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Showing posts from October, 2018

बुध उत्पन्न करता है ?

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कमजोर बुध उत्पन्न करता है ये स्वास्थ समस्याएँ फलित ज्योतिष में बुध अपनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हमारे जीवन के बहुत विशेष घटकों को नियंत्रित करता है बुध को सबसे कम आयु का ग्रह माना गया है इस लिए इसे राजकुमार का पद दिया गया है, बुध का रंग हरा है वर्ण वैश्य  है बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है कन्या राशि बुध की उच्च राशि भी है और मीन राशि में बुध नीचस्थ अर्थात सबसे कमजोर होता है, शनि, शुक्र और राहु  बुध के मित्र ग्रह हैं और गोचरवश बुध किसी भी राशि में लगभग एक माह रहता है। ज्योतिष में बुध को वैसे तो बुद्धि, कैचिंग पॉवर, तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता, याददास्त, सोचने समझने की क्षमता,  वाणी, बोलने की क्षमता, उच्चारण, व्यव्हार कुसलता, सूचना, संचार, यातायात, व्यापार, वाणिज्य, गणनात्मक विषय, लेखन,  कम्युनिकेशन और गहन अध्ययन का कारक माना गया है और ये सभी घटक हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं विशेषतः बुद्धि क्षमता की तो आज के समय में सर्वाधिक और हर जगह आवश्यकता होती है। पर इन सब के अलावा बुध का हमारे स्वास्थ और शरीर पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है बुध हमारे शरीर के बहु

दिवाली विशेष यन्त्र रचना

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व्यापार वृद्धिकारक यन्त्र ================ इस यन्त्र की रचना दीवाली की आधी रात को की जाती है |इसको सिन्दूर या हिंगुल से दीवार पर [दूकान के बाहर ] लिखा जाता है |इसे भोजपत्र पर लिखाकर लटकाया भी जा सकता है अथवा धारण भी किया जा सकता है |दूकान में लटका कर नित्य धूप दीप करते रहना चाहिए | भोजपत्र पर यंत्र को पंचगंध से अनार की कलम से लिखना चाहिए |इसके बाद विधिवत पूजन कर दूकान में लगा देना चाहिए |इसे शीशे में फ्रेम भी किया जा सकता है |इसे नित्य धूप दीप दिखाना चाहिए |धारण करने के लिए इसे चांदी के कवच में बंद कर गले या बाजू में धारण किया जाता है|  यह यन्त्र व्यापार में उत्तरोत्तर वृद्धि देता है |कुदृष्टि से बचाव करता है |सुरक्षा देता है |यदि यह यन्त्र स्त्री के गले या बाजू में धारण करा दिया जाए तो इसके प्रभाव से गर्भ की रक्षा तथा संतान की प्राप्ति होती है 🔈🔉🔊 यदि आप भी चाहते है,,,की इस यन्त्र अपने घर या दुकान में स्थापित करें तो अवस्य सम्पर्क करें ☎. +918788381356

Vipareeta Raja yoga,

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world famous astrologer most powerful spiritualist from India.. all religious an expert pandit your service... Pt.abhishek sastri Contact no:-+918788381356 It must be noted that debilitation of some planets are desirable in a horoscope. They are the lords of the Dusthanas (6th/ 8th/ 12th). If the lords of the Dusthanas are placed in other Dusthanas in debilitation, then it confers Vipareeta raja yoga, whereby the native gains due to the loss of natural and functional significations of the planet causing the yoga. For example, if 8th lord Moon is involved in Vipareeta Raja yoga, by its debilitation in the 12th house, the native might enjoy rise in life, but the Mother (natural signification of Moon) and the marriage (8th house is the longevity of marriage) might suffer simultaneously. To enjoy the fruits of Vipareeta Raja yoga, the native must not strengthen such debilitated planets that confer the yoga. Click here   👇👇👇 https://www.narayanjyotishparamarsh.c

आयुष्य योग

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Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=.  आयुष्य निर्णय पर ज्योतिष शास्त्र के सर्वमान्य सूत्रों के संकलन उदाहरण जैमिनी सूत्र की तत्वादर्शन नामक टीका में मिलता है। महर्षि मैत्रेय ने ऋषि पाराशर से जिज्ञासा वश प्रश्न किया कि हे मुन्हे आयुर्दाय के बहुत भेद शास्त्र में बतलाये गये है कृपाकर यह बतलायें कि आयु कितने प्रकार की होती है और उसे कैसे जाना जाता है,इस ज्योतिष के मूर्तिमंत स्वरूप ऋषि पराशर बोले - बालारिष्ट योगारिष्ट्मल्पमध्यंच दीर्घकम। दिव्यं चैवामितं चैवं सत्पाधायु: प्रकीर्तितम॥ हे विप्र आयुर्दाय का वस्तुत: ज्ञान होना तो देवों के लिये भी दुर्लभ है फ़िर भी बालारिष्ट योगारिष्ट अल्प मध्य दीर्घ दिव्य और अस्मित ये सात प्रकार की आयु संसार में प्रसिद्ध है। बालारिष्ट ज्योतिष शास्त्र में जन्म से आठ वर्ष की आयुपर्यंत होने वाली मृत्यु को बालारिष्ट कहा गया है। यथा लग्न से ६ ८ १२ में स्थान में चन्द्रमा यदि पाप ग्रहों से द्र्ष्ट हो तो जातक का शीघ्र मरण होता है। सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण का समय हो सूर्य चन्द्रमा राहु एक ही राशि में हों तथा लग्न पर

आप को किस क्षेत्र मे मिलेगी सफलता -

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Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=.  जन्मांग चक्र का दशम भाव कर्म भाव कहा जाता है। इसके स्वामी को दशमेश या कर्मेश कहा गया है। दशम भाव से व्यक्ति की आजीविका का विचार किया जाता है। अर्थात् व्यक्ति सरकारी नौकरी करेगा अथवा प्राइवेट, या व्यापार करेगा तो कौन सा, उसे किस क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी। आज अधिकांश लोग अपनी आजीविका से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कार्य क्षेत्र या कर्म का प्रकार उनके मन के अनुकूल नहीं है। अब प्रश्न उठता है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनोनुकूल कार्य कौन सा हो सकता है, उसका निर्धारण कैसे हो? मन का स्वामी चंद्र जिस राशि में हो उस राशि से स्वामी ग्रह की प्रकृति के आधार पर या चंद्र से उसके युति अथवा दृष्टि संबंध के आधार पर यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका (व्यापार नौकरी) का चयन करता है अथवा कार्यरत है तो वह कैरियर उसके मन पसंद का होगा। जन्मकुंडली में कोई ग्रह जब लग्नेश, पंचमेश या नवमेश होकर दशम भाव में स्थित हो, या दशमेश होकर किसी भी त्रिकोण (1, 5, 9 भावों) में, या अपने ही स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति की आजीविका के पर्याप

काला_सुरमा

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जीवन है तो समस्या है और समस्या है तो उपाय है, इन्ही में से अगर आप - आपकी उन्नति से जलने वालो से या आप पर बुरी नजर रखने वालों से परेशान है तो, शनिवार के दिन काला खड़ा सुरमा किसी भी पंसारी की दुकान से खरीदें और यह काला खड़ा सूरमा अपने घर के रोशनदान के ऊपर रख दें, ईश्वर ने चाहा तो मात्र इतने से सात्विक उपाय/ᵘᵖᵃᵃᵞᵉ आप दोनों प्रकार की समस्यायों से निज़ात पा जायंगे, श्री रामलल्ला आपको व् आपके अपनों को सदेव स्वस्थ रखे-संपन्न रखे इसी कामना के साथ, ॐ-शान्ति... विमल पाहुजा, रोल्स ˚ ˚ ˚ Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=1 #narayan#jyotish#paramarsh

प्रेम विवाह

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एक जमाना था जब समाज स्वीकार नहीं करता था प्रेम विवाह को आज है कि रोजमर्रा की बात है, समाज स्वीकार कर रहा है लेकिन ये जानना जरूरी है कि किसका प्रेम विवाह सफल होगा और किसका नहीं तो विवाह से पहले एक दोस्ती का दौर चलता है लडकी के लिये उसका दोस्त मंगल है लडके के लिये उसकी दोस्त बुध है और शादी के बाद गृहस्थी का सुख कारक शुक्र है तो जिनकी भी कुंडलियों में मंगल, शुक्र और बुध किसी भी तरह से संबंधित होते हैं वो विपरीत लिंगी की तरफ सहज ही खिंचते है अब अगर इसमें मंगल या बुध खराब हुये तो कुंडली में शुक्र कितना ही शुभ हो, गृहस्थी में समस्या आनी ही आनी है अब अलगाव न भी हो तो कोई और आर्थिक, शारीरिक या कोई और समस्या पैदा हो जायेगी जो गृहस्थ जिंदगी का मजा न लेने देगा | मंगल जहां शरीर और पैसे से मारता है वहीं बुध बेकार के झगडे लगाकर दूरियां बढा देता है  इसलिये, सावधान रहें और प्रेम विवाह से पूर्व अपनी कुंडली का अवलोकन अवश्य करवायें | जिनकी कुंडली में प्रेम विवाह शुभ फल दे रहा हो वो प्रेम विवाह अवश्य करें चाहे जमाना बैरी हो जाये क्योंकि प्रकृति के कुछ नियम हैं और आपकी जिंदगी के प्राकृतिक नि

कैसे करें हम कर्पूर की प्रयोग???

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🙏कपूर के चमत्कारिक टोटके🙏 बहुत ही सरल उपाय जो कोई भी कभी भी कर सकता है https://www.narayanjyotishparamarsh.com #narayan#jyotish#paramrsh 👉पूण्य प्राप्ति हेतु : कर्पूर जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर मे संध्यावंदन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं। 👉पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु : कर्पूर जलाने से देवदोष व पितृदोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृदोष है या काल सर्पदोष है। दरअसल, यह राहु और केतु का प्रभाव मात्र है इसको दूर करने के लिए घर के वास्तु को ठीक करें। 👉यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कर्पूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूप में कर्पूर की 2-2 टिकियां रख दें  बस इतना उपाय ही काफी है। 👉आकस्मिक घटना या दुर्घटना से बचाव : आकस्मिक घटना या दुर्घटना का कारण राहु, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं  इसके लिए

चमकेगा आपका भाग्य:----

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हाथ की रेखा बता देती है किस देवता की पूजा से चमकेगा आपका भाग्य:---- 1- यदि आपेक हाथ की हृदय रेखा पर त्रिशूल बनता हो, उंगलियां चाहे टेढ़ी-मेढ़ी हों तो ऐसे लोंगो के ईष्ट देव भगवान शिव माने जाते है और उन्हें जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति के लिए शिव की आराधना करना चाहिए, एवं इस मंत्र- ऊँ नमः शिवाय का जप 108 बार करना चाहिए । 2- यदि हृदयरेखा के अंत पर एक शाखा गुरु पर्वत पर जाती हो तो इन्हें रांम भक्त श्री हनुमान जी का पूजन करना चाहिए, जो जीवन में आने वाली विपदाओं को दूर करते है, साथ ही इस मंत्र का 108 बार जप- ऊँ नमो हनुमंता एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से सुख शांति मिलती है । 3- यदि भाग्य रेखा खंडित हो व इसमें दोष हो तो ऐसे लोगों को लक्ष्मी माता का ध्यान या लक्ष्मी मंत्र का जप करना चाहिए । मात लक्ष्मी को ईष्ट मानकर इस मंत्र – ऊँ श्रीं, ह्रीं, श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः । का जप करना चाहिए । 4- यदि हाथ में सूर्य ग्रह दबा हुआ हो, व्यक्ति को शिक्षा में पूर्ण सफलता न मिल पा रही हो, मस्तिष्क रेखा खराब हो, तो सूर्य ईष्ट मानकर सूर्य मंत्र का
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#शरद_पूर्णिमा_2018 : इस उपाय से पाएं कर्ज और मर्ज से मुक्ति शरद पूर्णिमा इसी माह 24 अक्टूबर को मनाई जायेगी। इस दिन चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता देखने लायक होती है🙏 🌻🙏 #यह_पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गयी गई है #पौराणिक_महत्व🙏🌻🙏 इसी दिन भगवान् कृष्ण महारास रचाना आरम्भ करते हैं। देवीभागवत महापुराण में कहा गया है कि, गोपिकाओं के अनुराग को देखते हुए भगवान् कृष्ण ने चन्द्र से महारास का संकेत दिया, चन्द्र ने भगवान् कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों से प्रकृति को आच्छादित कर दिया। उन्ही किरणों ने भगवान् कृष्ण के चहरे पर सुंदर रोली कि तरह लालिमा भर दी। फिर उनके अनन्य जन्मों के प्यासे बड़े बड़े योगी, मुनि, महर्षि और अन्य  भक्त गोपिकाओं के रूप में कृष्ण लीला रूपी  महारास ने समाहित  हो गए, कृष्ण कि वंशी कि धुन सुनकर अपने अपने कर्मो में लीन सभी गोपियां अपना घर-बार छोड़कर  भागती हुईं  वहाँ आ पहुचीं। कृष्ण और  गोपिकाओं का अद्भुत प्रेम देख कर चन्द्र ने अपनी सोममय किरणों से अमृत वर्षा आरम्भ कर दी जिसमे भीगकर यही गोपिकाएं अमरता को प्राप्त हुईं, और भगवान्
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ज्योतिष और रोग ज्योतिष शास्त्र भविष्य दर्शन की आध्यात्मिक विद्या है। भारतवर्ष में चिकित्साशास्त्र (आयुर्वेद) का ज्योतिष से बहुत गहरा संबंध है। होमियोपैथ की उत्पत्ति भी ज्योतिष शास्त्र  के आधार पर ही हुआ है I जन्मकुण्डली व्यक्ति के जन्म के समय ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रह नक्षत्रों का मानचित्र होती है, जिसका अध्ययन कर जन्म के समय ही यह बताया जा सकता है कि अमुक व्यक्ति को उसके जीवन में कौन-कौन से रोग होंगे। चिकित्सा शास्त्र व्यक्ति को रोग होने के पश्चात रोग के प्रकार का आभास देता है। आयुर्वेद शास्त्र में अनिष्ट ग्रहों का विचार कर रोग का उपचार विभिन्न रत्नों का उपयोग और रत्नों की भस्म का प्रयोग कर किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोगों की उत्पत्ति अनिष्ट ग्रहों के प्रभाव से एवं पूर्वजन्म के अवांछित संचित कर्मो के प्रभाव से बताई गई है। अनिष्ट ग्रहों के निवारण के लिए पूजा, पाठ, मंत्र जप, यंत्र धारण, विभिन्न प्रकार के दान एवं रत्न धारण आदि साधन ज्योतिष शास्त्र में उल्लेखित है। ग्रहों के अनिष्ट प्रभाव दूर करने के लिये रत्न धारण करने की बिल्कुल सार्थक है। इसके पीछे विज्ञान का रहस्य छिप

दोष निवारक कवच

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कालसर्प दोष निवारक कवच ===================            कालसर्प योग अथवा दोष का नाम मूल शास्त्रीय ग्रंथों में उल्लिखित नहीं है और वहां इतना हौवा भी नहीं इस योग का |मूल ग्रंथों में राहू -केतु के बीच सभी ग्रहों के आ जाने को एक योग अवश्य माना जाता है और इसके भिन्न प्रभाव भी होते हैं |आज इसी को कालसर्प दोष कहा जाता है |इस योग में मुख्य भूमिका राहू की ही होती है जबकि कुछ कम प्रभाव केतु का भी पड़ता है |इस योग में उत्पन्न जातक जीवन में कुछ कमियाँ भी पाता है और खुद में कुछ विशेषताएं भी पाता है |कमियों ,दोषों ,दुष्प्रभावों के निवारण के लिए ही शान्ति के उपाय किये जाते हैं |कालसर्प योग जन्म कुंडली में ,सभी ग्रहों के राहू -केतु के बीच आ जाने पर बनता है |यह एक ज्योतिषीय योग होता है जो बारह प्रकार का होता है |ऐसा योग कुंडली में होने पर स्वास्थ्य ,संतान , संपत्ति और दाम्पत्य सुख में से एक कम होने लगता है |यह चारो एक साथ मिलने मुश्किल हो जाते हैं|इस दोष के निवारण के अनेक उपाय ज्योतिषीय शास्त्रों में बताये गए हैं ,किन्तु कोई भी उपाय नैसर्गिक कुंडली में विद्यमान ग्रह की स्थिति में परिवर्तन नहीं कर सकता

वशीकरण

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मोहिनी वशीकरण मंत्र मोहिनी वशीकरण मंत्र से आप अपने सच्चे प्यार को हासिल कर सकते हो. मोहिनी वशीकरण मंत्र एक सरल उपाय है जिससे आप अपने सच्चे प्यार को हासिल कर सकते हो, मोहिनी वशीकरण मंत्र से आप अपनी प्रेमी या प्रेमिका को हासिल कर सकते हो नाराज व्यक्ति को मना सकते हो अक्सर देखा जाता है की जिनके प्यार छीन जाते है वो व्यक्ति मरने की कगार पे पहुंच जाते है. मोहिनी वशीकरण मन्त्र भोत ही आसान उपाय है प्यार को हासिल करने का मोहिनी वशीकरण में आपको अपने प्यार की नाम क साथ इस मंत्र का १५१ बार जाप करना होगा और एक टोटका करना होगा जैसे आप कहे मुताबिक करेंगे तो आपका लवर आपको हासिल हो जायेगा. मोहिनी वशीकरण मंत्र में इन बातो का रखे दयान. -सच्चे दिल से मंत्र को पढ़े. -मंत्र का जाप करते वक़्त दयान सिर्फ अपने लवर का सोचे. -मंत्र को सही से पढ़े. -मंत्र को गलत पड़ने से कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है. -गलत मंत्र बोलने से वो मंत्र काम नहीं करेगा आपको फिर से उस मंत्र को किसी पंडित से सिद्ध करवाना पड़ेगा. शास्त्रों में लिखा गया है की प्यार एक अनमोल चीज़ है इसे कोई भी छीन नहीं सकता है लेकिन खुद की गलती से वो आपसे दूर

द्वादश लग्न

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द्वादश लग्न नवग्रह फलम (मकर से में लग्न) 〰️〰️🔹〰️〰️🔹🔹〰️〰️🔹〰️〰️ मकर लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ ग्रह 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मकर लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे दुबले पतले होते हैं. समान्यतया इनकी शादी विलम्ब से होती है. इन्हें नियम और अनुशासन पर चलना पसंद होता है. ये थोड़े से जिद्दी और रूढ़िवादी होते हैं ये अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं. मकर लग्न में लग्नस्थ ग्रह इन्हें किस प्रकार से प्रभावित करते हैं यह देखिए! मकर लग्न में लग्नस्थ सूर्य👉 सूर्य मकर लग्न की कुण्डली में अष्टम भाव का स्वामी होता है लग्न भाव में सूर्य की स्थिति होने से व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है. हड्डियों में दर्द एवं पेट सम्बन्धी रोग की संभावना प्रबल रहती है. दृष्टि दोष की भी संभावना रहती हैं. लालच और स्वार्थ की भावना रहती है. शत्रु राशि में सूर्य की उपस्थिति होने के कारण जीवन में कठिन परिस्थितियों एवं बाधाओं का सामना करना होता है. परिश्रम और आत्मबल से कठिनाईयों पर विजय प्राप्त करते हैं. पिता से तनाव होता है. सगे सम्बन्धियों से भी विरोध का सामन
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अष्टलक्ष्मी राहु नैसर्गिक पापी ग्रह है.इस ग्रह की अपनी कोई राशि नहीं है अत: जिस राशि में होता है उस राशि के स्वामी अथवा भाव के अनुसार फल देता है.राहु जब छठे भाव में स्थित होता है और केन्द्र में गुरू होता है तब यह अष्टलक्ष्मी योग (Ashtalakshmi yoga) नामक शुभ योग का निर्माण करता है. अष्टलक्ष्मी योग (Ashtalakshmi yoga) में राहु अपना पाप पूर्ण स्वभाव त्यागकर गुरू के समान उत्तम फल देता है. अष्टलक्ष्मी योग (Ashtalakshmi yoga) जिस व्यक्ति की कुण्डली में बनता है वह व्यक्ति ईश्वर के प्रति आस्थावान होता है.इनका व्यक्तित्व शांत होता है.इन्हें यश और मान सम्मान मिलता है.लक्ष्मी देवी की इनपर कृपा रहती है. अपनी कुंडली की अच्छी जानकारी प्राप्त करने के लिए संपर्क करें।। पं:अभिषेक शास्त्री +918788381356