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Showing posts from February, 2020

॥गायत्री मन्त्र के कुछ प्रयोग:॥

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✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️ 👉शारीरिक तथा मानसिक रोगों और पाप ग्रहों की शान्ति के लिए दूध में भीगी हुई शमी,पीपल या वट वृक्ष की समिधाओं से 1000 गायत्री मन्त्रों द्वारा होम करें | हवन के बाद जल से सूर्य को तर्पण दें | 👉शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे 100 बार गायत्री  मन्त्र का जाप करने से रोग तथा अभिचार से मुक्ति मिलती है | 👉गिलोय के टुकड़ों को क्षीर में भिगो कर गायत्री मन्त्र से अग्नि में आहुति देना मृत्युंजय होम कहा गया है जो सम्पूर्ण व्याधियों को नष्ट करने वाला है | 👉गायत्री मन्त्र द्वारा, ज्वर में दूध में भीगे आम के पत्तों से ,मिर्गी में अपामार्ग के बीजों से ,प्रमेह में गूलर की समिधा तथा मधु या गन्ने के रस से हवन करना रोग शान्ति करता है | 👉गायत्री का जाप करते हुए कुशा द्वारा रोगी का स्पर्श करने से रोगी को आराम मिलता है | 👉लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गायत्री मन्त्र द्वारा लाल पुष्पों अथवा बिल्व पत्र या पुष्पों से हवन करना चाहिए | 👉पुत्र लाभ के लिए क्षीर द्वारा  गायत्री मन्त्र से हवन करें तथा भगवान् सूर्य को क्षीर का भोग लगा कर ऋतु स्नाता ब्राह्मणी को भोजन

Yoga of business....???

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रोजगार एवं व्यवसाय का योग आपकी कुण्डली मे...... प्रत्येक व्यक्ति को अपना जीवन निर्वाह करने के लिए धन की आवश्यकता होती है। 2, 6, 10 अर्थ भाव होने से व्यक्ति की धन संबंधी आवश्यकता को पूरा करते हैं।  दूसरा भाव हमारे कुटुंब व संचित धन को दर्शाता है। छठा भाव हमारी नौकरी व ऋण को दर्शाता है। दसवां भाव हमारे व्यवसाय को दर्शाता है। किसी व्यक्ति का दूसरा भाव बलवान हो तो उसकी धन संबंधी आवश्यकताएं कुटुंब से मिली हुई संपत्ति व धन से पूरी होती रहती है ।  किसी व्यक्ति का छठा भाव बलवान हो तो व्यक्ति नौकरी द्वारा सारा जीवन गुजार देता है। कुछ लोग जीवन भर उधार ही मांगते रह जाते हैं और उनके कार्य चलते रहते हैं। दशम भाव बलवान होने से व्यक्ति अपने स्वयं के कर्म से धन कमाता है। व्यक्ति किस तरह के व्यवसाय या नौकरी में अधिक सफलता प्राप्त करेगा इसका निर्धारण करने के लिए 1 , 2 , 7 ,10 , 11 , भाव में विराजमान ग्रह या इन भावो पर दृष्टि डालने वाले ग्रहों से किया जाता है । जिसकी कुंडली में प्रथम , द्वितीय , सप्तम , नवम , दशम एवं एकादश भाव के स्वामी एवं बुध प्रबल रहतें हैं , ऐसे लोग समान्यतः स्व

Good astrology yoga/शुभ ज्योतिष योग???

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ज्योतिष के 6 प्रमुख  शुभ और प्रभावशाली योग जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे ... 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 ज्योतिष शास्त्र में पंचांग से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण के आधार पर मुहूर्तों का निर्धारण किया जाता है। जिन मुहूर्तों में शुभ कार्य किए जाते हैं उन्हें शुभ मुहूर्त कहते हैं। इनमें सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, गुरु पुष्य योग, रवि पुष्य योग, पुष्कर योग, अमृत सिद्धि योग, राज योग, द्विपुष्कर एवं त्रिपुष्कर यह कुछ शुभ योगों के नाम हैं। आइए जानते हैं 6 प्रमुख योगों के बारे में... अमृत सिद्धि योग :- अमृत सिद्धि योग अपने नामानुसार बहुत ही शुभ योग है। इस योग में सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। यह योग वार और नक्षत्र के तालमेल से बनता है। इस योग के बीच अगर तिथियों का अशुभ मेल हो जाता है तो अमृत योग नष्ट होकर विष योग में परिवर्तित हो जाता है।  सोमवार के दिन हस्त नक्षत्र होने पर जहां शुभ योग से शुभ मुहूर्त बनता है लेकिन इस दिन षष्ठी तिथि भी हो तो विष योग बनता है। सिद्धि योग :- वार, नक्षत्र और तिथि के बीच आपसी तालमेल होने पर सिद्धि योग का निर्म