Wednesday, August 30, 2017

धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।*

*गुरुवार को धन की बरकत के लिए उपाय --अगर आप आर्थिक रुप से परेशान रहते हैं, अनावश्यक व्यय के कारण हर महीने आपका बजट बिगड़ रहा है तो गुरुवार के दिन धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।*

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*ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि गुरु धन का कारक ग्रह है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है--*

*1.गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।*

*2.शाम के समय केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर लड्डू या बेसन की मिठाई अर्पित करें और लोगों में बांट दें।*

*3.गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के बाद केसर का तिलक लगाएं। अगर केसर उपलब्ध नहीं हो तब हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं।*

*4.गुरु का प्रभाव धन पर होता है। अगर कोई गुरुवार के दिन आपसे धन मांगने आता है तो लेन देने से बचें। गुरुवार को धन देने से आपका गुरु कमजोर हो जाता है, इससे आर्थिक परेशानी बढ़ती है।*

*5. रोज नही तो कम से कम गुरुवार के दिन माता पिता एवं गुरु का आशीर्वाद लें। इनका आशीर्वाद गुरु ग्रह का आशीर्वाद माना जाता है। इनकी प्रसन्नता के लिए पीले रंग के वस्त्र उपहार स्वरुप दें।*

*6.संध्या के समय गुरुवार के दिन लोबान की धूनी घर – व्यापार में देने से धन की आवक बढ़ती है ।*

*7.यदि शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से तीन गुरुवार तक गरीबों में मीठे तथा पीले चावल बांटे जाए तो शीघ्र ही धन लाभ होने लगेगा ।*

*8.यदि आपके आर्थिक कार्य सिद्ध होते – होते रुक जाते हों तो पीले सूत के धागे में सफ़ेद चन्दन के 1 टुकड़े को बांधकर किसी केले के पेड़ पर लटका आएं । शीघ्र ही इसका प्रभाव देखने को मिल जाएगा ।*
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Sunday, August 27, 2017

✡️ Third Eye - आज्ञा✡️



🌘आज्ञा चक्र मस्तक के मध्य में, भौंहों के बीच स्थित है। इस कारण इसे "तीसरा नेत्र” भी कहते हैं। आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केन्द्र है। यह मानव और दैवी चेतना के मध्य सीमा निर्धारित करता है।

🌘यह ३ प्रमुख नाडिय़ों, इडा (चंद्र नाड़ी) पिंगला (सूर्य नाड़ी) और सुषुम्ना (केन्द्रीय, मध्य नाड़ी) के मिलने का स्थान है। जब इन तीनों नाडिय़ों की ऊर्जा यहां मिलती है और आगे उठती है, तब हमें समाधि, सर्वोच्च चेतना प्राप्त होती है।

🌘इसका मंत्र है ॐ। आज्ञा चक्र का रंग सफेद है। इसका तत्व मन का तत्व, अनुपद तत्त्व है। इसका चिह्न एक श्वेत शिवलिंगम्, सृजनात्मक चेतना का प्रतीक है। इसमें और बाद के सभी चक्रों में कोई पशु चिह्न नहीं है। इस स्तर पर केवल शुद्ध मानव और दैवी गुण होते हैं।

🌘आज्ञा चक्र के प्रतीक चित्र में दो पंखुडिय़ों वाला एक कमल है जो इस बात का द्योतक है कि चेतना के इस स्तर पर 'केवल दो', आत्मा और परमात्मा (स्व और ईश्वर) ही हैं। आज्ञा चक्र की देव मूर्तियों में शिव और शक्ति एक ही रूप में संयुक्त हैं। इसका अर्थ है कि आज्ञा चक्र में चेतना और प्रकृति पहले ही संयुक्त है, किन्तु अभी भी वे पूर्ण ऐक्य में समाए नहीं हैं।

🌘इस चक्र के गुण हैं - एकता, शून्य, सत, चित्त और आनंद।

🌘 'ज्ञान नेत्र' भीतर खुलता है और हम आत्मा की वास्तविकता देखते हैं - इसलिए 'तीसरा नेत्र' का प्रयोग किया गया है जो भगवान शिव का द्योतक है। आज्ञा चक्र 'आंतरिक गुरू' की पीठ (स्थान) है। यह द्योतक है बुद्धि और ज्ञान का, जो सभी कार्यों में अनुभव किया जा सकता है। उच्चतर, नैतिक विवेक के तर्कयुक्त शक्ति के समक्ष अहंकार आधारित प्रतिभा समर्पण कर चुकी है। तथापि, इस चक्र में एक रुकावट का उल्टा प्रभाव है जो व्यक्ति की परिकल्पना और विवेक की शक्ति को कम करता है, जिसका परिणाम भ्रम होता है।
🌘🕉️🕉️🕉️🌒 चक्र ✡️

🌘आज्ञा चक्र मस्तक के मध्य में, भौंहों के बीच स्थित है। इस कारण इसे "तीसरा नेत्र” भी कहते हैं। आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केन्द्र है। यह मानव और दैवी चेतना के मध्य सीमा निर्धारित करता है।

🌘यह ३ प्रमुख नाडिय़ों, इडा (चंद्र नाड़ी) पिंगला (सूर्य नाड़ी) और सुषुम्ना (केन्द्रीय, मध्य नाड़ी) के मिलने का स्थान है। जब इन तीनों नाडिय़ों की ऊर्जा यहां मिलती है और आगे उठती है, तब हमें समाधि, सर्वोच्च चेतना प्राप्त होती है।

🌘इसका मंत्र है ॐ। आज्ञा चक्र का रंग सफेद है। इसका तत्व मन का तत्व, अनुपद तत्त्व है। इसका चिह्न एक श्वेत शिवलिंगम्, सृजनात्मक चेतना का प्रतीक है। इसमें और बाद के सभी चक्रों में कोई पशु चिह्न नहीं है। इस स्तर पर केवल शुद्ध मानव और दैवी गुण होते हैं।

🌘आज्ञा चक्र के प्रतीक चित्र में दो पंखुडिय़ों वाला एक कमल है जो इस बात का द्योतक है कि चेतना के इस स्तर पर 'केवल दो', आत्मा और परमात्मा (स्व और ईश्वर) ही हैं। आज्ञा चक्र की देव मूर्तियों में शिव और शक्ति एक ही रूप में संयुक्त हैं। इसका अर्थ है कि आज्ञा चक्र में चेतना और प्रकृति पहले ही संयुक्त है, किन्तु अभी भी वे पूर्ण ऐक्य में समाए नहीं हैं।

🌘इस चक्र के गुण हैं - एकता, शून्य, सत, चित्त और आनंद।

🌘 'ज्ञान नेत्र' भीतर खुलता है और हम आत्मा की वास्तविकता देखते हैं - इसलिए 'तीसरा नेत्र' का प्रयोग किया गया है जो भगवान शिव का द्योतक है। आज्ञा चक्र 'आंतरिक गुरू' की पीठ (स्थान) है। यह द्योतक है बुद्धि और ज्ञान का, जो सभी कार्यों में अनुभव किया जा सकता है। उच्चतर, नैतिक विवेक के तर्कयुक्त शक्ति के समक्ष अहंकार आधारित प्रतिभा समर्पण कर चुकी है। तथापि, इस चक्र में एक रुकावट का उल्टा प्रभाव है जो व्यक्ति की परिकल्पना और विवेक की शक्ति को कम करता है, जिसका परिणाम भ्रम होता है।
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*🌷आइये जाने उच्च तथा नीच राशि के ग्रह—🌷*






*ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों के मन में उच्च तथा नीच राशियों में स्थित ग्रहों को लेकर एक प्रबल धारणा बनी हुई है कि अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सदा शुभ फल देता है तथा अपनी नीच राशि में स्थित ग्रह सदा नीच फल देता है। उदाहरण के लिए शनि ग्रह को तुला राशि में स्थित होने से अतिरिक्त बल प्राप्त होता है तथा इसीलिए तुला राशि में स्थित शनि को उच्च का शनि कह कर संबोधित किया जाता है और अधिकतर ज्योतिषियों का यह मानना है कि तुला राशि में स्थित शनि कुंडली धारक के लिए सदा शुभ फलदायी होता है।*

*किंतु यह धारणा एक भ्रांति से अधिक कुछ नहीं है तथा इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है और इसी भ्रांति में विश्वास करके बहुत से ज्योतिष प्रेमी जीवन भर नुकसान उठाते रहते हैं क्योंकि उनकी कुंडली में तुला राशि में स्थित शनि वास्तव में अशुभ फलदायी होता हैतथा वे इसे शुभ फलदायी मानकर अपने जीवन में आ रही समस्याओं का कारण दूसरे ग्रहों में खोजते रहते हैं तथा अपनी कुंडली में स्थित अशुभ फलदायी शनि के अशुभ फलों में कमी लाने का कोई प्रयास तक नहीं करते। इस चर्चा को आगे बढ़ाने से पहले आइए एक नज़र में ग्रहों के उच्च तथा नीच राशियों में स्थित होने की स्थिति पर विचार कर लें।नवग्रहों में से प्रत्येक ग्रह को किसी एक राशि विशेष में स्थित होने से अतिरिक्त बल प्राप्त होता है जिसे इस ग्रह की उच्च की राशि कहा जाता है। इसी तरह अपनी उच्च की राशि से ठीक सातवीं राशि में स्थित होने पर प्रत्येक ग्रह के बल में कमी आ जाती है तथा इस राशि को इस ग्रह की नीच की राशि कहा जाता है। उदाहरण के लिए शनि ग्रह की उच्च की राशि तुला है तथा इस राशि से ठीक सातवीं राशि अर्थात मेष राशि शनि ग्रह की नीच की राशि है तथा मेष में स्थित होने से शनि ग्रह का बल क्षीण हो जाता है। इसी प्रकार हर एक ग्रह की 12 राशियों में से एक उच्च की राशि तथा एक नीच की राशि होती है।*

*किंतु यहां पर यह समझ लेना अति आवश्यक है कि किसी भी ग्रह के अपनी उच्च या नीच की राशि में स्थित होने का संबंध केवल उसके बलवान या बलहीन होने से होता है न कि उसके शुभ या अशुभ होने से। तुला में स्थित शनि भी कुंडली धारक को बहुत से अशुभ फल दे सकता है जबकि मेष राशि में स्थित नीच राशि का शनि भी कुंडली धारक को बहुतसे लाभ दे सकता है। इसलिए ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों को यह बात भली भांति समझ लेनी चाहिए कि उच्च या नीच राशि में स्थित होने का प्रभाव केवल ग्रह के बल पर पड़ता है न कि उसके स्वभाव पर। पारम्परिक भारतीय ज्योतिष कभी यह नहीं कहती कि उच्च का ग्रह हमेशा अच्छे परिणाम देगा और नीच का ग्रह हमेशा खराब परिणाम देगा। लेकिन हेमवंता नेमासा काटवे की मानें तो उच्च ग्रह हमेशा खराब परिणाम देंगे और नीच ग्रह अच्छे परिणाम देंगे। इसके पीछे उनका मंतव्य मुझे यह नजर आता है कि जब कोई ग्रह उच्च का होता है तो वह इतनी तीव्रता से परिणाम देता है कि व्यक्ति की जिंदगी में कर्मों से अधिक प्रभावी परिणाम देने लगता है। यानि व्यक्ति कोई एक काम करना चाहे और ग्रह उसे दूसरी ओर लेकर जाएं। इस तरह व्यक्ति की जिंदगी में संघर्ष बढ़ जाता है। इसी वजह से काटवे ने उच्च के ग्रहों को खराब कहा होगा।कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं जब नीच ग्रह उच्च का परिणाम देते हैं। यह मुख्य रूप से लग्न में बैठे नीच ग्रह के लिए कहा गया है। मैंने तुला लग्न में सूर्य और गुरू की युति अब तक चार बार देखी है।तुला लग्न में सूर्य नीच का हुआ और गुरू अकारक।अगर टर्मिनोलॉजी के अनुसार गणना की जाए तो सबसे निकृष्ट योग बनेगा। लेकिन ऐसा नहीं होता। लग्न में सूर्य उच्च का परिणाम देता है और वास्तव में देखा भी यही गया। लग्न में उच्च का सूर्य गुरू के साथ हो तो जातक अपने संस्थान में शीर्ष स्थान पर पहुंचता है॥*

*आइए कुछ तथ्यों की सहायता से इस विचार को समझने का प्रयास करते हैं। शनि नवग्रहों में सबसेधीमी गति से भ्रमण करते हैं तथा एक राशि में लगभग अढ़ाई वर्ष तक रहते हैं अर्थात शनि अपनी उच्च की राशि तुला तथा नीच की राशि मेष में भी अढ़ाई वर्ष तक लगातार स्थित रहते हैं। यदि ग्रहों के अपनी उच्च या नीच राशियों में स्थित होने से शुभ या अशुभ होने की प्रचलित धारणा को सत्य मान लिया जाए तो इसका अर्थ यह निकलता है कि शनि के तुला में स्थित रहने के अढ़ाई वर्ष के समय काल में जन्में प्रत्येक व्यक्ति के लिए शनि शुभ फलदायी होंगे क्योंकि इन वर्षों में जन्में सभी लोगों की जन्म कुंडली में शनि अपनी उच्च की राशि तुला में ही स्थित होंगे। यह विचार व्यवहारिकता की कसौटी पर बिलकुल भी नहीं टिकता क्योंकि देश तथा काल के हिसाब से हर ग्रह अपना स्वभाव थोड़े-थोड़े समय के पश्चात ही बदलता रहता है तथा किसी भी ग्रह का स्वभाव कुछ घंटों के लिए भी एक जैसा नहीं रहता,फिर अढ़ाई वर्ष तो बहुत लंबा समय है।*

*इसलिए ग्रहों के उच्च या नीच की राशि में स्थित होने का मतलब केवल उनके बलवान या बलहीन होने से समझना चाहिए न कि उनके शुभ या अशुभ होने से। मैने अपने ज्योतिष अभ्यास के कार्यकाल में ऐसी बहुत सी कुंडलियां देखी हैं जिनमें अपनी उच्च की राशि में स्थित कोई ग्रह बहुत अशुभ फल दे रहा होता है।क्योंकि अपनी उच्च की राशि में स्थित होने से ग्रह बहुत बलवान हो जाता है, इसलिए उसके अशुभ होने की स्थिति में वह अपने बलवान होने के कारण सामान्य से बहुत अधिक हानि करता है।इसी तरह मेरे अनुभव में ऐसीं भी बहुत सी कुंडलियां आयीं हैं जिनमें कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में स्थित होने पर भी स्वभाव से शुभ फल दे रहा होता है किन्तु बलहीन होने के कारण इन शुभ फलों में कुछ न कुछ कमी रह जाती है। ऐसे लोगों को अपनी कुंडली में नीच राशि में स्थित किन्तु शुभ फलदायी ग्रहों के रत्न धारण करने से बहुत लाभ होता है क्योंकि ऐसे ग्रहों के रत्न धारण करने से इन ग्रहों को अतिरिक्त बल मिलता है तथा यह ग्रह बलवान होकर अपने शुभ फलों में वृद्धि करने में सक्षम हो जाते हैं।हर ग्रह अपनी उच्च राशि में तीव्रता से परिणाम देता है और नीच राशि में मंदता के साथ। अगर वह ग्रह आपकी कुण्डली में अकारक है तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह उच्च का है या नीच का। सूर्य मेष में, चंद्र वृष में, बुध कन्या में,गुरू कर्क में, मंगल मकर में, शनि तुला में और शुक्र मीन राशि में उच्च के परिणाम देते हैं।यानि पूरी तीव्रता से परिणाम देते हैं।इसी तरह सूर्य तुला में, चंद्रमा वृश्चिक में, बुध मीन में, गुरू मकर में, मंगल कर्क में, शुक्र कन्या में और शनि मेष में नीच का परिणाम देते हैं।*

*अब हम ग्रह एवं राशियों के कुछ वर्गीकरण को जानेंगे जो कि फलित ज्योतिष के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।पहला वर्गीकरण शुभ ग्रह और पाप ग्रह का इस प्रकार है -*

*शुभ ग्रह: चन्द्रमा, बुध, शुक्र, गुरू हैं॥*

*पापी ग्रह: सूर्य, मंगल, शनि, राहु, केतु हैं।*

*साधारणत चन्द्र एवं बुध को सदैव ही शुभ नहीं गिना जाता। पूर्ण चन्द्र अर्थात पूर्णिमा के पास का चन्द्र शुभ एवं अमावस्या के पास का चन्द्र शुभ नहीं गिना जाता। इसी प्रकार बुध अगर शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ होता है और यदि पापी ग्रह के साथ हो तो पापी हो जाता है।यह ध्यान रखने वाली बात है कि सभी पापी ग्रह सदैव ही बुरा फल नहीं देते। न ही सभी शुभ ग्रह सदैव ही शुभ फल देते हैं। अच्छा या बुरा फल कई अन्य बातों जैसे ग्रह का स्वामित्व, ग्रह की राशि स्थिति,दृष्टियों इत्यादि पर भी निर्भर करता है।जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।जैसा कि उपर कहा गया एक ग्रह का अच्छा या बुरा फल कई अन्य बातों पर निर्भर करता है और उनमें से एक है ग्रह की राशि में स्थिति। कोई भी ग्रह सामान्यत अपनी उच्च राशि, मित्र राशि, एवं खुद की राशि में अच्छा फल देते हैं। इसके विपरीत ग्रह अपनी नीच राशि और शत्रु राशि में बुरा फल देते हैं।*

*ग्रहों की उच्चादि राशि स्थिति इस प्रकार है —-*

*ग्रह                    उच्च राशि                   नीच राशि                 स्वग्रह राशि*
*1                       सूर्य,मेष                      तुला                          सिंह*
*2                       चन्द्रमा,वृषभ             वृश्चिक                        कर्क*
*3                       मंगल, मकर               कर्क                     मेष, वृश्चिक*
*4                       बुध, कन्या                 मीन                    मिथुन, कन्या*
*5                       गुरू, कर्क                 मकर                    धनु, मीन*
*6                       शुक्र, मीन                 कन्या                  वृषभ, तुला*
*7                       शनि, तुला                मेष                     मकर, कुम्भ*
*8                        राहु,                        धनु                        मिथुन*
*9                        केतु                       मिथुन                        धनु*

*उपर की तालिका में कुछ ध्यान देने वाले बिन्दु इस प्रकार हैं -1 ग्रह की उच्च राशि और नीच राशि एक दूसरे से सप्तम होती हैं। उदाहरणार्थ सूर्य मेष में उच्च का होता है जो कि राशि चक्र की पहली राशि है और तुला में नीच होता है जो कि राशि चक्र की सातवीं राशि है।2 सूर्य और चन्द्र सिर्फ एक राशि के स्वामी हैं।*

*राहु एवं केतु किसी भी राशि के स्वामी नहीं हैं। अन्य ग्रह दो-दो राशियों के स्वामी हैं।3 राहु एवं केतु की अपनी कोई राशि नहीं होती। राहु-केतु की उच्च एवं नीच राशियां भी सभी ज्योतिषी प्रयोग नहीं करते हैं।*

*सभी ग्रहों के बलाबल का राशि और अंशों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। एक राशि में 30ए अंश होते हैं।ग्रहों के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए ग्रह किस राशि में कितने अंश पर है यह ज्ञान होना अनिवार्य है।सभी नौ ग्रहों की स्थिति का विश्लेषणइस प्रकार है-*

*सूर्य- सूर्य सिंह राशि में स्वग्रही होता है। 1ए से 10ए अंश तक उच्च का माना जाता है। तुला के 10ए अंश तक नीच का होता है। 1ए से 20ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ माना जाता है। सिंह में ही 21ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री होता है।*

*चंद्र- कर्क राशि मेंचंद्रमा स्वग्रही अथवा स्वक्षेत्री माना जाता है,परन्तु वृष राशि में 3ए अंश तक उच्च का और वृश्चिक राशि में 3ए अंश तक नीच का होता है। वृष राशि में ही 4ए से 30ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ तथा कर्क राशि में 1ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है।*

*मंगल- मंगल मेष तथा वृश्चिक राशियों में स्वग्रही होता है। मकर राशि में 1ए से 28ए अंश तक उच्च का तथा कर्क राशि में 1ए से 28ए अंश तक नीच का माना जाता है। मेष राशि में 1ए से 18ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ होता है और 19ए से 20ए अंश तक स्वक्षेत्री कहा जाता है।*

*बुध- बुध ग्रह कन्या और मिथुन राशियों में स्वग्रही होता है परंतु कन्या राशि में 15ए अंश तक उच्च का और मीन राशि में 15ए अंश तक नीच का होता है। कन्या राशि में ही 16ए से 20ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ और इसी राशि में 21ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री कहलाता है।*

*गुरू- गुरू धनु और मीन राशियों में स्वग्रही या स्वक्षेत्री होता है।कर्क राशि में 5ए अंश तक उच्च का और मकर राशि में 5ए अंश तक नीच का होता है। 1ए से 10ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ तथा धनु राशि में ही 14ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री माना जाता है।*

*शुक्र- शुक्र ग्रह अपनी दो राशियों वृष और तुला में स्वग्रही होता है। मीन राशि में 27ए अंश तक उच्च का और कन्या राशि में 27ए अंश तक नीच का होता है। तुला राशि में 1ए से 10ए अंश तक मूल त्रिकोणस्थ और उसी राशि में 11ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री होता है।*

*शनि- शनि अपनी दो राशियों कुंभ और मकर में स्वग्रही होता है। तुला में 1ए से 20ए अंश तक उच्च का और मेष में 20ए अंश तक नीच का होता है। कुंभ राशि में ही शनि 1ए से 20ए अंश तक मूल त्रिकोण का होता है। उसके बाद 21ए से 30ए अंश तक स्वक्षेत्री होता है।*

*राहू- कन्या राशि का स्वामी मिथुन और वृष में उच्च का होता है। धनु में नीच का कर्क में मूल त्रिकोस्थ माना जाता है।*

*केतु- केतु मिथुन राशि का स्वामी है। 15ए अंश तक धनु और वृश्चिक राशि में उच्च का होता है। 15ए अंश तक मिथुन राशि में नीच का, सिंह राशि में मूल त्रिकोण का और मीन में स्वक्षेत्री होता है।वृष राशि में ही यह नीच का होता है।*

*जन्म कुंडली का विश्लेषण अंशों के आधार पर करने पर ही ग्रहों के वास्तविक बलाबल को ज्ञात किया जाता है। उदाहरण के लिए सिंह लग्न की जन्म कुंडली में सूर्य लग्न में बैठे होने से वह स्वग्रही है। यह जातक को मान सम्मान, धनधान्य बचपन से दिला रहा है। दशम भाव में वृष का चंद्रमा होने से जातक उत्तरोत्तर उन्नति करता रहेगा। अत: यह दो ग्रह ही उसके भाग्यवर्धक होंगे।*

*नीच भंग राज योग —–ग्रह अगर नीच राशि में बैठा हो या शत्रु भाव में तो आम धारणा यह होती है कि जब उस ग्रह की दशा आएगी तब वह जिस घर में बैठा है उस घर से सम्बन्धित विषयों में नीच का फल देगा. लेकिन इस धारणा से अगल एक मान्यता यह है कि नीच में बैठा ग्रह भी कुछ स्थितियों में राजगयोग के समान फल देता है. इस प्रकार के योग को नीच भंग राजयोग के नाम से जाना जाता है.*

*नीच भंग राजयोग के लिए आवश्यक स्थितियां——ज्योतिषशास्त्र के नियमों में बताया गया है कि नवमांश कुण्डली में अगर ग्रह उच्च राशि में बैठा हो तो जन्म कुण्डली में नीच राशि में होते हुए भी वह नीच का फल नहीं देता है. इसका कारण यह है कि इस स्थिति में उनका नीच भंग हो जाता है.जिस राशि में नीच ग्रह बैठा हो उस राशि का स्वामी ग्रह उसे देख रहा हो अथवा जिस राशि में ग्रह नीच होकर बैठा हो उस राशि का स्वामी स्वगृही होकर साथ में बैठा हो तो स्वत: ही ग्रह का नीच भंग हो जाता है।*

 *नीच भंग के संदर्भ में एक नियम यह भी है कि नीच राशि में बैठा ग्रह अगर अपने सामने वाले घर यानी अपने से सातवें भाव में बैठे नीच ग्रह को देख रहा है,तो दोनों नीच ग्रहों का नीच भंग हो जाता है.अगर आपकी कुण्डली में ये स्थितियां नहीं बनती हों तो इन नियमों से भी नीच भंग का आंकलन कर सकते हैं जैसे जिस राशि में ग्रह नीच होकर बैठे हों उस राशि के स्वामी अपनी उच्च राशि में विराजमान हों तो नीच ग्रह का दोष नहीं लगता है।*

*एक नियम यह भी है कि जिस राशि में ग्रह नीच का होकर बैठा है उस ग्रह का स्वामी जन्म राशि से केन्द्र में विराजमान है साथ ही जिस राशि में नीच ग्रह उच्च का होता है उस राशि का स्वामी भी केन्द्र में बैठा हो तो सर्वथा नीच भंग राज योग बनता है. अगर यह स्थिति नहीं बनती है तो लग्न भी इस का आंकलन किया जा सकता है।यानी जिस राशि में ग्रह नीच होकर बैठा उस राशि का स्वामी एवं जिस राशि में नीच ग्रह उच्च का होता है।उसका स्वामी लग्न से कहीं भी केन्द्र में स्थित हों तो नीच भंग राज योग का शुभ फल देता है.अगर आपकी कुण्डली में ग्रह नीच राशियों में बैठे हैं तो इन स्थितियों को देखकर आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि आपकी कुण्डली में नीच राशि में बैठा ग्रह नीच का फल देगा अथवा यह नीच भंग राजयोग बनकर आपको अत्यंत शुभ फल प्रदान करेगा.*

*नीच भंग राजयोग का फल—–नीच भंग राज योग कुण्डली में एक से अधिक होने पर भी उसी प्रकार फल देता है जैसे एक नीच भंग राज योग होने पर .आधुनिक परिवेश में ज्योतिषशास्त्री मानते है कि ऐसा नहीं है कि इस योग के होने से व्यक्ति जन्म से ही राजा बनकर पैदा लेता है. यह योग जिनकी कुण्डली में बनता है उन्हें प्रारम्भ में कुछ मुश्किल हालातों से गुजरना पड़ता है जिससे उनका ज्ञान व अनुभव बढ़ता है तथा कई ऐसे अवसर मिलते हैं जिनसे उम्र के साथ-साथ कामयाबी की राहें प्रशस्त होती जाती हैं.यह योग व्यक्ति को आमतौर पर राजनेता, चिकित्सा विज्ञान एवं धार्मिक क्षेत्रों में कामयाबी दिलाता है जिससे व्यक्ति को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा मिलती है. वैसे इस योग के विषय में यह धारणा भी है कि जिस व्यक्ति की कुण्डली में जिस राशि में ग्रह नीच होकर बैठा है उस राशि का स्वामी एवं उस ग्रह की उच्च राशि का स्वामी केन्द्र स्थान या त्रिकोण में बैठा हो तो व्यक्ति महान र्धमात्मा एवं राजसी सुखों को भोगने वाला होता है.इसी प्रकार नवमांश में नीच ग्रह उच्च राशि में होने पर भी समान फल मिलता है.*
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Thursday, August 24, 2017

*🌷गणेश चतुर्थी🌷*





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*अमृत योग में आएगी गणेश चतुर्थी*

*1. अमृत योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से रात्रि 08:32 तक*

*2. रवि योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से दोपहर 02:35 तक*

*25 अगस्त 2017 को मनाई जाएगी महागणपति चतुर्थी एवं कलंक चतुर्थी*

*(चंद्र दर्शन नहीं करे)*

*नोट : रात्रि 09 बजकर 18 मिनट तक चन्द्रदर्शन नहीं करे क्योंकि इस दिन कलंकचौथ है, मान्यता के अनुसार जो भी इस दिन चंद्र का दर्शन करता है, उस पर कोई न कोई कलंक अवश्य  लगता है।*

*गणेश पूजन का समय :- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी दिनाङ्क 25 अगस्त 2017 को चतुर्थी तिथि रात्रि 08:31 तक रहेगी। अत: 25 अगस्त को चतुर्थी चन्द्रोदव्यापिनी होने से महागणपति चतुर्थी (गणेशचौथ) इसी दिन मनायी जाएगी। गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय - चर का चौघडिय़ा प्रात: 06:05 से प्रात: 07:42 तक रहेगा। लाभ का चौघडिय़ा प्रात: 07:42 से प्रात: 09:17 तक, अमृत का चौघडिय़ा प्रात: 09:17 से प्रात: 10:53 तक, शुभ का चौघडिय़ा दोपहर 12:28 से दोपहर 02:04 तक, चर का चौघडिय़ा सायं 05:15 से सायं 06:51 तक तथा अभिजित दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक रहेगा।*

*गणेश चतुर्थी पूजा विधि :- नारद पुराण के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को विनायक व्रत करना चाहिए। यह व्रत करने कुछ प्रमुख नियम निम्न हैं:*

*इस व्रत में आवाहन, प्रतिष्ठापन, आसन समर्पण, दीप दर्शन आदि द्वारा गणेश पूजन करना चाहिए।*

*पूजा में दूर्वा अवश्य शामिल करें।*

*गणेश जी के विभिन्न नामों से उनकी आराधना करनी चाहिए।*

*नैवेद्य के रूप में पांच लड्डू रखें।*

*इस दिन रात के समय चन्द्रमा की तरफ नहीं देखना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि इसे देखने पर झूठे आरोप झेलने पड़ते हैं।*

*अगर रात के समय चन्द्रमा दिख जाए तो उसकी शांति के लिए पूजा करानी चाहिए।*

*हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न बाधाओं को दूर करने वाले, कृपा के सागर तथा भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का आविर्भाव हुआ था।*

*गणेश चतुर्थी पर्व 2017*

*भगवान विनायक के जन्मदिवस पर मनाया जानेवाला यह महापर्व महाराष्ट्र सहित भारत के सभी राज्यों में हर्षोल्लास पूर्वक और भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 25 अगस्त के दिन मनाया जाएगा।*

*गणेश चतुर्थी की कथा*

*कथानुसार एक बार मां पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसका नाम गणेश रखा। फिर उसे अपना द्वारपाल बना कर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गई। थोड़ी देर बाद भगवान शिव आए और द्वार के अन्दर प्रवेश करना चाहा तो गणेश ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया। इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश के सिर को काट दिया और द्वार के अन्दर चले गए। जब मां पार्वती ने पुत्र गणेश जी का कटा हुआ सिर देखा तो अत्यंत क्रोधित हो गई। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं ने उनकी स्तुति कर उनको शांत किया और भोलेनाथ से बालक गणेश को जिंदा करने का अनुरोध किया। महामृत्युंजय रुद्र उनके अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को श्री गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।*

*गणेश चतुर्थी पूजा विधि*

*इस महापर्व पर लोग प्रातः काल उठकर सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से उनका पूजन करते हैं। पूजन के पश्चात् नीची नज़र से चंद्रमा को अर्घ्य देकर ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं। इस पूजा में गणपति को 21 लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है। मान्यता के अनुसार इन दिन चंद्रमा की तरफ नही देखना चाहिए।*

*अंगारकी चतुर्थी पूजन*

*गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य एवं विध्न विनाशक है. श्री गणेश जी बुद्धि के देवता है, इनका उपवास रखने से मनोकामना की पूर्ति के साथ साथ बुद्धि का विकास व कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है. श्री गणेश को चतुर्थी तिथि बेहद प्रिय है, व्रत करने वाले व्यक्ति को इस तिथि के दिन प्रात: काल में ही स्नान व अन्य क्रियाओं से निवृत होना चाहिए. इसके पश्चात उपवास का संकल्प लेना चाहिए. संकल्प लेने के लिये हाथ में जल व दूर्वा लेकर गणपति का ध्यान करते हुए, संकल्प में यह मंत्र बोलना चाहिए "मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये"*

*इसके पश्चात सोने या तांबे या मिट्टी से बनी प्रतिमा चाहिए. इस प्रतिमा को कलश में जल भरकर, कलश के मुँह पर कोरा कपडा बांधकर, इसके ऊपर प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. पूरा दिन निराहार रहते हैं. संध्या समय में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है. रात्रि में चन्द्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्ध्य दिया जाता है.*
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9472998128.. चतुर्थी🌷*

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*अमृत योग में आएगी गणेश चतुर्थी*

*1. अमृत योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से रात्रि 08:32 तक*

*2. रवि योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से दोपहर 02:35 तक*

*25 अगस्त 2017 को मनाई जाएगी महागणपति चतुर्थी एवं कलंक चतुर्थी*

*(चंद्र दर्शन नहीं करे)*

*नोट : रात्रि 09 बजकर 18 मिनट तक चन्द्रदर्शन नहीं करे क्योंकि इस दिन कलंकचौथ है, मान्यता के अनुसार जो भी इस दिन चंद्र का दर्शन करता है, उस पर कोई न कोई कलंक अवश्य  लगता है।*

*गणेश पूजन का समय :- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी दिनाङ्क 25 अगस्त 2017 को चतुर्थी तिथि रात्रि 08:31 तक रहेगी। अत: 25 अगस्त को चतुर्थी चन्द्रोदव्यापिनी होने से महागणपति चतुर्थी (गणेशचौथ) इसी दिन मनायी जाएगी। गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय - चर का चौघडिय़ा प्रात: 06:05 से प्रात: 07:42 तक रहेगा। लाभ का चौघडिय़ा प्रात: 07:42 से प्रात: 09:17 तक, अमृत का चौघडिय़ा प्रात: 09:17 से प्रात: 10:53 तक, शुभ का चौघडिय़ा दोपहर 12:28 से दोपहर 02:04 तक, चर का चौघडिय़ा सायं 05:15 से सायं 06:51 तक तथा अभिजित दोपहर 12:05 से दोपहर 12:53 तक रहेगा।*

*गणेश चतुर्थी पूजा विधि :- नारद पुराण के अनुसार भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को विनायक व्रत करना चाहिए। यह व्रत करने कुछ प्रमुख नियम निम्न हैं:*

*इस व्रत में आवाहन, प्रतिष्ठापन, आसन समर्पण, दीप दर्शन आदि द्वारा गणेश पूजन करना चाहिए।*

*पूजा में दूर्वा अवश्य शामिल करें।*

*गणेश जी के विभिन्न नामों से उनकी आराधना करनी चाहिए।*

*नैवेद्य के रूप में पांच लड्डू रखें।*

*इस दिन रात के समय चन्द्रमा की तरफ नहीं देखना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि इसे देखने पर झूठे आरोप झेलने पड़ते हैं।*

*अगर रात के समय चन्द्रमा दिख जाए तो उसकी शांति के लिए पूजा करानी चाहिए।*

*हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल चतुर्थी को हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी दिन समस्त विघ्न बाधाओं को दूर करने वाले, कृपा के सागर तथा भगवान शंकर और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश जी का आविर्भाव हुआ था।*

*गणेश चतुर्थी पर्व 2017*

*भगवान विनायक के जन्मदिवस पर मनाया जानेवाला यह महापर्व महाराष्ट्र सहित भारत के सभी राज्यों में हर्षोल्लास पूर्वक और भव्य तरीके से आयोजित किया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 25 अगस्त के दिन मनाया जाएगा।*

*गणेश चतुर्थी की कथा*

*कथानुसार एक बार मां पार्वती स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक सुंदर बालक को उत्पन्न किया और उसका नाम गणेश रखा। फिर उसे अपना द्वारपाल बना कर दरवाजे पर पहरा देने का आदेश देकर स्नान करने चली गई। थोड़ी देर बाद भगवान शिव आए और द्वार के अन्दर प्रवेश करना चाहा तो गणेश ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया। इसपर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश के सिर को काट दिया और द्वार के अन्दर चले गए। जब मां पार्वती ने पुत्र गणेश जी का कटा हुआ सिर देखा तो अत्यंत क्रोधित हो गई। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं ने उनकी स्तुति कर उनको शांत किया और भोलेनाथ से बालक गणेश को जिंदा करने का अनुरोध किया। महामृत्युंजय रुद्र उनके अनुरोध को स्वीकारते हुए एक गज के कटे हुए मस्तक को श्री गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।*

*गणेश चतुर्थी पूजा विधि*

*इस महापर्व पर लोग प्रातः काल उठकर सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से उनका पूजन करते हैं। पूजन के पश्चात् नीची नज़र से चंद्रमा को अर्घ्य देकर ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं। इस पूजा में गणपति को 21 लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है। मान्यता के अनुसार इन दिन चंद्रमा की तरफ नही देखना चाहिए।*

*अंगारकी चतुर्थी पूजन*

*गणेश को सभी देवताओं में प्रथम पूज्य एवं विध्न विनाशक है. श्री गणेश जी बुद्धि के देवता है, इनका उपवास रखने से मनोकामना की पूर्ति के साथ साथ बुद्धि का विकास व कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है. श्री गणेश को चतुर्थी तिथि बेहद प्रिय है, व्रत करने वाले व्यक्ति को इस तिथि के दिन प्रात: काल में ही स्नान व अन्य क्रियाओं से निवृत होना चाहिए. इसके पश्चात उपवास का संकल्प लेना चाहिए. संकल्प लेने के लिये हाथ में जल व दूर्वा लेकर गणपति का ध्यान करते हुए, संकल्प में यह मंत्र बोलना चाहिए "मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये"*

*इसके पश्चात सोने या तांबे या मिट्टी से बनी प्रतिमा चाहिए. इस प्रतिमा को कलश में जल भरकर, कलश के मुँह पर कोरा कपडा बांधकर, इसके ऊपर प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. पूरा दिन निराहार रहते हैं. संध्या समय में पूरे विधि-विधान से गणेश जी की पूजा की जाती है. रात्रि में चन्द्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्ध्य दिया जाता है.*
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Monday, August 21, 2017

राहु मंगल का विध्वंसक योग

10 दिन हो जाइये सावधान बन रहा है राहु मंगल का विध्वंसक योग


राहु-मंगल-का-विध्वंसक-योग
राहु-मंगल-का-विध्वंसक-योग

राहु मंगल का विध्वंसक योग


(दस दिन के लिए रहे ये चार राशि वाले सावधान)


बीते डेढ़ वर्ष से राहु सिंह राशि में गोचर कर रहा था जो की अब 18 अगस्त 2017 को राशि परिवर्तन कर कर्क राशि में प्रवेश कर गया है।


18 अगस्त को प्रातः राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है राहु का राशि परिवर्तन करना तो ज्योतिषीय गणनाओं में बहुत महत्वपूर्ण घटना होती ही है पर यहाँ जो एक विशेष स्थिति बन रही है।

◆ वो यह है के 18 अगस्त को राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है तथा मंगल पहले से ही अपनी नीच राशि कर्क में गोचर कर रहा है जिससे 18 अगस्त को राहु के कर्क में प्रवेश करते ही कर्क राशि में राहु और मंगल की युति बन गयी है जो की 27 अगस्त तक बनी रहेगी 27 अगस्त को मंगल के सिंह राशि में आने पर राहु मंगल का नकारात्मक योग समाप्त होगा।

◆ राहु मंगल के योग को ज्योतिष में एक विध्वंसकारी और नकारात्मक योग माना गया है, मंगल और राहु दोनों ही क्रोधी प्रवृति और उठा पटक कराने वाले ग्रह हैं।

◆ मंगल को दुर्घटना, एक्सीडेंट्स, वाद विवाद, क्रोध, आर्ग्यूमेंट्स, अग्निदुर्घटना आदि का कारक माना गया है तथा राहु आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, षड़यंत्र, मतिभ्रम आदि का कारक है इसलिए राहु और मंगल का योग बनने पर दुर्घटनाओं और वाद विविद की घटनाओं में वृद्धि होती है और उठा पटक का वातावरण उत्पन्न होता है।

◆ 18 अगस्त से 27 अगस्त के बीच दस दिनों के लिए कर्क राशि में राहु और मंगल का योग बनने से इस दस दिनों में सड़क दुर्घटना, अग्नि दुर्घटना, वाद विवाद, आर्ग्यूमेंट्स में वृद्धि होगी और वातावरण में तथा आम मानस के व्यव्हार में भी क्रोध बढ़ेगा।
असमसजिक तत्वों द्वारा अशांति उत्पन्न करना और आतंकवादी घटनाओं की भी सम्भावना होगी, इस लिए 18 अगस्त से 27 अगस्त तक के दस दिनों में कुछ विशेष सावधानियां बरतें।

◆ सबसे पहले तो, अपने व्यवाहर पर नियंत्रण रखें आर्ग्युमेंट्स को एवॉइड करें, और विवादों से बचें।

◆ कोई भी वाहन चलाते समय विशेष सावधानी रखें |

◆ विरोधियों के प्रति सचेत रहें।

◆ प्रॉपर्टी आदि की खरीददारी या लेनदेन इन दस दिनों में न करें।

◆ और विशेष रूप से अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें तथा व्यर्थ के विवादों से बचें।

इन राशियों के व्यक्ति रखे विशेष सावधानी –


◆ राहु मंगल के इस दस दिन के योग का नकारात्मक प्रभाव वैसे तो सभी को प्रभावित करेगा पर विशेष रूप से मेष, कर्क, सिंह और धनु राशि के व्यक्तियों के लिए यह ग्रहस्थिति अधिक समस्याकारक होगी, और इसमें भी बहुत विशेष रूप से कर्क और धनु राशि वालो के लिए यह योग सर्वाधिक संघर्षकारी होगा

◆ क्योंकि राहु मंगल का यह योग कर्क राशि में ही बन रहा है जिससे यह राशि सर्वाधिक प्रभावित होगी इसके अलावा यह योग धनु से आठवीं राशि में बनने के कारक धनु राशि के जातकों के लिए भी यह अधिक कष्टकारक है।

◆ मेष राशि के जातकों के लिए विशेषतः गृहक्लेश और पारिवारिक विवाद उत्पन्न होंगे, इसलिए आर्ग्यूमेंट्स से बचें और विवादों को बड़ा रूप ना दें। कर्क राशि के जातकों के लिए उनके क्रोध में वृद्धि होगी और स्वास्थ में उतार चढ़ाव आएगा इसलिए अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ समस्याओं के प्रति सचेत रहें।

◆ सिंह राशि के जातकों के लिए धन खर्च बढ़ेगा, धन हानि की सम्भावना होगी इसलिए इस समय में आर्थिक लेनदेन में विशेष सावधानी बरतें।

◆ धनु राशि के जातकों के लिए स्वास्थ समस्याएं, एक्सीडेंट या चोट आदि की सम्भावना होगी इसलिए धनु राशि के व्यक्ति विशेष रूप से वाहन चलाने में सावधानी रखें और विवादों से बचें।

अपनी राशि के अनुसार रखें ये सावधानी –


मेष राशि – गृहकलेश और पारिवारिक विवाद से बचें।
वृष राशि – छोटे भाई बहनो से बहस करने से बचें।
मिथुन राशि – आर्थिक लेनदन में सावधानी और वाणी पर नियंत्रण रखें।
कर्क राशि – अपने क्रोध को नियंत्रित रखें, व्यव्हार में संयम बरतें।
सिंह राशि – आर्थिक लेनदेन में सावधानी रखें, व्यर्थ धन खर्च से बचें।
कन्या राशि – बड़े भाई बहनो से बहस करने से बचें।
तुला राशि – ऑफिस में सीनियर्स और बोस से आर्ग्यूमेंट्स करने से बचें।
वृश्चिक राशि – महत्वपूर्ण कार्यो और निर्णयों में सावधानी बरतें।
धनु राशि – वाहन चलाने में सावधानी रखें।
मकर राशि – वैवाहिक जीवन में विवाद करने से बचें।
कुम्भ राशि – विरोधियों से सचेत रखें।
मीन राशि – संतान पक्ष के साथ बहस से बचें, शेयर आदि में इन्वेस्ट न करें।

मित्रो, राहु मंगल योग के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए सहायक होंगे ये उपायः


★ हनुमान चालीसा और संकट मोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें।
★ साबुत उड़द का दान करें।
★ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

धन लाभ विचार

                            || ॐ ||
धनेश (व्दितीय भाव का अधिपति) यदि धन स्थान (व्दितीय भाव) में हो अथवा केंद्र (१, ४, ७, १०) भाव में हो तो जातक को “श्रम से सफलता” (शारीरिक / मानसिक श्रम) मिलती हैं तथा धन लाभ होता हैं |

धन भाव में शुभ ग्रह धनप्रद (धन प्रदान करने वाले) तथा धन भाव में पाप ग्रह धन नाशक (धन हनी करने वाले) होते हैं | यदि धन स्थान पर शुभ ग्रह की दृष्टी या योग हो तब भी जातक को धन लाभ होता रहता हैं |

धनवान योग :-
धनेश यदि लाभ भाव (एकादश भाव) या लाभेश धन स्थान में हो अथवा धनेश तथा लाभेश (एकादश भाव अधिपति) दोनों ही केंद्र अथवा त्रिकोण (१, ४, ५, ७, ९, १०) में स्थित हो तो मनुष्य धनवान होता हैं |

व्यय योग :-
यदि धनेश त्रिक भाव (६, ८, १२) में स्थित हो तो जातक को आवक से ज्यादा खर्च की चिंता सताती हैं |

|| ॐ तत् सत् ||
जय श्री नारायण
  पँ अभिषेक कुमार
     9472998128

Sunday, August 20, 2017

सूर्य ग्रहण

                        जय श्री नारायण

मित्रो नमस्कार 21,22/8/2017 को सूर्य ग्रहण है। और मेरे जिन मित्रो की जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण मतलब जिन की कुंडली में सूर्य और राहू एक साथ एक ही घर में बैठे हों या जिनकी कुंडली में राहू की दृष्टी सूर्य देव पर जाती हो उन मित्रो के लिए उपाय करने का सही समय है। मित्रो 21,22/8/2017 तारीख को 23:51 मिनट पर सूर्य ग्रहण का उपाय करने का सही समय है तो कृपया आप उपाय करके अपने बुरे समय को ठीक करें। करना इये है राहू का सामान जैसे नारियल साबुत बादाम आदि ग्रहण के मध्य काल जोकि कल 23:51 मिनट पर है सिर से 7 बार उसार कर तेज बहते पानी में जल प्रबाह कर दें।
अब में आपको सूर्य ग्रहण बाले जातकों को होने बाली परेसानियां बताता हूँ।
इस पोस्ट से में आज आप लोगों से कुछ कुंडलियों में पाये जाने बाले बुरे योगों में से एक सूर्य ग्रहण नामक बुरे योग के बारे में बताऊंगा ।
जब किसी की जन्म कुंडली में सूर्य देव के साथ राहु एक ही घर में बैठ जाएँ या राहू की दृष्टि सूर्य देव के ऊपर पड़ रही हो तो सूर्य ग्रहण नाम का बुरा योग बन जाता है।
इस बुरे योग के कारण व्यकित को बहुत सी परेसानियों से दो चार होना पड़ता है।
जैसे जातक का मन किसी भी काम में लंबे समय तक नहीं लगता। इरिटेस्न फीलिंग चिढ़ चिड़ा सवभाव हो जाना। कोई भी काम टिक के ना कर पाना।
काम काज या नौकरी का बार बार बदलना।
उसके पिता को भी अपनी मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता। पिता के जीवन काल में अनेक परेशनियां । उनको तरक्की ना मिलना। ऐसे व्यकित के अपने पिता से सम्बंध भी ज्यादा मधुर नहीं हो पाते। उस जातक की उम्र जब 22 और 23 साल की होती है तब पिता के जीवन में अनेक प्रकार के म्रत्यु तुल्य कष्ट होते हैं। साथ ही वैचारिक मतभेद बने रहते हैं।
ऐसे व्यकित को सरकार से भी कोई लाभ नहीं मिलता बल्कि सरकार से सम्मन या नोटिस मिलते हैं। जिस कारण जातक सरकार से भी परेसान रहता है।
मित्रो इस योग या ऐसे ही अन्य बुरे योगों से घवराने की कोई जरूरत ना है। किउंकि लाल किताब जियोतिश है। जिसके सटीक उपाय कारगर हैं।जिनको करने से बुरे ग्रहों के बुरे प्रभाव से आसानी से बचा जा सकता है और अच्छी जिंदगी गुजारी जा सकती है। लाल किताब के उपाय बहुत ही आसान और कम खर्चीले होते हैं। जिनको कोई भी व्यक्ति बिना किसी की सहायता के आसानी से कर सकता है।
मित्रो में professionall astrologer हूँ। अपना पूरा समय लाल किताब जियोतिष् को ही देता हूँ। fb पर इतने से ज्यादा की उम्मीद ना करें।
आप लाल किताब जियोतिश के अनुसार अपनी कुण्डली पर पूरी विवेचना उपाय के साथ मुझसे करबाना चाहते हों या लाल किताब जियोतिश सीखने के इच्छुक हों तो मुझसे सम्पर्क करें।
मित्रो अब हमारे कार्यालय में online सुविधा भी उपलब्ध है। अगर आप मेरे कार्यालय में आने में असमर्थ हैं तो इस सुविधा का लाभ जरूर उठायें।
सोजन्य से
एस्ट्रो परामर्श
पँ अभिषेक कुमार
whatsapp 9472998128

Thursday, August 17, 2017

*💥आज का राशिफल💥*



                        *💥सुप्रभातम्💥*

*दिनांक 18 अगस्त 2017, शुक्रवार, विक्रमी संवत 2074, शक संवत 1939, वर्षा ऋतु, दक्षिणायण अयन, भाद्रपद मास,  एकादशी तिथि(10:01 तक। 10:02 से द्वादशी तिथि चालू), कृष्ण पक्ष,आद्रा नक्षत्र, वज्र योग।*

        *👹राहुकाल👹*

*💥10:47 से 12:24💥*

*❌राहुकाल में सभी कार्य वर्जित हैं।❌*

        *💥 नोट💥*

*👉राशिफल पड़ने के बाद आगे शेयर करें। आप जैसे किसी मित्र का मार्गदर्शन होगा।*

     *🌞सुर्योदय-06:19🌞*
     *🌝सूर्यास्त-19:05🌝*

*💥हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।राम रामेति रामेति।रमे रामें मनोरमे॥ सहस्त्र नाम त तुल्यं। राम नाम वरानने।।आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्त्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है।*

*💥आज एकादशी और गुरुवार को बाल नही कटवाने चाहिये।*

*💥एकादशी के दिन चावल और साबूदाना खाना वर्जित है।एकादशी को शिम्बी (सेम) नही खाना चाहिये।*

 *🐑मेष-आज के दिन किए गए दान-पुण्य के काम आपको मानसिक शान्ति और सुकून देंगे। दिन बहुत लाभदायक नहीं है- इसलिए अपनी जेब पर नज़र रखें और ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्चा न करें। घरेलू मामलों पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। आपकी ओर से की गयी लापरावाही महंगी साबित हो सकती है। आपको अपने प्रिय को ख़ुद के हालात समझाने में दिक़्क़त महसूस होगी। दूसरों को ऐसा काम करने के लिए बाध्य न करें, जो आप स्वयं न करना चाहें। आप जिस प्रतियोगिता में भी क़दम रखेंगे, आपका प्रतिस्पर्धी स्वभाव आपको जीत दिलाने में सहयोग देगा। जीवनसाथी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें रखना आपको वैवाहिक जीवन में उदासी की तरफ़ ले जा सकता है।*

 *🐂वृष-किसी सज्जन पुरुष की दैवीय बातें आपको संतोष और ढांढस बंधाएंगी। आज निवेश के जो नए अवसर आपकी ओर आएँ, उनपर विचार करें। लेकिन धन तभी लगाएँ जब आप उन योजनाओं का भली-भांति अध्ययन कर लें। अगर आप सामाजिक जलसों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे, तो आप अपने संगी-साथियों की फ़ेहरिस्त में इज़ाफ़ा कर सकते हैं। अपनी दीवानगी को क़ाबू में रखें, नहीं तो यह आपके प्रेम-संबंध को मुश्किल में डाल सकती है। ऐसे काम हाथ में लें, जो रचनात्मक प्रकृती के हैं। दीर्घावधि में कामकाज के सिलसिले में की गयी यात्रा फ़ायदेमंद साबित होगी। आपके जीवनसाथी की ओर से मिला कोई ख़ास तोहफ़ा आपके खिन्न मन को ख़ुश करने में काफ़ी मददगार साबित होगा।*

 *💏मिथुन-किसी दोस्त के साथ ग़लतफ़हमी अप्रिय हालात खड़े कर सकती है, किसी भी फ़ैसले पर पहुँचने से पहले संतुलित नज़रिए से दोनों पक्षों को जाँचें। अचानक आए ख़र्चे आर्थिक बोझ बढ़ा सकते हैं। विवाद, मतभेद और दूसरों की आपमें कमियाँ निकालने की आदत को नज़रअन्दाज़ करें। काफ़ी वक़्त फ़ोन न करके आप अपने प्रिय को तंग करेंगे। जो काम आपने किया है, उसका श्रेय किसी और को न ले जाने दें। उन लोगों पर नज़र रखें जो आपको ग़लत राह पर ले जा सकते हैं या फिर ऐसी जानकारी दे सकते हैं जो आपके लिए नुक़सानदेह साबित हो सकती है। अपने जीवनसाथी की नुक़्ताचीनी से आप आज परेशान हो सकते हैं, लेकिन वह आपके लिए कुछ बढ़िया भी करने वाला है।*

 *🦀कर्क-आज आप थकावट महसूस करेंगे और छोटी-छोटी बातों पर नाराज़ भी हो सकते हैं। भागीदारी वाले व्यवसायों और चालाकी भरी आर्थिक योजनाओं में निवेश न करें। किसी ऐसे के साथ परस्पर संवाद की कमी जिसका आपको बहुत ख़याल है, आपको तनाव दे सकती है। प्यार-मुहब्बत के मामले में अपनी ज़ुबान पर क़ाबू रखें, नहीं तो परेशानी में पड़ सकते हैं। आज का दिन थोड़ी दिक़्क़त ला सकता है; लेकिन आप धीरज और शान्त मन से हर मुश्किल पर जीत हासिल कर सकते हैं। अगर आप ख़रीदारी पर जाएँ तो ज़रूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें। ऐसा लगता है कि आपके जीवनसाथी का मिज़ाज आज कुछ ख़राब है।*

 *🐅सिंह-स्वास्थ्य के लिहाज़ से बहुत अच्छा दिन है। आपकी ख़ुशमिज़ाजी ही आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करेगी। भागीदारी वाले व्यवसायों और चालाकी भरी आर्थिक योजनाओं में निवेश न करें। परिवार के सदस्यों के साथ कुछ आराम के पल बिताएँ। आप अचानक गुलाबों की ख़श्बू से ख़ुद को सराबोर पाएंगे। यह प्यार की मदहोशी है, इसे महसूस करें। संभव हैं कि आज आपके बॉस का मिज़ाज काफ़ी ख़राब हो, जिसके चलते आपको काम करने में काफ़ी तकलीफ़ हो सकती है। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। वैवाहिक जीवन में स्नेह को दिखलाने का अपना महत्व है और इस चीज़ का अनुभव आज आप करेंगे।*

 *👩कन्या-आप अपनी भावनाओं पर क़ाबू रखने में दिक़्क़त महसूस करेंगे - आपका अजीब रवैया लोगों को भ्रमित करेगा और इसलिए आपमे झुंझलाहट पैदा करेगा। आपको कई स्रोतों से आर्थिक लाभ होगा। नवजात शिशु की ख़राब तबियत परेशानी का सबब बन सकती है। इस ओर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। डॉक्टर से भली-भांति सलाह लें, क्योंकि ज़रा-सी लापरवाही बीमारी को बद से बदतर बना सकती है। प्यार के नज़रिए से यह दिन बेहद ख़ास रहेगा। साझेदारी में किए गए काम आख़िरकार फ़ायदेमंद साबित होंगे, लेकिन आपको अपने भागीदारों से काफ़ी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। आज के दिन घटनाएँ अच्छी तो होंगी, लेकिन तनाव भी देंगी - जिसके चलते आप थकान और दुविधा महसूस करेंगे। शादीशुदा ज़िन्दगी के नज़रिए से यह दिन शानदार रहेगा।*

 *⚖तुला-क़ुदरत ने आपको आत्मविश्वास और तेज़ दिमाग़ से नवाज़ा है- इसलिए इनका भरपूर इस्तेमाल कीजिए। आर्थिक तौर पर सुधार तय है। बच्चे की पढ़ाई के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। इस समय जो समस्याएँ आपको झेलनी पड़ रही हैं, वे क्षणिक हैं और समय के साथ वे ख़ुद-ब-ख़ुद ख़त्म हो जाएंगी। सावधान रहें, क्योंकि प्यार में पड़ना आज के दिन आपके लिए दूसरी कठिनाइयाँ खड़ी कर सकता है। तरोताज़गी और मनोरंजन के लिए बढ़िया दिन, लेकिन अगर आप काम कर रहे हैं तो व्यावसायिक लेन-देन में सावधानी की ज़रूरत है। यात्रा के दौरान आप नयी जगहों को जानेंगे और महत्वपूर्ण लोगों से मुलाक़ात होगी। आपको या आपके जीवनसाथी को बिस्तर में चोट लग सकती है। इसलिए एक-दूसरे का ख़याल रखें।*

 *🦂वृश्चिक-आज खेल-कूद में हिस्सा लेने की ज़रूरत है, क्योंकि चिर यौवन का रहस्य यही है। निवेश करने और अनुमान के आधार पर पैसे लगाने के लिहाज़ से अच्छा दिन नहीं है। ऐसा कोई जिसे आप जानते हैं, आर्थिक मामलों को ज़रूरत से ज़्यादा गंभीरता से लेगा और घर में थोड़ा-बहुत तनाव भी पैदा होगा। आपका बेपनाह प्यार आपके प्रिय के लिए बेहद क़ीमती है। यदि आप अपने फ़ोन को किनारे उठाकर नहीं रखेंगे, तो कोई बड़ी ग़लती हो सकती है। छुपे हुए दुश्मन आपके बारे में अफ़वाहें फैलाने के लिए अधीर होंगे। आप और आपका जीवनसाथी मिलकर वैवाहिक जीवन की बेहतरीन यादें रचेंगे।*

 *🏹धनु-आज के दिन आप बिना झंझट विश्राम कर सकेंगे। अपनी मांसपेशियों को आराम देने के लिए तैल से मालिश करें। अपने निवेश और भविष्य की योजनाओं को गुप्त रखें। आपके जीवन-साथी की लापरवाही संबंधों में दूरी बढ़ा सकती है। साथ में अपना क़ीमती समय बिताएँ और मीठी यादों को फिर से ताज़ा करें, ताकि पुराने दिनों को फिर से वापस लाया जा सके। अगर आप खुले दिल से अपनी बात रखें, तो आपकी मोहब्बत आज आपके सामने प्यार के फ़रिश्ते के रूप में आएगी। आपको अपने भागीदार को आपकी योजना से जुड़े रहने के लिए मनाने में दिक़्क़त होगी। आज ऐसी कई सारी चीज़ें होंगी - जिनकी तरफ़ तुरन्त ग़ौर करने की आवश्यकता है। आपके और आपके जीवन साथी के बीच विश्वास की कमी रह सकती है। जिससे आज वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है।*

 *🐊मकर-लम्बी यात्रा के लिहाज़ से आपने सेहत और ऊर्जा-स्तर में जो सुधार किए हैं, वे काफ़ी फ़ायदेमंद रहेंगे। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद आप थकान के चंगुल में फँसने से बचे रहेंगे। आपके ख़र्चे बजट को बिगाड़ सकते हैं और इसलिए कई योजनाएँ बीच में अटक सकती हैं। रिश्तेदारों के साथ बिताया गया वक़्त आपके लिए फ़ायदेमंद रहेगा। समय, कामकाज, पैसा, यार-दोस्त, नाते-रिश्ते सब एक ओर और आपका प्यार एक तरफ़, दोनों आपस में खोए हुए - कुछ ऐसा मिज़ाज रहेगा आपका आज। कामकाज के नज़रिए से आज का दिन वाक़ई सुचारू रूप से चलेगा। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। आज आप महसूस करेंगे कि जीवनसाथी के साथ की एहमियत कितनी है।*

*🌊कुम्भ-गाड़ी चलाते समय सावधान रहें। आर्थिक तंगी से बचने के लिए अपने तयशुदा बजट से दूर न जाएँ। अपने मित्रों के माध्यम से आपका ख़ास लोगों से परिचय होगा, जो आगे चलकर फ़ायदेमंद रहेगा। अपने प्रिय की नाराज़गी के बावजूद अपना प्यार ज़ाहिर करते रहें। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए विचारों और आइडिया को जाँचने का बेहतरीन वक़्त। आपकी भागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण आपका जीवनसाथी ख़ुद को दरकिनार महसूस कर सकता है, जिसका इज़हार शाम को होना मुमकिन है।*

 *🐬मीन-आपका व्यक्तित्व आज इत्र की तरह महकेगा और सबको आकर्षित करेगा। ख़र्चों में इज़ाफ़ा होगा, लेकिन साथ ही आमदनी में हुई बढ़ोत्तरी इसको संतुलित कर देगी। सामाजिक गतिविधियाँ मज़ेदार रहेंगी, लेकिन अपने रहस्य किसी के सामने उजागर न करें। किसी छोटी-मोटी बात को लेकर भी आपके प्रिय से आपकी नोंक-झोंक हो सकती है। आज आपको दफ़्तर में कुछ ऐसा काम करना पड़ सकता है, जिससे आप लंबे समय से बचने की कोशिश कर रहे थे। जब आपसे राय पूछी जाए तो संकोच न करें- क्योंकि इसके लिए आपकी काफ़ी तारीफ़ होगी। आज अपने जीवनसाथी का वह रुख़ देखने को मिलेगा, जो उतना अच्छा नहीं है।*

 *नोट- सभी फलादेश चंद्रराशि🌝नामराशि अनुसार हैं।*
*🎂🎂🎂🎂🎂🎂जन्मदिन और सालगिरह🎂🎂🎂🎂🎂🎂*
*आज जिन भाई बहनो  का जन्मदिन है या शादी की सालगिरह है उन सभी भाई बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। ऐसे भाई बहन आज के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान करवाएं।।*
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18 अगस्त 2017 का राहु

*** आप सभी का आभार और मेरी तरफ से  शुभकामनाऐ ***

-----आज बात करते है कल के बदलने वाले गोचर की जिसकी हफ्तो पहले से ढेर सारी भविष्यवाणिया सबने अपने आधार पर करी है। 18 अगस्त यानी काल दो अहम ग्रह जिनसे लोग भय खाते है उनका स्थान परिवर्तन यानी गोचर बदल रहा है ** राहू का कर्क मे** और केतू का मकर मे ** ऐ दोनो वक्री यानी उल्टी दिशा मे घूम कर सभी पर प्रभाव डालते है हर राशी मे इनका गोचर करना अलग अलग प्रभाव देता है सभी को सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव देते रहते है ।

**---सभी गोचरो मे मैने गुरू , शनी ,मगंल  और राहू अधिक प्रभाव मे पाऐ है इनके फल अधिक प्रभाव मे रहते है  । लेकिन आखिर राहू का गोचर ही इतना नकारात्मक कैसे लोग समझ कर चलते है कारण है राहू के फल जोकी सकारात्मक भी होगा तो भी बुद्धी को लालच मे ही डालता है । अब चूकी ऐ कर्क मे प्रवेश कर रहा है जोकी जल तत्व राशि है जिसका स्वामी चद्रदेव है जो स्वयः मनुष्य के मन के स्वामी के साथ साथ शारीर के अदंर शीतलता और खुशमिजाज और मजाकिया स्वाभाव को प्रसारित करते है । अब यंहा राहू का आना थोडी सी भी और अधिक भी प्रभावी रह सकता है और रहेगा भी कारण की इसका असर अपनी शत्रु राशी पर अधिक प्रभावी होगा और राहू को पूरा मौका है चद्रमा को दूषित करने का । कुडंली मे सबसे पहले चद्र ही पिडित होता है यानी मनुष्य के साथ छोटी सी भी बात होने पर मन पिडित होता है ऐ स्थिर न होने की वजह से दुखः भागी अधिक लगता है । ऐ बात भी सच है की चद्रमा माता कारक है और कोई भी माता को पिडित जल्दि नही करता लेकिन राहू कूटनीती मे माहिर होता है । वो स्वप्न व भ्रामिक स्थति को बनाकर मनुष्य के कर्मो को अवरूद्ध करता है ताकी अप्रत्यक्ष रूप से चद्र पिडित हो यानी मन डर भय द्धवैष से ग्रषित रहे और गलत चीजो मे मनुष्य ध्यान जाऐ । मेरा अपना एक अनुभव रहा है मैने राहू बुध मगंल के शुभ से ज्यादा अशुभ फल देखे है इन तीनो सभांलना बडी टेडी खीर है इनमे केतू भी आते है पर ऐ सभंल जाते है । इन तीनो का गुण दो दो तरह के हो जाते है मगंल -सुर्य और अपने फलो को मिक्स या एक दूसरे की तरह प्रदर्शित करता है । वंही बुध कभी शुक्र के फलो मे भी और राहू के फलो मे अपने दोहरे स्भाव को प्रदर्शित करता है ठीक राहू तो राहू है वो समझने ही नही देता की बुध का फल है या चद्रमा का पिडित कोन है ऐ समझना काफी मसक्कत का काम है -तभी हम कहते है ज्योतिष हलवा पूरी नही है खुसबू से भी दूर से वही लगे और नजदीक से भी । ग्रह यदि उच्च का बैठा हो तो लोग समझते है शुभ फलदायी है ऐ तो देखे की किसके नक्षत्र मे है और उसके स्वामी का हाल क्या है ।

हम बात राहू की कर रहे थे सबसे पहले कि कुडंली मे बैठे ग्रह दशा अतंर दशा वर्षफल और खासतर गोचर मे अधिक से अधिक प्रभावी होते है चाहे कितना शुभ हो या पापगत । लग्न के हिसाब से राहू अलग अलग भाव मे जाऐगा और चद्रराशी से तो है ही अपनी जगह । पर राहू की हमेशा ऐ खास बात ध्यान मे रखे की राहू पाप या सट्टे या जैसे भी इस गोचर मे जिसको अधिक लक्ष्मी प्राप्त हो वो अधिख खुश भी न हो क्यूकी राहू अपने दिए फल जाते जाते वापस ले जाकर दयनीय अवस्था दे जाता है कारण की लोग धर्म की ओर जाए ।

अब बात की किसको क्या लाभ हानी होगी इस गोचर से ---सबसे पहले ऐ बात जाने की राहू दशा जिसकी शुरू होने वाली है या हो चुकी है या अतंर दशा मे चलेगा और चद्र , मगंल ,गुरू ,सुर्य ,शुक्र के साथ युति करेगा उनको खासा असर इस गोचर मे देखने को मिलेगा । क्यूकी राहू अपनी पूरी ताकत के साथ शत्रु राशी पर हावी होगा और उसके फलो प्रभावहीन रखेगा । लेकिन जिनकी कुडंली मे शनी और केतू का गोचर शुभ फल दायी है उसको हानी इतनी नही होगी ।

*--किन चीजो पर असर होगा --1-शाररिक परेशानी यानी जिसमे वायरल फिवर हाईब्लडप्रेशर अधिक गुस्सा आना ,हार्ट परेशानी और डिपरेशन ,सरदर्द जो तबतक ठीक रहेगे जबतक दवाई चलेगी फिर वही । अकारण ऑपरेशन के कारण बनना गुर्दे की पथ्थरी कुल मिलाकर पेट सबंधी रोग अधिक ।
2---- पारवारिक कलेश -यानी आर्थिक स्थति मे चालबाजी धोखे से पैदा हुआ कलेश खासतर भाई भाई या मित्र मामा चाचाओ के बीच । पत्नी व पति मे झूठे शक व किसी अन्य का बीच मे आने से आपसी मतभेद जो अकारण पैदा होगे खासतर जिनकी कुडंली मे मगंल शुक्र के साथ अब राहू आऐगे या जनम से बैठे है वो खासा इस पिरियड मे परे शानी उठाऐगे ।
जिनकी राहू की दशा चल रही है या शुक्र गुरू के अतंर मे राहू देव की दशा आने वाली है आ गयी है या राहू मे ऐ दोनो या मगंल आऐगे उनकी यदि शादी की बात चल रही है या चल के शुरू हो ग्ई तो सावधानी रखे खासतर वो जिनके सप्तम व अष्टम मे राहू अकेले या गुरू के साथ हो उनके साथ धोखा हो सकता है या होगा जो अब नये नये लव रिलेशन को शादी मे बदलना चाह रहे है वो पहले पूरी जानकारी पता करे फिर कदम उठाऐ शादी का क्यूकी ऐ राहू यदि शादी कराऐगा तो न वो चलेगी न समाज इजाजत देगा ।
इस गोचर से माता पिता खासा अधिक परेशान रहेगे अपनी पारवारिक स्थति व बच्चो के बदलते ब्यवहार और काम धंधे से ।

**3--- ऐ अहम कारण है काम धंधा व नौकरी ब्यापार -राहू के कारकत्व मै पहली पोस्ट मे बता चुका हूं --जीवन यापन के लिए काम जरूरी है 2017 लगभग 75% से ऊपर के जातको का खराब शुरू हुआ है कुछ का मार्च 2016 से खराब समय चला है चल भी रहा । इस गोचर मे आधे से अधिक तो काम मे बदलाव करेगे चाहे छः महीने बाद सही लेकिन जिनका बुध अच्छा होगा और राहू से तालमेल की अच्छी स्थति अच्छी होगी (ऐ सिर्फ जातक की कुडंली अवलोकन से जाना जा सकता है ) उनका ऐ समय सितंबर से अच्छे से अच्छा शुरू होगा पर केतू शनी के उपाय जरूरी होगे । लेकिन अधिकतर लोग अपने काम को बदलेगे ज्यादातर लोग पार्टनरशिप मे नया काम शुरू करेगे जो कि शुरूआत अच्छी तो देगा लेकिन मानसिक शांती नही ऊपर से मनमुटाव की स्थति पैदा करके फिर अलग अलग करेगा खासतर उनके लिए जिनकी जन्मकुडंली मे शनी व सुर्य की स्थति खराब हो । नौकरी के लिए सुर्य और विजनिष के लिऐ बुध का मजबूत होना जरूरी है और दोनो के लिए बुध और शनी ।

**इस समयावस्था मे क्या करे**- आखं मूदकर किसी पर भी भरोषा न करे फिर चाहे घनिष्ट मित्र ही क्यू न हो क्यूकी धोखा वही अधिक पनपता है

**-2---यदि आप नयी चीजो की शुरूआत करने की सोच रहे है तो हो सके तो कुछ समय टाले अभी नौकरी पेशा बिजनिष करने मे इनवेस्ट करने की या लोन लेकर नया काम करने की सोच रहे है तो सावधान रहे । नौकरी वाले नौकरी न छोडे खासतर दूसरे के बहकावे मे आकर तो बिलकुल नही लालच से बचे ।

**-3---यदि आप शादि का सोच रहे है तो अभी समय अनुकूल नही है थोडा रूककर सोचविचार करके लडके लडकी दोनो के परिवार की पूरी जानकारी व समझ कर शादी का फैसला ले और योग्य ज्योतिषी की सहायता से कुडंली का अवलोकन कराऐ । मै पहले कह चुका हू भ्रम और धोखा यानी छलावा राहु का मुख्य कार्य है ।

***क्या करे इस समय मे *--- 1--खुद पर भरोषा रखे सयंम ही आपकी ताकत है जितना हो सके गुस्से व बहस से दूर रहे ।

2---प्रातःकाल सुर्य दर्शन करे मंदिर जाए और ताजेफूल फल शिव व हनुमान जी चढाऐ ।
**3-- अपने माता पिता की सेवा करे रोज काम से लौटते समय उनके लिए कुछ खाने को लेते आऐ और उनके पैर छूकर थोडी देर उनके साथ बैठकर बाते करे ताकी आपका दिमाग शातं रहे । पत्नी व पति आपसी विवाद से बचे ।।

4**--जिनका बुध या जिनके बच्चो का स्वभाव हठी व जिद्दी या अक्रामक हो रा है या पढाई मे मन नही लग रहा है तो --रात को चांदी के गिलास मे पानी मंदिर मे रखकर सुबह उनको पीने दे ।

यदि स्वयः मे बडो मे ऐ परेशानी आ रही है दिमाग परेशान है तो --12-14 पत्ते तुलषी के सुबह तोड के ले और एक चम्मच सौफं और एक चम्मच मिश्री लेकर तीनो को एक साथ कूट ले और एक स्टील के लोटे मे पानी मे एक घण्टे के लिए भैगो दे और बाद फैटं के छान कर आधा आधा गिलास सुबह श्याम पिऐ । इससे बुध और बुद्धी दोनो के साथ और हेल्थ से सभी चीजो मे सुधार होगा ।

**नोट ---जरूरी नही की सबको बुरे फल मिले इस गोचर से किसी को न तो डराया गया है न बाध्य है आप । और सभी की कुडली से सही फलादेश किया जा सकता है राहू के गोचर का भी व अन्य भी । बाकी ऐ गोचर और ग्रहो की डीटेल के साथ आगे दिया जाऐगा ।

***-----यदि आप अपनी किसी समस्या हेतू व कुडंली विश्लेषण करवाना चाहते है तो  मिलकर व टेलीफोनिकली ऑपयटंमेटं सकते है उसके लिए आप फोन व वाट्हसप कर सकते है --
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Monday, August 14, 2017

संतान प्राप्ति कैसे हो।।।


 *🌷कुंडली*से जाने :संतान प्राप्ति का समय :निःसंतान योग :संतान बाधा दूर करने के सरल उपाय:🌷*

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*ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए हमारे शास्त्रों मे कई  सूत्र दिए हैं। कुछ प्रमुख सूत्र इस प्रकार से  हैं।*

*ज्योतिषीय नियम हैं जो घटना के समय बताने  में सहायक होते हैं .*

*संतान प्राप्ति  का समय :*

*लग्न और लग्नेश को देखा  जाता  है।*
*घटना का संबंध किस भाव से है।*
*भाव का स्वामी कौन  है ।*
*भाव का कारक ग्रह कौन है।*
*भाव में कौन कौन से ग्रह हैं।*
*भाव पर किस  ग्रह की दृष्टि।*
*कौन से ग्रह महादशा ,अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा, सूक्ष्म एवं प्राण दशा चल रही है।भाव को प्रभावित करने वाले ग्रहों की गोचर स्थिति भी देखना चाहिये।*

 *इन सभी का अध्ययन करने   से किसी भी घटना का समय जाना जा सकता है।*

*संतान प्राप्ति के समय को जानने के लिए पंचम भाव, पंचमेश अर्थात पंचम भाव का स्वामी, पंचम कारक गुरु, पंचमेश, पंचम भाव में स्थित ग्रह और पंचम भाव ,पंचमेश पर दृष्टियों पर ध्यान देना चाहिए।   जातक का विवाह हो चुका हो और संतान अभी तक नहीं हुई हो , संतान का समय निकाला जा सकता है। पंचम भाव जिन शुभ ग्रहों से प्रभावित हो उन ग्रहों की दशा-अंतर्दशा और गोचर के शुभ रहते संतान की प्राप्ति होती है।*

*गोचर में जब ग्रह पंचम भाव पर या पंचमेश पर या पंचम भाव में बैठे ग्रहों के भावों पर गोचर करता है तब संतान सुख की प्राप्ति का समय होता है।यदि गुरु गोचरवश पंचम, एकादश, नवम या लग्न में भ्रमण करे तो भी संतान लाभ की संभावना होती है। जब गोचरवश लग्नेश, पंचमेश तथा सप्तमेश एक ही राशि में भ्रमण करे तो संतान लाभ होता है।*

  *संतान कब (साधारण योग):-*

 *पंचमेश यदि पंचम भाव में स्थित हो या लग्नेश के निकट हो, तो विवाह के पश्चात् संतान शीघ्र होती है दूरस्थ हो तो मध्यावस्था में, अति दूर हो तो वृद्धावस्था में संतान प्राप्ति होती है। यदि पंचमेश केंद्र में हो तो यौवन के आरंभ में, पणफर में हो तो युवावस्था में और आपोक्लिम में हो तो अधिक अवस्था में संतान प्राप्ति होती है।*

 *पुत्र और पुत्री प्राप्ति का समय कैसे जानें?*

  *संतान प्राप्ति के समय के निर्धारण में यह भी जाना जा सकता है कि पुत्र की प्राप्ति होगी या पुत्री की। यह ग्रह महादशा, अंतर्दशा और गोचर पर निर्भर करता है। यदि पंचम भाव को प्रभावित करने वाले ग्रह पुरुष कारक हों तो संतान पुत्र और यदि स्त्री कारक हों तो पुत्री होगी।पुरुष ग्रह की महादशा तथा पुरुष ग्रह की ही अंतर्दशा चल रही हो एवं कुंडली में गुरु की स्थिति अच्छी हो तो निश्चय ही पुत्र की प्राप्ति होती है। विपरीत स्थितियों में कन्या जन्म की संभावनाएं होती हैं।*

*जन्म कुंडली में संतान योग जन्म कुंडली में संतान विचारने के लिए पंचम भाव का अहम रोल होता है। पंचम भाव से संतान का विचार करना चाहिए। दूसरे संतान का विचार करना हो तो सप्तम भाव से करना चाहिए। तीसरी संतान के बारे में जानना हो तो अपनी जन्म कुंडली के भाग्य स्थान से विचार करना चाहिए भाग्य स्थान यानि नवम भाव से करें।*

*१.  पंचम भाव का स्वामी स्वग्रही हो*

*२.पंचम भाव पर पाप ग्रहों की दॄष्टि ना होकर शुभ ग्रहों की दॄष्टि हो अथवा स्वयं चतु सप्तम भाव को देखता हो.*

*३.पंचम भाव का स्वामी कोई नीच ग्रह ना हो यदि  भावपंचम में कोई उच्च ग्रह हो तो अति सुंदर योग होता है.*

*४.पंचम भाव में कोई पाप ग्रह ना होकर शुभ ग्रह विद्यमान हों और षष्ठेश या अष्टमेश की उपस्थिति  भावपंचम में नही होनी चाहिये.*

*५. पंचम भाव का स्वामी को षष्ठ, अष्टम एवम द्वादश भाव में नहीं होना चाहिये. पंचम भाव के स्वामी के साथ कोई पाप ग्रह भी नही होना चाहिये साथ ही स्वयं पंचमभाव का स्वामी नीच का नही होना चाहिये.*

*६. पंचम भाव का स्वामी उच्च राशिगत होकर केंद्र त्रिकोण में हो.*

*७ पति एवम पत्नी दोनों की कुंडलियों का अध्ययन करना चाहिए |*

*८ सप्तमांश लग्न का स्वामी जन्म कुंडली में :बलवान ,शुभ स्थान ,सप्तमांश लग्न भी शुभ ग्रहों से युक्त  |*

 *८  एकादश भाव में शुभ ग्रह बलवान हो |*

*संतान सुख मे परेशानी के योग :-*

*ऊपर बताये गये  ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों , तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है |*

*पंचम भाव: राशि ( वृष ,सिंह कन्या ,वृश्चिक ) हो  तो कठिनता से संतान होती है |*

*निःसंतान योग-*

 *पंचम भाव में क्रूर, पापी ग्रहों की मौज़ूदगी*

*पंचम भाव में बृहस्पति की मौजूदगी*

*पंचम भाव पर क्रूर, पापी ग्रहों की दृष्टि*

*पंचमेश का षष्ठम, अष्टम या द्वादश में जाना*

*पंचमेश की पापी, क्रूर ग्रहों से युति या दृष्टि संबंध*

*पंचम भाव, पंचमेश व संतान कारक बृहस्पति तीनों ही पीड़ित हों*

*नवमांश कुण्डली में भी पंचमेश का शत्रु, नीच आदि राशियों में स्थित होना पंचम भाव व पंचमेश को कोई भी शुभ ग्रह न देख रहे हों संतानहीनता की स्थिति बन जाती है।*

*पुत्र या पुत्री :*

*सूर्य ,मंगल, गुरु पुरुष ग्रह हैं |*

*शुक्र ,चन्द्र स्त्री ग्रह हैं |*

 *बुध और शनि नपुंसक ग्रह हैं |*

 *संतान योग कारक पुरुष ग्रह होने पर पुत्र होता  है।*

 *संतान योग कारक स्त्री ग्रह होने पर पुत्री होती  है |*

*शनि और बुध  योग कारक हो  पुत्र व पुत्री होती  है|*

*ऊपर बताये गये  ग्रह निर्बल पाप ग्रह अस्त ,शत्रु –नीच राशि  में लग्न से 6,8 12 वें भाव में स्थित हों तो ,  पुत्र या पुत्रियों की हानि होगी |*

 *बाधक ग्रहों की क्रूर व पापी ग्रहों की किरण रश्मियों को पंचम भाव, पंचमेश तथा संतान कारक गुरु से हटाने के लिए रत्नों का उपयोग करना होता हैं।*
*👉अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिये व्हाट्सअप करें==================================9472998128

Sunday, August 13, 2017

*🌷केतु के गुण अवगुण🌷*



*ज्योतिष शास्त्र के अनुसार केतु एक छाया ग्रह है जो स्वभाव से पाप ग्रह भी है। केतु के बुरे प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में कई बड़े संकटों का सामना करना पड़ता है। हालांकि यही केतु जब शुभ होता है तो व्यक्ति को ऊंचाईयों पर भी ले जाता है। केतु यदि अनुकूल हो जाए तो व्यक्ति आध्यात्म के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है। आमतौर पर माना जाता है कि हमारी जन्मकुंडली हमारे पिछले जन्म के कर्मों तथा इस जन्म के भाग्य को बताती है। फिर भी ज्योतिषीय विश्लेषण कर हम अशुभ ग्रहों से होने वाले प्रभाव तथा उनके कारणों को जानकर उनका सहज ही निवारण कर सकते हैं।*

*राहू एवं केतु छाया ग्रह माने गए है जिनका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है। इन्हें इनके कार्य करने की वास्तविक शक्ति कुंडली में अन्य ग्रहों के सम्मिलित प्रभाव से मिलती है। ज्योतिष में माना जाता है कि किसी जानवर को परेशान करने पर, किसी धार्मिक स्थल को तोड़ने अथवा किसी रिश्तेदार को सताने, उनका हक छीनने की सजा देना ही केतु का कार्य है। झूठी गवाही व किसी से धोखा करना भी केतु के बुरे प्रभाव को आमंत्रित करता है।*

*जब भी व्यक्ति पर केतु का अशुभ प्रभाव शुरू होने वाला होता है तो उसके अंदर कामवासना एकदम से बढ़ जाती है। किसी अन्य पापग्रह यथा राहू, मंगल की युति मिलने पर व्यक्ति किसी महिला/ लड़की से दुष्कर्म तक करने का जोखिम उठा सकता है। इसके अलावा मुकदमेबाजी, अनावश्यक झगड़ा, वैवाहिक जीवन में अशांति, भूत-प्रेत बाधाओं द्वारा परेशान होना भी केतु के ही कारण होता है। शारीरिक प्रभावों में व्यक्ति को पथरी, गुप्त व असाध्य रोग, खांसी तथा वात एवं पित्त विकार संबंधी रोग हो जाते हैं।*

*सभी ग्रहों में राहु-केतु मायावी ग्रह हैं इन पर सटीक फलित करना अत्यधिक जटिल है। राहु पर थोडा बहुत लिखा हुआ मिल भी जाता है, लेकिन जब केतु की बात आती हैं उस समय या तो राहु के समान उसके फल बतायें गये हैं या मंगल के गुणों की समानता दे दी जाती है। लेकिन मेरे अनुभव में केतु के बिल्कुल अलग फल है। केतु सभी ग्रहों में सबसे तीक्ष्ण व पीडा दायक ग्रह है। मायावी होने के कारण प्राय: केतु में लगभग सभी ग्रहों की झलक देखने को मिल जाती है। सूर्य के समान जलाने वाला, चंद्र के समान चंचल, मंगल के समान पीडाकारी, बुध के समान दूसरे ग्रहों से शीघ्र प्रभावित होने वाला, गुरु के समान ज्ञानी, शुक्र के समान चमकने वाला एवं शनि के समान एकांतवासी ग्रह है। केतु के कुछ अनुभव सिद्ध फल-*

*1- केतु हमेशा अपना प्रभाव दिखाता ही है। केतु का प्रभाव जिस भाव पर होगा जातक को उस भाव से सम्बंधित अंग में किसी प्रकार की चोट या निशान, तिल, वर्ण अवश्य देगा।*

*2-  केतु पर यदि षष्ठेश का प्रभाव हो तो पीडा दायक रोग होते हैं। यदि साथ में मारकेश का भी प्रभाव होतो ऐसा केतु ऑपरेशन आदि करवाता हैं अथवा अंगहीन बनाता है।*

*3- केतु का प्रभाव लग्न या तृतिय स्थान पर हो तथा कुछ क्रूर या पापी ग्रह का प्रभाव भी हो तो ऐसे जातक अत्यधिक गुस्सैल व अनियंत्रित होते हैं। ऐसे जातक जल्दबाज होते हैं जिनके कारण अधिकतर गलत निर्णय लेते हैं। यदि केतु पर पाप प्रभाव अधिक हो तो ऐसे जातक हत्या तक कर बैठते है।*

*4- केतु का नवम, दशम व एकादश प्रभाव शुभ होता है इसके अतिरिक्त बुध व गुरु की राशि में स्थित केतु भी मारक प्रभाव न रखकर व्यक्ति को उच्च शिक्षा देने वाला या सफल बनाने वाला होता  है। ऐसे जातक प्रबुध होते है, डॉक्टर, वकील या रक्षा विभाग में प्रयास करने से सफलता शीघ्र प्राप्त होती है।*

*5- केतु के अंदर अध्यात्मिक शक्ति होती है, शास्त्रों में वर्णित है की गुरु संग केतु की युति मोक्ष दायक होती है। अत: शुभ केतु का प्रभाव व्यक्ति को धर्म से जोडता है। लग्न या नवम भाव पर केतु का शुभ प्रभाव होतो ऐसे लोग कट्टर धर्मी होते हैं।*

*6- केतु का संकेत चिन्ह झंडा होता है जो की उच्चता का सूचक है। योगकारक ग्रह के संग या लग्नेश संग केतु का प्रभाव व्यक्ति को प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्रदान करता हैं।*

*केतु को सूर्य व चंद्र का शत्रु कहा गया हैं। केतु मंगल ग्रह की तरह प्रभाव डालता है। केतु वृश्चिक व धनु राशि में उच्च का और वृष व मिथुन में नीच का होता है।*

*जन्म कुंडली में लग्न, षष्ठम, अष्ठम और एकादश भाव में केतु की स्थिति को शुभ नहीं माना गया है | इसके कारण जातक के जीवन में अशुभ प्रभाव ही देखने को मिलते है |*

*जन्मकुंडली में केतु यदि केंद्र-त्रिकोण में उनके स्वामियों के साथ बैठे हों या उनके साथ शुभ दृष्टि में हों तो योगकारक बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में ये अपनी दशा-भुक्ति में शुभ परिणाम जैसे लंबी आयु, धन, भौतिक सुख आदि देते हैं।*

*केतु के कारक है -मोक्ष, पागलपन, विदेश प्रवास, कोढ़, आत्महत्या, दादा-दादी, गंदी जुबान, लंबे कद, धूम्रपान, जख्म, शरीर पर धब्बे, दुबलापन, पापवृत्ति , द्वेष, गूढ़ता, जादूगरी, षडयंत्र, दर्शनशास्त्र, मानसिक शांति, धैर्य, वैराग्य, सरकारी जुर्माने, सपने, आकस्मिक मौत, बुरी आत्मा, वायुजनित रोग, जहर, धर्म, ज्योतिष विद्या, मुक्ति, दिवालियापन, हत्या की प्रवृत्ति , अग्नि-दुर्घटना आदि का कारक केतु ग्रह है।*

*सूर्य जब केतु के साथ होता है तो जातक के व्यवसाय, पिता की सेहत, मान-प्रतिष्ठा, आयु, सुख आदि पर बुरा प्रभाव डालता है।*

*चंद्र यदि केतु के साथ हो और उस पर किसी अन्य शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति मानसिक रोग, वातरोग, पागलपन आदि का शिकार होता है।*

*वृश्चिक लग्न में यह योग जातक को अत्यधिक धार्मिक बना देता है।*

*मंगल केतु के साथ हो तो जातक को हिंसक बना देता है। इस योग से प्रभावित जातक अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाते और कभी-कभी तो कातिल भी बन जाते हैं।*

*बुध केतु के साथ हो तो व्यक्ति लाइलाज बीमारी ग्रस्त होता है। यह योग उसे पागल, सनकी, चालाक, कपटी या चोर बना देता है। वह धर्म विरुद्ध आचरण करता है।*

*केतु गुरु के साथ हो तो गुरु के सात्विक गुणों को समाप्त कर देता है और जातक को परंपरा विरोधी बनाता है। यह योग यदि किसी शुभ भाव में हो तो जातक ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखता है।*

*शुक्र केतु के साथ हो तो जातक दूसरों की स्त्रियों या पर पुरुष के प्रति आकर्षित होता है।*

*शनि केतु के साथ हो तो आत्महत्या तक कराता है। ऐसा जातक आतंकवादी प्रवृति का होता है। अगर बृहस्पति की दृष्टि हो तो अच्छा योगी होता है।*

*किसी स्त्री के जन्म लग्न या नवांश लग्न में केतु हो तो उसके बच्चे का जन्म आपरेशन से होता है। इस योग में अगर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो कष्ट कम होता है।*

*भतीजे एवं भांजे का दिल दुखाने एवं उनका हक छीनने पर केतु अशुभ फल देना है। कुत्ते को मारने एवं किसी के द्वारा मरवाने पर, किसी भी मंदिर को तोड़ने अथवा ध्वजा नष्ट करने पर इसी के साथ ज्यादा कंजूसी करने पर केतु अशुभ फल देता है। किसी से धोखा करने व झूठी गवाही देने पर भी केतु अशुभ फल देते हैं।*

*अत: मनुष्य को अपना जीवन व्यवस्िथत जीना चाहिए। किसी को कष्ट या छल-कपट द्वारा अपनी रोजी नहीं चलानी चाहिए। किसी भी प्राणी को अपने अधीन नहीं समझना चाहिए जिससे ग्रहों के अशुभ कष्ट सहना पड़े।*

*समय रहते यदि शुभ-अशुभ योगों को पहचान लिया जाए तो जीवन को सभी ओर सकारात्मक दिशा देने में आसानी हो सकती है।केतु के अधीन आने वाले जातक जीवन में अच्छी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, जिनमें से अधिकांश आध्यात्मिक ऊंचाईयों पर होते हैं।*

*केतु ग्रह के उपाय -दान और वैदिक मंत्र :-*
*केतु शांति हेतु लहसुनिया रत्न धारण करने का विधान है।*
*केतु ग्रह की उपासना के लिए निम्न में किसी एक मंत्र का नित्य श्रद्धापूर्वक निश्चित संख्या में जप करना चाहिए।*
*जप का समय रात्रि ८ बजे के बाद तथा कुल जप-संख्या 17000 है।*
*हवन के लिए कुश का उपयोग करना चाहिए।*

*वैदिक मंत्र-*
*ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। सुमुषद्भिरजायथाः॥*
*बीज मंत्र- जप-संख्या 17000*
*पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।*
*रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥*
*बीज मंत्र-जप-संख्या 17000*
*ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।*
*सामान्य मंत्र-जप-संख्या 17000*
*ॐ कें केतवे नमः।*

*केतु ग्रह का दान :-केतु की प्रसन्नता हेतु दान की जाने वाली वस्तुएँ इस प्रकार बताई गई हैं-*

*वैदूर्य रत्नं तैलं च तिलं कम्बलमर्पयेत्।शस्त्रं मृगमदं नीलपुष्पं केतुग्रहाय वै॥*

*वैदूर्य नामक रत्न, तेल, काला तिल, कंबल, शस्त्र, कस्तूरी तथा नीले रंग का पुष्प दान करने से केतु ग्रह साधक का कल्याण करता है।*

*अश्वगंधा की जड़ को नीले धागे में बांधकर मंगलवार को धारण करने से भी केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव कम होने लगते है |*

*केतु से पीड़ित व्यक्ति को मंदिर में कम्बल का दान करना चाहिए*

*तंदूर में मीठी रोटी बनाकर 43 दिन कुत्तों को खिलाएँ या सवा किलो आटे को भुनकर उसमे गुड का चुरा मिला दे और ४३ दिन तक लगातार चींटियों को डाले,रोज कौओं को रोटी खिलाएं।*

*अपना कर्म ठीक रखे तभी भाग्य आप का साथ देगा और कर्म ठीक हो इसके लिए आप मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए जाएं।*

*माता-पिता और गुरु जानो का सम्मान करे ,अपने धर्मं का पालन करे, भाई बन्धुओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें।*

*यदि सन्तान बाधा हो तो कुत्तों को रोटी खिलाने से घर में बड़ो के आशीर्वाद लेने से और उनकी सेवा करने से सन्तान सुख की प्राप्ति होगी।*

*गौ ग्रास. रोज भोजन करते समय परोसी गयी थाली में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्ते को एवं एक हिस्सा कौए को खिलाएं आप के घर में हमेशा बरक्कत रहेगी।*

*नोट:-हर जातक जातिका की कुंडली में ग्रहों की स्तिथि अलग अलग होती है इसलिए हर जातक किसी भी ग्रह की वजह से शुभ या अशुभ समय से गुजर रहा है तो उनके प्रेडिक्शन या उपाय भी उनकी वर्तमान समस्या तथा कुंडली मे स्थित ग्रहों की स्तिथि के अनुसार ही किये जाये तो बेहतर परिणाम मिल पाते हैं। यही कारण है कि दुसरो की देखा देखी किये जाने वाले उपाय लाभ कि बजाय हानि ज्यादा करते हैं। हमेशा अपनी कुंडली के अनुसार ही उपाय या रत्न धारण किया करें।*
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Saturday, August 12, 2017

*🌷हथेली और ज्योतिष🌷*

             
*🌷जय श्री नारायण🌷*
                         पँ अभिषेक कुमार
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*1.हथेली में अगर मछली का चिन्ह हो और कुंडली में पाप प्रभाव रहित शनि, जन्म लग्न से  12 वे भाव में हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यवान, बुद्धिमान और नेकदिल होता है ।*

*2.हथेली में अगर मछली का चिन्ह हो और राहु कुंडली में 3 व् 6 भाव में हो तो व्यक्ति घर का चिराग होता है ।*

*3.हथेली में शेर का चिन्ह हो और पाप प्रभाव रहित सूर्य कुंडली के दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति बहादुर, निडर और निर्दयी होता है ।*

*4.हथेली में सांप का चिन्ह हो और शनि कुंडली के 12 वे भाव में हो तो व्यक्ति रखवाला होता है - जैसे ख़ज़ाने का सांप ।*

*5.हथेली में कौवे का चिन्ह हो और शनि लग्न में और राहु-केतु कहीं भी नीच-राशि में हो तो व्यक्ति धोखेबाज़ होता है ।*

*6.हथेली में गाय - बैल का चिन्ह हो और शुक्र कुंडली के 12 वे भाव में पाप प्रभाव रहित और शुभ हो तो व्यक्ति खेती कार्य से धनवान बनता है ।*

*7.हथेली में चूल्हे का चिन्ह हो और शनि कुंडली के लग्न में हो, मंगल, लग्न से 4 थे भाव में तो व्यक्ति चोर और धोखेबाज़ होता है ।*

*8.हथेली में कमान का चिन्ह हो और मंगल कुंडली के 3 रे भाव में हो तो व्यक्ति बहादुर और निडर होता है ।*

*9.हथेली में फूल का चिन्ह हो और बुध कुंडली के 6 वे भाव में हो तो व्यक्ति धनवान और सुखी जीवन जीता है ।*

*10.हथेली में झंडे का चिन्ह हो और गुरु बृहस्पति कुंडली के 7 वे भाव में हो तो व्यक्ति बहुत धार्मिक होता है ।*

*11.हथेली में छत्र का चिन्ह हो और चंद्र कुंडली के  2 रे भाव में हो और गुरु बृहस्पति कुंडली के 4 थे भाव में हो तो व्यक्ति धनवान और यश, मान-सम्मान वाला होता है ।*

*12.हथेली में अगर रेखाओं से पहाड़ जैसा चिन्ह बने और कुंडली में सूर्य, प्रथम भाव में हो तथा बुध, सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति महान सलाहकार बनता है । जैसे मंत्री याँ बड़ा वकील ।*

*13.हथेली में रेखाओं से किसी गाँव जैसा चिन्ह बने और कुंडली में शनि, सप्तम भाव में हो और बुध, एकादश भाव में हो तो व्यक्ति बहुत धनवान बनता है ।*

*14.हथेली में रेखाओं से ढाल जैसा चिन्ह बने ( तलवार आदि से बचाव का अस्त्र ) और कुंडली में मंगल नीच हो, पाप प्रभाव में हो, चतुर्थ भाव में हो और गुरु बृहस्पति पाप प्रभाव में होकर अष्टम भाव में हो तो व्यक्ति डरपोक, बुज़दिल और गरीब होता है ।*

*15.हथेली में रेखाओं से अगर तलवार का चिन्ह बने और कुंडली में मंगल, प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति शत्रु पर विजय पाने वाला साहसी होता है ।*

*16.हथेली में अगर रेखाओं से घोड़े का चिन्ह बने और कुंडली में चंद्र, दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति बहुत धनवान होता है ।*

*17.हथेली में रेखाओं से अगर मंदिर जैसा चिन्ह बने और कुण्डली में गुरु बृहस्पति द्वितीय भाव में हो तो व्यक्ति धर्म-कर्म को मानने वाला, आध्यात्मिक और सात्विक होता है ।*

*18.हथेली में विभिन्न रेखाओं से अगर चौसर याँ चौपड़ का चिन्ह बने और कुंडली में शनि, पाप प्रभाव रहित छठवे भाव में हो और केतु दशम भाव में हो तो व्यक्ति जाना-माना खिलाड़ी बनता है ।*

*19.हथेली में अगर कलम का चिन्ह बनता हो और कुण्डली में शुभ बुध, सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति दक्ष लेखक, कलम का धनी याँ जाना-माना अकाउंटेंट बनता है ।*

*20.हथेली में अंकुश, शंख, चक्र, कुंडल याँ कान जैसा चिन्ह बने और कुण्डली में मंगल याँ गुरु बृहस्पति, लग्न में अथवा दोनों ही लग्न में हो तो व्यक्ति करोड़ों में खेलने वाला लक्ष्मीपति, धनवान होता है ।*

*21.अगर हथेली में मुसल का चिन्ह विभिन्न रेखाओं से बनता हो और कुंडली में बुध, द्वादश भाव में हो तो व्यक्ति महाकंजूस होता है ।*

*22.अगर हथेली में रेखाओं से ऊखल का चिन्ह बनता हो और कुंडली में गुरु बृहस्पति, सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति दो वक्त की रोटी के लिये भी परेशान रहता है ।*

*23.अगर रेखाओं से हथेली में चूल्हे का चिन्ह बने और कुंडली में मंगल पाप प्रभाव से युक्त अष्टम भाव में हो तो व्यक्ति गरीब और आमदनी से परेशान रहता है ।*

*24.अगर हथेली में बड़-पीपल का चिन्ह विभिन्न रेखाओं से बनता हो और कुंडली में सूर्य-गुरु बृहस्पति दोनों साथ में प्रथम भाव याँ चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति उच्च-पद पर आसीन, दूसरों से टैक्स वसूलने वाला परंतु अचानक मृत्यु पाने वाला होता है ।*

*25.अगर हथेली में विभिन्न रेखाओं से कैसा भी वृक्ष का चिन्ह बने और शनि, दशम भाव में हो तो व्यक्ति बहुत बड़ी जायदाद का मालिक होता है ।*

*26.अगर हथेली में चौकी का चिन्ह बने और शुभ प्रभाव में आया हुआ मंगल, दशम भाव में हो तो व्यक्ति साम्राज्य का स्वामी होता है ।*

*27.हथेली में अगर रथगाड़ी का चिन्ह विभिन्न रेखाओं से बनता हो और सूर्य, चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति को राजा जैसी अथवा सरकारी सवारी का सुख मिलता है ।*

*28.अगर हथेली में विभिन्न रेखाओं से तराज़ू का चिन्ह बनता हो और कुंडली में बुध, शुक्र, द्वादश और सप्तम में इकट्ठे अथवा अलग-अलग हो तो व्यक्ति बहुत बड़ा व्यापारी याँ आढती होता है ।*

*29.अगर हथेली में पालकी का चिन्ह विभिन्न रेखाओं से बने और कुण्डली मे गुरु बृहस्पति, नवम भाव में हो तो व्यक्ति बहुत आराम और सुख पाने वाला होता है ।*

*30.अगर हथेली में आँख का चिन्ह बनता हो और कुंडली में शनि शुभ प्रभाव में आया हुआ एकादश भाव में हो तो व्यक्ति धोखेबाज़ी से धनवान बन जाता है ।*

*31.अगर हथेली में विभिन्न रेखाओं से नाक का चिन्ह बनता हो और कुंडली में बुध, द्वादश भाव में हो तो व्यक्ति साधारण व्यापारी होता है ।*

*32.अगर हथेली में विभिन्न रेखाओं से त्रिशूल का चिन्ह बनता हो और कुंडली में शुभ प्रभाव में आया शनि, द्वादश भाव में हो तो व्यक्ति का जीवन अच्छा गुजरता है ।*
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Friday, August 11, 2017

*🌷राहु के गुण अवगुण🌷*

               *🌷जय श्री नारायण🌷*

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*राहु छाया ग्रह है,ग्रन्थों मे इसका पूरा वर्णन है,और श्रीमदभागवत महापुराण में तो शुकदेवजी ने स्पष्ट वर्णन किया कि यह सूर्य से १० हजार योजन नीचे स्थित है,और श्याम वर्ण की किरणें निरन्तर पृथ्वी पर छोडता रहता है,यह मिथुन राहि में उच्च का होता है धनु राशि में नीच का हो जाता है,राहु और शनि रोग कारक ग्रह है,इसलिये यह ग्रह रोग जरूर देता है। काला जादू तंत्र टोना आदि यही ग्रह अपने प्रभाव से करवाता है।अचानक घटनाओं के घटने के योग राहु के कारण ही होते है,और षष्टांश में क्रूर होने पर ग्रद्य रोग हो जाते है।राहु के बारे में हमे बहुत ध्यान से समझना चाहिये,बुध हमारी बुद्धि का कारक है,जो बुद्धि हमारी सामान्य बातों की समझ से सम्बन्धित है,जैसे एक ताला लगा हो और हमारे पास चाबियों का गुच्छा है,जो बुध की समझ है तो वह कहेगा कि ताले के अनुसार इस आकार की चाबी इसमे लगेगी,दस में से एक या दो चाबियों का प्रयोग करने के बाद वह ताला खुल जायेगा,और यदि हमारी समझ कम है,तो हम बिना बिचारे एक बाद एक बडे आकार की चाबी का प्रयोग भी कर सकते है,जो ताले के सुराख से भी बडी हो,बुध की यह बौद्धिक शक्ति है क्षमता है,वह हमारी अर्जित की हुई जानकारी या समझ पर आधारित है,जैसे कि यह आदमी बडा बुद्धिमान है,क्योंकि अपनी बातचीत में वह अन्य कई पुस्तकों के उदाहरण दे सकता है,तो यह सब बुध पर आधारित है,बुध की प्रखरता पर निर्भर है।*

*आइये जानें राहु से बनने वाले शुभ अशुभ गुण व दोष:-*

*1. राहु कूटनीति का ग्रह है- राहु कूटनीति का सबसे बडा ग्रह है,राहु जहां बैठता है शरीर के ऊपरी भाग को अपनी गंदगी से भर देता है,यानी दिमाग को खराब करने में अपनी पूरी पूरी ताकत लगा देता है। दांतों के रोग देता है,शादी अगर किसी प्रकार से राहु की दशा अन्तर्दशा में कर दी जाती है,तो वह शादी किसी प्रकार से चल नही पाती है,अचानक कोई बीच वाला आकर उस शादी के प्रति दिमाग में फ़ितूर भर देता है,और शादी टूट जाती है,कोर्ट केश चलते है,जातिका या जातक को गृहस्थ सुख नही मिल पाते है।इस प्रकार से जातक के पूर्व कर्मो को उसी रूप से प्रायश्चित कराकर उसको शुद्ध कर देता है।*

*2. राहु की अपनी कोई राशि नही है-  राहु की अपनी कोई राशि नही है,यह जिस ग्रह के साथ बैठता है वहां तीन कार्य करता है।*

*१.यह उस ग्रह की पूरी शक्ति समाप्त कर देता है।*

*२.यह उस ग्रह और भाव की शक्ति खुद लेलेता है।*

*३.यह उस भाव से सम्बन्धित फ़लों को दिलवाने के पहले बहुत ही संघर्ष करवाता है फ़िर सफ़लता देता है।*
*कहने का तात्पर्य है कि बडा भारी संघर्ष करने के बाद सत्ता देता है और फ़िर उसे समाप्त करवा देता है।*

*3. राहु जेल और बन्धन का कारक है-राहु का बारहवें घर में बैठना बडा अशुभ होता है,क्योंकि यह जेल और बन्धन का मालिक है,१२ वें घर में बैठ कर अपनी महादशा अन्तर्दशा में या तो पागलखाने या अस्पताल में या जेल में बिठा देता है,यह ही नही अगर कोई सदकर्मी है,और सत्यता तथा दूसरे के हित के लिये अपना भाव रखता है,तो एक बन्द कोठरी में भी उसकी पूजा करवाता है,और घर बैठे सभी साधन लाकर देता है। यह साधन किसी भी प्रकार के हो सकते है।*

*4. राहु संघर्ष करवाता है-हजारों कुन्डलियों को देखा,जो महापुरुष या नेता हुये उन्होने बडे बडे संघर्ष किये तब जाकर कहीं कुर्सी पर बैठे,जवाहर लाल नेहरू सुभाषचन्द्र बोस सरदार पटेल जिन्होने जीवन भर संघर्ष किया तभी इतिहास में उनका नाम लिखा गया,हिटलर की कुन्डली में भी द्सवें भाव में राहु था,जिसके कारण किसी भी देश या सरकार की तरफ़ मात्र देखलेने की जरूरत से उसको मारकाट की जरूरत नही पडती थी।*

*5. राहु १९वीं साल में जरूर फ़ल देता है। यह एक अकाट्य सत्य है कि किसी कुन्डली में राहु जिस घर में बैठा है,१९ वीं साल में उसका फ़ल जरूर देता है,सभी ग्रहों को छोड कर यदि किसी का राहु सप्तम में विराजमान है,चाहे शुक्र विराजमान हो,या बुध विराजमान हो या गुरु विराजमान हो,अगर वह स्त्री है तो पुरुष का सुख और पुरुष है तो स्त्री का सुख यह राहु १९ वीं साल में जरूर देता है। और उस फ़ल को २० वीं साल में नष्ट भी कर देता है। इसलिये जिन लोगों ने १९ वीं साल में किसी से प्रेम प्यार या शादी कर ली उसे एक साल बाद काफ़ी कष्ट हुये। राहु किसी भी ग्रह की शक्ति को खींच लेता है,और अगर राहु आगे या पीछे ६ अंश तक किसी ग्रह के है तो वह उस ग्रह की सम्पूर्ण शक्ति को समाप्त ही कर देता है।*

*6. राहु की दशा १८ साल की होती है। राहु की दशा का समय १८ साल का होता है,राहु की चाल बिलकुल नियमित है,तीन कला और ग्यारह विकला रोजाना की चाल के हिसाब से वह अपने नियत समय पर अपनी ओर से जातक को अच्छा या बुरा फ़ल देता है,राहु की चाल से प्रत्येक १९ वीं साल में जातक के साथ अच्छा या बुरा फ़ल मिलता चला जाता है,अगर जातक की १९ वीं साल में किसी महिला या पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बने है,तो उसे ३८ वीं साल में भी बनाने पडेंगे,अगर जातक किसी प्रकार से १९ वीं साल में जेल या अस्पताल या अन्य बन्धन में रहा है,तो उसे ३८ वीं साल में,५७ वीं साल में भी रहना पडेगा। राहु की गणना के साथ एक बात और आपको ध्यान में रखनी चाहिये कि जो तिथि आज है,वही तिथि आज के १९ वीं साल में होगी।*

*7. राहु चन्द्र हमेशा चिन्ता का योग बनाते हैं। राहु और चन्द्र किसी भी भाव में एक साथ जब विराजमान हो,तो हमेशा चिन्ता का योग बनाते है,राहु के साथ चन्द्र होने से दिमाग में किसी न किसी प्रकार की चिन्ता लगी रहती है,पुरुषों को बीमारी या काम काज की चिन्ता लगी रहती है,महिलाओं को अपनी सास या ससुराल खानदान के साथ बन्धन की चिन्ता लगी रहती है। राहु और चन्द्रमा का एक साथ रहना हमेशा से देखा गया है,कुन्डली में एक भाव के अन्दर दूरी चाहे २९ अंश तक क्यों न हो,वह फ़ल अपना जरूर देता है। इसलिये राहु जब भी गोचर से या जन्म कुन्डली की दशा से एक साथ होंगे तो जातक का चिन्ता का समय जरूर सामने होगा।*

*8. पंचम का राहु औलाद और धन में धुंआ उडा देता है। राहु का सम्बन्ध दूसरे और पांचवें स्थान पर होने पर जातक को सट्टा लाटरी और शेयर बाजार से धन कमाने का बहुत शौक होता है,राहु के साथ बुध हो तो वह सट्टा लाटरी कमेटी जुआ शेयर आदि की तरफ़ बहुत ही लगाव रखता है,अधिकतर मामलों में देखा गया है कि इस प्रकार का जातक निफ़्टी और आई.टी. वाले शेयर की तरफ़ अपना झुकाव रखता है। अगर इसी बीच में जातक का गोचर से बुध अस्त हो जाये तो वह उपरोक्त कारणों से लुट कर सडक पर आजाता है,और इसी कारण से जातक को दरिद्रता का जीवन जीना पडता है,उसके जितने भी सम्बन्धी होते है,वे भी उससे परेशान हो जाते है,और वह अगर किसी प्रकार से घर में प्रवेश करने की कोशिश करता है,तो वे आशंकाओं से घिर जाते है। कुन्डली में राहु का चन्द्र शुक्र का योग अगर चौथे भाव में होता है तो जातक की माता को भी पता नही होता है कि वह औलाद किसकी है,पूरा जीवन माता को चैन नही होता है,और अपने तीखे स्वभाव के कारण वह अपनी पुत्र वधू और दामाद को कष्ट देने में ही अपना सब कुछ समझती है।*

*9. सही भाव में राहु-गुरु चांडाल योग को हटाकर यान चालक बनाता है।बुध अस्त में जन्मा जातक कभी भी राहु वाले खेल न खेले तो बहुत सुखी रहता है,राहु का सम्बन्ध मनोरंजन और सिनेमा से भी है,राहु वाहन का कारक भी है राहु को हवाई जहाज के काम,और अंतरिक्ष में जाने के कार्य भी पसंद है,अगर किसी प्रकार से राहु और गुरु का आपसी सम्बन्ध १२ भाव में सही तरीके से होता है,और केतु सही है,तो जातक को पायलेट की नौकरी करनी पडती है,लेकिन मंगल साथ नही है तो जातक बजाय पायलेट बनने के और जिन्दा आदमियों को दूर पहुंचाने के पंडिताई करने लगता है,और मरी हुयी आत्माओं को क्रिया कर्म का काम करने के बाद स्वर्ग में पहुंचाने का काम भी हो जाता है। इसलिये बुध अस्त वाले को लाटरी सट्टा जुआ शेयर आदि से दूर रहकर ही अपना जीवन मेहनत वाले कामों को करके बिताना ठीक रहता है।*

*10. राहु के साथ मंगल व्यक्ति को आतंकवादी बना देता है। राहु के साथ मंगल वाला व्यक्ति धमाके करने में माहिर होता है,उसे विस्फ़ोट करने और आतिशबाजी के कामों की महारता हाशिल होती है,वह किसी भी प्रकार बारूदी काम करने के बाद जनता को पलक झपकते ही ठिकाने लगा सकता है। राहु तेज हथियार के रूप में भी जाना जाता है,अगर कुन्डली में शनि मंगल राहु की युति है,तो बद मंगल के कारण राहु व्यक्ति को कसाई का रूप देता है,उसे मारने काटने में आनन्द महसूस होता है।*

*11. राहु गुरु अपनी जाति को छुपाकर ऊंचा बनने की कोशिश करता है।राहु के साथ जब गुरु या तो साथ हो या आगे पीछे हो तो वह अपनी शरारत करने से नहीं हिचकता है,जिस प्रकार से एक पल्लेदार टाइप व्यक्ति किसी को मारने से नही हिचकेगा,लेकिन एक पढा लिखा व्यक्ति किसी को मारने से पहले दस बार कानून और भलाई बुराई को सोचेगा। राहु के साथ शनि होने से राहु खराब हो जाता है,जिसके भी परिवार में इस प्रकार के जातक होते है वे शराब कबाव और भूत के भोजन में अपना विश्वास रखते है,और अपनी परिवारिक मर्यादा के साथ उनकी जमी जमाई औकात को बरबाद करने के लिये ही आते है,और बरबाद करने के बाद चले जाते है। इस राहु के कारण शुक्र अपनी मर्यादा को भूल कर अलावा जाति से अपना सम्बन्ध बना बैठता है,और शादी अन्य जाति में करने के बाद अपने कुल की मर्यादा को समाप्त कर देता है,शुक्र का रूप राहु के साथ चमक दमक से जुड जाता है। राहु के साथ शनि की महादशा या अन्तर्दशा चलती है तो सभी काम काज समाप्त हो जाते है।*

*12- राहु के रोग- राहु से ग्रस्त व्यक्ति पागल की तरह व्यवहार करता है। पेट के रोग दिमागी रोग पागलपन खाजखुजली भूत चुडैल का शरीर में प्रवेश बिना बात के ही झूमना,नशे की आदत लगना,गलत स्त्रियों या पुरुषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना,शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना,लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना,होरर शो देखने की आदत होना,भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना,नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरुषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना,कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाडते रहना,शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फ़ेफ़डों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना,शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना,ड्र्ग लेने की आदत डाल लेना,नींद नही आना,शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना,गाली देने की आदत पड जाना।*

*नोट:-हर जातक जातिका की कुंडली में ग्रहों की स्तिथि अलग अलग होती है इसलिए हर जातक किसी भी ग्रह की वजह से शुभ या अशुभ समय से गुजर रहा है तो उनके प्रेडिक्शन या उपाय भी उनकी वर्तमान समस्या तथा कुंडली मे स्थित ग्रहों की स्तिथि के अनुसार ही किये जाये तो बेहतर परिणाम मिल पाते हैं। यही कारण है कि दुसरो की देखा देखी किये जाने वाले उपाय लाभ कि बजाय हानि ज्यादा करते हैं। हमेशा अपनी कुंडली के अनुसार ही उपाय या रत्न धारण किया करें।*
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