गोचर में बुध

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जन्म या नाम राशि से २' ४' ६' ८' १० व ११ वें स्थान पर बुध शुभ फल देता है। शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है।

जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग, चुगलखोरी, धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है।

दूसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है।

तीसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है।

चौथे👉 स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है।

पांचवें👉 स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है।

छठे👉 स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता है लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है।

सातवें👉 स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है।

आठवें👉 स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्राप्ति,सफलता,विजय व उह्ह सामजिक स्थिति देता है.

नवें👉  स्थान पर बुध  के  गोचर से  भाग्य हानि ,विघ्न ,धन मान कि हानि होती है
दसवें  स्थान पर बुध  के  गोचर से पद प्राप्ति,शत्रु कि पराजय व्यवसाय में लाभ,यश व सफलता प्राप्त होती है।

ग्यारहवें👉स्थान पर बुध के गोचर से आय वृध्धि ,व्यापार में लाभ , आरोग्यता, भूमि लाभ,भाइयों को सुख ,कार्यों में सफलता , संतान सुख  , मित्र सुख व हरे पदार्थों से लाभ होता है।

बारहवें👉 स्थान पर बुध  के  गोचर से  अपव्यय , स्थान हानि,स्त्री को कष्ट , शारीरिक कष्ट ,मानसिक चिंता होती है विद्या प्राप्ति में बाधा ,किसी कार्य कि हानि ,शत्रु से पराजय होती है।

( गोचर में बुध के उच्च ,स्व मित्र,शत्रु नीच आदि राशियों में स्थित होने पर , अन्य ग्रहों से युति ,दृष्टि के प्रभाव से , अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने पर उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव है)

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