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Showing posts from July, 2020

LONELINESS

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Loneliness is a state of mind.   it means with out companions. One  important factor in loneliness is a person’s social lifes & contacts.  We depend on various people for different reasons. For instance, our family give us emotional supports, our parents and teachers give us guidance ,our friends share similar interest . It needs to be emphasized here that but loneliness is not about how many friends /social contacts you have, it is about how many friends /social contacts we think or expect we should have.For instance lonely people may have many social contacts, they some times feel they should have more. They question their own popularity .Loneliness is a subjective experience. If you think you are lonely, then you are lonely. Even though if you are in a middle of party, u can feel lonely. Conversely a person can be alone, and not feel lonely if he has no desire for social interaction. Loneliness is an emotion, a lack, a feeling that something is missing, a pain, a depr

ANXIETY

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Vedic Astrology Planet Moon is releted for mind, so when planet Moon is weak with other malefics like Planet Saturn, Planet Rahu,Planet Ketu and Planet Mars then person will be generally weak in mind and fearful. In your horoscope when 6th house, 8th house and 12th house is affected by bad cusps lords and planet then it plays a crucial roles in fear anxiety, depression, low confidence . Planet Moon goes to enemy house with affliction from Planet Rahu or Planet Saturn then native will be always with fear and anxiety. Important role in horoscope is Accendent lord, it important to access native mental stability, when Accendent lord becomes weak and occupies with bad house aspected by planet Rahu or Planet Saturn will make native anxious. Planet Moon is play important role in our life so you always do some precostions about this planet, drink lots of water every day, because moon is watery planet so you do this, White and watery Planet Moon can cause a lot of spiritual and em

रुद्राभिषेक से क्या क्या लाभ मिलता है ?

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शिव पुराण के अनुसार किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का इस्तेमाल करना चाहिए का उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहा हू और आप से अनुरोध है की आप इसी के अनुरूप रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा। श्लोक जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै। मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा। पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।। बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना। जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।। घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्। तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः। प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम। केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः। शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्। श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!! सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह! पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।। जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्ष

मंगला गौरी व्रत

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↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭ श्रावण मास में जिस प्रकार सोमवार का महत्व होता है ठीक उसी प्रकार से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार का भी एक अलग महत्व है हमारे सनातन शास्त्र के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा करनी चाहिए संभव हो तो व्रत कीजिए या फिर पूजा अर्चना के बाद बिना लहसुन प्याज का वैष्णो भोजन कर लीजिए या मीठा भोजन कीजिए या फलाहार कर लीजिए. मंगला गौरी व्रत वैसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनके जीवन में मंगल ग्रह के कारण मंगल दोष के कारण अशांति आर्थिक क्षति व्यवसायिक हानि बिना गलती किए दंड मिलते हैं और मंगल के कारण जिनका दांपत्य जीवन अच्छा नहीं चल रहा है अथवा मंगल ग्रह के दोष के कारण जिनके विवाह नहीं हो रहे हैं ऐसे लोग लड़के या लड़की दोनों हैं श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा अर्चना करें यह पूजा सबसे पहले माता जानकी ने त्रेता युग में किया था और अपने मनोवांछित पति श्री राम भगवान को पति रूप में प्राप्त किया था वही माता जानकी ने गया में मंगला गौरी भगवती की स्थापना की मंगला गौरी भगवती की पूजा

नागपंचमी पूजा

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⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝ श्रावण मास में एक नाग पंचमी पूजा कृष्ण पक्ष में होती है और दूसरी नाग पंचमी पूजा शुक्ल पक्ष में होती है कृष्ण पक्ष के नाग पंचमी को मौना नाग पंचमी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष के नाग पंचमी को नाग पंचमी कहा जाता है । नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नाग देवता की पूजा करनी चाहिए नाग पंचमी पूजा हमारे सनातन शास्त्र में परिवारिक और पारंपरिक विधि से की जाती है ज्योतिष के दृष्टिकोण से नाग पंचमी पूजा वैसे लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है जिन्हें राहु केतु और चंद्रमा के कारण जीवन में आर्थिक रूप से व्यावसायिक रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से और सफलता मिलती है संतान नहीं होती है इलाज करने के बाद भी बीमारी ठीक नहीं होती सारे प्रयास करने के बाद भी व्यवसाय में कार्यालय में परिवार में और जीवन में सफलता नहीं मिलती इस दिन नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा कीजिए नाग देवता के पूजा कीजिए दान दक्षिणा कीजिए और अपनी समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना कीजिए श्रावण मास कृष्ण पक्ष की नाग पंचमी समाप्त हो चुकी है अब 25 जुलाई को श्रावण मास शुक्ल पक्ष के नाग पं

सोमवती अमावस्या पर विशेष:

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↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫ सन 2020 का श्रावण मास अनोखे संयोग में है इस बार श्रावण मास में पांच सोमवार है जिसमें तीसरा सोमवार अमावस्या तिथि के महान पवित्र संयोग में है कहा जाता है कि यदि अमावस्या तिथि का संयोग सोमवार से हो जाए तो वह सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है... ↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫↬↫ 20 जुलाई को सोमवार है श्रावण मास का तीसरा सोमवार और उसी दिन रात में 10:00 बज कर 33 मिनट तक अमावस्या तिथि का महान संयोग है और उस दिन चंद्रमा अपनी कर्क राशि में रहेंगे यह जो दोनों संयोग सोमवार को पढ़ रहे हैं यह भगवान भोलेनाथ और भगवान विष्णु के भक्तों के लिए मनोकामनाओं को पूर्ण करने की अपूर्व महत्ता में है सोमवार को जब अमावस्या तिथि का संयोग होता है उस दिन स्त्री पुरुष माताएं भगवान भोलेनाथ के भगवान श्री विष्णु के आराधना करते हैं अपने परिवार अपने जीवन में सुख समृद्धि आयु आरोग्य और हर प्रकार के मंगलकारी हल्की प्राप्ति के लिए जिनके विवाह नहीं हो रहे हैं वह वर और कन्या है सोमवती अमावस्या के दिन व्रत करें और संभव हो तो पीपल के वृक्ष के नीचे श्री विष्ण

श्रावण मास

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श्रावण मास में राश‍ि अनुसार करें भगवान श‍िव जी का पूजन, होंगे अत्‍यंत प्रसन्‍न 🙏 श्री काशीविश्वनाथ जी मन्दिर वाराणसी 🙏 ======================= ✍🏻श्रावण सोमवार में श‍िवजी की पूजा का व‍िशेष महत्‍व माना गया है। लेकिन आप अपनी राश‍ि के अनुसार भोलेनाथ जी की पूजा करें तो श‍िवजी अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं। सावन मास में राश‍ि अनुसार भोलेशंकर की पूजा से मनोवांछित सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। तो आइए जानते हैं क‍ि क‍िस राशि वालों को भोले शंकर की क‍िस तरह आराधना करनी चाहिए.............. १:- मेष राशि:- मेष राश‍ि के जातकों को भगवान शिव जी का अभिषेक गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर करना चाहिए। इसके बाद चंदन और सफेद पुष्‍प चढ़ाने चाहिए। इसके बाद श्रद्धानुसार 11, 21, 51 और 108 बार ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जप करना चाहिए। ऐसा करने से भोले बाबा समस्‍त मनोकामनाएं पूरी करते हैं। २:-वृष राशि:- वृष राश‍ि के जातकों को श‍िव शंकर का दही से अभिषेक करना चाहिए। दही से अभिषेक करने से जातक को धन, पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होने का योग बनता है। इसके अलावा सफेद फूल तथा बेलपत्र चढ़ाने चाहिए। इससे जीवन

How to build my house.

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कब बनेगा अपना घर, कब आएगी अपनी गाड़ी, क्या कहती है कुंडली आपकी .... दुनिया में हर किसी की यही जरूरत है कि उसका अपना एक घर हो और उसका अपना वाहन हो। आइए जानें कुंडली के कौन से योग आपको वाहन और घर का सुख दे सकते हैं और इन्हें पाने के लिए क्या किया जा सकता है? अपना घर खरीदने या बनाने के लिए चन्द्र और मंगल कुंडली में मजबूत होने चाहिए। जिनकी कुंडली में चौथा भाव बली हो उसका घर अवश्य बनेगा। जितने बली ग्रह चौथे भाव पर होंगे उतने ही घर जातक के होंगे लेकिन अगर राहु का प्रभाव चौथे भाव पर हो तो वह अपने घर का सुख नहीं ले सकेगा। हो सकता है घर तो आलिशान हो लेकिन खुद सरकारी मकान में रहे। शुक्र जितना अच्छा होगा घर उतना ही आलिशान होगा, भव्य होगा। मंगल अगर नीच का हो साथ ही राहु से पीड़ित हो तो घर सुन्दर नहीं होगा और घर में रहकर सुख नहीं मिलेगा।  चंद्र खराब हो तो घर बनाने में परेशानी आती है और मां-बाप का सहयोग नहीं मिलता। उपाय ... चांदी का चोकोर टुकड़ा हमेशा अपने पूजा स्थान में रखें। सोना चांदी और तांबा इन तीन धातुओं की अंगूठी अनामिका में पहनें। 11 मंगलवार गरीब

How to know about sugar from astrology...

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↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭  ↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭             किसे हो सकता है मधुमेह (डाइबिटीज) मधुमेह अर्थात् डाइबिटीज होने की संभावना को ज्योतिष के आधार पर देखा जा सकता है। यह रोग खून में शक्कर यानी ब्लड शुगर के बढ़े हुए स्तर के कारण होता है। चिकित्सकीय दृष्टि से इसके दो कारण हैं: जीवन शैली ... अगर आनुवांशिक कारणों से मधुमेह है तो कम उम्र में ही इसके कारण काफी तकलीफ होने लगती है, वहीं आरामदेह जीवन शैली के कारण होने वाला मधुमेह एक महामारी के रूप में फैलता जा रहा है। ज्योतिष से यह जाना जा सकता है कि किसे मधुमेह होने की संभावना ज्यादा है। यह भी जाना जा सकता है कि समस्या कब सामने आएगी। कुछ प्रमुख ज्योतिषीय संकेत निम्न प्रकार से हैं .. यदि लिवर यानी यकृत की समस्या के कारण मधुमेह होने की संभावना है तो बृहस्पति तथा सिंह राशि से इसका पता चलता है। यदि अग्नाशय यानी पैनक्रियाज के कारण मधुमेह की संभावना है तो शुक्र तथा कर्क राशि इसका संकेत देते हैं। गलत खान-पान और आरामदेह जीवनशैली के कारण मधुमेह की संभावना को शुक्र दर्शाता है। खून में शर्करा क

कर्ज में डूबे हुए हैं?

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क्या आप भी कर्ज में डूबे हुए हैं? क्या कहती है आपकी जन्मकुंडली आइए जानते हैं ... ***~~***~~***~~***~~***~~***~~***~~*** हमारा जन्म होते ही हम सभी अपने के चक्र से बंध जाते हैं और जन्मकुंडली हमारे इसी प्रारब्ध को प्रकट करती है हमारे जीवन में सभी घटनाएं नवग्रह द्वारा ही संचालित होती हैं।   आज के समय में जहाँ आर्थिक असंतुलन हमारी चिंता का एक मुख्य कारण है वहीँ एक दूसरी स्थिति जिसके कारण अधिकांश लोग चिंतित और परेशान रहते हैं वह है  “कर्ज” धन का कर्ज चाहे किसी से व्यक्तिगत रूप से लिया गया हो या सरकारी लोन के रूप में ये दोनों ही स्थितियां व्यक्ति के ऊपर एक बोझ के समान बनी रहती हैं  कई बार ना चाहते हुये भी परिस्थितिवश व्यक्ति को इस कर्ज रुपी बोझ का सामना करना पड़ता है वैसे तो आज के समय में अपने कार्यो की पूर्ती के लिए अधिकांश लोग कर्ज लेते हैं  परन्तु जब जीवन पर्यन्त बनी रहे या बार बार सामने आये तो वास्तव में यह भी हमारी कुंडली में बने कुछ विशेष ग्रहयोगों के कारण ही होता है – ” हमारी कुंडली में “छटा भाव” कर्ज का भाव माना गया है अर्थात कुंडली का छटा भाव ही व्यक्ति के