Friday, August 28, 2020

अपने चेहरे के आकार से जानिए कितने भाग्‍यशाली हैं आप ...

↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭

तो कुल मिलाकर चेहरा इंसान के मन का ही नहीं, बल्कि उसकी किस्मत का भी आईना होता है।

चेहरे से आप किसी भी व्यक्ति की किस्मत के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। चेहरे के आकार बताते है – 

आपका चेहरा अंडाकार है, तिकोना है, चौकोर है या फिर गोल है इससे आप किस क्षेत्र में तरक्की करेंगे, आपके प्रेम संबध कैसे रहेंगे और आप किन लोगों की संगत में रहेंगे, ये सब आप जान सकते हैं। 

आपका चेहरा आपकी किस्मत से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें भी बातें सकता है जो शायद कोई और ना बता पाएं। समुद्रशास्त्र में ऐसी बहुत ही बातों का ज़िक्र है।


अंडाकार चेहरे वाले लोगों का स्वभाव बहुत ही आकर्षक होता है। ये लोग फिल्म या मीडिया इंडस्ट्री में काफी नाम कमाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि ये किसी भी सिचुएशन में खुद को बड़ी ही आसानी से ढ़ाल लेते हैं। इन्हे गुस्सा बहुत जल्दी आता है और ये बहुत ज़िद्दी होते हैं।

लंबे पतले चेहरे वाले लोग फिजिकली काफी फिट होते हैं। ये लोग हर परिस्थिति में खुद को बेहतर साबित करते हैं। लेकिन वैवाहिक जीवन में इन्हे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अपने अडिग स्वभाव के कारण कई बार ये आलोचनाओं का शिकार होते हैं।

ऐसे लोगों के बारे में सबसे खास बात ये होती है कि ये हर काम को अपने निराले अंदाज़ से करते हैं। इसी वजह से इनका नाम सबसे जुदा होता है। 

आर्ट की फील्ड में ये बहुत सक्सेस हासिल करते हैं। ये बहुत क्रिएटिव होते हैं और इन्हें अपने किसी भी काम में किसी और का इंटरफेयर पसंद नहीं होता है।

चौकोर चेहरे वाले लोग इंटेलिजेंट होते हैं और साथ ही इन्हें दूसरों से काम निकलवाना बड़ी ही अच्छी तरह से आता है। ऐसी महिलाएं हर काम अपनी तरह से करवाना जानती हैं।

 इनमें लीडरशिप क्वालिटी होती है। ऐसे लोगों का किस्मत ज़रूर साथ देती है लेकिन अगर ये किस्मत के भरोसे ही बैठ जाएं तो फिर इन्हे कुछ नहीं मिलता है।

गोल चेहरे वाले लोग किस्मत के मामले में सबसे बेस्ट होते हैं। करियर में सक्सेस हो या फिर लाइफ पार्टनर, इन्हें सब बेस्ट ही मिलता है। ये लोग बहुत इमोशनल भी होते हैं और अपने लव अफेयर्स में हमेशा सफल होते हैं।

उम्मीद है कि आपको ये खास जानकारी पसंद आई होगी और अब आप अपना और अपने दोस्तों का चेहरा देखकर समझ जाएंगे कि उनकी किस्मत कैसी है। 

अगर आपको पता रहे कि आपका या सामने वाला का स्‍वभाव कैसा तो उसे समझने और दूसरों के साथ अपने रिश्‍तों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। सामुद्रिक शास्‍त्र की इस जानकारी की मदद से आप किसी के भी स्‍वभाव के बारे में जान सकते हैं।

और भी बहुत कुछ कहता है आपकी फेस रीडिंग आपके शरीर आपके स्वभाव आत्मविश्वास आपके शरीर के एक-एक अंग बहुत कुछ बोलता है 

आप भी अपने जीवन से जुड़ा हुआ रहस्य के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं या किसी भी व्यक्ति के चेहरे के अनुसार उसके स्वभाव विचार आदि क्या भविष्य की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप संपर्क करें 



Sunday, August 23, 2020

श्री गणेश की जी काल्पनिक कुंडली

सर्वप्रथम पूजनीय व हर कार्य में प्रथम माने जाने वाले भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को मेष लग्न में हुआ। यह कुंडली कल्पना से बनाई गई है, जो गणेशजी के व्यक्तित्व पर आधारित है।

लग्न को सिर माना गया है। लग्न में केतु है, शनि की चतुर्थ भाव से लग्न पर नीच की दृष्टि आ रही है। यानी शनि की कुदृष्टि पड़ने से उनका सिर धड़ से अलग हुआ। केतु पृथकता का कारक भी है।

पौराणिक कथा के अनुसार माता का आदेश था कि किसी को भी स्नान करते वक्त नहीं आने दिया जाए। कर्क राशि, माता भाव में विराजमान है वहीं शनि भी है।


यह उन्हीं के पिता भगवान शिव ने किया। ऐसा कुंडली के अनुसार देखें तो मंगल की दृष्टि लग्न व केतु पर पड़ रही है। शनि, मंगल का दृष्टि संबंध भी बन रहा है। चतुर्थ यानी माता व दशम यानी पिता भाव में स्थित ग्रहों के कारण यह संयोग बना।

श्री गणेश माता-पिता के भक्त हैं। इसकी वजह सूर्य पर गुरु की कृपादृष्टि होना मान सकते हैं। उनका सिर हाथी का लगना भी मंगल व गुरु की ही कृपा रही। गुरु की पंचम व मंगल की चतुर्थ दृष्टि लग्न पर आने से ऐसा संपन्न हुआ।

सप्तम में राहु व उस भाव का स्वामी उच्च का होकर द्वादश में है अत: ऋद्धि व सिद्धि दो पत्नियों के स्वामी बने। उच्च का बुध, पराक्रमेश भी है, यही वजह है कि श्री गणेश का कोई शत्रु नहीं है।

  पंचम भाव में सूर्य व नवम भाव में गुरु व मंगल की अष्टम दृष्टि पड़ने से लाभ व शुभ इनके पुत्र हुए।

 और भी बहुत कुछ है आप भी अपने जीवन से जुड़ा हुआ किसी भी रहस्य की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं या खास विधि प्रयोग करके जीवन में अनेकों लाभ लेना चाहते हैं तो संपर्क करें

और आप अपनी जन्म कुंडली और हस्तरेखा दिखा करके अपने जीवन से जुड़ा हुआ हर प्रकार से जानकारी प्राप्त करें और जीवन में अनेकों लाभ लें ..
⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝⇜⇝

Friday, August 21, 2020

श्री गणेश महोत्सव

〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
सभी सनातन धर्मावलंबी प्रति वर्ष गणपति की स्थापना तो करते है लेकिन हममे से बहुत ही कम लोग जानते है कि आखिर हम गणपति क्यों बिठाते हैं ? आइये जानते है।

हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है।
लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था।
अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपति जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की।

गणपती जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपती जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा। महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला। अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ।

वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। तभी से गणपती बैठाने की प्रथा चल पड़ी। इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं।

गणेश चतुर्थी को कुछ स्थानों पर डंडा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि गुरु शिष्य परंपरा के तहत इसी दिन से विद्याध्ययन का शुभारंभ होता था। इस दिन बच्चे डण्डे बजाकर खेलते भी हैं। गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि का दाता भी माना जाता है। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में इसे डण्डा चौथ भी कहते हैं।

अलग अलग कामनाओ की पूर्ति के लिए अलग अलग द्रव्यों से बने हुए गणपति की स्थापना की जाती हैं।

(1) श्री गणेश👉 मिट्टी के पार्थिव श्री गणेश बनाकर पूजन करने से सर्व कार्य सिद्धि होती हे!                       

(2) हेरम्ब👉 गुड़ के गणेश जी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती हे।
                                       
(3) वाक्पति👉 भोजपत्र पर केसर से पर श्री गणेश प्रतिमा चित्र बनाकर।  पूजन करने से विद्या प्राप्ति होती हे।

 (4) उच्चिष्ठ गणेश👉 लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री।  सुख और स्त्री को पतिसुख प्राप्त होता हे घर में ग्रह क्लेश निवारण होता हे।

(5) कलहप्रिय👉 नमक की डली या। नमक  के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से शत्रुओ में क्षोभ उतपन्न होता हे वह आपस ने ही झगड़ने लगते हे।

(6) गोबरगणेश👉 गोबर के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से पशुधन में व्रद्धि होती हे और पशुओ की बीमारिया नष्ट होती है (गोबर केवल गौ माता का ही हो)।
                         
(7) श्वेतार्क श्री गणेश👉 सफेद आक मन्दार की जड़ के श्री गणेश जी बनाकर पूजन करने से भूमि लाभ भवन लाभ होता हे।
                     
(8) शत्रुंजय👉 कडूए नीम की की लकड़ी से गणेश जी बनाकर पूजन करने से शत्रुनाश होता हे और युद्ध में विजय होती हे।
                         
(9) हरिद्रा गणेश👉 हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली हर बाधा नष्ठ होती हे और स्तम्भन होता हे।

(10) सन्तान गणेश👉 मक्खन के श्री गणेश जी बनाकर पूजन से सन्तान प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं।

(11) धान्यगणेश👉 सप्तधान्य को पीसकर उनके श्रीगणेश जी बनाकर आराधना करने से धान्य व्रद्धि होती हे अन्नपूर्णा माँ प्रसन्न होती हैं।   

(12) महागणेश👉 लाल चन्दन की लकड़ी से दशभुजा वाले श्री गणेश जी प्रतिमा निर्माण कर के पूजन से राज राजेश्वरी श्री आद्याकालीका की शरणागति प्राप्त होती हैं।

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ 21 अगस्त को 23:01 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त 22 अगस्त को 19:55 बजे

गणपति स्वयं ही मुहूर्त है। सभी प्रकार के विघ्नहर्ता है इसलिए गणेशोत्सव गणपति स्थापन के दिन दिनभर कभी भी स्थापन कर सकते है। सकाम भाव से पूजा के लिए नियम की आवश्यकता पड़ती है इसमें प्रथम नियम मुहूर्त अनुसार कार्य करना है।

मुहूर्त अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा दोपहर के समय करना अधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। मध्याह्न यानी दिन का दूसरा प्रहर जो कि सूर्योदय के लगभग 3 घंटे बाद शुरू होता है और लगभग 12;30      =14:00 गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त के संयोग पर गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना करना अत्यंतशुभ माना जाता है। 15:41 =17:16  भी अच्छा मुहूर्त है

चन्द्रमा को नहीं देखने का समय 09:01 से 21:20 तक

गणेश जी की पूजा करने के लिए चौकी या पाटा, जल कलश, लाल कपड़ा, पंचामृत, रोली, मोली, लाल चन्दन, जनेऊ गंगाजल, सिन्दूर चांदी का वर्क लाल फूल या माला इत्र मोदक या लडडू धानी सुपारी लौंग, इलायची नारियल फल दूर्वा, दूब पंचमेवा घी का दीपक धूप, अगरबत्ती और कपूर की आवस्यकता होती है।

सकाम पूजा के लिये स्थापना से पहले संकल्प भी अत्यंत जरूरी है। यहाँ हम संक्षिप्त विधि बता रहे है गणेश पूजन की विस्तृत विधि हमारी अगली पोस्ट ने देख सकते है।

हाथ में पान के पत्ते पर पुष्प, चावल और सिक्का रखकर सभी भगवान को याद करें। अपना नाम, पिता का नाम, पता और गोत्र आदि बोलकर गणपति भगवान को घर पर पधारने का निवेदन करें और उनका सेवाभाव से स्वागत सत्कार करने का संकल्प लें।

भगवान गणेश की पूजा करने लिए सबसे पहले सुबह नहा धोकर शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। क्योकि गणेश जी को लाल रंग प्रिय है। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में होना चाहिए। सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं। गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं। ऋद्धि-सिद्धि के रूप में दो सुपारी रखें। गणेश जी को सिन्दूर लगाकर चांदी का वर्क लगाएं। लाल चन्दन का टीका लगाएं। अक्षत (चावल) लगाएं। मौली और जनेऊ अर्पित करें। लाल रंग के पुष्प या माला आदि अर्पित करें। इत्र अर्पित करें। दूर्वा अर्पित करें। नारियल चढ़ाएं। पंचमेवा चढ़ाएं। फल अर्पित करें। मोदक और लडडू आदि का भोग लगाएं। लौंग इलायची अर्पित करें। दीपक, अगरबत्ती, धूप आदि जलाएं इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं। गणेश जी की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन गणपति अथर्वशीर्ष व संकट नाशन गणेश आदि स्तोत्रों का पाठ करे।


जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।। जय गणेश जय गणेश…
एक दन्त दयावंत चार भुजाधारी। माथे सिन्दूर सोहे मूष की सवारी।। जय गणेश जय गणेश…
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया।। जय गणेश जय गणेश…
हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लडूवन का भोग लगे संत करे सेवा।। जय गणेश जय गणेश…
दीनन की लाज राखी शम्भु सुतवारी। कामना को पूरा करो जग बलिहारी।। जय गणेश जय गणेश…

22 तारीख को यानी गणेश चतुर्थी के दिन भूलकर भी चंद्र दर्शन न करें वर्ना आपके उपर बड़ा कलंक लग सकता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा का दृष्टांत है।

एक दिन गणपति चूहे की सवारी करते हुए गिर पड़े तो चंद्र ने उन्हें देख लिया और हंसने लगे। चंद्रमा को हंसी उड़ाते देख गणपति को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने चंद्र को श्राप दिया कि अब से तुम्हें कोई देखना पसंद नहीं करेगा। जो तुम्हे देखेगा वह कलंकित हो जाएगा। इस श्राप से चंद्र बहुुत दुखी हो गए। तब सभी देवताओं ने गणपति की साथ मिलकर पूजा अर्चना कर उनका आवाह्न किया तो गणपति ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। तब देवताओं ने विनती की कि आप गणेश को श्राप मुक्त कर दो। तब गणपति ने कहा कि मैं अपना श्राप तो वापस नहीं ले सकता लेकिन इसमें कुछ बदलाव जरूर कर सकता हूं। भगवान गणेश ने कहा कि चंद्र का ये श्राप सिर्फ एक ही दिन मान्य रहेगा। इसलिए चतुर्थी के दिन यदि अनजाने में चंद्र के दर्शन हो भी जाएं तो इससे बचने के लिए छोटा सा कंकर या पत्थर का टुकड़ा लेकर किसी की छत पर फेंके। ऐसा करने से चंद्र दर्शन से लगने वाले कलंक से बचाव हो सकता है। इसलिए इस चतुर्थी को पत्थर चौथ भी कहते है।

भाद्रपद (भादव ) मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी के चन्द्रमा के दर्शन हो जाने से कलंक लगता है। अर्थात् अपकीर्ति होती है। भगवान् श्रीकृष्ण को सत्राजित् ने स्यमन्तक मणि की चोरी लगायी थी।

स्वयं रुक्मिणीपति ने इसे “मिथ्याभिशाप”-भागवत-१०/५६/३१, कहकर मिथ्या कलंक का ही संकेत दिया है। और देवर्षि नारद भी कहते हैं कि –

आपने भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि के चन्द्रमा का दर्शन किया था जिसके फलस्वरूप आपको व्यर्थ ही कलंक लगा –


तात्पर्य यह कि भादंव मास की शुक्लचतुर्थी के चन्द्रदर्शन से लगे कलंक का सत्यता से सम्बन्ध हो ही –ऐसा कोई नियम नहीं । किन्तु इसका दर्शन त्याज्य है । तभी तो पूज्यपाद गोस्वामी जी लिखते हैं —

“तजउ चउथि के चंद नाई”-मानस. सुन्दरकाण्ड,३८/६,

स्कन्दमहापुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि भादव के शुक्लपक्ष के चन्द्र का दर्शन मैंने गोखुर के जल में किया जिसका परिणाम मुझे मणि की चोरी का कलंक लगा।


1👉 यदि उसके पहले द्वितीया का चंद्र्मा आपने देख लिया है तो चतुर्थी का चन्द्र आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता।

2👉 या भागवत की स्यमन्तक मणि की कथा सुन लीजिए ।

3👉 अथवा निम्नलिखित मन्त्र का 21 बार जप करलें –

सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।

4👉 यदि आप इन उपायों में कोई भी नहीं कर सकते हैं तो एक सरल उपाय बता रहा हूँ उसे सब लोग कर सकते हैं । एक लड्डू किसी भी पड़ोसी के घर पर फेंक दे ।

चंद्र दर्शन से बचने का समय- 09:01 से 21:20 तक (22 अगस्त)

गणेशचतुर्थी के दिन सभी लोग को अपने सामर्थ्य एवं श्रद्धा से गणेश जी की पूजा अर्चना करते है। फिर भी राशि स्वामी के अनुसार यदि विशेष पूजन किया जाए तो विशेष लाभ भी प्राप्त होगा।

👉 यदि आपकी राशि मेष एवं बृश्चिक हो तो आप अपने राशि स्वामी का ध्यान करते हुए लड्डु का विशेष भोग लगावें आपके सामथ्र्य का विकास हो सकता है।

👉 आपकी राशि बृष एवं तुला है तो आप भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग विशेष रूप से लगावें आपको ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है।

👉 मिथुन एवं कन्या राशि वालो को गणेश जी को पान अवश्य अर्पित करना चाहिए इससे आपको विद्या एवं बुद्धि की प्राप्ति होगी।

👉 धनु एवं मीन राशि वालों को फल का भोग अवश्य लगाना चाहिए ताकि आपको जीवन में सुख, सुविधा एवं आनन्द की प्राप्ति हो सके।

👉 यदि आपकी राशि मकर एवं कुंभ है तो आप सुखे मेवे का भोग लगाये। जिससे आप अपने कर्म के क्षेत्र में तरक्की कर सकें।

👉 सिंह राशि वालों को केले का विशेष भोग लगाना चाहिए जिससे जीवन में तीव्र गति से आगे बढ़ सकें।

👉यदि आपकी राशि कर्क है तो आप
खील एवं धान के लावा और बताशे का भोग लगाए जिससे आपका जीवन सुख-शांति से भरपूर हो

〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
1- गणेश चतुर्थी व्रत- 22 अगस्त शनिवार

2- ऋषि पंचमी 23 अगस्त - रविवार

3- मोरछठ-चम्पा सूर्य, बलदेव षष्ठी 24 अगस्त - सोमवार

4- संतान सप्तमी 24 अगस्त - सोमवार

5- राधाष्टमी -25 अगस्त - मंगलवार

6-  श्रीमहालक्ष्मी व्रत आरम्भ, ऋषि दधीचि जन्म 26 अगस्त - बुधवार

7- अदुख नवमी (उदासीन)  27 अगस्त - गुरुवार

8-  तेजा दशमी, रामदेव जयंती 28 अगस्त - शुक्रवार

9- पदमा डोल ग्यारस 29 अगस्त - शनिवार
वामन अवतार

10- भुवनेश्वरी जयंती, प्रदोष व्रत 30 अगस्त - रविवार

1 सितम्बर - अनन्त चतुर्दशी, गणपति विसर्जन सोमवार


Tuesday, August 18, 2020

हथेली में प्लस का निशान ?


हस्तेरखा विज्ञान में कई ऐसे शुभ चिन्हों के बारे में बताया गया है। ऐसे ही शुभ चिन्हों में से एक है प्लस यानी जोड़ का निशान।

जोड़ का निशान हथेली में तर्जनी उंगली के नीचे यानी गुरु पर्वत पर हो तो बहुत ही शुभ फलदायी होता है। हस्तरेखा विज्ञान के जानकारों का कहना है कि,

हथेली में गुरु पर्वत उभरा हुआ हो और किसी ओर झुका हुआ नहीं हो तो व्यक्ति महत्वाकांक्षी और ज्ञानी होता है।

माय ज्योतिष के अनुभवी ज्योतिषाचार्यों द्वारा पाएं जीवन से जुड़ी विभिन्न परेशानियों का सटीक निवारण

इस पर जोड़ का निशान भी नजर आए तो इसे सोने पर सुहागा समझना चाहिए। जिनकी हथेली में गुरु पर्वत उभरा और जोड़ के निशान साथ होता है तो व्यक्ति धनवान होता है।

ऐसा व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधा से पूर्ण जीवन का आनंद लेता है। यह जो भी काम करते हैं उनमें भाग्य का भरपूर सहयोग मिलता है। इनके बच्चे योग्य और माता-पिता की सेवा करने वाले होते हैं।

आप अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें और दोनों हाथ की फोटो दिखा करके आप जीवन में अनेकों लाभ लें ..

और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग आदि के लिए संपर्क करें किंतु मुक्त फ्री वाले संपर्क ना करें  ..


Wednesday, August 12, 2020

नौकरी व्यापार


 कोई छोटा बिजनेसमैन हो, सरकारी नौकरी करता हो या फिर प्राइवेट फर्म में काम करता हो, हर कोई अपने जीवन में तरक्की चाहता है ।

 अगर आप भी जीवव में स्थाई सफलता पाना चाहते हैं तो आज ही इन टोटकों को आजमा कर देखीये ये सरल व छोटे से टोटके आपके करियर को संवारने में भरपूर

 मदद करेंगे कड़ी मेहनत के साथ-साथ ये उपाय आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा भरकर आपकी मदद जरूर करेंगे ।

इन उपायों को करने से पहले आपको अपने भीतर से डर और असुरक्षा नाम के दो बड़े शत्रुओं पर विजय पाना होगा तब ही यो टोटके भी आपकी कोई मदद कर पाएंगे,

क्योकिं ये दोनों ही लोगों की उत्पादकता और खुशी दोनों पर ताला लगा देते हैं । अगर आप में सकारात्मक ऊर्जा का अभाव है तो स्वयं ईश्वर भी आपकी मदद नहीं कर पाएंगे ।

- सुबह उठते ही अपनी दोनों हथेलियों को फैलाएं और अपने चेहरे के सामने रखकर देखते हुए इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करे-


अर्थात- मेरे हाथ के अग्रभाग में माता महालक्ष्मी का, मध्य में सरस्वती का और मूल भाग में ब्रह्मा का निवास है और ये सभी मेरे ऊपर अपनी कृपा कर रहे हैं ।

इस मंत्र का नियमित सुबह नींद से जागते ही सबसे पहले दोनों हथेलियों को फैलाकर 11 बार मन ही मन बोलना हैं, कुछ ही दिनों में आप देखेंगे सफलता आपके पीछे पीछे दौड़ने लगेगी ।

शास्त्रानुसार प्राचीन काल से ही ऐसी मान्यता चली आ रही की ऐसा करने से माता लक्ष्मी की भरपूर कृपा बरसने लगती हैं । कहा जाता है कि इंसान के हाथों कि दसों अंगुलियों पर मां लक्ष्मी, हथेली के मध्य भाग में मां

सरस्वती और हथेली के निचले भाग में भगवान श्रीगणेश जी निवास करते हैं, प्रातःकाल अपनी हथेली को देखने से इन तीन देवी-देवताओं का स्मरण स्वतः ही हो जाता है और हर क्षेत्र में सफलता के लिए इन देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी मिलने लगता हैं ।

साथ ही सफल करियर के लिए प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें और रविवार के दिन सूर्य की उपासना करने के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें ।

 और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग या यंत्र मंत्र तंत्र से जुड़ा हुआ जानकारी के लिए संपर्क करें

कुंडली विश्लेषण वास्तु हस्तरेखा अंक ज्योतिष रत्न रहस्य एवं भविष्यफल के लिए संपर्क करें।


                    
    

Monday, August 10, 2020

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭
भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि मे श्री कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था इसलिए भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्मास्टमी  के नाम से जाना जाता है। 
एग्यारह अगस्त मंगलवार को प्रातःकाल सवा छः बजे तक सप्तमी तिथि है उसके बाद अष्टमी तिथि है दूसरे दिन बारह अगस्त बुधवार को प्रातःकाल आठ बजकर एक मिनट तक, चुंकि अष्टमी तिथि मध्य रात्रि मे एग्यारह अगस्त मंगलवार को है इसलिए मंगलवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत किया जायेगा और रात्रि में जन्मोत्सव मनाया जायेगा। 
इस बार भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र नहीं होगा,चुंकि नक्षत्र की अपेक्षा तिथि का ही अधिक महत्व है इसलिए एग्यारह अगस्त मंगलवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत होगा और उसी रात में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जायेगा
पहला दिन:- जिस दिन भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म होता है और
दूसरा दिन:- रात्रि में भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के बाद दूसरे दिन लोग भगवान के नाम पर व्रत रखते हैं। 
जिस दिन भगवान का जन्म होता है उस दिन के व्रत को श्री कृष्ण जन्माष्टमी (या श्री कृष्ण जयंती जन्मोत्सव)व्रत कहा जाता है। 
और रात्रि में भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद दूसरे दिन जो व्रत किया जाता है उसे श्री कृष्णाष्टमी व्रत कहा जाता है। 
इस बार एग्यारह अगस्त मंगलवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव व्रत है जबकि बारह अगस्त बुधवार को श्री कृष्णाष्टमी व्रत संपन्न होगा
आप अपनी श्रद्धा से या पारिवारिक परम्परा के अनुसार जिस भी दिन व्रत कीजिए फल एक समान ही मिलता है। 


Wednesday, August 5, 2020

Love Astrology


↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↜↝↜↝↜↜↝↜↜↝↜↝↜↝↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝↜↝
Without love life has no meaning. Love is path to connect two people and change your life. Many people believe that all answers of their love questions are founded in the stars of horoscope. Various people have different problems in their life such as break-up, get back your love, find a perfect person etc. the solutions of these problems you can find from the astrology.

                                                               Astrology is a supernatural power that can have ability to tell you about your past, present and future. A perfect matrimonial relation depends on the love compatibility of two persons. Astrology helps you to count your love compatibility through love compatibility calculator. If you are fall in love in a person but you wants to know that he/she also fall in love with you or not. Astrology helps you to found your answers of these questions. It can help you to check the compatibility of the person that is in love or not.

 Love Astrology is the best method to find your perfect match for love. The method to use astrology through sun Signs. These sign are based on many attributes that depend on a particular time of when a person born. The Signs are found on a particular personality of person not depends on their gender. These Star Signs helps you to find perfect person that will fall in love with you forever. If you love relation is not match it will create a difficulties in your future life. Your life is spoil with these problems.
 Astrology includes various techniques to find the perfect match, fulfill happiness in your life. Some people want to attract the particular person and want to fall in love with that person . But in Love Astrology it will helps you check the love compatibility with your partner. Astrology depends on particular person’s moon, Star, and planet. So why are you waiting..