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Showing posts from December, 2018

कैसे करे आर्थिक तंगी को दूर ???

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संयोग से रावण संहिता पड़ी पढ़ते हुए कुछ प्रयोग अच्छे लगे आप सब के लिए लाया हूं वर्तमान समय में आप किसी भी कारण से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं तो आपके लिए एक अचूक उपाय है। रावण संहिता और अरुण संहिता में ज्योतिष और तंत्र से संबंधित सैंकड़ों उपाय बताए गए हैं। उक्त उपायों के बारे में कहा जाता है कि यह अचूक होते हैं। उक्त उपायों को ज्योतिष की महान और रहस्यमयी लाल किताब में भी संग्रहित किया गया है।... तो जानिए आर्थिक तंगी को दूर करने का अचूक उपाय। उपाय नंबर 1 : किसी भी शुक्रवार को सवा सौ ग्राम साबुत बासमती चावल और सवा सौ ग्राम ही मिश्री को एक सफेद रुमाल में बांध कर मां लक्ष्मी से अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करते हुए उनसे जाने अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे। इसके बाद उक्त रुमाल को ले जाकर किसी साफ, शुद्ध एवं बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। ध्यान रखें कि यह सामग्री किसी नाले या गंदी नहर में न बहाएं। नदी में ही बहाना उत्तम होगा। उक्त उपाय रावण संहिता का है। एक बार करें जरूरत होने पर 1 महीने के   अंतराल से दोहराते रहे उपाय नंबर 2  : क...

*जन्मकुंडली के अनुसार शिक्षा का चयन*

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आज कल हर किसी के दिल मे प्रश्न होता है कि बच्चे को किस क्षेत्र की पढ़ाई कराये।कई बार देखने को मिला है माता-पिता जबरदस्ती अपने बच्चे को अपने मन मुताबिक विषय का चुनाव करवा देते है और जिस विषयो को उन्होंने चुनवाया था,उस विषय का कारक ग्रह उस बच्चे की कुंडली मे कमजोर या खराब स्थिति में है तो फिर उस बच्चे को सफलता नही मिलती।इसलिए अगर माता-पिता सही समय पर अपने बच्चे की कुंडली को पहले ही किसी अच्छे ज्योतिषी को दिखा ले। *प्रमुख भाव* जन्मपत्रिका में पंचम भाव से शिक्षा तथा नवम भाव से उच्च शिक्षा तथा भाग्य के बारे में विचार किया जाता है।सबसे पहले जातक की कुंडली में पंचम भाव तथा उसका स्वामी कौन है तथा पंचम भाव पर किन-किन ग्रहों की दृष्टि है,ये ग्रह शुभ-अशुभ है अथवा मित्र-शत्रु,अधिमित्र हैं विचार करना चाहिए।दूसरी बात नवम भाव एवं उसका स्वामी,नवम भाव स्थित ग्रह,नवम भाव पर ग्रह दृष्टि आदि शुभाशुभ को जानना।  *जन्मकुंडली में जो सर्वाधिक प्रभावी ग्रह होता है सामान्यत: व्यक्ति उसी ग्रह से संबंधित कार्य-व्यवसाय करता है।*  यदि हमें कार्य व्यवसाय के बारे में जानकारी मिल जाती है तो शिक्षा भी उ...

ज्योतिष और वैवाहिक जीवन

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कुंडली में कई ऐसे दोष होते हैं जिनके कारण हम चाहते हुए भी अच्छा वैवाहिक जीवन नहीं जी पाते। इसका पहला उपाय तो यही है कि शादी कुंडली का मिलान करवाकर की जाए। शादी में केवल गुण मिलान पर निर्भर रहकर शादी न की जाए बल्कि जिससे भी शादी की जा रही है, उसकी कुंडली में उसके स्वास्थ्य, धन, चरित्र, गृहस्थ सुख, संतान सुख व आयु आदि को भी ध्यान में रखा जाए। यदि जातक में सभी गुण मिलते हैं तभी शादी के लिए आगे बढ़ना चाहिए। शादी को करवाने का कार्य गुरु ग्रह का होता है लेकिन  शादी को चलाने का कार्य शुक्र ग्रह के अधीन है। ऐसे में आपके वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की परेशानी आ रही है तो आपकी कुंडली में कहीं न कहीं शुक्र दूषित या कमजोर मिलेंगे। ऐसे में आपको मां लक्ष्मीजी की आराधना करनी चाहिए, क्रीम रंग के वस्त्र ज्यादा से ज्यादा धारण करने चाहिए, सेंट, परफ्यूम व डिओ आदि का प्रयोग करना चाहिए। वस्त्र का खासतौर पर आपको ख्याल रखना होगा। वस्त्र कभी भी फटे हुए और मैले-कुचेले न पहनें। गाय की सेवा करें और अपने परोसे गए भोजन में से एक हिस्सा निकालकर गाय को खिलाएं। यदि आपकी कुंडली allow कर रही है तो शुक्र का रत...

*खुद का घर कब और कैसा होगा-*

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*मंगल को भूमि का और चतुर्थ भाव का कारक माना जाता है,इसलिए अपना मकान बनाने के लिए मंगल की स्थिति कुंडली में शुभ तथा बली होनी चाहिए.स्वयं की भूमि अथवा मकान बनाने के लिए चतुर्थ भाव का बली होना आवश्यक होता है,तभी व्यक्ति घर बना पाता है.मंगल का संबंध जब जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव से बनता है तब व्यक्ति अपने जीवन में कभी ना कभी खुद की प्रॉपर्टी अवश्य बनाता है.मंगल यदि अकेला चतुर्थ भाव में स्थित हो तब अपनी प्रॉपर्टी होते हुए भी व्यक्ति को उससे कलह ही प्राप्त होते हैं अथवा प्रॉपर्टी को लेकर कोई ना कोई विवाद बना रहता है.मंगल को भूमि तो शनि को निर्माण माना गया है.* *इसलिए जब भी दशा/अन्तर्दशा में मंगल व शनि का संबंध चतुर्थ/चतुर्थेश से बनता है और कुंडली में मकान बनने के योग मौजूद होते हैं तब व्यक्ति अपना घर बनाता है.चतुर्थ भाव /चतुर्थेश पर शुभ ग्रहों का प्रभाव घर का सुख देता है.चतुर्थ भाव/चतुर्थेश पर पाप व अशुभ ग्रहो का प्रभाव घर के सुख में कमी देता है और व्यक्ति अपना घर नही बना पाता है.चतुर्थ भाव का संबंध एकादश से बनने पर व्यक्ति के एक से अधिक मकान हो सकते हैं.एकादशेश यदि चतुर्थ में स्थित हो ...

दाम्पत्य जीवन

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मनोकामना पूर्ति एंव दाम्पत्य जीवन की समस्या दूर करने का उपाय अगर आपका कोई कार्य रुका हुआ है या कोई अन्य समस्या है या दाम्पत्य जीवन मे कड़वाहट है तो ये उपाय आपके लिए प्रबल असरदारक सिद्ध बशर्ते आपमे श्रद्धा और विस्वास हो 9 गुलाब के फूल ले उन फूलो पर गुलाब का या चन्दन का इत्र छिड़क दें ये क्रिया आपको किसी भी दुर्गा माता के मंदिर में करनी फिर हर एक फूल पर अपनी मनोकामना बोलते हुए माता को चढ़ा दे वही बैठकर ओम दुम दुर्गायै नमः इस मंत्र का 108 बार जाप करे घर आकर एक हरि इलायची खा ले उक्त उपाय आपको शुक्रवार को प्रातः 5 से 7 के बीच करना है दिन में या शाम को नही करना है। कुछ समय मे आपकी मनोकामना पूर्ण होती आपको दिखेगी उक्त उपाय को आप लगातार 9 शुक्रवार को करे कितनी भी बड़ी समस्या क्यों न हो समाप्त हो जाएगी या हल निकल आएगा।। Contact no:+918788381356 www.narayanjyotishparamarsh.com

वरुण मुद्रा

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वरुण मुद्रा :: चेहरा खिलाये ,झुर्रियां ,चर्म रोग -रक्त विकार मिटाए ============================================= सबसे छोटी उंगली (कनिष्ठिका) को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाने पर वरुण मुद्रा बनती है| इस तत्व की कमी से जहां त्वच में रूखापन आता है, वहीं स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन बन जाता है| एक अजीब-सा तनाव हमेशा तन-मन में बना रहता है| परिणामस्वरूप अपने सामाजिक ढांचे को भी ऐसा व्यक्ति बिगाड़ लेता है| इसको विपरीत अर्थात् जल तत्व की वृद्धि होने की कल्पना की उड़ान ऊंचाइया छूने लगी हैं| कमी में पहली मुद्रा और अधिकता में दूसरी मुद्रा से लाभ होता है| कनिष्ठिका को पहले अंगूठे की जड़ में लगाकर फिर अंगूठे से कनिष्ठिका को दबाने से दूसरी मुद्रा बनती है| इसमें बीच की तीन उंगलियां सहज एवं सीधी रहती हैं| वरुण मुद्रा शरीरमें रूखापन नष्ट करके चिकनाई बढ़ाती है, चमड़ी चमकीली तथा मुलायम बनाती है । चर्म-रोग, रक्त-विकार एवं जल-तत्त्वकी कमीसे उत्पन्न व्याधियोंको दूर करती है । मुँहासोंको नष्ट करती और चेहरेको सुन्दर बनाती है ।  रूखापन नष्ट, चमड़ी चमकीली व मुलायम, चर्मरोग, रक्त विकार, मुहाँसे एवं जल की कमी वाले ...

किस्मत चमकाने के लिए

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अचानक धन लाभ भी देता है कपूर और भी है फायदे - कपूर के चमत्कारिक टोटके - वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में भी इसके महत्व और उपयोग के बारे में बताया गया है। कर्पूर के कई औषधि के रूप में भी कई फायदे हैं, जिन्हें हमने कई बार लिखा है, आने वाले दिनों में फिर लिखेंगे. कपूर को संस्कृत में कर्पूर, फारसी में काफ़ूर और अंग्रेजी में कैंफ़र कहते हैं। कपूर उत्तम वातहर, दीपक और पूतिहर होता है। त्वचा और फुफ्फुस के द्वारा उत्सर्जित होने के कारण यह स्वेदजनक और कफघ्न होता है। न्यूनाधिक मात्रा में इसकी क्रिया भिन्न-भिन्न होती है। साधारण औषधीय मात्रा में इससे प्रारंभ में सर्वाधिक उत्तेजन, विशेषत: हृदय, श्वसन तथा मस्तिष्क, में होता है। पीछे उसके अवसादन, वेदनास्थापन और संकोच-विकास-प्रतिबंधक गुण देखने में आते हैं। अधिक मात्रा में यह दाहजनक और मादक विष हो जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि कर्पूर या कपूर से आप कैसे संकट मुक्ति होकर मालामाल बन सकते हैं और कैसे आप अपने ग्रह और घर को भी बाधा मुक्त रख सकते हैं। कपूर आपके बिगड़े हुए कामों, पैसों की कमी और वास्तुदोष को भी ठीक करता है। आइये जानते हैं कैसे करें कपूर क...

🏵️।।नौकरी होगी या व्यापार।।🏵️

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  इन दोनों में से आजीविका का साधन क्या होगा? यह जानना हर कोई चाहता है। आप भी जानना चाहते हैं तो अपनी कुंडली का विश्लेषण करें। इसके लिए यहां अनमोल 17सूत्र दे रहे हैं, जिसके उपयोग से आप आसानी से जान सकेंगे कि आप नौकरी में सफल होंगे या व्‍यापार में। 1-यदि कुंडली का दूसरा भाव, दशम भाव एवं एकादश भाव का संबंध छठे भाव या इसके स्वामी से होगा तो समझ लें कि आप नौकरी करेंगे। 2-छठा भाव नौकरी का एवं सेवा का है। छठे भाव का कारक भाव शनि है। दशम भाव या दशमेश का संबंध छठे भाव से हो तो जातक नौकरी ही करता है। 3-यह जान लें कि दशम भाव बली हो तो नौकरी व सप्तम भाव बली हो तो व्यवसाय को चुनना चाहिए। 4-वृष, कन्या व मकर व्यापार की प्रमुख राशियां हैं।  चन्द्र, गुरु, बुध तथा राहु ग्रह व्यापार की सफलता में मुख्य भूमिका निभाते हैं। यह जान लें कि पंचम व पंचमेश का दशम भाव से संबंध हो तो शिक्षा जो प्राप्त हुई है वह व्यापार या व्यवसाय में काम आती है। 5-लग्नेश, सप्तमेश, लाभेश, गुरु, चन्द्रमा का बली होना या केन्द्र त्रिकोण में स्थित होना व्यवसाय में सफलता दिलाता है। 6-सर्वाष्टक वर्ग में दशम की अपे...

आपका भाग्य बदल जाएगा।

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काली मिर्च के ऐसे ही कुछ उपाय जिनसे आपका भाग्य बदल जाएगा। (1) ज्योतिष के अनुसार काली मिर्च को शनि ग्रह की कारक वस्तु माना गया है। शनि की साढ़े साती या ढैय्या की स्थिति में काले कपड़े में थोड़ी सी काली मिर्च और कुछ पैसे दान करना चाहिए। इससे शनि का प्रकोप तुरंत ही शांत होगा। (2) अगर आप किसी भी तरह से शनि दोष से पीड़ित है तो भोजन करते समय कभी भी उपर से नमक या मिर्च नहीं लें वरन काला नमक और काली मिर्च का ही प्रयोग करें। इससे शनि का बुरा असर खत्म होगा। (3) अगर आपका काम बार-बार बिगड़ रहा हो तो इसके लिए भी एक बहुत ही आसान सा टोटका है। घर से बाहर निकलते समय मेन गेट पर काली मिर्च रखें और जाते समय इस पर पैर रख कर निकलें, आपका हर कार्य पूरा होगा। परन्तु ध्यान रखें कि काली मिर्च पर पैर रखने के बाद वापिस घर में नहीं आना है अन्यथा इसका उल्टा असर भी हो सकता है। (4) अगर आप काफी सारा धन कमाना चाहते हैं परन्तु परिस्थितियों तथा भाग्य के चलते नहीं कमा पा रहे हैं तो यह उपाय आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है। आपको सिर्फ इतना सा करना है कि शुक्ल पक्ष (चांदनी पक्ष) में काली मिर्च के पांच दाने लेकर अपन...