बुध का सामान्य दशा फल

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जन्म कुंडली में बुध स्वग्रही, मित्र, उच्च राशि, नवांश का, शुभ भावाधिपति, षड्बली, शुभ युक्त, दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुद्धि की प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता, हास्य में रूचि, सुख-सौभाग्य, गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है। लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है। जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है।

यदि बुध अस्त ,नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार में हानि ,शेयरों में घाटा तथा वाणी में दोष होता है। जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में असफलता व हानि होती है।
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