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Showing posts from January, 2020

शनि गोचर 2020,राशिफल एवं उपाय

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*** ************************************************* शनि गोचर 2020 न्यायकारक शनि गोचर 2020 में धनु राशि से अपनी स्वराशि मकर में 24 जनवरी को होने जा रहा है। यह गोचर भारतीय समय अनुसार दोपहर 12 बज कर 5 मिनट पर होगा। इसी वर्ष 11 मई 2020 से 29 सितम्बर 2020 तक शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर करेगा। इसी वर्ष शनि 27 दिसम्बर 2020 को अस्त भी हो जाएंगे, जिससे शनि के प्रभाव कुछ कम हो जाते हैं। धनु और मकर राशि में पहले से ही शनि की साढ़े साती का प्रभाव चल रहा था। अब कुम्भ राशि पर भी शनि की साढ़े साती का पहला चरण शुरु हो जाएगा। शनि मकर और कुम्भ दो राशियों के स्वामी हैं। शनि की दो राशियों में से एक राशि मकर में शनि का गोचर होने जा रहा है और शनि की दूसरी राशि कुम्भ शनि की स्व राशि और मूल त्रिकोण राशि है। शनि एक अनुशासनात्मक और न्याय कारक ग्रह हैं। जिस प्रकार से एक शिक्षक हमारी ऊर्ज़ाओं को समझ कर हमें सही मार्ग पर लें जाने की कोशिश करते हैं और गलत करने पर दण्डित भी करते हैं, उसी प्रकार ये शनि भी अनुशासन में रह कर कर हमें हमारी सीमाओं से बांधते हैं। शनि के मकर राशि में आने से हमें समझ आ

कैसे मिलेगी नौकरी में सफलता/How to get success in job???

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सरकारी नौकरी में सफलता दिलाते हैं यह खास योग क्या आपके जन्म कुंडली में भी बन रहे हैं !! गजकेसरी योग ज्योतिष में वर्णित अनेक ग्रहयोगों में से एक बहुचर्चित और विशेष योग है जिसे बहुत शुभ फल देने वाला योग माना गया है।  गजकेसरी योग बृहस्पति और चन्द्रमाँ से बनने वाला एक योग है, जन्म कुंडली में जब बृहस्पति और चन्द्रमाँ एक साथ बैठे हो, या बृहस्पति, चन्द्रमाँ से केंद्र (1,4,7,10) में हो तो इसे गजकेसरी योग कहते हैं। यदि कुंडली में गजकेसरी योग अच्छी स्थिति में बन रहा हो और उस पर कोई पाप प्रभाव ना हो तो इसके बहुत शुभ फल प्राप्त होते हैं जिस व्यक्ति की कुंडली में गजकेसरी योग हो वह व्यक्ति धन, यश, प्रसिद्धि और ऐश्वर्य को प्राप्त करता है ज्योतिष ग्रंथों में इस योग की बहुत प्रसंसा की गई है ऐसा व्यक्ति लक्ष्मीवान होता है और जीवन को बहुत अच्छी स्थिति में व्यतीत करता है परन्तु ये सभी शुभ फल तभी घटित होते हैं जब गजकेसरी योग अन्य पाप योगो से बाधित न हो रहा हो। गजकेसरी योग जब केंद्र (1,4,7,10 भाव ) या त्रिकोण (1,5,9 भाव ) में बने तो अधिक शुभ होता है। यदि गजकेसरी योग कर्क, धनु या मी

विवाह बाधा निवारण/Marriage interruption prevention astro

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जन्मकुंडली में नही बन रहे विवाह के योग, तो कीजिये ज्योतिष्य अनुसार कुछ उपाय.... विवाह जीवन का एक ऐसा मोड़ होता है जिसके अभाव में व्यक्ति अधूरा रहता है। लेकिन विवाह हर व्यक्ति की किस्मत में नहीं होता। लेकिन इसके ज्योतिषीय पहलू पर चर्चा करना भी जरूरी है। जिस देश में विवाह को धार्मिक संस्कार मानकर विवाह पूर्व कुंडली मिलान को जरूरी माना गया हो वहां अविवाहितों की संख्या बढऩे के ज्योतिषीय कारण व समाधान पर चर्चा निहायत जरूरी होती है और ज्योतिषशास्त्र अनुसार कुछ उपाय करके भी शीघ्र विवाह के योग बन सकते हैं आपकी कुंडली मे। हल्दी के प्रयोग से उपाय-  विवाह योग लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए। भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है। पीला वस्त्र धारण करना- ऐसे व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए। वृद्धों का सम्मान करना- उपाय करने वाले व्यक्ति को कभी भी अपने से बड़ों व बूढ़ों का अपमान नहीं करना चाहिए। गाय को रोटी देना- जिन व्य

क्या होता है हंस योग !!

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ज्योतिष से जानें इसका कुंडली पर प्रभाव ... प्रत्येक इंसान की कुंडली में ऐसे कई योग होते हैं जिसका उनके जीवन पर अच्छा-बुरा प्रभाव पड़ता है। मगर बहुत से लोग होते हैं जिन्हें इन योग के बारे में पता नहीं होता।  अब ज़ाहिर सी बात इन योगों का असर शुभ है या अशुभ ये तो तब ही पता चलेगा जब इनके बारे में कोई जानकारी होगी।  आज हम अपने इस आर्टकिल में आपको एक ऐसे ही योग के बारे में बताएंगे जो अगर किसी की कुंडली में ये योग बन जाए तो बहुत शुभ होता है बल्कि इससे कई तरह के लाभ भी प्राप्त होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हंस योग को एक बेहद शुभ योग माना जाता है। कहा जाता है इस योग का संबंध देवगुरु बृहस्पति से होता है।  बता दें अगर गुरु अपनी स्वराशि मीन या धनु अथवा उच्च राशि कर्क में स्थित होकर जन्म कुंडली के केन्द्र स्थान में हो तो ऐसे में हंस नामक योग बनता है। कहा जाता है इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अधिक बुद्धिमान और आध्यात्मिक होता है। अपने इन्हीं गुणों के चलते समाज में इन्हें काफ़ी प्रसिद्धि प्राप्त होती है।  इस योग के बारे में ये भी कहा जाता है कि इसके प्रभाव वाले

🕰वास्तुशास्त्र में घड़ी का महत्व⏰

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********************************************** ✳अक्सर हम घर में घड़ी लगाते समय दिशा का ध्यान नहीं देते है, जो जगह पसंद आती है बस वहीं लगा लेते हैं। जो वास्तु के अनुसार बिल्कुल गलत है। गलत दिशा में घड़ी लगाने से आपको शारीरिक,मानसिक अथवा आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है साथ ही गलत दिशा में लगाई हुई घडी आपकी प्रगति में भी बाधक बन सकती है। घर में सही दिशा में लगी घड़ी आपका भाग्य बदल सकती है। ********** ✳दुर्भाग्य का सूचक है बंद घड़ी वास्तु के अनुसार घर में रखी बंद घड़ी आपके जीवन में समस्याओं को पैदा कर सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटी-फूटी घड़ी तथा बंद घड़ी दुर्भाग्य का सूचक होती है। इसलिए घर में मौजूद बंद और टूटी-फूटी घड़ी को हटा दें। ********** ✳घर में दक्षिण दिशा में घड़ी लगी हुई है तो घर के मुखिया का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। इस दिशा में घड़ी लगी रहने से प्रगति के अवसर नहीं मिलेंगे, एवं आपकी प्रगति रूक जाएगी और आप सभी प्रकार से तरक्की नहीं कर पाएंगे इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है।  ********** ✳आप जब भी घर में दीवार पर घड़ी लगाए तो दिशाओं का ध्यान जरूर रखें। वास्त

शादी की दिशा..?

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🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊 (1) शुक्र से सप्तमेश की जो दिशा हो उसी दिशा में प्राय: वर का घर होता है। जैसे शुक्र से सप्तमेश कन्या राशि का भाव हो तो सप्तमेश बुध हुआ। बुध की दिशा उत्तर है। अतः उत्तर दिशा की ओर विवाह होने कि संभावना है, ऐसा कहना चाहिए। (2) यदि सप्तम स्थान में कोई ग्रह हो तो उस स्थान की राशि की जो दिशा हो अथवा सप्तम स्थान पर जिन ग्रहों की दृष्टि पड़ती हो, उन- उन ग्रहों की राशिस्थ दिशाओं में वर का घर समझना चाहिए।   For More Information...... Contact:-- 8788381356 Email Us :-- NarayanJyotishParamarsh090@gmail.com  Or Visit Here....✌    NarayanJyotishParamarsh