Wednesday, January 30, 2019

31 जनवरी 2019 का राशिफल और उपाय...


मेष राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ चं चन्द्रमसे नम:।'
आज का भविष्य : वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी व्यक्ति विशेष से कहासुनी हो सकती है। लेन-देन में सावधानी रखें। बनते काम बि‍गड़ सकते हैं। चोट व दुर्घटना से बचें। नकारात्मकता बढ़ेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। घर में तनाव रहेगा। पार्टनरों से मतभेद व कहासुनी हो सकती है।

वृषभ राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ शुं शुक्राय नम:।'
आज का भविष्य : कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। सभी कार्य समय पर होंगे। निवेश शुभ रहेगा। आय में वृद्धि होगी। स्वास्थ्‍य का ध्यान रखें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

मिथुन राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ बुं बुधाय नम:।'
आज का भविष्य : प्रतिद्वंद्विता में वृद्धि होगी। थकान व कमजोरी रहेगी। स्थायी संपत्ति में वृद्धि होगी। कोई बड़ा सौदा हो सकता है। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। घर-बाहर सभी तरफ से सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें।

कर्क राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ रां राहवे नम:।'
आज का भविष्य : कोई आनंददायक यात्रा का आयोजन हो सकता है। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। कारोबारी व्यस्तता रहेगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। घर-परिवार की चिंता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। प्रभावशाली व्यक्तियों से परिचय होगा। प्रमाद न करें।

सिंह राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ सों सोमाय नम:।'
आज का भविष्य : जोखिम व जमानत के कार्य टालें। शत्रु हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। शोक समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। आय बनी रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। मेहनत अधिक होगी।

कन्या राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ बुं बुधाय नम:।'
आज का भविष्य : नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। पारिवारिक चिंता में वृद्धि होगी। श‍त्रुओं से सावधानी आवश्यक है। निवेश शुभ रहेगा। मेहनत का फल प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

तुला राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ शुं शुक्राय नम:।'
आज का भविष्य : आत्मसम्मान बना रहेगा। अच्छे समाचार मिलेंगे। अतिथियों का आगमन होगा। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। किसी बड़े काम को करने का मन बनेगा। जल्दबाजी न करें। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। नए मित्र बनेंगे। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। आय में निश्चितता रहेगी।

वृश्चिक राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ अं अंगारकाय नम:।'
आज का भविष्य : उत्साह व प्रसन्नता से काम कर पाएंगे। कोई बड़ा कार्य होने से प्रसन्नता में वृद्धि होगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। बेरोजगारी दूर होगी। कारोबार में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य की अनुकूलता रहेगी। प्रमाद न करें।

धनु राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ चं चन्द्रमसे नम:।'
आज का भविष्य : फालतू खर्च होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। जीवनसाथी से असहयोग मिलेगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। लेन-देन में जल्दबाजी व लापरवाही न करें। धनहानि हो सकती है। विवाद से बचें। झंझटों से दूर रहें। आय में निश्चितता रहेगी।

मकर राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ शं शनैश्चराय नम:।'
आज का भविष्य : रुका हुआ धन मिलने के योग हैं, प्रयास करते रहें। यात्रा लाभदायक रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। रोजगार में वृद्धि होगी। आय बढ़ेगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। भाइयों का सहयोग प्रसन्नता में वृद्धि करेगा। घर-बाहर जीवन सुखमय रहेगा। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

कुंभ राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ शं शनैश्चराय नम:।'
आज का भविष्य : नई योजना बनेगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन हो सकता है। रोजगार में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने का अवसर प्राप्त हो सकता है। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। नए काम मिल सकते हैं। बाहर जाने का मन बनेगा। प्रसन्नता तथा संतुष्टि रहेगी। जल्दबाजी न करें।

मीन राशि के लिए आज का कल्याणकारी उपाय- 'जपें ॐ बृं बृहस्पतये नम:।'
आज का भविष्य : तंत्र-मंत्र में रुचि जागृत होगी। सत्संग का लाभ मिलेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। सभी तरफ से सफलता प्राप्त होगी। प्रसन्नता में वृद्धि होगी। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्‍य प्रभावित हो सकता है। थकान रहेगी। 
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धन-नाश योग:


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं  बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है| ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है| इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं| इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं|
दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है| जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है| सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उलझा रहता है और कर्ज लेकर जीवनयापन व मुकदमेबाजी करता रहता है| 12 वें भाव का सूर्य व्ययों में वृद्धि कर व्यक्ति को ऋणी रखता है| अष्टम भाव का राहू दशम भाव के माध्यम से दूसरे भाव पर विष-वमन कर धन का नाश करता है और इंसान को ऋणी होने के लिए मजबूर कर देता है| इनके आलावा कुछ और योग हैं जो व्यक्ति को ऋणग्रस्त बनाते हैं|


षष्ठेश पाप ग्रह हो व 8 वें या 12 वें भाव में स्थित हो तो व्यक्ति ऋणग्रस्त रहता है|
—छठे भाव का स्वामी हीन-बली होकर पापकर्तरी में हो या पाप ग्रहों से देखा जा रहा हो|
—-अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो यानि कम अंश का हो तो ऋण लेने की स्थिति बनती है।
—- अगर मंगल कुंडली में शनि, सूर्य या बुध आदि पापग्रहों के साथ हो तो व्यक्ति को जीवन में एक बार ऋण तो लेना ही पड़ता है।
— दूसरा व दशम भाव कमजोर हो, एकादश भाव में पाप ग्रह हो या दशम भाव में सिंह राशि हो, ऐसे लोग कर्म के     प्रति अनिच्छुक होते हैं|
— यदि व्यक्ति का 12 वां भाव प्रबल हो व दूसरा तथा दशम कमजोर तो जातक उच्च स्तरीय व्यय वाला होता है और 5. निरंतर ऋण लेकर अपनी जरूरतों की पूर्ति करता है|
— आवास में वास्तु-दोष-पूर्वोत्तर कोण में निर्माण हो या उत्तर दिशा का निर्माण भारी व दक्षिण दिशा का निर्माण हल्का हो तो व्यक्ति के व्यय अधिक होते हैं और ऋण लेना ही पड़ता है|

सोमवार सोमवार की अधिष्ठाता देवी पार्वती हैं। यह चर संज्ञक और शुभ वार है। इस वार को किसी भी प्रकार का कर्ज लेने-देने में हानि नहीं होती है।
मंगलवार मंगलवार के देवता कार्तिकेय हैं। यह उग्र एवं क्रूर वार है। इस वार को कर्ज लेना शास्त्रों में निषेध बताया गया है। इस दिन कर्ज लेने के बजाए पुराना कर्ज हो तो चुका देना चाहिए।
बुधवार बुधवार के देवता विष्णुहैं। यह मिश्र संज्ञक शुभ वार है, मगर ज्योतिष की भाषा में इसे नपुंसक वार माना गया है। यह गणेशजी का वार है। इस दिन कर्ज देने से बचना चाहिए।
– गुरुवार- गुरुवार के देवता ब्रह्माहैं। यह लघु संज्ञक शुभ वार है। गुरुवार को किसी को भी कर्ज नहीं देना चाहिए, लेकिन इस दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्दी उतरता है।
शुक्रवार शुक्रवार के देवता इन्द्र हैं। यह मृदु संज्ञक और सौम्य वार है। कर्ज लेने-देने दोनों दृष्टि से अच्छा वार है।
शनिवार शनिवार के देवता काल हैं। यह दारुण संज्ञक क्रूर वार है। स्थिर कार्य करने के लिए ठीक है, परंतु कर्ज लेन-देने के लिए ठीक नहीं है। कर्ज विलंब से चुकता है।
– रविवार- रविवार के देवता शिव हैं। यह स्थिर संज्ञक और क्रूर वार है। रविवार को न तो कर्ज दें और न ही कर्ज लें।
कर्ज के पिंड से छुटकारा नहीं हो रहा हो तो प्रत्येक बुधवार को गणेशजी के सम्मुख तीन बार ‘ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र’ का पाठ करें और यथाशक्ति पूजन करें।
धनहीनता के ज्योतिष योग—

ज्योतिष में फलित करते समय योगों का विशेष योगदान होता है। योग एक से अधिक ग्रह जब युति, दृष्टि, स्थिति वश संबंध बनाते हैं तो योग बनता है। योग कारक ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा व प्रत्यन्तर दशादि में योगों का फल मिलता है। योग को समझे बिना फलित व्यर्थ है। योग में योगकारक ग्रह का महत्वपूर्ण भूमिका होती है। योगकाकर ग्रह के बलाबल से योग का फल प्रभावित होता है। अब यहां ज्योतिष योगों कि चर्चा करेंगे जो इस प्रकार हैं।धनहानि किसी को भी अच्छी नहीं लगती है। आज उन ज्योतिष योगों की चर्चा करेंगे जो धनहानि या धनहीनता कराते हैं। कुछ योग इस प्रकार हैं-

-धनेश  छठे, आठवें एवं बारहवें भाव में हो या भाग्येश बारहवें भाव में हो तो जातक करोड़ों कमाकर भी निर्धन रहता है। ऐसे जातक को धन के लिए अत्यन्त संघर्ष करना पड़ता है। उसके पास धन एकत्रा नहीं होता है अर्थात्‌ दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि धन रुकता नहीं है।
– जातक की कुंडली में धनेश अस्त या नीच राशि में स्थित हो तथा द्वितीय व आठवें भाव में पापग्रह हो तो जातक सदैव कर्जदार रहता है।
– जातक की कुंडली में धन भाव में पापग्रह स्थित हों। लग्नेश द्वादश भाव में स्थित हो एवं लग्नेश नवमेश एवं लाभेश(एकादश का स्वामी) से युत हो या दृष्ट हो तो जातक के ऊपर कोई न कोई कर्ज अवश्य रहता है।
-किसी की कुंडली में लाभेश छठे, आठवें एवं बारहवें भाव में हो तो जातक निर्धन होता है। ऐसा जातक कर्जदार, संकीर्ण मन वाला एवं कंजूस होता है। यदि लग्नेश भी निर्बल हो तो जातक अत्यन्त निर्धन होता है।
-षष्ठेश एवं लाभेश का संबंध दूसरे भाव से हो तो जातक सदैव ऋणी रहता है। उसका पहला ऋण उतरता नहीं कि दूसरा चढ़ जाता है। यह योग वृष, वृश्चिक, मीन लग्न में पूर्णतः सत्य सिद्ध होते देखा गया है।
-धन भाव में पाप ग्रह हों तथा धनेश भी पापग्रह हो तो ऐसा जातक दूसरों से ऋण लेता है। अब चाहे वह किसी करोड़पति के घर ही क्यों न जन्मा हो।
-किसी जातक की कुंडली में चन्द्रमा किसी ग्रह से युत न हो तथा शुभग्रह भी चन्द्र को न देखते हों व चन्द्र से द्वितीय एवं बारहवें भाव में कोई ग्रह न हो तो जातक दरिद्र होता है। यदि चन्द्र निर्बल है तो जातक स्वयं धन का नाश करता है। व्यर्थ में देशाटन करता है और पुत्रा एवं स्त्राी संबंधी पीड़ा जातक को होती है।
– यदि कुंडली में गुरु से चन्द्र छठे,आठवें या बारहवें हो एवं चन्द्र केन्द्र में न हो तो जातक दुर्भाग्यशाली होता है और उसके पास धन का अभाव होता है। ऐसे जातक के अपने ही उसे धोखा देते हैं। संकट के समय उसकी सहायता नहीं करते हैं। अनेक उतार-चढ़ाव जातक के जीवन में आते हैं।
-यदि लाभेश नीच, अस्त य पापग्रह से पीड़ित होकर छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो तथा धनेश व लग्नेश निर्बल हो तो ऐसा जातक महा दरिद्र होता है। उसके पास सदैव धन की कमी रहती है। सिंह एवं कुम्भ लग्न में यह योग घटित होते देखा गया है।
-यदि किसी जातक की कुण्डली में दशमेश, तृतीयेश एवं भाग्येश निर्बल, नीच या अस्त हो तो ऐसा जातक भिक्षुक, दूसरों से धन पाने की याचना करने वाला होता है।
– किसी कुण्डली में मेष में चन्द्र, कुम्भ में शनि, मकर में शुक्र एवं धनु में सूर्य हो तो ऐसे जातक के पिता एवं दादा द्वारा अर्जित धन की प्राप्ति नहीं होती है। ऐसा जातक निज भुजबल से ही धन अर्जित करता है और उन्नति करता है।
– यदि कुण्डली का लग्नेश निर्बल हो, धनेश सूर्य से युत होकर द्वादश भाव में हो तथा द्वादश भाव में नीच या पापग्रह से दृष्ट सूर्य हो तो ऐसा जातक राज्य से दण्ड स्वरूप धन का नाश करता है। ऐसा जातक मुकदमें धन हारता है। यदि सरकारी नौकरी में है तो अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित या नौकरी से निकाले जाने का भय रहता है। वृश्चिक लग्न में यह योग अत्यन्त सत्य सिद्ध होता देखा गया है।
-यदि धनेश एवं लाभेश छठे, आठवें, बारहवें भाव में हो एवं एकादश में मंगल एवं दूसरे राहु हो तो ऐसा जातक राजदण्ड के कारण धनहानि उठाता है। वह मुकदमे, कोर्ट व कचहरी में मुकदमा हारता है। अधिकारी उससे नाराज रहते हैं। उसे इनकम टैक्स से छापा लगने का भय भी रहता है।

मूलतः धनेश, लाभेश, दशमेश, लग्नेश एवं भाग्येश निर्बल हो तो धनहीनता का योग बनता है।
उक्त धनहीनता के योग योगकारक ग्रहों की दशान्तर्दशा में फल देते हैं। फल कहते समय दशा एवं गोचर का विचार भी कर लेना चाहिए।
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पत्नी का स्वभाव

कुंडली से जाने पत्नी का स्वभाव !


हर लड़का चाहता है की उसकी जीवन संगिनी बहुत सुंदर हो और स्वभाव में अच्छी हो लेकिन बहुत बार प्रयास करने के बाद भी आपको ऐसी पत्नी नहीं मिलती । व्यक्ति की कुंडली के ग्रहो के अनुसार ही तय होता है की आपको सुंदर और गुणवान जीवन संगिनी मिलेगी या नहीं । हमारी जन्म कुंडली में सातवाँ घर और शुक्र दोनों से पत्नी के बारे में जाना जा सकता है ।

यदि सप्तम भाव में मंगल, शनि, बुध या सूर्य की दृष्टि हो तो ऐसे लोगों को बहुत बुद्धिमान और गुणवान पत्नी मिलती है ।यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के सप्तम भाव में वृषभ राशि है या तुला राशि है तो यह इस बात का संकेत है की उस व्यक्ति की जीवन संगिनी बहुत खूबसूरत होगी और अगर कुंडली के सातवे घर में मिथुन राशि या कन्या राशि है तो उस व्यक्ति की जीवन संगिनी बहुत सुशील, सत्य और मीठा बोलने वाली, और बहुत आकर्षक होगी । सातवे घर में कर्क राशि है तो उस व्यक्ति की पत्नी बहुत लम्बी, तीखे नेन नक्श वाली और भावुक होगी ।लड़के की कुंडली में चंद्र उच्च हो, या शुभ हो तो ऐसे व्यक्ति को संस्कारी और सुन्दर पत्नी मिलती है और उनका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा रहता है और अगर कुंडली में चंद्र नीच का हो या अशुभ हो तो ऐसे व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में खटपट रहती है ।यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सप्तमेश केंद्र में हो और सप्तमेश को अच्छे ग्रह देख रहे हो तो उस व्यक्ति की पत्नी सर्वगुण सम्पन होती है ,कुंडली के सातवें घर में बुध, गुरु या शुक्र बैठे हो तो ऐसे लोगों की जीवन संगिनी बहुत पढ़ी लिखी, धार्मिक विचारों की और कला, संगीत और लेखन कार्य में निपुण होती है ।
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Sunday, January 20, 2019

21 जनवरी राशिफल



मेष राशिफल - आज के  दिन आपका किसी से झगड़ा न होजाये  इसका ध्यान रखने की सलाह है।  मित्रो व स्वजनों के साथ आपका वैचारिक  स्तर पर मनमुटाव  सकता है।  स्व्भाव में उग्रता और क्रोध की मात्रा विशेष रहेगी ,पुराने रोग परेशान करसकते हैं।

वृषभ राशिफल :-  आज के दिन आपको कार्य करने  दृढ मनोबल तथा आत्मविश्वास का पूरा सहकार मिलेगा।  इस कार्य का फल भी आपको अपेक्छा अनुसार मिलेगा। मातृ पक्ष की ओर से लाभदायिक समाचार प्राप्त होगा।  अभ्यास में विद्यार्थियों को रूचि रहेगी।

मिथुन राशिफल: - आज शारीरिक और मानसिक से आप अस्वस्थ रह सकते है , .मन में दुख और असंतोष की भावना रहेगी। पारिवारिक सदस्यों के साथ ग़लतफ़हमी न हो इसका आप अधिक ध्यान रखिए।  आँख संबधित एवं मस्तिक पीड़ा होने की संभावना है.

कर्क राशिफल :- आज के दिन आपके अंदर आत्मविश्वास की मात्रा अद्दिक ही रहेगी। किसी भी कार्य को करने के लिए निर्णय त्वरित ले सकेंगे। पिता और बड़े भाई से आर्थिक लाभ होसकती है।  सामाजिक रूप से मान-सम्मान में बृद्धि होगी।

सिंह राशिफल :- आज आप शारीरिक थकान महशुस क्र सकते है।  आपका स्वास्थ्य कुछ नरम-गरम  रहेगा। मन में चिंता होगी। ब्वयवस्य में बाधा उपस्थित होसकती है ,भाग्य साथ नहीं देरहा आयशा प्रतीत होगा।

कन्या राशिफल :-  आज के दिन  आप सभी कार्य दृढ मनोबल और आत्मविस्वास पूर्वक करेंगे। प्रवाश-पर्यटन की सम्भवना रहेगी। अच्छा भोजन और नए वस्त्र परिधान प्राप्त करने के प्रसंग उपस्थित होंगे।  भागीदारी से लाभ होगा।  वाहन सुख की प्राप्ति होगी।

  तुला राशिफल :- आज आपको व्यवसायिक स्थल पर वातावरण अनुकल रहेगा।  उच्च अधिकारी आप पर प्रसन्न रहेंगे।  आपका हर कार्य आज सफलता पूर्वक सम्पन्न होगा। आपकी मान -प्रतिस्ठा में बृद्धि होगी।  नोकरी  में पदोनति भी होसकती है।

वृश्चिक राशिफल :- आज आपका मनोबल और  आत्मविशास  में  दृढ़ता का अनुभव होगा। शारीरिक स्वास्थ अच्छा रहेगा।घर मे शुख-सन्ति का वातावरण रहेगा।स्वभाव और वाणी में उग्रता पर सयम रखिये। सहकर्मी का सहकार आपको मिलेगा।

धनु राशि:- आज के दिन आपको आर्थिक आय कम और व्यय अधिक होगा। आंखों के दर्द व्यग्रत होगी।मानसिक चिन्ता भी रहेगी।वाणी और आचरण में ध्यान रखिये। मध्याह्न के बाद आपकी समस्या में परिवर्तन आएगा।आर्थिक दृष्टि से भी लाभ होगा

मकर राशि:- आज के दिन आपका प्रातः काल से ही आनंदप्रद और लाभप्रद रहेगा। व्यवसाय और व्यपार के छेत्र में लाभ होगा। सामाजिक क्षेत्र में आपकी प्रसंशा होगी । परिवार में भी आनंद का वतावरण रहेगा। मध्यान्ह के बाद परिस्थि में प्रतिकूलता होगी।

कुम्भ राशिफल :- आज के दिन आपको कार्य सफलता और यश-कीर्ति प्राप्त होगी। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । सामाजिक रूप से मान-प्रतिष्ठा में बृद्धि होगी।
मद्यह्न के बाद आप मनोरंजन का कार्यक्रम बनाय मन को शान्त रखें।

मीन राशिफल  आज आपका दिन अछि तरह से बीतेगा। कला के क्षेत्र में आपकी अभिरुचि रहेगी, मित्रो से हुई भेट से आनंद होगा। विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय है। प्रियपात्र के साथ आनंद मय दिन व्यतीत होगा।

Friday, January 18, 2019

21 जनवरी चंदग्रहण


साल 2019  का पहला महीना सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण दोंनो का गवाह बनेगा।  6 जनवरी को सूर्यग्रहण  लगा था और अब 21 जनवरी को चंद्रग्रहण लगने जारहा है।  यानि इस दिन चन्द्रमा का रंग काफी लाल दिखाई देगा। कहा जाता है की यदि चन्द्रमा लाल रंग का दिखाई दे तो छत्रिय और राजाओ के लिए कश्टकारी होता है। 

ज्योतषियो की मने तो 21 जनवरी को लगने वाले चंद्रग्रहण के भी काफी प्रभाव दिखाई देंगे। 
राजनीती से लेकर वस्तुओ की कीमत और मौसम पर चंद्रग्रहण का प्रभाव दिखाई देगा।  ज्योतिष्यो के मुताबिक इस घटना के बाद असमय वर्सा और बर्फ़बारी हो सकती है।  जिससे कई देशो में** भयंकर ठण्ड** पड़ेगी।  ज्योतषियो की मने तो दक्षिण भारत की राजनीती पर भी यह ग्रहण असर डाल सकता है।  कर्नाटक में मुश्किल में चलरहि कांग्रेस -जेडीएस  की सरकार ग्रहण के बाद और मुशिकल में आसक्ति है। 

हलाकि **चंद्रग्रहण ** को किशानो के लिए लाभदायक बतया जारहा है। कर्क राशि में ग्रहण के समय चन्द्रमा पर गुरु और बुध की दृस्टि से  फषलों लिए अच्छी वर्सा होगी और गर्मियों में नदियों में पर्याप्त जल रहेगा।  ज्योतषियो का अनुमान है की ग्रहण  कुछ दिन बाद सरकार भी किशानो के लिए कोई कल्याणकारी योज्ना  पेश कर सकती है। बिद्यार्थियो के लिए भी यह ग्रहण अच्छा बताया जारहा है। 

बता दे की चंद्रग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उतरी-दक्षिणी अमेरिका और मध्य  प्रसांत में ही नजर आएगा ,यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इससे पहले सूर्य ग्रहण  भारत में नजर नहीं आया था। 
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क्या आपका जन्म 1970 से 1980 के बीच हुआ है ?


ज्योत्षविदो की मने तो उनका कहना है की इन लोगो को जल्द ही शुभ समाचार मिलने वाला है।   जल्द ही  इनके जीवन में खुशियाँ दस्तक देने वाली है।  इन पर भगवान भोलेनाथ मेहरबान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा योग बनने जा रहा है  जिससे की जिन लोगो का जन्म 1970 से 1980 के बीच हुवा है , उनको  वाले   समय में कई बड़ी उपलब्धिया  मिल सकती है। इनके जीवन में निरंतर खुशियाँ बनी रहेगी।  महादेव इन पर सदा मेहरबान रहेंगे। 
   इन लोगो के जीवन से धन - संबद्ध सभी प्रकार की परेशानियां दूर होंगी।  इनका जीवन सदैव खुशहाल व्यतीत होगा। समाज में इनके 
मान-सम्मान बृद्धि होगी। इन्हे अपनी प्रतिभा दिखाने को मिलेगा।  ऐसे लोग अपनी मेहनत के दम पर समाज मे खुब तरक्की  हासिल करेंगे।  ये लोग अपनी कार्य निष्ठा के दम पर जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे। नरिंतर इनको खुशिया मिलेंगी। इनके कार्यो में आ रहे सभी विघ्न भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगें। कार्यछेत्र में भी सफलता मिलेगी।  ऐसे लोग बड़ी परेशानी को भी आसानी से पार कर जायेंगे।   
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Wednesday, January 16, 2019

हमारे सप्तर्षि

सप्तर्षियों की संक्छिप्त  वर्णन्न 

ऋग्वेद में लगभग एक हजार  सूक्त हैं,याने लगभग दस हजार मन्त्र हैं। चारों वेदों में करीब बीस हजार से ज्यादा मंत्र हैं और इन मन्त्रों के रचयिता कवियों को हम ऋषि कहते हैं। बाकी तीन वेदों के मन्त्रों की तरह ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना में भी अनेकानेक ऋषियों का योगदान रहा है। पर इनमें भी सात ऋषि ऐसे हैं जिनके कुलों में मन्त्र रचयिता ऋषियों की एक लम्बी परम्परा रही। ये कुल परंपरा ऋग्वेद के सूक्त दस मंडलों में संग्रहित हैं और इनमें दो से सात यानी छह मंडल ऐसे हैं जिन्हें हम परम्परा से वंशमंडल कहते हैं क्योंकि इनमें छह ऋषिकुलों के ऋषियों के मन्त्र इकट्ठा कर दिए गए हैं।

आकाश में सात तारों का एक मंडल नजर आता है उन्हें सप्तर्षियों का मंडल कहा जाता है। उक्त मंडल के तारों के नाम भारत के महान सात संतों के नाम पर ही रखे गए हैं। वेदों में उक्त मंडल की स्थिति, गति, दूरी और विस्तार की विस्तृत चर्चा मिलती है। प्रत्येक मनवंतर में अगल-अगल सप्त‍ऋषि हुए हैं। यहां प्रस्तुत है वैवस्वत मनु के काल के सप्तऋषियों का परिचय।


1.वशिष्ठ :राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ को कौन नहीं जानता। ये दशरथ के चारों पुत्रों के गुरु थे। वशिष्ठ के कहने पर दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था।

कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था। वशिष्ठ ने राजसत्ता पर अंकुश का विचार दिया तो उन्हीं के कुल के मैत्रावरूण वशिष्ठ ने सरस्वती नदी के किनारे सौ सूक्त एक साथ रचकर नया इतिहास बनाया।

दूसरे महान ऋषि मंत्र शक्ति के ज्ञाता और स्वर्ग निर्माता...

2.विश्वामित्र :ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। लेकिन स्वर्ग में उन्हें जगह नहीं मिली तो विश्वामित्र ने एक नए स्वर्ग की रचना कर डाली थी। इस तरह ऋषि विश्वामित्र के असंख्य किस्से हैं।

माना जाता है कि हरिद्वार में आज जहां शांतिकुंज हैं उसी स्थान पर विश्वामित्र ने घोर तपस्या करके इंद्र से रुष्ठ होकर एक अलग ही स्वर्ग लोक की रचना कर दी थी। विश्वामित्र ने इस देश को ऋचा बनाने की विद्या दी और गायत्री मन्त्र की रचना की जो भारत के हृदय में और जिह्ना पर हजारों सालों से आज तक अनवरत निवास कर रहा है।

तीसरे महान ऋषि ने बताया ज्ञान-विज्ञान तथा अनिष्ट-निवारण का मार्ग...

3.कण्व :माना जाता है इस देश के सबसे महत्वपूर्ण यज्ञ सोमयज्ञ को कण्वों ने व्यवस्थित किया। कण्व वैदिक काल के ऋषि थे। इन्हीं के आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला एवं उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था।

103सूक्तवाले ऋग्वेद के आठवें मण्डल के अधिकांश मन्त्र महर्षि कण्व तथा उनके वंशजों तथा गोत्रजों द्वारा दृष्ट हैं। कुछ सूक्तों के अन्य भी द्रष्ट ऋषि हैं, किंतु 'प्राधान्येन व्यपदेशा भवन्ति' के अनुसार महर्षि कण्व अष्टम मण्डल के द्रष्टा ऋषि कहे गए हैं। इनमें लौकिक ज्ञान-विज्ञान तथा अनिष्ट-निवारण सम्बन्धी उपयोगी मन्त्र हैं।

सोनभद्र में जिला मुख्यालय से आठ किलो मीटर की दूरी पर कैमूर श्रृंखला के शीर्ष स्थल पर स्थित कण्व ऋषि की तपस्थली है जो कंडाकोट नाम से जानी जाती है।

चौथे महान ऋषि जिन्होंने दुनिया को बताया विमान उड़ाना...

4.भारद्वाज :वैदिक ऋषियों में भारद्वाज-ऋषि का उच्च स्थान है। भारद्वाज के पिता बृहस्पति और माता ममता थीं। भारद्वाज ऋषि राम के पूर्व हुए थे, लेकिन एक उल्लेख अनुसार उनकी लंबी आयु का पता चलता है कि वनवास के समय श्रीराम इनके आश्रम में गए थे, जो ऐतिहासिक दृष्टि से त्रेता-द्वापर का सन्धिकाल था। माना जाता है कि भरद्वाजों में से एक भारद्वाज विदथ ने दुष्यन्त पुत्र भरत का उत्तराधिकारी बन राजकाज करते हुए मन्त्र रचना जारी रखी।

ऋषि भारद्वाज के पुत्रों में 10 ऋषि ऋग्वेद के मन्त्रदृष्टा हैं और एक पुत्री जिसका नाम 'रात्रि' था, वह भी रात्रि सूक्त की मन्त्रदृष्टा मानी गई हैं। ॠग्वेद के छठे मण्डल के द्रष्टा भारद्वाज ऋषि हैं। इस मण्डल में भारद्वाज के 765 मन्त्र हैं। अथर्ववेद में भी भारद्वाज के 23 मन्त्र मिलते हैं। 'भारद्वाज-स्मृति' एवं 'भारद्वाज-संहिता' के रचनाकार भी ऋषि भारद्वाज ही थे।

ऋषि भारद्वाज ने 'यन्त्र-सर्वस्व' नामक बृहद् ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ का कुछ भाग स्वामी ब्रह्ममुनि ने 'विमान-शास्त्र' के नाम से प्रकाशित कराया है। इस ग्रन्थ में उच्च और निम्न स्तर पर विचरने वाले विमानों के लिए विविध धातुओं के निर्माण का वर्णन मिलता है।
पांचवें महान ऋषि पारसी धर्म संस्थापक कुल के और जिन्होंने बताया खेती करना...

5.अत्रि : ऋग्वेद के पंचम मण्डल के द्रष्टा महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र, सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति थे। अत्रि जब बाहर गए थे तब त्रिदेव अनसूया के घर ब्राह्मण के भेष में भिक्षा माँगने लगे और अनुसूया से कहा कि जब आप अपने संपूर्ण वस्त्र उतार देंगी तभी हम भिक्षा स्वीकार करेंगे, तब अनुसूया ने अपने सतित्व के बल पर उक्त तीनों देवों को अबोध बालक बनाकर उन्हें भिक्षा दी। माता अनुसूया ने देवी सीता को पतिव्रत का उपदेश दिया था।

अत्रि ऋषि ने इस देश में कृषि के विकास में पृथु और ऋषभ की तरह योगदान दिया था। अत्रि लोग ही सिन्धु पार करके पारस (आज का ईरान) चले गए थे, जहाँ उन्होंने यज्ञ का प्रचार किया। अत्रियों के कारण ही अग्निपूजकों के धर्म पारसी धर्म का सूत्रपात हुआ।

अत्रि ऋषि का आश्रम चित्रकूट में था। मान्यता है कि अत्रि-दम्पति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में जन्मे। ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी।

छटवें ऋषि शास्त्रीय संगीत के रचनाकार,,,,,

 6.वामदेव :वामदेव ने इस देश को सामगान (अर्थात् संगीत) दिया। वामदेव ऋग्वेद के चतुर्थ मंडल के सूत्तद्रष्टा, गौतम ऋषि के पुत्र तथा जन्मत्रयी के तत्ववेत्ता माने जाते हैं। भरत मुनि द्वारा रचित भरत नाट्य शास्त्र सामवेद से ही प्रेरित है। हजारों वर्ष पूर्व लिखे गए सामवेद में संगीत और वाद्य यंत्रों की संपूर्ण जानकारी मिलती है।

वामदेव जब मां के गर्भ में थे तभी से उन्हें अपने पूर्वजन्म आदि का ज्ञान हो गया था। उन्होंने सोचा, मां की योनि से तो सभी जन्म लेते हैं और यह कष्टकर है, अत: मां का पेट फाड़ कर बाहर निकलना चाहिए। वामदेव की मां को इसका आभास हो गया। अत: उसने अपने जीवन को संकट में पड़ा जानकर देवी अदिति से रक्षा की कामना की। तब वामदेव ने इंद्र को अपने समस्त ज्ञान का परिचय देकर योग से श्येन पक्षी का रूप धारण किया तथा अपनी माता के उदर से बिना कष्ट दिए बाहर निकल आए।
सातवें ऋषि गुरुकुल परंपरा के अग्रज...

7.शौनक :शौनक ने दस हजार विद्यार्थियों के गुरुकुल को चलाकर कुलपति का विलक्षण सम्मान हासिल किया और किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया। वैदिक आचार्य और ऋषि जो शुनक ऋषि के पुत्र थे।

फिर से बताएं तो वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भरद्वाज, अत्रि, वामदेव और शौनक- ये हैं वे सात ऋषि जिन्होंने इस देश को इतना कुछ दे डाला कि कृतज्ञ देश ने इन्हें आकाश के तारामंडल में बिठाकर एक ऐसा अमरत्व दे दिया कि सप्तर्षि शब्द सुनते ही हमारी कल्पना आकाश के तारामंडलों पर टिक जाती है।

इसके अलावा मान्यता हैं कि अगस्त्य, कष्यप, अष्टावक्र, याज्ञवल्क्य, कात्यायन, ऐतरेय, कपिल, जेमिनी, गौतम आदि सभी ऋषि उक्त सात ऋषियों के कुल के होने के कारण इन्हें भी वही दर्जा प्राप्त है।

अंत में पढ़ें कुछ खास तथ्य की बातें... वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- 1.वशिष्ठ, 2.विश्वामित्र, 3.कण्व, 4.भारद्वाज, 5.अत्रि, 6.वामदेव और 7.शौनक।

पुराणों में सप्त ऋषि के नाम पर भिन्न-भिन्न नामावली मिलती है। विष्णु पुराण अनुसार इस मन्वन्तर के सप्तऋषि इस प्रकार है :- वशिष्ठकाश्यपो यात्रिर्जमदग्निस्सगौत। विश्वामित्रभारद्वजौ सप्त सप्तर्षयोभवन्।। अर्थात् सातवें मन्वन्तर में सप्तऋषि इस प्रकार हैं:- वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज।

इसके अलावा पुराणों की अन्य नामावली इस प्रकार है:- ये क्रमशः केतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरा, वशिष्ट तथा मारीचि है।

महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं।

 कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है।।
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Friday, January 11, 2019

शनि व राहु ।


1 शनि एवं राहु दोनों ही कार्मिक ग्रह माने जाते है!
कार्मिक का अर्थ होता है कर्म के अनुरूप फल देने वाला. शनि देव को दण्डनायक का पद प्राप्त है जो व्यक्ति को उनके पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार सजा भी देते हैं और पुरष्कार भी.
2 राहु का फल भी शनि की भांति पूर्व जन्म के अनुसार मिलता है. राहु व्यक्ति के पूर्व जन्म के गुणों एवं विशेषताओं को लेकर आता है. 
3 शनि एवं राहु दोनों ही ग्रह दु:ख, कष्ट, रोग एवं आर्थिक परेशानी देने वाले होते हैं. परंतु अगर शुभ स्थिति में हों तो बड़े से बड़ा राजयोग भी इनके समान फल नहीं दे सकता. यह प्रखर बुद्धि, चतुराई, तकनीकी योग्यता प्रदान कर धन-दौलत से परिपूर्ण बना सकते हैं. ऊँचा पद, मान-सम्मान एवं पद प्रतिष्ठा सब कुछ प्राप्त होता है.
4 मकर एवं कुम्भ इन दोनों राशियों का स्वामित्व शनि को प्राप्त है जबकि राहु की अपनी कोई राशि नहीं है. राहु जिस राशि में बैठता है उसे अपने अधिकार में कर लेता है.5 शनि का फल विलम्ब से अथवा धीरे-धीरे प्राप्त होता है जबकि राहु जल्दी फल देने वाला ग्रह है। यह एक पल में अमीर बना देता है तो दूसरे ही पल कंगाल बनाने की भी योग्यता रखता है. 6 शनि देव का गुण है कि यह व्यक्ति को ईमानदारी एवं मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं तो राहु चतुराई एवं आसान तरीकों से सफलता पाने का विचार उत्पन्न करता है.

Tuesday, January 8, 2019

The simplest solution

The simplest solution to live a happy life
Desirable Success Measures

Friends, do you think that you are not achieving your success in business / employment / job. If you want you to have tremendous success in your work area, then here are some simple tips given here that can change your life. These measures are according to the amount, which means whatever amount of the person, if he has done according to his own amount, with complete faith and faith, then he can achieve hopeful success in his work area.
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Saturday, January 5, 2019

Stronger by eating food weak planet



There is a lack of elements in our body. Or the planet which is weak. The nature gives us the same type of catering and motivation to fulfill those elements. like

The people whose horoscope is weak in Jupiter's position. They like pulses in the food, yellow vegetables, or yellow sweets so much. Use turmeric in the food.

Those people whose horoscope has worsened in the horoscope, those people like either very quick chillies, or very sweet food. They can not eat non-chilli and they like lentil pulses. When they think of eating sweet, they can eat just as sweet and that too without regret, without regret.

If the sun's condition is weak, then such people find sweet or otherwise sour taste in every kind of food. They eat more salt in their diet. You can see them eating anytime, chips, or any other snack, they can eat at any time, anytime. Without thinking that day or night

Venus and Chandra are related to white matter. When these two planets are weak in the horoscope of a person, they are more interested in white things like butter, curd, cheese, milk or white sweets.

Roasting or spicy food if you prefer that the condition of Saturn in your horoscope is weak. Talk about pulses, they like most of the urad dal and never say 'khichadi'. They like the smell of mustard oil, so they want their food to be made in the same oil.

Mercury has a weak position in the horoscope, so such people prefer raw food to the vegetables. Peas and carrots are their favorites. Moong dal is their favorite and they expect this in their all-time meals.
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My Problem


Today, we will talk about career and business related problems: Any of our profession or work, we all have a great significance in life, a working person is respected by the society and I can live my life well. And they can feed their families in a nutritionally manner, but many times it has been seen that all things go well with our lives, suddenly we have some problems related to our profession. Mr. our credit scoring business goes is released from the falls on the verge of closing or moving fine job all of a sudden, why so many times that even some where there is no work after much effort would it end. Whenever we face such a problem with our life, then the real reason is that our planets are related to 5, 8, 12 times, when whenever the condition of the house related to these values ​​comes to the difference, then this problem is our life. Of course, and many times it has also been seen that everything goes to the end. But the planets related to the 6, 8, 12 quote also give us problems related to our career or profession, as the work
 Do not walk in the way of the job. I do not have the right ambience of the office or the burden of the work is not enough to be made by my manager etc, but not as many of the planets released from 5, 8, 12.

If you also have some similar issues? Obviously please contact.
Pt. Abhishek Shastri
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Wednesday, January 2, 2019

Vastu defect


Vastu defect of toilets in the north-east:-
Somewhere you are suffering from mental stress, whether your business is going into a deficit, debt and illness does not leave you, is worried about your children's education and their career, all these things can be the architectural faults.
And the biggest Vaastu defect in it is toilets created in the north-east, if the sub-constellation of the house in the horoscope is Rahu Rahu or Rahu 2 is sitting in the house then the object angle is definitely in the angle angle and if it is from the state of Rahu Then it becomes more effective. 
Toilets are related to Rahu, i.e. the negative energy is the north angle (northeast direction) is very holy direction, the direction of the goddess of Ishwar that is the place where Lord Shiva resides here, it is the brain of the Vaastu male and coming from here Magnetic energy is very pure and should be kept sacred. If there is a toilet at this place then the energies of the magnet coming from the north angle become negative. ,


The north is the water element and the toilet is earth's element. It is the work of the earth. Soaking the water, that is, the work of anti-water elements for the earth's water, as well as the shantyalaya Rahu, from which all the positive energy coming from this direction, ie the divine energy And the energy of Rahu increases and that is why all the people living in the home get negative thoughts and at the same time dispose of the toilet Which in our mind, the brain, which is also coming good idea that they have all become lost or destroyed and can not something new in your life. There are many types of transit in the house
Health :-
Head-related parsees, delusions and wrong decisions, head injuries, brain haemorrhage, mental disorders, depression, infertility involved accidents. Transit related to blood, kidneys,
Financial: -
Financial difficulties, loss and waste of money, failure to pay the loan, rising debt and finally bankruptcy.
Family: May be a misunderstanding and constant struggle between husband and wife and even till divorce.
So if there is a toilet in the north of your house, then its solution should be done.
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pt.abhishek shastri.
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