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Showing posts from 2019

शादी और बुध ग्रह

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बुध भी विवाह के मामले में चुप नहीं हैं श्री एच. भूतलिंगम ने अपने एक लेख में लिखा है कि यदि बुध सातवे भाव में गुलिक के साथ बैठा हुआ हो एवम उसे शनि और मंगल देखते हो तो जातक अथवा जतिका का विवाहित जीवन बहुत दुःखी होता है। यदि इस विशेष योग में बुध बढ़काधिपती भी भयंकर हो तो यह योग और भी भयंकर हो जाता है। ऐसी अवस्था में एक साथी (स्त्री या पुरूष) बीमारी और दुःख के कारण पागल तक हो जाता है।    महिलाओं की कुंडली में आठवें भाव, उसके स्वामी की स्थिति, कारक शुक्र आदि के बलवान का विचार करना चाहिए। उनकी लग्न बलवान होना एवं जल तत्व की राशि का होना उयुक्त होता है। 'कुल दोष' के अलावा उनकी कुंडलियों में द्व्तीय स्थान {लग्न से} शुक्र से द्वित्य स्थान, चन्द्रमा से  द्वितीय स्थान एवं सप्तमेश इ द्वितीय स्थान में पाप गृह नहीं होने चाहिए।                                              For More Information...... Contact:-- 8788381356 Email Us :-- NarayanJyotishParamarsh090@.com                                         Or Visit Here....✌                               NarayanJyotishParamarsh

Marriage & sexual life. [Post 3]

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 पुरुषों की कुंडलियों में सातवें भाव का स्वामी बहुत बलवान और पाप ग्रहों से अदृष्ट होना चाहिए। सातवे  भाव का स्वामी के स्वामी से केन्द्र स्थान अग्नि तत्त्व वाला ग्रह नहीं होना चाहिए। सातवे भाव का कारक शुक्र भी पाप ग्रहों से दृष्ट एवम मंगल या शनि से घिरा रहना भी सुखी विवाहित जीवन की दृष्टि से ठीक नहीं है।           शुक्र का सातवें भाव के स्वामी के साथ होना सुखी विवाहित जीवन प्रकट करता है, लेकिन यहां अगर सप्तम भाव का स्वामी सूर्य, मंगल और शनि हो तो यह बात पूर्णतया लागू नहीं होगी, बल्कि वैवाहिक जीवन दुःखपूर्ण भी हो सकता है।     और आगे की जानकारी के लिए फॉलो करें तकी हमारी नए नए पोस्ट की नोटिफिकेशन आप तक आसानी से मिलसके,      @follow me                     

Marriage and sexual life [Post- 2]

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                           जी हाँ , आपने मेरे पहले पोस्ट जैसा की पढ़े और समझे है, आज फिर हम उसी विषय पर                                    अपनी नयी और दूसरी आर्टिकल प्रस्तुत कर रहें हैं।  पहली और सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है की हमे वर और वधु की अलग - अलग विशेस्ताओ की जाँच उनकी कुंडली के आधार पर करनी चाहिए।  पुरुष की कुंडली में उसकी आयु उसका सातवाँ भाव एवं विवाह और उसके बाद में आने वाली दसा -अन्तर्दशा का अध्ययन आवश्यक है।  आयु के लिए ग्रहयोग और दसा  दोनों प्रकार  विचार करना चाहिए।               अकाल मृत्यु , दुर्घटना , हृदयावरोध आदि अशुभ और मारक दशाओ में घटित होते है। प्राचीन भारतीय संस्कृत ग्रन्थों में 'कलत्र दोष '    से योग मिलते है ,  पुरुष की कुंडली में उनका परिहार आवश्यक है।  इस आर्टिकल का संकेड़ पार्ट के लिए आप हमे कमेंट में बताय और आपको यह पोस्ट कैसा लगा यह भी बताने की कृपा करें         धन्यबाद।     http://www.narayanjyotishparamarsh.com

विवाह और यौन जीवन

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भारतीय समाज में विवाह अत्यंत महवपूर्ण धार्मिक एवं आवश्यक संस्कार है।       बहुत प्राचीन समय से विवाह के लिए कुंडलियों का मिलान करने की प्रथा चली आरही है।      इस प्रथा का आशय केवल परम्परा का निर्वाह ही नहीं हैं , अपितु गुण -धर्म -स्व्भाव और प्रकृति के अनुरूप उपुक्त जीवन -साथी की खोज भी है।                                         भारतीय ज्योतिष नक्षत्र , योग , ग्रह राशि अदि तत्वों के आधार पर व्यक्ति के स्व्भाव व गुण  का निस्चय करता है और बतलाता है की अमुक नक्षत्र ,ग्रह और राशि के प्रभाव में उत्पन्न नारी के साथी संबन्ध करना अनुकूल है। इस प्रकार कुंडलियों के मिलान की यह प्रथा वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृस्टि से  अत्यंत उपयुक्त और प्रभावसाली है।                                  भारतीय ज्योतिष मे जन्म-नक्षत्र के चरणों के आधारों पर कुंडली मिलान की परम्परा चली आरही है। प्रत्येक प्रान्त और भासा के पञ्चांग में इससे संबधित चक्र और सरणिया बनी होती हैं , और सामान्य जानकारी रखने वाले ज्योतिष -प्रेमी  भी सरलता से वर -बधु  के पारस्परिक गुणों का पता लगा सकते हैं।    प्रस्तुत अध्याय में क

शक्ति और आरोग्य के देवता हैं सूर्य देव

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🌹🕉श्री भुवन भाष्करायनमः🌹      भगवान सूर्य की साधना,आराधना एवं अर्चना के परम पवित्र एवं अक्षय फलदायी पर्व "सूर्य षष्ठी" के पावन उपलक्ष्य पर दो शब्द..................... ----------------------------------------    शक्ति और आरोग्य के देवता हैं सूर्य देव-- ----------------------------------------      🌷वैदिक काल से भगवान सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है। सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र बताया गया है। सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता हैं। सूर्यदेव की कृपा से ही पृथ्वी पर जीवन बरकरार है। ऋषि-मुनियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताते हुए सूर्य की साधना-आराधना को अत्यंत कल्याणकारी बताया है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। जिनकी साधना स्वयं प्रभु श्री राम ने भी की थी। विदित हो कि प्रभु श्रीराम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी सूर्य की उपासना करके ही कुष्ठ रोग दूर कर पाए थे।     सूर्य की साधना का महत्व - -----------------------------------

दीपावली के आश्चर्य जनक टोटके

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दोस्तों इस बार दीपावली के अवसर पर कुछ छोटे छोटे टोटके(उपाय) करिये और इनका आश्चर्य जनक परिणाम स्वयं देखिये। 1-दीपावली के पांच पर्व होते हैं (धनतेरस, चर्तुदशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया)। पांचों दिन दीपक (चार छोटे एक बड़ा) जरुर जलाएं। दीपक रखने से पहले आसन बिछाएं फिर खील, चावल रखें तथा उस पर दीपक रखें। धन की वृद्वि सदा बनी रहेगी। 2-यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250  ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें। 3-आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बाँध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर 'धनदा यन्त्र' को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेघ अर्पित करें, यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें. प्रतिदिन नहा धोकर यन्त्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें। 4-दीपावली के दिन सुबह तुलसी की माला बना कर मां लक्ष्‍मी के चरणों में चढ़ा दें, इससे आपको धन की बरकत हो

How to please mahalakshmi?

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🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️ दीपावली पर महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए ये है 51 उपाय, एक उपाय जरूर अपनाएं .... हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं। छत्तीसगढ के ज्योतिष विद्या के जानकार मुंगेली के ज्योतिषी बता रहे है इस दीपावली क्या करे जिससे महालक्ष्मी होगी प्रसन्न। 1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां ध

करवा चौथ : 17अक्टूबर 2019 विशेष

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती है। सुहागन महिलाओं के लिए चौथ महत्वपूर्ण है। इसलिए इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख की मनोकामना भी पूर्ण हो सकती है। करवा चौथ महात्म्य 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए। महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी

श्री राम रक्षा स्तोत्र

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 मित्रो आज हम आपको श्री राम रक्षा स्तोत्र भावार्थ सहित बतायेगें!!!!!! इस राम रक्षा स्तोत्र मंत्र के रचयिता बुध कौशिक ऋषि हैं, सीता और रामचंद्र देवता हैं, अनुष्टुप छंद हैं, सीता शक्ति हैं, हनुमान जी कीलक है तथा श्री रामचंद्र जी की प्रसन्नता के लिए राम रक्षा स्तोत्र के जप में विनियोग किया जाता हैं। ॥ अथ ध्यानम्‌ ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥ वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥ ध्यान धरिए — जो धनुष-बाण धारण किए हुए हैं,बद्द पद्मासन की मुद्रा में विराजमान हैं और पीतांबर पहने हुए हैं, जिनके आलोकित नेत्र नए कमल दल के समान स्पर्धा करते हैं, जो बाएँ ओर स्थित सीताजी के मुख कमल से मिले हुए हैं- उन आजानु बाहु, मेघश्याम,विभिन्न अलंकारों से विभूषित तथा जटाधारी श्रीराम का ध्यान करें | ॥ इति ध्यानम्‌ ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥ श्री रघुनाथजी का

जानें गणेश चतुर्थी तिथि

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 जानें गणेश चतुर्थी तिथि, डेट, टाइम, कथा और महत्व भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को गजानन, गजदंत, गजमुख जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल हिन्दू पंचाग के भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को  मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुथी 2 सितंबर को शुरू हो रही है। दो सितंबर को ही लोग भगवान गणेश की मूर्ति स्थापति कर अगले 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे। गणेश चतुर्थी कथा - पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले चंदन का उपटन लगा रही थीं। इस उबटन से उन्होंने भगवान गणेश को तैयार किया और घर के दरवाजे के बाहर सुरक्षा के लिए बैठा दिया। इसके बाद मां पार्वती स्नान करने लगे। तभी भगवान शिव घर पहुंचे तो भगवान गणेश ने उन्हें घर में जाने से रोक दिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और गणेश सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती को जब इस बात का

रक्षा बंधन के त्यौहार को बनाए खास

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🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿 रक्षा बंधन के त्यौहार को बनाए खास, जानें कौन से रंग की राखी आपके भाई के लिए रहेगी शुभ ... भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन त्यौहर इस बार स्वतंत्रता दिवस यानी कि 15 अगस्त के दिन पड़ रहा है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की लंबी उम्र के लिए उन्हें रक्षा सूत्र बांधती है। राखी कौन से कलर की लेनी है, कैसी राखी लें वैसे तो ये बहनों की चॉइस पर निर्भर करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने भाई के जीवन में तरक्की के लिए आप उन्हें उनकी राशि अनुसार राखी बांध सकती हैं। क्योंकि हर एक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है। और हर ग्रह का एक पसंदीदा रंग भी होता है। बस उसी को देखते हुए आप अपने भाई के लिए राखी का रंग चुन सकती हैं… मेष राशि: जिस बहन के भाई की राशि मेष है उन्हें अपनी भाई को लाव रंग की राखी बांधनी चाहिए। क्योंकि इन राशि वालों का स्वामी ग्रह मंगल है। इससे आपके भाई के शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी। वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातकों को नीले रंग की राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा। क्योंकि आपकी राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। मिथुन राशि: मिथुन राशि का स्वामी ग्

श्रावण में ग्रह के पूजन कर सकते हैं ?

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 श्रावण में जानिए ग्रह के अनुसार किस रोग के लिए क्या उपाय पूजन कर सकते हैं। सूर्य- से संबंधित कष्ट सिरदर्द, नेत्र रोग, अस्थि रोग आदि हों तो श्रावण मास में शिवलिंग का पूजन आक वृक्ष के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्वपत्रों से करने से इन रोगों में आराम मिलता है। चंद्रमा- से संबंधित बीमारी या कष्ट जैसे खांसी, जुकाम, नजला, मानसिक परेशानी, रक्तचाप की समस्या आदि हों तो शिवलिंग का रुद्री पाठ करते हुए काले तिल मिश्रित दूध धार से रुद्राभिषेक करने से आराम मिलता है। मंगल- से संबंधित बीमारी जैसे रक्तदोष हो तो गिलोय, जड़ी-बूटी के रस आदि से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बुध- से संबंधित बीमारी जैसे चर्म रोग, गुर्दे का रोग आदि हों तो विदारा या जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बृहस्पति- से संबंधित बीमारी जैसे चर्बी, आंतों, लिवर की बीमारी आदि हों तो शिवलिंग पर हल्दी मिश्रित दूध चढ़ाने से आराम मिलता है। शुक्र- से संबंधित बीमारी, वीर्य की कमी, मल-मूत्र की बीमारी, शारीरिक या शक्ति में कमी हो तो पंचामृत, शहद और घृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम

पति-पत्नी का दांपत्य सुख

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जनमकुंडली के 12वे घर से पति-पत्नी का सम्भोग सुख देखा जाता l जनमकुंडली में जब भी 12वे घर में नीच ग्रह यानि राहु जो 12वे घर में नीच का माना जाता वो बैठ जाए या 12वे घर में जो ग्रह अशुभ माने जाते जैसे सूर्य, चंद्र या बुध बैठे हो या 12 वे घर में एक से ज़्यादा ग्रह बैठ जाए जो आपस में दुश्मन माने गए है जैसे शनि और चंद्र ही बैठ जाए तो ऐसे में पति-पत्नी का सम्भोग सुख अच्छा नही होगा या बेडरूम में हमेशा लड़ाई-झगड़े होते रहेंगे l http://www.narayanjyotishparamarsh.com  Appointment Whtsapp-  +91-8788381356

Astrology information .

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 आपने देखा होगा जब भी आप किसी ज्योतिष के पास जाते हैं तो वह आपकी पत्रिका देखता है और उसका मूल्यांकन  करके आपको आपके जीवन के उन सभी विषयों के बारे में बताता है जो आप जानना चाहते हैं। शायद कभी आपके मन में यह सवाल भी आया हो कि आखिर क्या है ये जन्म पत्रिका जिसे जन्म कुंडली भी कहते हैं? और कैसे इस पत्रिका को देखकर एक ज्योतिष हमारे जन्म, स्वाभाव, कद काठी, धन, परिवार, पढाई लिखे, नौकरी, प्रेम, शादी, संतान और भी कई तरह की जानकारियां बता सकता है? कैसे एक जन्म पत्रिका हमारे पूरे जीवन का खाका तय कर सकती है और कैसे ये भविष्यवाणियां सही साबित हो सकती है? इस तरह के कई सवाल हैं जो एक सामान्य मनुष्य के दिमाग में आना स्वाभाविक है अगर वह ज्योतिष विधा के बारे में ज्यादा नहीं जानता। इस आलेख के माध्यम से मेरा प्रयास है कि अगर आपके दिमाग में भी इस तरह के प्रश्न हैं तो उनका उत्तर आपको दे सकूं। आप सभी एक्स-रे फिल्म के बारे में तो ज़रूर जानते होंगे...जिसके माध्यम से हम शरीर के अंदर किसी भाग कि स्थिति को यथावत देख पाते हैं। हमारी जन्मपत्रिका भी एक तरह कि एक्स-रे फ

घर परिवार की खुशहाली के लिए औरतें सुबह उठतकर जरूर करें ये काम

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आपको बता दें, कि हिंदू धर्म शास्त्रों में लिखा हैं कि घर में खुशहाली की चाबी महिला के हाथ में होती हैं घर की औरत जैसा चाहे अपने घर को बना सकती हैं वही वास्तुशास्त्रों के मुताबिक अगर औरत कुछ चीजों को ध्यान में रखे तो घर की सभी परेशानियों और समस्याओं से मनुष्य को छुटकारा मिल सकता हैं वही ऐसा भी कहा जाता हैं कि जिस घर का​ निर्माण वास्तु के हिसाब से नहीं होता हैं वहां के लोगो को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं इसके साथ ही वास्तुशास्त्र में कुछ ऐसी बातें भी बताई गई हैं जिनका महिलाओं के द्वारा पालन करना लाभकारी माना जाता हैं तो आज हम आपको वास्तु शास्त्रों के हिसाब से घर की महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं। वास्तुशास्त्रों के मुताबिक घर की महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। सुबह उठकर घर की साफ सफाई करने के बाद भगवान की आरती उतारने से घर में मौजूद आलस्य और परेशानियां मीलों दूर हो जाती हैं वही साथ ही घर के लोगो का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता हैं। घर के मुखिया अगर सुबह उठकर तांबे के लोटे में पानी भरकर, मेन गेट या फ

जन्मपत्रिका

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जन्मपत्रिका में राहु -केतु द्वारा निर्मित शुभाशुभ योग 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 १ अष्ट लक्ष्मी योग👉 जन्मांग में राहु छठे स्थान में और वृहस्पति केंद्र में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग बनता हैं। इस योग के कारण जातक धनवान होता हैं और उसका जीवन सुख शांति के साथ व्यतीत होता हैं। २ मोक्ष योग👉 जन्मांग में वृहस्पति और केतु का युति दृष्टि सम्बन्ध हो तो मोक्ष योग होता हैं। यदि केतु गुरु की राशी और वृहस्पति उच्च राशी कर्क में हो तो मोक्ष की सम्भावना बढ़ जाती हैं। ३ परिभाषा योग👉 तीसरे छठे, दसवे या ग्यारहवे भाव में राहु शुभ होकर स्थित हो तो परिभाषा योग का निर्माण करता हैं। ऐसा राहु जातक को कई प्रकार की परेशानियों से बचा लेता हैं। इनमे स्थित राहु दुसरे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करता हैं। ४👉 अरिष्ट भंग योग👉 मेष ,वृष या कर्क लग्न में राहु नवम, दशम या एकादश भाव में स्थित हो तो अरिष्ट भंग योग बनता हैं जो अपने नाम के अनुसार ही कई प्रकार के अरिष्टो का नाश करता हैं। ५ लग्न कारक योग👉 यदि लग्नेश अपनी उच्च राशी या स्वराशी में हो और राहु लग्नेश की राशी में स्थित हो तो लग्न कारक योग बनता हैं। यह

सूर्य अर्घ्य

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ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भारतीय शास्त्रों के अनुसाए सूर्य देव को जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. जी हां अक्सर आप अपनी समस्या लेकर जब किसी पंडित के पास जाते है, तो वो सबसे पहले सूर्य को अर्घ देने का उपाय ही सुझाते है. वही अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे सूर्य ग्रह मजबूत हो तो यह माना जाता है, कि वह व्यक्ति काफी गुणवान होता है. साथ ही समाज मे उसका बहुत मान सम्मान भी होता है. इसके इलावा वह बहुत प्रतिष्ठित भी होता है. ऐसे मे कुंडली मे सूर्य ग्रह को मजबूत रखना बेहद जरुरी है। वैसे महाभारत काल से ऐसा माना जाता है, कि कर्ण नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करते थे और सूर्य को जल का अर्घ भी देते थे. इसके इलावा सूर्य देव की पूजा के बारे मे भगवान् राम की कथा मे भी यह लिखा गया है, कि भगवान् राम हर रोज सूर्य देव की पूजा करते थे और अर्घ देते थे. वैसे कलयुग मे भी ऐसे बहुत से लोग है जो सूर्य देव को जल अर्पित करते है और उनकी पूजा करते है. गौरतलब है, कि सूर्य देव को अगर पूरी विधि के साथ जल चढ़ाया जाये तो इसके परिणाम और भी अच्छे होते है। यदि ह

Gajendra Moksha

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          :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::          ‼️Gajendra Moksha- Significance ‼️ ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: The Bhagwat has many Kathas which explain some very important deep meanings to life and sufferings.Many of them are also indicative of Astrology or guidance to dealing with difficulties in life. Gajendra Moksha is a story of an elephant who was the king in his forest. While drinking water from the Lake he is suddenly attacked by a crocodile. He tries his best but he is not able to get his foot out of the crocodile s mouth. He is stuck and caught, the pain is immense and unbearable. When he just cannot take the suffering anymore he calls out to Vishnu.  His prayer is a powerful, beautiful stotra which can be chanted by anyone to relieve themselves of sufferings. Finally, Vishnu appears and takes Ganjendra with him to Vishnu Lok and all his suffering is over and he finds ema

How do karma ?

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    🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁 We know very well. We will get the fruits of our deeds, yet we can not do good deeds, either You can say that if the fruit of the action done by us is not conducive to our situation then what will you do in Like this..........? Message directly on Whatsapp with your horoscope details.  WhatsApp no>+91~8788381356 Thank you.   To know, contact. 

काले तिल के टोटके

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काले तिल के 7 चमत्कारिक टोटके 🔸🔸🔹🔸🔸🔸🔸🔹🔸🔸 कार्यों में आ रही परेशानियों और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र की किताबों में कई तरह के टोटके या उपाय बताए गए हैं उन्हीं में से एक है काले तिल के असरकार और चमत्कारिक उपाय। आप भी जानिए... 1👉 राहु-केतु और शनि से मुक्ति हेतु 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️        कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रहा हो तो प्रत्येक शनिवार को बहते जल की नदी में काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।आप काले तिल भी दान कर सकते हैं। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृदोष आदि में भी यह उपाय कारगर है। 2.👉 धन की समस्या दूर करने हेतु  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  हर शनिवार काले तिल, काली उड़द को काले कपड़े में बांधकर किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। इस उपाय से पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। धनहानि रोकने हेतु : मुठ्ठी भर काले तिल को परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसारकर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बं

*धन-नाश योग--*

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💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं  बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है| ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है| इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं| इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं|* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है| जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है| सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उलझा र