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Showing posts from August, 2017

धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।*

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*गुरुवार को धन की बरकत के लिए उपाय --अगर आप आर्थिक रुप से परेशान रहते हैं, अनावश्यक व्यय के कारण हर महीने आपका बजट बिगड़ रहा है तो गुरुवार के दिन धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि गुरु धन का कारक ग्रह है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है--* *1.गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।* *2.शाम के समय केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर लड्डू या बेसन की मिठाई अर्पित करें और लोगों में बांट दें।* *3.गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के बाद केसर का तिलक लगाएं। अगर केसर उपलब्ध नहीं हो तब हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं।* *4.गुरु का प्रभाव धन पर होता है। अगर कोई गुरुवार के दिन आपसे धन मांगने आता है तो लेन देने से बचें। गुरुवार को धन देने से आपका गुरु कमजोर हो जाता है, इससे आर्थिक परेशानी बढ़ती है।* *5. रोज नही तो कम से कम गुरुवार के दिन माता पिता एवं

✡️ Third Eye - आज्ञा✡️

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🌘आज्ञा चक्र मस्तक के मध्य में, भौंहों के बीच स्थित है। इस कारण इसे "तीसरा नेत्र” भी कहते हैं। आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केन्द्र है। यह मानव और दैवी चेतना के मध्य सीमा निर्धारित करता है। 🌘यह ३ प्रमुख नाडिय़ों, इडा (चंद्र नाड़ी) पिंगला (सूर्य नाड़ी) और सुषुम्ना (केन्द्रीय, मध्य नाड़ी) के मिलने का स्थान है। जब इन तीनों नाडिय़ों की ऊर्जा यहां मिलती है और आगे उठती है, तब हमें समाधि, सर्वोच्च चेतना प्राप्त होती है। 🌘इसका मंत्र है ॐ। आज्ञा चक्र का रंग सफेद है। इसका तत्व मन का तत्व, अनुपद तत्त्व है। इसका चिह्न एक श्वेत शिवलिंगम्, सृजनात्मक चेतना का प्रतीक है। इसमें और बाद के सभी चक्रों में कोई पशु चिह्न नहीं है। इस स्तर पर केवल शुद्ध मानव और दैवी गुण होते हैं। 🌘आज्ञा चक्र के प्रतीक चित्र में दो पंखुडिय़ों वाला एक कमल है जो इस बात का द्योतक है कि चेतना के इस स्तर पर 'केवल दो', आत्मा और परमात्मा (स्व और ईश्वर) ही हैं। आज्ञा चक्र की देव मूर्तियों में शिव और शक्ति एक ही रूप में संयुक्त हैं। इसका अर्थ है कि आज्ञा चक्र में चेतना और प्रकृति पहले ही संयुक्त है, किन्तु

*🌷आइये जाने उच्च तथा नीच राशि के ग्रह—🌷*

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*ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों के मन में उच्च तथा नीच राशियों में स्थित ग्रहों को लेकर एक प्रबल धारणा बनी हुई है कि अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सदा शुभ फल देता है तथा अपनी नीच राशि में स्थित ग्रह सदा नीच फल देता है। उदाहरण के लिए शनि ग्रह को तुला राशि में स्थित होने से अतिरिक्त बल प्राप्त होता है तथा इसीलिए तुला राशि में स्थित शनि को उच्च का शनि कह कर संबोधित किया जाता है और अधिकतर ज्योतिषियों का यह मानना है कि तुला राशि में स्थित शनि कुंडली धारक के लिए सदा शुभ फलदायी होता है।* *किंतु यह धारणा एक भ्रांति से अधिक कुछ नहीं है तथा इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है और इसी भ्रांति में विश्वास करके बहुत से ज्योतिष प्रेमी जीवन भर नुकसान उठाते रहते हैं क्योंकि उनकी कुंडली में तुला राशि में स्थित शनि वास्तव में अशुभ फलदायी होता हैतथा वे इसे शुभ फलदायी मानकर अपने जीवन में आ रही समस्याओं का कारण दूसरे ग्रहों में खोजते रहते हैं तथा अपनी कुंडली में स्थित अशुभ फलदायी शनि के अशुभ फलों में कमी लाने का कोई प्रयास तक नहीं करते। इस चर्चा को आगे बढ़ाने से पहले आइए एक नज़र में ग्रहों

*🌷गणेश चतुर्थी🌷*

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💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *अमृत योग में आएगी गणेश चतुर्थी* *1. अमृत योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से रात्रि 08:32 तक* *2. रवि योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से दोपहर 02:35 तक* *25 अगस्त 2017 को मनाई जाएगी महागणपति चतुर्थी एवं कलंक चतुर्थी* *(चंद्र दर्शन नहीं करे)* *नोट : रात्रि 09 बजकर 18 मिनट तक चन्द्रदर्शन नहीं करे क्योंकि इस दिन कलंकचौथ है, मान्यता के अनुसार जो भी इस दिन चंद्र का दर्शन करता है, उस पर कोई न कोई कलंक अवश्य  लगता है।* *गणेश पूजन का समय :- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी दिनाङ्क 25 अगस्त 2017 को चतुर्थी तिथि रात्रि 08:31 तक रहेगी। अत: 25 अगस्त को चतुर्थी चन्द्रोदव्यापिनी होने से महागणपति चतुर्थी (गणेशचौथ) इसी दिन मनायी जाएगी। गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय - चर का चौघडिय़ा प्रात: 06:05 से प्रात: 07:42 तक रहेगा। लाभ का चौघडिय़ा प्रात: 07:42 से प्रात: 09:17 तक, अमृत का चौघडिय़ा प्रात: 09:17 से प्रात: 10:53 तक, शुभ का चौघडिय़ा दोपहर 12:28 से दोपहर 02:04 तक, चर का चौघडिय़ा सायं 05:15 से सायं 06:51 तक तथा अभिजित

राहु मंगल का विध्वंसक योग

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10 दिन हो जाइये सावधान बन रहा है राहु मंगल का विध्वंसक योग राहु-मंगल-का-विध्वंसक-योग राहु मंगल का विध्वंसक योग (दस दिन के लिए रहे ये चार राशि वाले सावधान) बीते डेढ़ वर्ष से राहु सिंह राशि में गोचर कर रहा था जो की अब 18 अगस्त 2017 को राशि परिवर्तन कर कर्क राशि में प्रवेश कर गया है। 18 अगस्त को प्रातः राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है राहु का राशि परिवर्तन करना तो ज्योतिषीय गणनाओं में बहुत महत्वपूर्ण घटना होती ही है पर यहाँ जो एक विशेष स्थिति बन रही है। ◆ वो यह है के 18 अगस्त को राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है तथा मंगल पहले से ही अपनी नीच राशि कर्क में गोचर कर रहा है जिससे 18 अगस्त को राहु के कर्क में प्रवेश करते ही कर्क राशि में राहु और मंगल की युति बन गयी है जो की 27 अगस्त तक बनी रहेगी 27 अगस्त को मंगल के सिंह राशि में आने पर राहु मंगल का नकारात्मक योग समाप्त होगा। ◆ राहु मंगल के योग को ज्योतिष में एक विध्वंसकारी और नकारात्मक योग माना गया है, मंगल और राहु दोनों ही क्रोधी प्रवृति और उठा पटक कराने वाले ग्रह हैं। ◆ मंगल को दुर्घटना, एक्सीडे

धन लाभ विचार

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                            || ॐ || धनेश (व्दितीय भाव का अधिपति) यदि धन स्थान (व्दितीय भाव) में हो अथवा केंद्र (१, ४, ७, १०) भाव में हो तो जातक को “श्रम से सफलता” (शारीरिक / मानसिक श्रम) मिलती हैं तथा धन लाभ होता हैं | धन भाव में शुभ ग्रह धनप्रद (धन प्रदान करने वाले) तथा धन भाव में पाप ग्रह धन नाशक (धन हनी करने वाले) होते हैं | यदि धन स्थान पर शुभ ग्रह की दृष्टी या योग हो तब भी जातक को धन लाभ होता रहता हैं | धनवान योग :- धनेश यदि लाभ भाव (एकादश भाव) या लाभेश धन स्थान में हो अथवा धनेश तथा लाभेश (एकादश भाव अधिपति) दोनों ही केंद्र अथवा त्रिकोण (१, ४, ५, ७, ९, १०) में स्थित हो तो मनुष्य धनवान होता हैं | व्यय योग :- यदि धनेश त्रिक भाव (६, ८, १२) में स्थित हो तो जातक को आवक से ज्यादा खर्च की चिंता सताती हैं | || ॐ तत् सत् || जय श्री नारायण   पँ अभिषेक कुमार      9472998128

सूर्य ग्रहण

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                        जय श्री नारायण मित्रो नमस्कार 21,22/8/2017 को सूर्य ग्रहण है। और मेरे जिन मित्रो की जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण मतलब जिन की कुंडली में सूर्य और राहू एक साथ एक ही घर में बैठे हों या जिनकी कुंडली में राहू की दृष्टी सूर्य देव पर जाती हो उन मित्रो के लिए उपाय करने का सही समय है। मित्रो 21,22/8/2017 तारीख को 23:51 मिनट पर सूर्य ग्रहण का उपाय करने का सही समय है तो कृपया आप उपाय करके अपने बुरे समय को ठीक करें। करना इये है राहू का सामान जैसे नारियल साबुत बादाम आदि ग्रहण के मध्य काल जोकि कल 23:51 मिनट पर है सिर से 7 बार उसार कर तेज बहते पानी में जल प्रबाह कर दें। अब में आपको सूर्य ग्रहण बाले जातकों को होने बाली परेसानियां बताता हूँ। इस पोस्ट से में आज आप लोगों से कुछ कुंडलियों में पाये जाने बाले बुरे योगों में से एक सूर्य ग्रहण नामक बुरे योग के बारे में बताऊंगा । जब किसी की जन्म कुंडली में सूर्य देव के साथ राहु एक ही घर में बैठ जाएँ या राहू की दृष्टि सूर्य देव के ऊपर पड़ रही हो तो सूर्य ग्रहण नाम का बुरा योग बन जाता है। इस बुरे योग के कारण व्यकित को बहुत सी परेसा

*💥आज का राशिफल💥*

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                        *💥सुप्रभातम्💥* *दिनांक 18 अगस्त 2017, शुक्रवार, विक्रमी संवत 2074, शक संवत 1939, वर्षा ऋतु, दक्षिणायण अयन, भाद्रपद मास,  एकादशी तिथि(10:01 तक। 10:02 से द्वादशी तिथि चालू), कृष्ण पक्ष,आद्रा नक्षत्र, वज्र योग।*         *👹राहुकाल👹* *💥10:47 से 12:24💥* *❌राहुकाल में सभी कार्य वर्जित हैं।❌*         *💥 नोट💥* *👉राशिफल पड़ने के बाद आगे शेयर करें। आप जैसे किसी मित्र का मार्गदर्शन होगा।*      *🌞सुर्योदय-06:19🌞*      *🌝सूर्यास्त-19:05🌝* *💥हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।राम रामेति रामेति।रमे रामें मनोरमे॥ सहस्त्र नाम त तुल्यं। राम नाम वरानने।।आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्त्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है।* *💥आज एकादशी और गुरुवार को बाल नही कटवाने चाहिये।* *💥एकादशी के दिन चावल और साबूदाना खाना वर्जित है।एकादशी को शिम्बी (सेम) नही खाना चाहिये।*  *🐑मेष-आज के दिन किए गए दान-पुण्य के काम आपको मानसिक शान्ति और सुकून देंगे। दिन बहुत लाभदायक नहीं है- इसलिए अपनी जेब

18 अगस्त 2017 का राहु

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*** आप सभी का आभार और मेरी तरफ से  शुभकामनाऐ *** -----आज बात करते है कल के बदलने वाले गोचर की जिसकी हफ्तो पहले से ढेर सारी भविष्यवाणिया सबने अपने आधार पर करी है। 18 अगस्त यानी काल दो अहम ग्रह जिनसे लोग भय खाते है उनका स्थान परिवर्तन यानी गोचर बदल रहा है ** राहू का कर्क मे** और केतू का मकर मे ** ऐ दोनो वक्री यानी उल्टी दिशा मे घूम कर सभी पर प्रभाव डालते है हर राशी मे इनका गोचर करना अलग अलग प्रभाव देता है सभी को सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव देते रहते है । **---सभी गोचरो मे मैने गुरू , शनी ,मगंल  और राहू अधिक प्रभाव मे पाऐ है इनके फल अधिक प्रभाव मे रहते है  । लेकिन आखिर राहू का गोचर ही इतना नकारात्मक कैसे लोग समझ कर चलते है कारण है राहू के फल जोकी सकारात्मक भी होगा तो भी बुद्धी को लालच मे ही डालता है । अब चूकी ऐ कर्क मे प्रवेश कर रहा है जोकी जल तत्व राशि है जिसका स्वामी चद्रदेव है जो स्वयः मनुष्य के मन के स्वामी के साथ साथ शारीर के अदंर शीतलता और खुशमिजाज और मजाकिया स्वाभाव को प्रसारित करते है । अब यंहा राहू का आना थोडी सी भी और अधिक भी प्रभावी रह सकता है और रहेगा भी कारण की इसका अस

संतान प्राप्ति कैसे हो।।।

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 *🌷कुंडली*से जाने :संतान प्राप्ति का समय :निःसंतान योग :संतान बाधा दूर करने के सरल उपाय:🌷* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं। कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं।* *ज्योतिषीय नियम हैं जो घटना के समय बताने  में सहायक होते हैं .* *संतान प्राप्ति  का समय :* *लग्न और लग्नेश को देखा  जाता  है।* *घटना का संबंध किस भाव से है।* *भाव का स्वामी कौन  है ।* *भाव का कारक ग्रह कौन है।* *भाव में कौन कौन से ग्रह हैं।* *भाव पर किस  ग्रह की दृष्टि।* *कौन से ग्रह महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा, सूक्ष्म एवं प्राण दशा चल रही है।भाव को प्रभावित करने वाले ग्रहों की गोचर स्थिति भी देखना चाहिये।*  *इन सभी का अध्ययन करने   से किसी भी घटना का समय जाना जा सकता है।* *संतान प्राप्ति के समय को जानने के लिए पंचम भाव, पंचमेश अर्थात पंचम भाव का स्वामी, पंचम कारक गुरु, पंचमेश, पंचम भाव में स्थित ग्रह और पंचम भाव ,पंचमेश पर दृष्टियों पर ध्यान देना चाहिए।   जातक का विवाह हो चुका हो और संतान अभी

*🌷केतु के गुण अवगुण🌷*

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*ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केतु एक छाया ग्रह है जो स्वभाव से पाप ग्रह भी है। केतु के बुरे प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ता है। हालांकि यही केतु जब शुभ होता है तो व्यक्ति को ऊंचाईयों पर भी ले जाता है। केतु यदि अनुकूल हो जाए तो व्यक्ति आध्यात्म के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है। आमतौर पर माना जाता है कि हमारी जन्मकुंडली हमारे पिछले जन्म के कर्मों तथा इस जन्म के भाग्य को बताती है। फिर भी ज्योतिषीय विश्लेषण कर हम अशुभ ग्रहों से होने वाले प्रभाव तथा उनके कारणों को जानकर उनका सहज ही निवारण कर सकते हैं।* *राहू एवं केतु छाया ग्रह माने गए है जिनका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है। इन्हें इनके कार्य करने की वास्तविक शक्ति कुंडली में अन्य ग्रहों के सम्मिलित प्रभाव से मिलती है। ज्योतिष में माना जाता है कि किसी जानवर को परेशान करने पर, किसी धार्मिक स्थल को तोड़ने अथवा किसी रिश्तेदार को सताने, उनका हक छीनने की सजा देना ही केतु का कार्य है। झूठी गवाही व किसी से धोखा करना भी केतु के बुरे प्रभाव को आमंत्रित करता है।* *जब भी व्यक्ति पर केतु का अशुभ प्रभाव शुर

*🌷हथेली और ज्योतिष🌷*

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              *🌷जय श्री नारायण🌷*                          पँ अभिषेक कुमार 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *1.हथेली में अगर मछली का चिन्ह हो और कुंडली में पाप प्रभाव रहित शनि, जन्म लग्न से  12 वे भाव में हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यवान, बुद्धिमान और नेकदिल होता है ।* *2.हथेली में अगर मछली का चिन्ह हो और राहु कुंडली में 3 व् 6 भाव में हो तो व्यक्ति घर का चिराग होता है ।* *3.हथेली में शेर का चिन्ह हो और पाप प्रभाव रहित सूर्य कुंडली के दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति बहादुर, निडर और निर्दयी होता है ।* *4.हथेली में सांप का चिन्ह हो और शनि कुंडली के 12 वे भाव में हो तो व्यक्ति रखवाला होता है - जैसे ख़ज़ाने का सांप ।* *5.हथेली में कौवे का चिन्ह हो और शनि लग्न में और राहु-केतु कहीं भी नीच-राशि में हो तो व्यक्ति धोखेबाज़ होता है ।* *6.हथेली में गाय - बैल का चिन्ह हो और शुक्र कुंडली के 12 वे भाव में पाप प्रभाव रहित और शुभ हो तो व्यक्ति खेती कार्य से धनवान बनता है ।* *7.हथेली में चूल्हे का चिन्ह हो और शनि कुंडली के लग्न में हो, मंगल, लग्न से 4 थ

*🌷राहु के गुण अवगुण🌷*

               *🌷जय श्री नारायण🌷* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *राहु छाया ग्रह है,ग्रन्थों मे इसका पूरा वर्णन है,और श्रीमदभागवत महापुराण में तो शुकदेवजी ने स्पष्ट वर्णन किया कि यह सूर्य से १० हजार योजन नीचे स्थित है,और श्याम वर्ण की किरणें निरन्तर पृथ्वी पर छोडता रहता है,यह मिथुन राहि में उच्च का होता है धनु राशि में नीच का हो जाता है,राहु और शनि रोग कारक ग्रह है,इसलिये यह ग्रह रोग जरूर देता है। काला जादू तंत्र टोना आदि यही ग्रह अपने प्रभाव से करवाता है।अचानक घटनाओं के घटने के योग राहु के कारण ही होते है,और षष्टांश में क्रूर होने पर ग्रद्य रोग हो जाते है।राहु के बारे में हमे बहुत ध्यान से समझना चाहिये,बुध हमारी बुद्धि का कारक है,जो बुद्धि हमारी सामान्य बातों की समझ से सम्बन्धित है,जैसे एक ताला लगा हो और हमारे पास चाबियों का गुच्छा है,जो बुध की समझ है तो वह कहेगा कि ताले के अनुसार इस आकार की चाबी इसमे लगेगी,दस में से एक या दो चाबियों का प्रयोग करने के बाद वह ताला खुल जायेगा,और यदि हमारी समझ कम है,तो हम बिना बिचारे एक बाद एक बडे आकार की