Saturday, June 20, 2020

सूर्यग्रहण

 🌍🌞सूर्यग्रहण🌞🌍
आषाढ़ कृष्णपक्ष अमावस्या🌚 21-6-2020 दिन रविवार को  भारतवर्ष के अधिकतम  स्थानों पर सूर्यग्रहण लग रहा है जो कि स्पष्ट रूप से दिखाई भी देगा ।
भारतीय समयानुसार ग्रहण दिन के 10:16am में स्पर्श,  12:18pm में मध्य एवम 02:04pm पर मोक्ष करेगा.                              यानी कि पूरा ग्रहण काल दिन के 10:16am से लेकर दोपहर 02:04pm तक रहेगा
🙏धर्मशास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण में 12 घंटे पहले से ही सूतक लग जाता है.. सूतक और ग्रहण काल में भोजन नही करना चाहिए। पूजा-पाठ , मूर्ति पूजन इत्यादि भी नही करना चाहिए..
इसमें बालक , वृद्ध और रोगी भोजन कर सकते है
विभिन्न राशियों के फल:-
यह ग्रहण मृगशिरा एवं आद्रा नक्षत्र तथा मिथुन राशि मन्डल पर मान्य हैं। अतः इन राशि नक्षत्र वालों कों ग्रहण दर्शन नही करना चाहिए। अपितु अपने इष्टदेव कि आराधना,गुरुमंत्र जाप, एवं धार्मिक ग्रंथो का पठन पाठन करना चाहिए।
मेष, सिंह, कन्या, मकर ,राशि हेतु दर्शन करना शुभ ।
वृषभ,तुला,धनु,कुंभ राशि हेतु सामान्य मध्यम फल एवं मिथुन, कर्क,वृश्चिक,मीन राशि हेतु नेष्ट अशुभ दर्शन योग्य नही।

यह सूर्यग्रहण महिला, नवविवाहिता, कन्या, विवाह योग्य बालक-बालिका, उधोगपति,मन्त्री,धर्मनेता,पर भी प्रभार सूचक दर्शन योग्य नही।

🔴🟠⚫गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल मे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए ।।                         अपने शरीर को कंडा से या धागा से मापना चाहिए..एवम ग्रहणकाल मे सोना और भोजन करना निषेध है

हमारी हिन्दू संस्कृति में ग्रहण का विशेष महत्त्व होता है। खगोलशास्त्री के लिए ग्रहण एक खगोलीय घटना है वहीं ज्योतिष शास्त्र के लिए ग्रहण भविष्य संकेत का एक अहम पड़ाव होते हैं। ग्रहण मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं-

इनके भी विविध प्रकार होते हैं जैसे खग्रास या पूर्ण, खंडग्रास, मान्द्य, कंकणाकृति आदि। बहरहाल, ग्रहण को चाहें खगोलीय घटना कहें या ज्योतिष व धर्म से इसे सम्बन्धित करें एक बात निर्विवाद रूप से सत्य है कि ग्रहण हमारी पृथ्वी एवं इस पर रहने वाले समस्त जीवों को न्यूनाधिक रूप से प्रभावित अवश्य करते हैं।

खगोलशास्त्र की मानें तो ग्रहण के समय सूर्य व चन्द्र से कुछ ऐसी किरणों का उत्सर्जन होता है जो हमारे लिए हानिकारक होता है वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष राशि व जन्मकुण्डली वाले व्यक्ति इससे अधिक प्रभावित होते हैं। वर्ष 2020 में सूर्यग्रहण 21 जून को होगा।

21 जून को होने वाला यह ग्रहण खण्डग्रास/कंकणाकृति सूर्यग्रहण होगा। यह ग्रहण मृगशिरा व आर्द्रा नक्षत्र व मिथुन राशि पर मान्य होगा। यह ग्रहण सम्पूर्ण भारत में दृश्यमान होने के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका, रूस, अफ़्रीका, ईरान, ईराक, नेपाल व पाकिस्तान में भी दिखाई देगा। भारत में दृश्यमान होने के कारण इस सूर्यग्रहण के समस्त सूतक-यम-नियम भारतवासियों पर लागू होंगे।


उपर्युक्त शास्त्रीय निर्देशानुसार मध्यम व अशुभ फल वालों को ग्रहण का दर्शन करना नेष्टकारक व वर्जित रहेगा। ग्रहण काल में साधकों व समस्त श्रद्धालुओं के लिए दान, मंत्र जप,स्वाध्याय, ईष्टदेव का मानसिक आराधना करना श्रेयस्कर रहेगा।


 🙏🙏विशेष जानकारी के लिए सम्पर्क करें
     पं: अभिषेक शास्त्री 
    (वाराणसी)
     🙏बहुत बहुत धन्यवाद🙏
      🙏 जय श्री कृष्णा🙏

Tuesday, June 16, 2020

Successful businessman.

  
व्‍यापारी वर्ग अक्‍सर अपने मुनाफे और नुकसान को लेकर आशंकित रहता है। खासतौर पर जब बात किसी नए कारोबार को शुरू करने की हो तो यह टेंशन और भी बढ़ जाती है। 

लेकिन हस्‍तरेखा शास्‍त्र में इसका बड़ा सीधा सा उपाय बताया गया है। यानी कि बिना किसी ज्‍योतिषी के पास जाए आप खुद ही अपने हाथ की रेखाओं को देखकर अपने व्‍यापार का भविष्‍य जान सकते हैं। 

तो अगर आप भी किसी नए व्‍यवसाय को शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं तो एक बार अपनी हथेलियों पर इन रेखाओं को जरूर देख लें।

यदि आपकी ह‍थेली पर शनि ग्रह कमजोर हो तो यह शुभ संकेत नहीं होता है। साथ ही यदि शनि की ऊंगली भी ठीक न हो और शुक्र उठा हुआ तो यह व्‍यापार में घाटे का संकेतक होता है।

 हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक कभी भी यदि यह संकेत आपके हाथ में दिखें तो कोई भी नया व्‍यापार शुरू करने से बचना चाहिए। वहीं व्‍यवसाय कर रहे हों तो हानि के सापेक्ष पहले से इंतजाम कर लेने चाहिए।

हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक यदि हथेलियों में हृदयरेखा मस्तिष्‍क रेखा पर जा रही हो तो यह व्‍यवसाय के लिए अच्‍छा संकेत नहीं होता। 

यदि आपके साथ ऐसा हो तो नया कारोबार शुरू करने से बचें। इसका अर्थ होता है कि व्‍यवसाय में धीरे-धीरे आर्थिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ेगा। साथ ही ऐसी रेखा व्‍यवसाय की उन्‍नति में भी बाधक होती है। 

यही वजह है कि हृदयरेखा के मस्तिष्‍क रेखा पर जाने के संकेत को देखकर ही विद्वानजन कोई भी नया कारोबार शुरू करने की मनाही करते हैं।

यदि आप कोई नया व्‍यवसाय शुरू करने जा रहे हैं और आपकी हाथ की भाग्‍यरेखा और जीवनरेखा खंडित हो तो यह शुभ संकेत नहीं होता है। 

हस्‍तरेखा शास्‍त्र की मानें तो ऐसी रेखा होने पर कोई नया कारोबार शुरू करने से बचना चाहिए। ऐसी रेखाएं व्‍यापार में आए दिन परेशानियां खड़ी करती हैं। यानी कि गाहे-बगाहे आर्थिक हानि होती ही रहती है।

 साथ ही विरोधी पक्ष लगातार आपको परेशान करते रहते हैं। अगर आपके हाथ में भी ऐसी रेखा हो तो नया व्‍यवसाय शुरू करने से बचें।

यदि आपका हाथ पतला और सख्‍त हो तो भी व्‍यवसाय में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक यह अच्‍छा संकेत नहीं होता है।

 इसका अर्थ होता है कि व्‍यक्ति के व्‍यापार पर किसी विरोधी पक्ष की नजर है और वह लगातार नुकसान पहुंचाने के प्रयास करता ही रहेगा।

 इससे सामने वाले की कार्यक्षमता भी प्रभावित होगी और व्‍यापार में लगातार नुकसान होने की भी संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

हस्‍तरेखा शास्‍त्र के मुताबिक यदि किसी व्‍यक्ति का हाथ भारी हो और भाग्‍यरेखा लहरदार हो तो यह शुभ संकेत नहीं होता। इसका अर्थ होता है कि व्‍यक्ति विशेष के व्‍यापार पर किसी की कुदृष्टि है।

 इसके चलते आप अपना व्‍यवसाय बेहतर तरीके से नहीं चला पाएंगे। कहा जाता है कि ऐसी रेखा वाले व्‍यक्ति तमाम प्रयास करने के बावजूद भी व्‍यापार को आर्थिक गति नहीं दे पाएंगे।

अगर ऐसी रेखाएं हाथ में हो तो नया व्‍यवसाय शुरू करने से बचना चाहिए। साथ ही व्‍यवसाय कर रहे हों आर्थिक नुकसान से बचने के लिए रास्‍ते जरूर तलाश लेने चाहिए।

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Thursday, June 11, 2020

सफलता का मार्ग...!!!

सफलता का स्वाद कौन नहीं चखना चाहता? हर व्यक्ति सफल होने की कामना रखता है, इसके लिए प्रयास भी करता है परन्तु सभी यह नहीं जानते कि सफलता किस प्रकार हासिल की जा सकती। हम अपने आसपास प्रतिदिन ऐसे सैकड़ों उदाहरण देखते है

कि कुछ लोगों को सफलता हासिल होती है और कुछ के हाथ केवल नाकामी लगती है। ऐसे में कैसे जाना जाए कि अमुक व्यक्ति सफल होगा या असफल। सफलता और असफलता को समझने के कुछ मापदंड होने चाहिए।

 इस विषय में कोई दोराय नहीं है कि जीवन किसी का भी हो, सभी का संघर्षमय है और सफलता हासिल होने पर सभी गौरवान्वित महसूस करते है। इसके साथ ही यह भी सर्वविदित है कि सफलता का नाम ही संघर्ष है, और निरंतर संघर्ष करने से ही अंतत: जीवन में सफलता अर्जित की जा सकती है।

जीवन में सफलता के मंत्र को ज्योतिष के माध्यम से सहजता से जाना जा सकता है। सफलता के मंत्र को जानकर निश्चित रुप से हम अपनी सफलता की मंजिल पर आसानी से पहुंच सकते है। सफलता की यात्रा सहज हो जाती है यदि प्रारम्भ में ही हमें यह मालूम हो कि यह यात्रा कौन से मार्ग से होकर जाएगी।

 आज हम आपको यह बताने जा रहे है कि आपको सफल बनाने में आपकी सफलता का मार्ग तय करने में ज्योतिष विद्या एक उल्लेखनीय भूमिका निभा सकती है।

वह कैस आईये जानें-
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्मकुंड्ली के योगों और दशाओं का फलादेश करने से पूर्व लग्न भाव, पंचम भाव और नवम भाव अर्थात इस जन्म के साथ साथ पूर्व जन्म का भी अवलोकन कर लेना चाहिए।

इसके अतिरिक्त स्वयं की योग्यता को पहचान कर, अपनी प्रतिभा पर विश्वास करते हुए, अपना सौ प्रतिशत देने वाले व्यक्ति पर सारी दुनिया गर्व करती है। यह भी देखा गया है कि प्रतिवान लोगों का जीवन अधिक संघर्षमय रहता है।

अनुभव में यह पाया गया है कि जो लोग कम प्रतिभावान होते है, परन्तु सफलता का मार्ग जानते है और जीवन में उच्चस्तरीय सफलता हासिल करते है। इसके विपरीत जो लोग बहुत अधिक प्रतिभावान होते है, कुशल और योग्य होते हैं, ऐसे व्यक्तियों को जीवनभर प्रयासरत रहना पडता है।

इसका कारण उन्हें सफलता के मार्ग की जानकारी न होना होता है। जिस प्रकार हम जीवन में जब किसी यात्रा पर निकलते है तो निकलने से पूर्व ही यात्रा का मार्ग, ठहराव की जगह, रुकने के स्टेशन और यात्रा के आने-जाने का एक निर्धारित कार्यक्रम बनाते है।

कुछ इसी प्रकार से जब हम सफलता चाहते है तो हमें यह मालूम होना चाहिए कि यह किस प्रकार संभव है। जिस रास्ते की कोई मंजिल ना हो, उस रास्ते पर चलने से कोई लाभ नहीं, इसी प्रकार जिस विषय का कोई लक्ष्य ना हो तो उस विषय पर समय और मेहनत लगाना, समय व्यर्थ करना सही नहीं है।

जीवन में सफलता कैसे प्राप्त करें
 – सफलता के लिए ज्योतिष कर सकता है आपकी मदद। बहुत से ज्योतिषीय कारण है जिनकी वजह से एक व्यक्ति लगातार संघर्षों के बाद भी असफल हो जाता है। ऐसा क्यों होता है? इस विषय के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की गणना नीचे की जा रही हैं-

जन्मपत्री में यदि लग्न कमजोर हो तो व्यक्ति चाहकर भी स्वयं को अनुशासित नहीं बना पाएगा। लग्न भाव कमजोर है या नहीं इसके लिए लग्न भाव में स्थित राशि, ग्रह स्थिति और लग्न भाव पर पड़ने वाले अन्य ग्रहों के प्रभाव से जाना जा सकता है।

लग्न भाव में स्थित राशि स्थिर प्रकृति की हो, एक मजबूत ग्रह सूर्य या गुरु लग्न भाव में हों, या लग्नेश स्वयं लग्न भाव में हो और कोई भी अशुभ ग्रह लग्न को ना देखता हो, तथा शुभ ग्रहों की दॄष्टि लग्न भाव पर होना, लग्न भाव को मजबूत बनाती है।

एक अनुशासनहीन व्यक्ति ही भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आज के समय का मूल्य समझ सकता है। एक दुर्बल लग्न आलस्य को जन्म देता है, व्यक्ति की आंतरिक शक्ति-विवेक को कम करता है, व्यक्ति की सोच में नकारात्मकता आती है और यही सोच उसके हर कार्य को कठिन और मुश्किल बनाती है।

एक जन्मजात प्रतिभावान और बुद्धिमान व्यक्ति भी जीवन में असफल हो सकता है यदि उसके विचारों में स्थिरता की कमी है, यदि उसके जीवन लक्ष्य स्थिर नहीं है। जीवन में उसे क्या करना है, यदि वह यह सुनिश्चित करने के बाद अपने लक्ष्यों को बदलता रहता है तो ऐसे में उस व्यक्ति का सफल होना नामुमकिन हो सकता है।

वैचारिक दॄढ़ता के लिए भी एक मजबूत लग्न के साथ साथ तीसरा भाव जिसे पराक्रम भाव भी कहा जाता है। दृढ़ता से ही सफलता के नए मार्गों को खोज सकते है।

एक आधी-अधूरी योजना सकारात्मक परिणाम दे सकती है, परन्तु बिना योजना के सफलता के लिए आगे बढ़ना, ठिक वैसे ही है जैसे अंधकार में सूई में धागा डालना अर्थात व्यर्थ है।

कुंडली का छठा भाव आपकी जीवन योजनाओं की जानकारी देता है। इसलिए छ्ठे भाव से इसका निर्णय किया जाता है। छठे भाव में बुध या राहु योजना निर्माण का गुण देता है।

असफलता का डर हमें अपंग कर देता है। कुण्डलीय दृष्टिकोण के अनुसार यह कमी व्यक्ति को सफलता प्राप्ति में असमर्थ तो बनाती ही है साथ ही व्यक्ति सफलता हेतु कदम ही नहीं उठा पाता है। लग्न भाव और सूर्य कमजोर हो, और छ्ठा भाव मजबूत हो तो व्यक्ति में यह दुर्गुण देखा जा सकता है।

शीघ्र सफल होने की चाह में गलतियां करते चले जाने की संभावनाएं बढ़ जाती है। चर लग्न इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यदि लग्न भाव भी कमजोर हो तो स्थिति अधिक गंभीर हो जाती है।

चंद्र का दुस्थानों में स्थित होना भी इसका एक कारण होता है। एकादश भाव में चंद्र व्यक्ति को उच्चाभिलाषी बनाता है। एकादश भाव इच्छापूर्ति का भाव है और यहां चंद्र शीघ्र इच्छाओं की पूर्ति चाहता है।

संघर्ष के बिना सफलता हासिल करना संभव नहीं है। जहां संघर्ष है, वहां गलतियां और समस्याएं भी है। गलतियों और समस्याओं का दोष दूसरों को देने से बचना चाहिए।

इसकी जगह अपनी गलतियों व दोषों का विश्लेषण करना चाहिए। एकादश भाव व भावेश का कमजोर होना दूसरों को दोष देने का स्वभाव देखता है। एकादश भाव असंतुलित स्वभाव भी देता है।

यदि लग्न भाव और लग्नेश दोनों कमजोर हो, राहु या पीडित बुध के प्रभाव में हो तो व्यक्ति बहुत अधिक बहस करने का स्वभाव रखता है। अपने को ही अधिक समझदार मामने की सोच में वह सही सुझावों पर ध्यान देने की जगह, अनदेखा करता है।

कुछ लोग कार्य शुरु करते है परन्तु उसमें अपना ध्यान लम्बे समय तक बनाए नहीं रख पाते है। इसे एकाग्रत की कमी कहा जाता है। मेष लग्न के जातकों में यह कमी बहुधा पाई जाती है। इस लग्न के व्यक्ति कठिन कार्य हाथ में लेते है, प्रारम्भ में जोश और उत्साह अधिक होने से अच्छी सफलता भी हासिल होती है

 परन्तु एकाग्रता की कमी होने से शीघ्र ही जोश और उत्साह खो देते है ऐसे में असफलता हासिल करना कठिन हो जाता है और कई बार कार्य मध्य में ही छोड़ देते है। इसके अतिरिक्त शुक्र या कमजोर चंद्र का लग्न पर प्रभाव व्यक्ति को दिन में स्वप्न देखने अर्थात सामर्थ्य से बड़े उद्देश्य निर्धारित करने का गुण देता है।

दूसरों के साथ मिलकर कार्य ना करना, लोगों से मिलने जुलने का गुण ना होना या सहायता न करने का गुण व्यक्ति को अलग-थलग डाल देता है। किसी के साथ भी ना जुड़ने की आदत का विचार एकादश भाव और इसके स्वामी से किया जाता है।

एकादश भाव कमजोर हो, इसका स्वामी अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो व्यक्ति अलग-थलग रहना पसंद करता है, यह स्वभाव सफलता में देरी का कारण बनता है।

अपने सामर्थ्य से बड़े कार्यों में यदि असफलता हासिल हो भी जाए तो उसे विनम्र होकर स्वीकार करना चाहिए। कुछ व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाते हैं। जीवन में असफलता भी बहुत कुछ सीखाती है।

 कई बार अपनी योग्यता, शक्ति और सामार्थ्य का आंकलन हम स्वयं नहीं कर पाते हैं, प्राप्त परिणाम हमें इसका आंकलन कराते है। लग्न भाव कमजोर हो तो व्यक्ति में विनम्रता की कमी रहती है।

जन्मपत्री में स्थित ग्रहों की कमियों को ज्योतिषीय उपायों के द्वारा सुधार किया जा सकता है। लग्न भाव को बल देने के लिए लग्नेश का रत्न धारण करना, लग्न भाव को तो बली करता ही है साथ ही लग्नेश भी मजबूत होता है। इसी प्रकार अन्य भावों को भी उपायों से बली कर सफलता हासिल की जा सकती है।

और अधिक जानकारी ग्रह नक्षत्र से संबंधित जानकारी एवं कुण्डली विश्लेषण वास्तु हस्तरेखा अंक ज्योतिष रत्न रहस्य भविष्यफल के लिए संपर्क करें    या यंत्र मंत्र तंत्र और उपाय विधि के लिए संपर्क करें

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                        II कुण्डली विशेषज्ञ II
                            II शास्त्री जी II