Sunday, May 30, 2021

kundli & Education

 

kundli & Education Prospects

Your educational pursuits and stints can be accurately predicted and explained by carefully analyzing the 1st, 5th & 10th house of your horoscope.

𝑾𝒐𝒓𝒓𝒊𝒆𝒅 𝒂𝒃𝒐𝒖𝒕 𝒚𝒐𝒖𝒓 𝒄𝒉𝒊𝒍𝒅'𝒔 𝒆𝒅𝒖𝒄𝒂𝒕𝒊𝒐𝒏? 

𝑪𝒐𝒏𝒔𝒖𝒍𝒕 𝒕𝒓𝒖𝒔𝒕𝒆𝒅 𝒂𝒔𝒕𝒓𝒐𝒍𝒐𝒈𝒆𝒓𝒔 𝒂𝒕 contact no +91-8788381356

It is quite possible to determine the stream, level and extent of a person's educational pursuit in the future, through Vedic astrology.

Here are the various houses in your kundli that can influence your education:

In a horoscope 4th house is the karaka house of education and 5th is that of intellect. The 2nd house is the house of speech and is also considered as house of education and knowledge. The 10th house is the Karaka house of name and fame from education. 


Fifth house:

The house that is the indicator of intelligence.

If the planet in this house is weak, then there may not be great progress in education.

The presence of the sun or mercury could mean an aptitude for mathematics is a possibility.

If Staurn or Jupiter presence is strong in the fifth house, it could indicate the making of a scientist.


The Tenth House:

In general, the 10th house reflects your occupation, profession, means of livelihood, temporal honours, foreign travels, self-respect, knowledge and dignity.

It is synonymous with the education of a  person. If the 10th house in a horoscope is not strong, it could result in a job that doesn't quite live up to your actual qualification. It can also give you the answer, why people, do different-kinds of jobs just irrespective of their educational-qualifications! Whenever, a major dasa(mahadasa or antardasa) changes, the effect of that must be looked-into, the 10th house.


Fourth House:

The 4th house is the most important house for education and it indicates primary education. Fourth house of the horoscope represents mind and mental stability. Thus capability of learning or grasping anything quickly partly depend on this house.


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Saturday, May 22, 2021

Your Kundli

 

Your Kundli can be a great indicator of what is in store with regards to health for you.

Let us take a look at how the various houses in your birth chart have an effect on your health and physical well-being.
The primary factor when it comes to health is that Ascendant of the 1st house in your kundli or birth chart.
The state of your human body is represented and clearly indicated by the first house. Thus the strength of that house indicates your physical stature, vitality and vigor. If the ascendant cusp lord and the ascendant lord are well placed, it will give good health to you. The basic rule in determining the strength in the chart is checking if the ruler of the Ascendant (the planet that rules the sign in the 1st house) is well disposed in the birth chart. It is also important to know that the Ascendant is free of malefic influences.
If the native is under Dosha or Maha Dosha of the 1st house lord, then in during that time native maintains good health.
Planets connected to the 11th house are influential for the onset and cure of diseases. A chronic disease cannot be cured for the native if there is no planet in the 11th house of that native's birth chart.
The sixth house in the kundli can predict the nature of an illness that can trouble the native. It indicates disease and sickness. Whenever the native is under Maha Dosha or Dosha of the Lord of the sixth house, the native falls sick. Depending on the strength of 6th house one can predict how ill the native is or will bee.
The 8th house of the chart indicates Longevity. The 8th house is directly related to the external generative organs, testicles and rectum. A strong and well-disposed 8th house provides good karma that can aid in overcoming obstacles in life and protecting one’s health.
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Friday, May 14, 2021

Successful Relationship?

The combination of the lord of the 5th and the 11th house is indicative of the success of your most intimate relationships.

It is of primary importance that both the houses do not have any malefic effects. If that is the case and the seventh housee too follows suit, then it is certain that the native would have a very successful love marriage.
The 11th house in your birth chart will be indicative of your dreams and aspirations and the extent of fulfillment. It is also referred as the ‘The House of Good Fortune’.
The 7th house not only represents Marriage but also paints a picture about any serious relationship or partnership.
The seventh and fifth house combine to create Yogas for Love marriage.
The fifth house also reflects everything you build or create, including your children. This house is examined to foretell the possibility of the birth of children, miscarriages, progeny possibilities & the relationship that you will share with them.
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If you do not know what is your 7th house or need help in checking your Horoscope and Ascendants, book an appointment with trusted astrologers at....wp no:- +91-8788381356

Wednesday, May 12, 2021

नीलम के फायदे ?

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नीलम रत्न की वजह से बढ़ती है एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता, इसके शुभ असर से मिल सकता है धन लाभ और मान-सम्मानज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु ये नौ ग्रह हैं और इन ग्रहों के लिए अलग-अलग रत्न बताए गए हैं। ग्रहों के अनुसार रत्न पहनने से संबंधित ग्रह के दोष दूर हो सकते हैं और शुभ प्रभाव बढ़ सकते हैं। वास्तु विशेषज्ञ , लालकिताब और वैदिक ज्योतिषाचार्य पं: अभिषेक शास्त्री जी के अनुसार शनि के अशुभ असर को दूर करने के लिए नीलम धारण करना चाहिए। जानिए नीलम रत्न से जुड़ी खास बातें...


शनि बदल सकता है किस्मत 

ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश माना गया है। शनि किसी भी व्यक्ति का भाग्य बदल सकता है। कुंडली में शनि शुभ हो तो सफलता मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नीलम शनि का प्रिय रत्न माना जाता है, इसके प्रभाव से कमजोर शनि का बल बढ़ सकता है। नीलम की वजह से सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। 

ये रत्न मन की अशांति दूर करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। जिन लोगों को नीलम फल जाता है यानी जिनके लिए ये रत्न शुभ होता है, वे धन-संपत्ति, यश, मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।

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कैसे और कब करें धारण ...

शनिवार को नीलम खरीदकर लाएं और दोपहर 1 से 2 बजे के बीच दाएं हाथ की मध्यमा उंगली यानी मिडिल फिंगर में इसे धारण करना चाहिए। धारण करने से पहले नीलम की पूजा करनी चाहिए। 

किसी ब्राह्मण से शनि मंत्रों के साथ नीलम को अभिमंत्रित करवा सकते हैं। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार मध्यमा उंगली शनि की होती है। ये रत्न चाँदी या पंचधातु की अंगूठी में पहनना चाहिए।

और अधिक जानकारी रत्न से जुड़ा हुआ परामर्श सलाह उपाय विधि प्रयोग या रत्न चाहिए तो आप हमें कॉल करें और अपना जन्म कुंडली दिखा करके आप रत्न प्राप्त करें और जीवन में अनेकों लाभ लें ....

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ज्योतिषाचार्य पं: अभिषेक शास्त्री  

संपर्क सूत्र - +91-8788381356

 परामर्श शुल्क 351 ₹


                

        

Saturday, April 24, 2021

जन्मकुंडली में यदि शुक्र शुभ हो तो

जन्मकुंडली में यदि शुक्र शुभ हो तो ऐसे जातक के शोक बड़े-बड़े होंगे और सभी शोक पूर्ण होंगे


 आपके यदि जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत है प्रबल है और योग अच्छे सहयोग बन रहे हैं तो आप जीवन में सबसे सफल व्यक्ति हो सकते हैं यह हमारे व्यक्तिगत अनुभव है.


• जातक अच्छा पहनने, घूमने फिरने, Shopping करने और अपने ऊपर पैसा ख़र्च करने वाला होगा l


• शादीशुदा जीवन का सुख अच्छा होगा और दोनो जीवनसाथी अलग-अलग जगह पर घूमने के शोकीन होंगे 


• जातक हसमुख स्वभाव का और सभी से अच्छे सम्बंध रखने वाला होगा l

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  आप लोग भी अपने ग्रहों से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं जन्मकुंडली से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार से सलाह परामर्श प्राप्त करना चाहते हैं तो संपर्क करें।

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Friday, April 23, 2021

35 की उम्र के बाद इनके बिगडऩे लगते हैं?

यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो सामान्यत: व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इस योग से लाभ भी हो सकते हैं। कालसर्प योग दो चरणों में होता है उत्तरार्ध और पूर्वार्ध।


 वहीं कभी-कभी व्यक्ति जीवन में बहुत जल्द धन-संपत्ति और सुख-सुविधाएं प्राप्त कर लेता है, लेकिन इसके बाद अचानक 35 वर्ष की उम्र के बाद उसके सब काम बिगड़ जाते हैं। इसके चलते उसे धन और सुख की कमी हो जाती है, इसकी वजह भी कालसर्प योग हो सकती है।


 यदि कालसर्प योग का बुरा असर व्यक्ति के जीवन पर शुरू हो गया है तो उसके जीवन में कुछ खास बातें होने लगती हैं। जिनसे हम समझ सकते हैं कालसर्प योग के कारण परेशानियां बढ़ रही हैं और काम बिगड़ रहे हैं।


 ऐसे बनता है कुंडली में कालसर्प योग : जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सातों ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि आ जाते हैं तो कालसर्प योग बनता है।

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Saturday, April 17, 2021

ग्रहों का प्रभाव

 

ग्रहों का प्रभाव देता है अच्छे व बुरे परिणाम

 व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है। हर व्यक्ति की कुण्डली में ग्रहों के कुछ विशेष योग होते हैं।


 ज्योतिषशास्त्र के माध्यम से इन योगों से व्यक्ति के जीवन में कब कैसा उतार चढ़ाव आएगा, इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जन्म कुण्डली में योग का अध्ययन करते समय योग बनाने वाले ग्रहों की स्थिति का आंकलन बहुत ही सूक्ष्मता पूर्वक किया जाना होता है। योग के दौरान जो ग्रह प्रबल होता है उसका फल ही प्रमुख रूप से प्राप्त होता है।

अगर आप जानना चाहते हैं, अपने उज्जवल भविषय के बारे में तो संपर्क करें। 

 शास्त्री जी 

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Monday, April 5, 2021

ग्रह योग

 

क्या होता है ग्रह योग 

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 ग्रह योग की जब हम बात कर रहे हैं तो सबसे पहले यह जानना होगा कि ग्रह योग क्या है और यह बनता कैसे है। विज्ञान की भाषा में बात करें तो दो तत्वों के मेल से योग बनता है ठीक इसी प्रकार दो ग्रहों के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रह योग बनने के लिए कम से कम किन्हीं दो ग्रहों के बीच संयोग, सहयोग अथवा सम्बन्ध बनना आवश्यक होता है।

 ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों के बीच योग बनने के लिए कुछ विशेष स्थितियों का होना आवश्यक होता है।जैसे: दो या दो से अधिक ग्रह मिलकर एक दूसरे से दृष्टि सम्बन्ध बनाते हों। भाव विशेष में कोई अन्य ग्रह आकर संयोग करते हों। कारक तत्व शुभ स्थिति में हों।

 कारक ग्रह का अकारक ग्रह से सम्बन्ध बन रहा हो। एक भाव दूसरे भाव से सम्बन्ध बना रहे हों। नीच ग्रहों से मेल हो अथवा शुभ ग्रहों से मेल हो। इन सभी स्थितियों के होने पर या कोई एक स्थिति होने पर योग का निर्माण होता है।

Saturday, March 13, 2021

Role of various bhaavs

 "Role of various  Bhaavas  Narayan Jyotish Paramarsh"

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     💐"Lagna"💐

👉🏻It represents body of the nation, its environment, cooperation, morality, public health, general well-being and home-ministry. If afflicted, there will be disturbance, anarchy, class-struggle and failure of administration.


      💐"2nd Bhaav"💐

 👉🏻It represents financial state of the nation, foreign exchange, national budget revenue, tax, planning, banking, internal trade, total national production/ wealth and stock-exchange.  In this bhaav, there may be emergency situation.


     💐"3rd bhaav"💐

 👉🏻It represents communications, transport, information collection/ broadcasting, military strength, neighbours and mental state of its people. If afflicted, it denotes loss of food-grains, water-tragedies, train- accidents, insinuative acts of neighbor-enemy or skirmishes at borders.


        💐"4th bhaav"💐

👉🏻It represents the mann, mind of the nation and its people, agricultural production, real estate & slum development, mining, forestry, weather, education & school, throne, public agitation, local politics, opposition parties, decision-makin g/ cancellation. If afflicted it denotes floods, earthquakes, land.slide, volcano, criminal activities, Scam, danger to the leader and weak government.


      💐“5 th  Bhaav”💐

👉🏻It represents education ,art, music , entertainment,  sports, birth-rate of children, share market, capital investment, ambassador, higher society and social activities. If afflicted it denotes loss of moral values, criminal activities, scams, danger to leaders ,


  

 💐"6th Bhaav"💐

👉🏻It represents armed forces, territorial attacks, labour class, unions & strike, state-loans/ debts, medical diseases and services, animal husbandry and record keeping. Presence of malefics or severely afflicted, it creates war-frenzy, victory in conflict war or epidemics.


      💐"7th bhaav" 💐

👉🏻It represents foreign policy, foreign trade, international agreements, cooperation from friendly countries, honour of the nation in foreign, females   position and cooperative institutions. If afflicted it denotes war, conflicts, enemies, thieves/ dacoits, foreign infiltrations, increase in crimes against women and terrorists.


        💐"8th Bhaav"💐

 👉🏻This represents death of head of state, national mourning, war, change of power & authority, Loss of men & material due to natural calamities, financial help from foreign, pensioners & old people, various types of compensations, scientific discoveries & research and gains through shares/ lotteries. If afflicted, it denotes heavy taxation/ punishment on people, higher death rate, economic / immoral actions offending  public  feelings.

      💐"9th Bhaav"💐

👉🏻It represents justice, judiciary, religion, ethics, long journeys, air travel, higher education,

tourism, transport system, public relations, advertisements and industrial capabilities. If afflicted it

denotes increase in government expenditure, and air/ water tragedies.


       💐"10th Bhaav"💐

👉🏻 This represents king, head of state, Prime Minister, ruling party, parliament, wealthy, big industrialist, social/ political leader, important authorities, national aims/ unity/ pride/ honour. If afflicted, it denotes defeat of government in parliament, change of government due to public unrest or war and loss of prestige of the country in foreign lands.


     💐"11th Bhaav"💐

👉🏻It represents international agreements/ contracts, mutual relations between centre & state governments, national income, gains from foreign trade, mint, will power of public, position of ruling party, victory in election, developmental program, control of inflation, distribution of essential items, revenue collection, representatives in foreign and international relations. If afflicted, it denotes uproar in parliament, problems/ sorrows to public due to selfish parliamentarians.


    💐"12th Bhaav"💐

👉🏻 It represents secret enemies or their agents, terrorists, smugglers, tax-evaders, life and success abroad, abductors/ criminals, anti-national or anti-social persons, desolate, helpless, old, disabled person, jail, hospital, hermitage and charitable institutions. If afflicted, it denotes increase in conspiracies, scams, misuse of wealth/ position/ authority, assassinations, organized crimes, cheating, fraud, unexpected/ sudden calamities, ill-luck, humiliation, worries and psychological problems.


Thank You

🙏Be  Blessed🙏

Tuesday, March 9, 2021

True love

!!!Astro !!! Astro Narayan !!! Jp Astro !!! Best Astrologer !!! Narayan !!!

!!! Narayan Jyatish !!! AstroYogi!!!

 🌷 True love & bond is inseparable & always exists within one's soul....

👁️This is the launguage of the eyes which read other eyes heal entirely & nurture the soul that makes one feel alive...And gives the new optimism about the life.😇🙏

🌍World is really big but the heart who can understand urs is rare to meet !!

✨That deep belonging & soul spark has no wordly defination but an eternal experience in itself which leaves imprint on ur existence.

💜If you find one in any form take it as God's token of love for you... Understand them, value them & keep them closer to your heart...

😇Only luckiest one gets the chance to love & being loved & understood so deeply on such pious soul level....

👩‍❤️‍👨When you respect & accept eachother from the core & love unconditionally every day is day of Love & bliss.... 🌹


Pt.AbhishekShastri ✨🦋

Friday, January 8, 2021

कैसे बनें करोड़पति !!!

 

ऐसा योग है तो आप बनेंगे करोड़पति...

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 👉ज्योतिषशास्त्र में कुछ विशेष शुभ योग भी बताए जाते हैं, ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग हैं, तो व्यक्ति को जीवनभर धन की कमी नहीं रहती है। ऐसे ही शुभ योगों में से एक योग है रुचक योग।

 👉 कुंडली में मंगल ग्रह अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण या उच्च का होकर केंद्र में स्थित हो तो रुचक योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से बलवान होता है। अपने कार्यों से वह संसार में प्रसिद्ध होता है और स्वयं के अतिरिक्त देश का नाम भी ऊंचा करता है।

 👉वह स्वयं राजा होता है या उसका जीवन राजा की तरह होता है। सामान्यत: आज के समय में ऐसे योग वाले व्यक्ति करोड़पति हो सकते हैं। अपनी संस्कृति के प्रति वह आस्थावान होता है। देश की उन्नति के लिए प्रयास करता है। वह भावना से युक्त होता है व उसके साथ कई लोग रहते हैं। उसके मित्र सच्चे होते हैं व चरित्र उज्जवल होता है।

 👉वह कभी भी धन का अभाव महसूस नहीं करता। प्रलोभन इन्हें पिघला नहीं सकते। वह उच्च अधिकारी बनने की योग्यता रखता है और यदि वह राजनीति में हो तो मुख्यमंत्री बनने तक के योग बन सकते हैं। यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि मंगल 10 से 25 डिग्री अंश के मध्य होना चाहिए किंतु यदि 10 से कम व पच्चीस से ज्यादा अंश होने पर रुचक योग पूर्ण फलदायी नहीं होता। यह योग भी तभी कार्य करता है जब मंगल पूर्ण बलिष्ठ हो।

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