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ग्रह योग

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  क्या होता है ग्रह योग  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  ग्रह योग की जब हम बात कर रहे हैं तो सबसे पहले यह जानना होगा कि ग्रह योग क्या है और यह बनता कैसे है। विज्ञान की भाषा में बात करें तो दो तत्वों के मेल से योग बनता है ठीक इसी प्रकार दो ग्रहों के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रह योग बनने के लिए कम से कम किन्हीं दो ग्रहों के बीच संयोग, सहयोग अथवा सम्बन्ध बनना आवश्यक होता है।  ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों के बीच योग बनने के लिए कुछ विशेष स्थितियों का होना आवश्यक होता है।जैसे: दो या दो से अधिक ग्रह मिलकर एक दूसरे से दृष्टि सम्बन्ध बनाते हों। भाव विशेष में कोई अन्य ग्रह आकर संयोग करते हों। कारक तत्व शुभ स्थिति में हों।  कारक ग्रह का अकारक ग्रह से सम्बन्ध बन रहा हो। एक भाव दूसरे भाव से सम्बन्ध बना रहे हों। नीच ग्रहों से मेल हो अथवा शुभ ग्रहों से मेल हो। इन सभी स्थितियों के होने पर या कोई एक स्थिति होने पर योग का निर्माण होता है।

Role of various bhaavs

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 "Role of various  Bhaavas  Narayan Jyotish Paramarsh" #astro, #astronarayan, #bestastrologer, #jpastro #astriyogi, #jyotish, #Narayan, #narayan jyotish, #narayanjyotishparamarsh,       💐"Lagna"💐 👉🏻It represents body of the nation, its environment, cooperation, morality, public health, general well-being and home-ministry. If afflicted, there will be disturbance, anarchy, class-struggle and failure of administration.       💐"2nd Bhaav"💐  👉🏻It represents financial state of the nation, foreign exchange, national budget revenue, tax, planning, banking, internal trade, total national production/ wealth and stock-exchange.  In this bhaav, there may be emergency situation.      💐"3rd bhaav"💐  👉🏻It represents communications, transport, information collection/ broadcasting, military strength, neighbours and mental state of its people. If afflicted, it denotes loss of food-grains, water-tragedies, train- accidents, insinuative acts of neighb

True love

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!!!Astro !!! Astro Narayan !!! Jp Astro !!! Best Astrologer !!! Narayan !!! !!! Narayan Jyatish !!! AstroYogi!!!  🌷 True love & bond is inseparable & always exists within one's soul.... 👁️This is the launguage of the eyes which read other eyes heal entirely & nurture the soul that makes one feel alive...And gives the new optimism about the life.😇🙏 🌍World is really big but the heart who can understand urs is rare to meet !! ✨That deep belonging & soul spark has no wordly defination but an eternal experience in itself which leaves imprint on ur existence. 💜If you find one in any form take it as God's token of love for you... Understand them, value them & keep them closer to your heart... 😇Only luckiest one gets the chance to love & being loved & understood so deeply on such pious soul level.... 👩‍❤️‍👨When you respect & accept eachother from the core & love unconditionally every day is day of Love & bliss.... 🌹 Pt.AbhishekShastri

कैसे बनें करोड़पति !!!

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  ऐसा योग है तो आप बनेंगे करोड़पति... astroyogi !!! astro !!! astronarayan !!! bestastrologer !!! blog !!! jpastro !!! jyotish !!! Narayan !!! narayan !!! jyotish !!! narayanjyotishparamarsh   👉ज्योतिषशास्त्र में कुछ विशेष शुभ योग भी बताए जाते हैं, ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग हैं, तो व्यक्ति को जीवनभर धन की कमी नहीं रहती है। ऐसे ही शुभ योगों में से एक योग है रुचक योग।  👉 कुंडली में मंगल ग्रह अपनी राशि का होकर या मूल त्रिकोण या उच्च का होकर केंद्र में स्थित हो तो रुचक योग बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति शारीरिक रूप से बलवान होता है। अपने कार्यों से वह संसार में प्रसिद्ध होता है और स्वयं के अतिरिक्त देश का नाम भी ऊंचा करता है।  👉वह स्वयं राजा होता है या उसका जीवन राजा की तरह होता है। सामान्यत: आज के समय में ऐसे योग वाले व्यक्ति करोड़पति हो सकते हैं। अपनी संस्कृति के प्रति वह आस्थावान होता है। देश की उन्नति के लिए प्रयास करता है। वह भावना से युक्त होता है व उसके साथ कई लोग रहते हैं। उसके मित्र सच्चे होते हैं व चरित्र उज्जवल होता है।  👉वह कभी भी धन का अभाव

राजनेता बनने के योग

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  आपकी कुंडली में हैं ये योग, तो आपको बड़ा राजनेता बनाकर छोड़ेगें।  व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है।  ज्योतिषशास्त्र एक ऐसी विद्या है जो लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को उजागर करने में सक्षम है। कुंडली अध्ययन के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु)के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भी गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।    किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह 'स्व' अर्थात स्वयं को सूचित करता है और इस पर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है। जानकारों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के योगों का बड़ा महत्व है। पराशर से लेकर जैमनी तक सभी ने ग्रह योग को ज्योतिष फलदेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है। अपने कुंडली से संबधित और अधिक जानकारी के लिए कृपया पेज को सब्स्क्राइब करें।  और हमें कमेंट में

बुध अरिष्ट शांति के विशेष उपाय एवं टोटके

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ १👉 ब्रह्मी बूटी या तुलसी की जड़ हरे वस्त्र में रखकर बुध के नक्षत्रो (अश्लेशा,ज्येष्ठा, एवं रेवती) में बुध के बीज मंत्र की कम से कम ३ माला जप करने के बाद हरे रंग के धागे में गंगा जल के छींटे लगा कर पुरुष दाहिनी तथा स्त्री बाहिनी भुजा में धारण करने से बुध कृत अरिष्ट की शांति होगी। २👉 किसी भी शुक्ल पक्ष के  प्रथम बुधवार से शुरू करके लगातार २१ दिन तक श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ नियमित रूप से करें अंतिम दिन उद्यापन में पांच कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र ५ फल एवं मिठाई दक्षिणा सहित दान करने से बुध के शुभत्व में वृद्धि होती है। ३👉 विद्या में बाधा या वाणी में दोष होने की स्तिथि में सरस्वती स्त्रोत्र का शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ करके २१ दिन लगातार माँ सरस्वती को इलाईची, मिश्री एवं केले का भोग अर्पण करने के बाद पाठ करने से दोषों की शांति होती है। पाठ के बाद प्रसाद को बाँट कर स्वयं ग्रहण करे। सायं काल तुलसी जी के आगे घी का दीप जलाएं। ४👉 व्यापार में हानि अथवा संतान कष्ट की स्थिति में प्रत्येक बुधवार या प्रतिदिन गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ

गोचर में बुध

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〰️〰️〰️〰️ जन्म या नाम राशि से २' ४' ६' ८' १० व ११ वें स्थान पर बुध शुभ फल देता है। शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है। जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग, चुगलखोरी, धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है। दूसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है। तीसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है। चौथे👉 स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है। पांचवें👉 स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है। छठे👉 स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता है लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है। सातवें👉 स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है। आठवें👉 स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्