्री राम भगवान को पति रूप में प्राप्त किया था वही माता जानकी ने गया में मंगला गौरी भगवती की स्थापना की मंगला गौरी भगवती की पूजा दुर्गा जी के चित्र पर कर सकते हैं.
 या भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का जो चित्र है उस पर भी कर सकते हैं संभव हो तो आचार्य को बुला लीजिए अच्छे पंडित को बुला लीजिए अगर संभव नहीं हो जैसे दुर्गा जी की पूजा करते हैं फूल बिल्वपत्र चंदन धूप दीप नैवेद्य वस्त्र सिंदूर आज से पूजा कीजिए और मंगल ग्रह के कारण जो विवाह नहीं हो रहा है वैवाहिक जीवन में तनाव हो रहा है शारीरिक या व्यवसायिक हनी हो रही है उसको दूर करने के लिए मंगला गौरी भगवती से प्रार्थना कीजिए अमंगल को दूर करके भक्तों के जीवन में मंगल ही मंगल करने के लिए दुर्गा जी का नाम मंगला गौरी से जाना जाता है 21 जुलाई को मंगलवार है सावन मास का शुक्ल पक्ष का और फिर 28 जुलाई को मंगलवार है शुक्ल पक्ष का दोनों ही दिन मंगला गौरी भगवती की पूजा कीजिए।
कृपया और अधिक जानकारी हेतु पेज फॉलो जरूर करें। 
जय माता मंगलागौरी🙏🙏

नागपंचमी पूजा

श्रावण मास में एक नाग पंचमी पूजा कृष्ण पक्ष में होती है और दूसरी नाग पंचमी पूजा शुक्ल पक्ष में होती है कृष्ण पक्ष के नाग पंचमी को मौना नाग पंचमी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष के नाग पंचमी को नाग पंचमी कहा जाता है ।
नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नाग देवता की पूजा करनी चाहिए नाग पंचमी पूजा हमारे सनातन शास्त्र में परिवारिक और पारंपरिक विधि से की जाती है ज्योतिष के दृष्टिकोण से नाग पंचमी पूजा वैसे लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है जिन्हें राहु केतु और चंद्रमा के कारण जीवन में आर्थिक रूप से व्यावसायिक रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से और सफलता मिलती है संतान नहीं होती है इलाज करने के बाद भी बीमारी ठीक नहीं होती सारे प्रयास करने के बाद भी व्यवसाय में कार्यालय में परिवार में और जीवन में सफलता नहीं मिलती इस दिन नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा कीजिए नाग देवता के पूजा कीजिए दान दक्षिणा कीजिए और अपनी समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना कीजिए श्रावण मास कृष्ण पक्ष की नाग पंचमी समाप्त हो चुकी है अब 25 जुलाई को श्रावण मास शुक्ल पक्ष के नाग पंचमी है परंपरा के अनुसार नाग पंचमी के दिन घर के दीवार पर चारों ओर नाग देवता के शरीर से लपेट दिया जाता है घर के द्वार पर नाग देवता का चित्र बनाया जाता है पूजा का विधि परंपरा के अनुसार उचित ।
 जिनके परिवार में कोई मां गर्भवती हैं उस परिवार में केवल द्वार पर नाग देवता का चित्र बनाएंगे किंतु अपने घर को नाग देवता से बांधेंगे नहीं दही का खेल दूध का खीर नीम का पत्ता नींबू तालाब के शैवाल आदि से गाय के कच्चे दूध धान का लावा आदि से नाग देवता की पूजा होती है किंतु जो लोग राहु केतुऔर चंद्रमा के कारण अपनी असफलता को दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन श्री शंकर भगवान और नाग देवता की पूजा करेंगे उन्हें वैसे ही पूजा करनी है जैसे और दिन महाशिवरात्रि आज में शंकर भगवान की पूजा करते हैं।

Friday, July 17, 2020

सोमवती अमावस्या पर विशेष:

20 जुलाई को सोमवार है श्रावण मास का तीसरा सोमवार और उसी दिन रात में 10:00 बज कर 33 मिनट तक अमावस्या तिथि का महान संयोग है और उस दिन चंद्रमा अपनी कर्क राशि में रहेंगे यह जो दोनों संयोग सोमवार को पढ़ रहे हैं यह भगवान भोलेनाथ और भगवान विष्णु के भक्तों के लिए मनोकामनाओं को पूर्ण करने की अपूर्व महत्ता में है सोमवार को जब अमावस्या तिथि का संयोग होता है उस दिन स्त्री पुरुष माताएं भगवान भोलेनाथ के भगवान श्री विष्णु के आराधना करते हैं अपने परिवार अपने जीवन में सुख समृद्धि आयु आरोग्य और हर प्रकार के मंगलकारी हल्की प्राप्ति के लिए जिनके विवाह नहीं हो रहे हैं वह वर और कन्या है सोमवती अमावस्या के दिन व्रत करें और संभव हो तो पीपल के वृक्ष के नीचे श्री विष्णु भगवान के चित्र को रखकर पीले फूल पीले फल आज से आज से पूजा करें और शीघ्र विवाह के लिए विवाह के बाद हर प्रकार से सुखद दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए श्री विष्णु भगवान की पूजा करें आरती करें पीले फूल पीले जन्म यज्ञोपवीत पीला फल हल्दी चंदन श्रीखंड चंदन धूप दीप नैवेद्य आज से आराधना कर अपने शीघ्र विवाह के लिए भगवान श्री विष्णु से निवेदन करें और सोमवती अमावस्या के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा कीजिए यह पूजा हर व्यक्ति को करना चाहिए चाहे आप व्रत करें या ना करें कम से कम सोमवार की अमावस्या को भगवान भोलेनाथ की पूजा भगवान श्री विष्णु की पूजा अवश्य ही कीजिए प्रदोष व्रत हो या फिर सोमवती अमावस्या का व्रत या तो आप फलाहार में रहिए या रात में बिना लहसुन प्याज का वैष्णव भोजन कीजिए या मीठा भोजन कीजिए आपको जैसे संभव हो उसी प्रकार से व्रत कीजिए भगवान में निष्ठा हो तो उसका परिणाम पूजा का फल अच्छा ही होता है  
 और अधिक जानकारी संविधान उपाय विधि प्रयोग के लिए संपर्क करें और कुंडली विश्लेषण के पश्चात अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त करें और निश्चित ही समाधान होगा और लाभ मिलेगा आप जरूर संपर्क करें ..

Sunday, July 12, 2020

श्रावण मास

🙏श्री काशीविश्वनाथ जी मन्दिर वाराणसी 🙏
✍🏻श्रावण सोमवार में श‍िवजी की पूजा का व‍िशेष महत्‍व माना गया है। लेकिन आप अपनी राश‍ि के अनुसार भोलेनाथ जी की पूजा करें तो श‍िवजी अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं। सावन मास में राश‍ि अनुसार भोलेशंकर की पूजा से मनोवांछित सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। तो आइए जानते हैं क‍ि क‍िस राशि वालों को भोले शंकर की क‍िस तरह आराधना करनी चाहिए..............
१:- मेष राशि:- मेष राश‍ि के जातकों को भगवान शिव जी का अभिषेक गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर करना चाहिए। इसके बाद चंदन और सफेद पुष्‍प चढ़ाने चाहिए। इसके बाद श्रद्धानुसार 11, 21, 51 और 108 बार ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जप करना चाहिए। ऐसा करने से भोले बाबा समस्‍त मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
२:-वृष राशि:- वृष राश‍ि के जातकों को श‍िव शंकर का दही से अभिषेक करना चाहिए। दही से अभिषेक करने से जातक को धन, पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होने का योग बनता है। इसके अलावा सफेद फूल तथा बेलपत्र चढ़ाने चाहिए। इससे जीवन की सभी समस्‍याओं का हल म‍िलने लगता है.!
३:-मिथुन राशि:- मिथुन राश‍ि के जातकों को भोलेनाथ का गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए। मान्‍यता है सावन भर प्रत‍िद‍िन गन्‍ने के रस से अभिषेक करने से भोलेनाथ जल्‍दी ही सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। इसके अलावा इस राशि के जातकों को श‍िवजी को भांग, धतूरा, तथा बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। शिव चालीसा का पाठ भी करना चाहिए.!
४:-कर्क राशि:- कर्क राशि के जातकों को भोलेनाथ का दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करना चाहिए। इससे मन शांत होता है और शुभ कार्यों को करने की प्रेरणा म‍िलती है। इसके साथ ही आंक के श्वेत फूल, धतूरा और बेलपत्र भी शिवजी को अर्पित करना चाहिए। साथ ही रुद्राष्टक का पाठ करना भी शुभ होगा।
५:-सिंह राशि:-सिंह राशि के जातकों को भोलेनाथ का मधु अथवा गुड़ युक्त जल से अभिषेक करना चाहिए। भगवान शिव को कनेर का पुष्प तथा लाल रंग का चंदन अर्पित करना चाहिए। गुड़ और चावल से बनी खीर चढ़ा सकते हैं। यह अत्‍यंत शुभ होता है। सूर्योदय के समय श‍िवजी की पूजा करने से सभी इच्‍छाओं की पूर्ति जल्‍दी होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। इससे सेहत संबंधी सभी समस्‍याएं दूर हो जाती है।
६:-कन्या राशि:- कन्‍या राशि के जातकों को शंभूनाथ का गन्‍ने के रस से अभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा शिवजी को भांग, दुर्वा, पान तथा बेलपत्र चढ़ाएं। ‘ऊं नमः शिवाय मंत्र’ का जप करें। शीघ्र ही मनोकामनाएं पूर्ण होगी। शिव चालीसा का पाठ करना भी बेहतर होगा।
७:-तुला राशि:- तुला राशि के जातकों को भगवान शिव का गाय के घी, इत्र या सुगंधित तेल या फिर मिश्री मिले दूध से अभिषेक करना चाहिए। सफेद फूल भी पूजा में शिवजी को चढ़ाने चाहिए। दही, शहद अथवा श्रीखंड का प्रसाद चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव के सहस्त्रनाम का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि तथा लक्ष्मी का आगमन होगा.
८:-वृश्चिक राशि:- वृश्चिक राशि के जातकों को पंचामृत अथवा शहद युक्त जल से भगवान शिव जी का अभिषेक करना चाहिए। लाल फूल, लाल चंदन भी शिवजी को चढ़ाने चाहिए। बेलपत्र अथवा बेल के पौधे की जड़ चढ़ाने से भी कार्यों में सफलता मिलती है। रूद्राष्टक का पाठ करना भी श्रेयस्कर रहेगा।
९:-धनु राशि:- धनु राशि के जातकों को भोलेनाथ का दूध में हल्दी अथवा पीला चंदन मिलाकर अभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा पीले रंग के फूलों या फिर गेंदे के फूल चढ़ाने चाहिए। खीर का भोग लगाना भी शुभ रहेगा। ऊं नमः शिवाय का जप और श‍िव चालीसा का पाठ करना चाहिए।
१०:-मकर राशि:- मकर राशि के जातकों को भोलेशंकर का नारियल के पानी से अथवा गंगा जल से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से जातक को सभी कामों में सफलता मिलेगी। त्रयंबकेश्वर का ध्यान करते हुए भगवान शिव जी को बेलपत्र, धूतरा, शमी के फूल, भांग एंव अष्टगंध अर्पित करने चाहिए। उड़द से बनी मिठाई का भोग लगाने से शनि की पीड़ा समाप्त होती है। नीले कमल का फूल भी भगवान को अवश्य चढ़ाएं।
११:-कुंभ राशि:- कुंभ राशि के जातकों को सावन महीने में शंकर भगवान को प्रत‍िद‍िन नारियल के पानी, सरसों के तेल अथवा तिल के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा शिवाष्टाक का पाठ करना चाहिए। इससे जातकों के बिगड़े काम बनेंगे। साथ ही धन-समृद्धि में वृद्धि होगी। शमी के फूल पूजा में अर्पित करें। शिवजी की कृपा से यह शनि पीड़ा को कम करता है।
१२:-मीन राशि:- मीन राशि के जातकों को सावन भर भोलेनाथ का केसल मिश्रित जल से जलाभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा शंकरजी की पूजा में पंचामृत, दही, दूध और पीले पुष्पों का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही ‘ऊं नमः शिवाय का जप करना चाहिए। शिव चालीसा का पाठ करना भी शुभ रहेगा। इससे लाइफ की सारी टेंशन दूर हो जाती है ।
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Wednesday, July 8, 2020

How to build my house.

दुनिया में हर किसी की यही जरूरत है कि उसका अपना एक घर हो और उसका अपना वाहन हो। आइए जानें कुंडली के कौन से योग आपको वाहन और घर का सुख दे सकते हैं और इन्हें पाने के लिए क्या किया जा सकता है?

अपना घर खरीदने या बनाने के लिए चन्द्र और मंगल कुंडली में मजबूत होने चाहिए।

जिनकी कुंडली में चौथा भाव बली हो उसका घर अवश्य बनेगा। जितने बली ग्रह चौथे भाव पर होंगे उतने ही घर जातक के होंगे

लेकिन अगर राहु का प्रभाव चौथे भाव पर हो तो वह अपने घर का सुख नहीं ले सकेगा। हो सकता है घर तो आलिशान हो लेकिन खुद सरकारी मकान में रहे।

शुक्र जितना अच्छा होगा घर उतना ही आलिशान होगा, भव्य होगा।

मंगल अगर नीच का हो साथ ही राहु से पीड़ित हो तो घर सुन्दर नहीं होगा और घर में रहकर सुख नहीं मिलेगा।

 चंद्र खराब हो तो घर बनाने में परेशानी आती है और मां-बाप का सहयोग नहीं मिलता।

चांदी का चोकोर टुकड़ा हमेशा अपने पूजा स्थान में रखें।

सोना चांदी और तांबा इन तीन धातुओं की अंगूठी अनामिका में पहनें।

 राहु का प्रभाव हो तो घर से कूड़ा करकट बाहर निकालें। 

खराब इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान घर से बाहर करें और मां दुर्गा या भैरव की आराधना करें।

राहु इंसान को चाहकर भी वाहन नहीं खरीदने देता।
 शुक्र और चौथा भाव कमजोर हो तो सामर्थ्य होने के बाद भी इंसान वाहन नहीं खरीद सकता। 

 राहु-शनि-मंगल चौथे भाव को प्रभावित करें तो गाड़ी का इंजन जल्दी-जल्दी खराब होता है अर्थात गाड़ी अधिकतर समय गैराज में ही रहती है चन्द्रमा खराब हो तो ड्राइविंग सही नहीं होती और दुर्घटनाएं हो जाती है।

 दोषी ग्रह, नीच ग्रह, मारकेश के रंग की गाड़ी कदापि न लें। मंगल शनि खराब हों तो काली, लाल व नीले रंग की गाड़ी न खरीदें। गाड़ी का नंबर जन्मांक के विपरीत न लें। लोहे का दान करें।

सबसे सरल उपाय यह है कि किसी भी मंदिर में देवता के वाहन को पहले पूजें। जैसे शिव मंदिर में नंदी को, गणेश मंदिर में चूहे को, दुर्गा मंदिर में सिंह को और बाद में प्रतिमा की पूजन करें। 

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Tuesday, July 7, 2020

How to know about sugar from astrology...

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         किसे हो सकता है मधुमेह (डाइबिटीज)
मधुमेह अर्थात् डाइबिटीज होने की संभावना को ज्योतिष के आधार पर देखा जा सकता है। यह रोग खून में शक्कर यानी ब्लड शुगर के बढ़े हुए स्तर के कारण होता है। चिकित्सकीय दृष्टि से इसके दो कारण हैं:

जीवन शैली ...
अगर आनुवांशिक कारणों से मधुमेह है तो कम उम्र में ही इसके कारण काफी तकलीफ होने लगती है, वहीं आरामदेह जीवन शैली के कारण होने वाला मधुमेह एक महामारी के रूप में फैलता जा रहा है।

ज्योतिष से यह जाना जा सकता है कि किसे मधुमेह होने की संभावना ज्यादा है। यह भी जाना जा सकता है कि समस्या कब सामने आएगी।

यदि लिवर यानी यकृत की समस्या के कारण मधुमेह होने की संभावना है तो बृहस्पति तथा सिंह राशि से इसका पता चलता है।

यदि अग्नाशय यानी पैनक्रियाज के कारण मधुमेह की संभावना है तो शुक्र तथा कर्क राशि इसका संकेत देते हैं।
गलत खान-पान और आरामदेह जीवनशैली के कारण मधुमेह की संभावना को शुक्र दर्शाता है।

खून में शर्करा की मात्रा यानी ब्लड ग्लूकोज लेवल के लिए शुक्र और चंद्रमा के साथ मंगल को देखा जाता है।
शुक्र तथा चंद्रमा पेशाब में शर्करा यानी शुगर को दर्शाते हैं।

जन्मजात यानी आनुवांशिक मधुमेह के लिए ऊपर बताये गये कारकों के साथ ही लग्न, छठे तथा आठवें भाव आपस में जुड़े होते हैं।

दशाक्रम तथा गोचर के आधार पर रोग के प्रकट होने यानी डाइग्नोस होने के समय को पहले से ही जाना जा सकता है।
आप भी शुगर बिपि या ब्लडप्रेसर या अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत या बीमारियों में फंसे हुए हैं तो आप भी संपर्क करें और जन्म कुंडली के अनुसार पूर्ण विश्लेषण के पश्चात जानकारी प्राप्त करें
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Wednesday, July 1, 2020

कर्ज में डूबे हुए हैं?

हमारा जन्म होते ही हम सभी अपने के चक्र से बंध जाते हैं और जन्मकुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है हमारे जीवन में सभी घटनाएं नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं।  

आज के समय में जहाँ आर्थिक असंतुलन हमारी चिंता का एक मुख्य कारण है वहीँ एक दूसरी स्थिति जिसके कारण अधिकांश लोग चिंतित और परेशान रहते हैं वह है 

“कर्ज” धन का कर्ज चाहे किसी से व्यक्तिगत रूप से लिया गया हो या सरकारी लोन के रूप में ये दोनों ही स्थितियां व्यक्ति के ऊपर एक बोझ के समान बनी रहती हैं 

कई बार ना चाहते हुये भी परिस्थितिवश व्यक्ति को इस कर्ज रुपी बोझ का सामना करना पड़ता है वैसे तो आज के समय में अपने कार्यो की पूर्ती के लिए अधिकांश लोग कर्ज लेते हैं

 परन्तु जब जीवन पर्यन्त बनी रहे या बार बार सामने आये तो वास्तव में यह भी हमारी कुंडली में बने कुछ विशेष ग्रहयोगों के कारण ही होता है –

” हमारी कुंडली में “छटा भाव” कर्ज का भाव माना गया है अर्थात कुंडली का छटा भाव ही व्यक्ति के जीवन में कर्ज की स्थिति को नियंत्रित करता है 

जब कुंडली के छटे भाव में कोई पाप योग बना हो या षष्टेश ग्रह बहुत पीड़ित हो तो व्यक्ति को कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है जैसे – 

यदि छटे भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में बैठा हो, छटे भाव में राहु–चन्द्रमाँ या राहु–सूर्य के साथ होने से ग्रहण योग बन रहा हो, छटे भाव में राहु मंगल का योग हो, छटे भाव में गुरु–चाण्डाल योग बना हो,
 शनि–मंगल या केतु–मंगल की युति छटे भाव में हो तो ऐसे पाप या क्रूर योग जब कुंडली के छटे भाव में बनते हैं तो व्यक्ति को कर्ज की समस्या बहुत परेशान करती है और री–पेमेंट में बहुत समस्यायें आती हैं।

 छटे भाव का स्वामी ग्रह भी जब नीच राशि में हो अष्टम भाव में हो या बहुत पीड़ित हो तो कर्ज की समस्या होती है इसके आलावा “मंगल” को कर्ज का नैसर्गिक नियंत्रक ग्रह माना गया है

 अतः यहाँ मंगल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है यदि कुंडली में मंगल अपनी नीच राशि(कर्क) में हो आठवें भाव में बैठा हो या अन्य प्रकार से अति पीड़ित हो तो भी कर्ज की समस्या बड़ा रूप ले लेती है”  

विशेष – यदि छटे भाव में बने पाप योग पर बलि बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही हो तो कर्ज का रीपेमेंट संघर्ष के बाद हो जाता है या व्यक्ति को कर्ज की समस्या का समाधान मिल जाता है 

परन्तु बृहस्पति की शुभ दृष्टि के आभाव में समस्या बनी रहती है छटे भाव में पाप योग जितने अधिक होंगे उतनी समस्या अधिक होगी अतः कुंडली का छठा भाव पीड़ित होने पर लोन आदि लेने में भी बहुत सतर्कता बरतनी चाहिये

  बहुत बार व्यक्ति की कुंडली अच्छी होने पर भी व्यक्ति को कर्ज की समस्या का सामना करना पड़ता है जिसका कारण उस समय कुंडली में चल रही अकारक ग्रहों की दशाएं या गोचर ग्रहों का प्रभाव होता है

 जिससे अस्थाई रूप से व्यक्ति उस विशेष समय काल के लिए कर्ज के बोझ से घिर जाता है उदाहरणार्थ अकारक षष्टेश और द्वादशेश की दशा व्यक्ति कर्ज समस्या देती है 

अतः प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में अलग अलग ग्रह-स्थिति और अलग अलग दशाओं के कारण व्यक्तिगत रूप से तो गहन विश्लेषण के बाद ही किसी व्यक्ति के लिए चल रही कर्ज समस्या के सटीक 

ज्योतिषीय उपाय निश्चित किये जा सकते हैं अतः यहाँ हम कर्जमुक्ति के लिए ऐसे कुछ मुख्य उपाय बता रहे हैं  जिन्हें कोई भी व्यक्ति कर सकता है

उपाय –
1. मंगल यन्त्र को घर के मंदिर में लाल वस्त्र पर स्थापित करें और प्रतिदिन इस मंत्र का एक माला जाप करें – ॐ क्राम क्रीम क्रोम सः भौमाय नमः।

2. प्रति दिन ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें।
3. हनुमान चालीसा का पाठ करें।

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