Monday, July 22, 2019

श्रावण में ग्रह के पूजन कर सकते हैं ?

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श्रावण में जानिए ग्रह के अनुसार किस रोग के लिए क्या उपाय पूजन कर सकते हैं।

सूर्य- से संबंधित कष्ट सिरदर्द, नेत्र रोग, अस्थि रोग आदि हों तो श्रावण मास में शिवलिंग का पूजन आक वृक्ष के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्वपत्रों से करने से इन रोगों में आराम मिलता है।

चंद्रमा- से संबंधित बीमारी या कष्ट जैसे खांसी, जुकाम, नजला, मानसिक परेशानी, रक्तचाप की समस्या आदि हों तो शिवलिंग का रुद्री पाठ करते हुए काले तिल मिश्रित दूध धार से रुद्राभिषेक करने से आराम मिलता है।

मंगल- से संबंधित बीमारी जैसे रक्तदोष हो तो गिलोय, जड़ी-बूटी के रस आदि से अभिषेक करने से आराम मिलता है।

बुध- से संबंधित बीमारी जैसे चर्म रोग, गुर्दे का रोग आदि हों तो विदारा या जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करने से आराम मिलता है।

बृहस्पति- से संबंधित बीमारी जैसे चर्बी, आंतों, लिवर की बीमारी आदि हों तो शिवलिंग पर हल्दी मिश्रित दूध चढ़ाने से आराम मिलता है।

शुक्र- से संबंधित बीमारी, वीर्य की कमी, मल-मूत्र की बीमारी, शारीरिक या शक्ति में कमी हो तो पंचामृत, शहद और घृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम मिलता है।

शनि- से संबंधित रोग जैसे मांसपेशियों का दर्द, जोड़ों का दर्द, वात रोग आदि हों तो गन्ने के रस और छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम मिलता है।

राहु -केतु से संबंधित बीमारी जैसे सिर चकराना, मानसिक परेशानी, अधरंग आदि के लिए उपर्युक्त सभी वस्तुओं के अतिरिक्त मृत संजीवनी का सवा लाख बार जप कराकर भांग-धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक करने से शांति मिलती है।
🙏🏻 बाबा की विश्वनाथ कृपा सब पर बनी रहे🙏🏻
                              ✍🏻 पं अभिषेक शास्त्री
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Saturday, July 13, 2019

पति-पत्नी का दांपत्य सुख



जनमकुंडली के 12वे घर से पति-पत्नी का सम्भोग सुख देखा जाता l
जनमकुंडली में जब भी 12वे घर में नीच ग्रह यानि राहु जो 12वे घर में नीच का माना जाता वो बैठ जाए या 12वे घर में जो ग्रह अशुभ माने जाते जैसे सूर्य, चंद्र या बुध बैठे हो या 12 वे घर में एक से ज़्यादा ग्रह बैठ जाए जो आपस में दुश्मन माने गए है जैसे शनि और चंद्र ही बैठ जाए तो ऐसे में पति-पत्नी का सम्भोग सुख अच्छा नही होगा या बेडरूम में हमेशा लड़ाई-झगड़े होते रहेंगे l


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आपने देखा होगा जब भी आप किसी ज्योतिष के पास जाते हैं तो वह आपकी पत्रिका देखता है और उसका मूल्यांकन  करके आपको आपके जीवन के उन सभी विषयों के बारे में बताता है जो आप जानना चाहते हैं। शायद कभी आपके मन में यह सवाल भी आया हो कि आखिर क्या है ये जन्म पत्रिका जिसे जन्म कुंडली भी कहते हैं? और कैसे इस पत्रिका को देखकर एक ज्योतिष हमारे जन्म, स्वाभाव, कद काठी, धन, परिवार, पढाई लिखे, नौकरी, प्रेम, शादी, संतान और भी कई तरह की जानकारियां बता सकता है? कैसे एक जन्म पत्रिका हमारे पूरे जीवन का खाका तय कर सकती है और कैसे ये भविष्यवाणियां सही साबित हो सकती है?



इस तरह के कई सवाल हैं जो एक सामान्य मनुष्य के दिमाग में आना स्वाभाविक है अगर वह ज्योतिष विधा के बारे में ज्यादा नहीं जानता। इस आलेख के माध्यम से मेरा प्रयास है कि अगर आपके दिमाग में भी इस तरह के प्रश्न हैं तो उनका उत्तर आपको दे सकूं।



आप सभी एक्स-रे फिल्म के बारे में तो ज़रूर जानते होंगे...जिसके माध्यम से हम शरीर के अंदर किसी भाग कि स्थिति को यथावत देख पाते हैं। हमारी जन्मपत्रिका भी एक तरह कि एक्स-रे फिल्म कि तरह ही है। दरअसल जन्म पत्रिका, हमारे जन्म के समय आकाश या ब्रह्माण्ड में बनने वाली ग्रहों कि स्थिति का एक्स रे या खाका है, जो यह बताता है कि जिस तिथि ,समय और स्थान पर हमारा जन्म हुआ था उस समय ब्रम्हाण्ड के सभी गृह किस स्थिति में थे। और यह खाका ही ग्रहों कि दशा और दिशा के माध्यम से सही तरीके से समझा जाए तो जातक के जीवन कि विभिन्न घटनाओं और पहलुओं को सटीक तरीके से समझा जा सकता है।



जन्मपत्रिका में १२ भाव होते हैं, जो १२ खानों के रूप में नजर आते हैं। इन १२ भावों में प्रत्येक भाव आपके जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समेटे हुए हैं, जिनमे आप खुद, आपसे जुड़े समस्त संबंध, घर, परिवार, कुटुंब, स्वस्थ्य, शिक्षा, नौकरी, धन, जीवन कि बड़ी घटनाएं जैसे प्रेम, विवाह, संतान, मृत्य, भाग्य, मनोकामनाओं कि पूर्ति शामिल हैं। इन बारहों भावों से मिलकर ही कुंडली संपूर्ण जीवन को प्रदर्शित करती है, जिसमें प्रत्येक भाव में विराजित राशि, उनके स्वामी, दृष्टि और विभिन्न ग्रहों कि स्थिति को देखकर स्थिति, परिस्थिति, शुभ, अशुभ, का अनुमान लगाया जाता है। इसके आलावा ज्योतिष के नियमों का इसमें समावेश कर वास्तविक परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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