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Showing posts from 2020

राजनेता बनने के योग

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  आपकी कुंडली में हैं ये योग, तो आपको बड़ा राजनेता बनाकर छोड़ेगें।  व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है।  ज्योतिषशास्त्र एक ऐसी विद्या है जो लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को उजागर करने में सक्षम है। कुंडली अध्ययन के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु)के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भी गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।    किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह 'स्व' अर्थात स्वयं को सूचित करता है और इस पर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है। जानकारों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के योगों का बड़ा महत्व है। पराशर से लेकर जैमनी तक सभी ने ग्रह योग को ज्योतिष फलदेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है। अपने कुंडली से संबधित और अधिक जानकारी के लिए कृपया पेज को सब्स्क्राइब करें।  और हमें कमेंट में

बुध अरिष्ट शांति के विशेष उपाय एवं टोटके

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ १👉 ब्रह्मी बूटी या तुलसी की जड़ हरे वस्त्र में रखकर बुध के नक्षत्रो (अश्लेशा,ज्येष्ठा, एवं रेवती) में बुध के बीज मंत्र की कम से कम ३ माला जप करने के बाद हरे रंग के धागे में गंगा जल के छींटे लगा कर पुरुष दाहिनी तथा स्त्री बाहिनी भुजा में धारण करने से बुध कृत अरिष्ट की शांति होगी। २👉 किसी भी शुक्ल पक्ष के  प्रथम बुधवार से शुरू करके लगातार २१ दिन तक श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ नियमित रूप से करें अंतिम दिन उद्यापन में पांच कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र ५ फल एवं मिठाई दक्षिणा सहित दान करने से बुध के शुभत्व में वृद्धि होती है। ३👉 विद्या में बाधा या वाणी में दोष होने की स्तिथि में सरस्वती स्त्रोत्र का शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ करके २१ दिन लगातार माँ सरस्वती को इलाईची, मिश्री एवं केले का भोग अर्पण करने के बाद पाठ करने से दोषों की शांति होती है। पाठ के बाद प्रसाद को बाँट कर स्वयं ग्रहण करे। सायं काल तुलसी जी के आगे घी का दीप जलाएं। ४👉 व्यापार में हानि अथवा संतान कष्ट की स्थिति में प्रत्येक बुधवार या प्रतिदिन गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ

गोचर में बुध

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〰️〰️〰️〰️ जन्म या नाम राशि से २' ४' ६' ८' १० व ११ वें स्थान पर बुध शुभ फल देता है। शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है। जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग, चुगलखोरी, धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है। दूसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है। तीसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है। चौथे👉 स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है। पांचवें👉 स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है। छठे👉 स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता है लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है। सातवें👉 स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है। आठवें👉 स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्

बुध का सामान्य दशा फल

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध स्वग्रही, मित्र, उच्च राशि, नवांश का, शुभ भावाधिपति, षड्बली, शुभ युक्त, दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुद्धि की प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता, हास्य में रूचि, सुख-सौभाग्य, गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है। लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है। जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है। यदि बुध अस्त , नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार में हानि ,शेयरों में घाटा

बुद्ध ग्रह का आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव

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〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :- मेष👉 बुध हो तो जातक कृश देह वाला, धूर्त, विग्रह प्रिय, नास्तिक, दाम्भिक, मद्यपान करने वाला, जुआरी,,नृत्य संगीत में रूचि रखने वाला, असत्य भाषी ,लिपि का ज्ञाता, परिश्रम से प्राप्त धन को नष्ट करने वाला,रति प्रिय,ऋण व बंधन भोगने वाला,कभी चंचल तो कभी स्थिर स्वभाव का होता है। वृष👉 बुध  हो तो जातक कार्य में दक्ष, विख्यात, शास्त्र का ज्ञाता, वस्त्र अलंकार व सुगंध प्रेमी, स्थिर प्रकृति,उत्तम स्त्री व धन से युक्त, मनोहर वाणी वाला, हास्य प्रेमी व वचन का पालन करने वाला होता है। मिथुन👉   बुध हो तो जातक ,बहुत विषयों का ज्ञाता ,शिल्प कला में कुशल,धर्मात्मा,बुद्धिमान, प्रिय भाषी,कवि,अल्प रतिमान, स्वतंत्र, दानी,पुत्र-मित्र युक्त,प्रवक्ता एवम अधिक कार्यों में लीन होता है। कर्क👉 बुध हो तो जातक प्राज्ञ,विदेश निरत, रति व गीत संगीत में चित्त वाला,स्त्री द्वेष के कारण नष्ट धन वाला,कुत्सित,चंचल,अधिक कार्यों में रत,अपने कुल कि कीर्ति के कारण प्रसिद्ध,बहु प्रलापी जल से धन लाभ प्राप्त करने वाला तथा अपने बन्धु-बांधवों से द

बुध ग्रह एक परिचय

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बुध👉 ग्रह रजोगुणी, पृथ्वी तत्त्व प्रधान,क्षुद्र जाति, गोलाकृति, त्रिधातु प्रकृति, उत्तर दिशा का स्वामी, दूर्वा की भांति हरा रंग, चर प्रकृति, मिश्रित रस, धातु स्वर्ण तथा इसके अधिपति देवता भगवान् श्री विष्णु हैं। ग्रह मंडल में बुध युवा राजकुमार का प्रतिक है। बुध मिथुन एवं कन्या राशि का स्वामी है तथा यह कन्या राही के १५° अंश पर परमोच्च और मीन के १५° अंश पर परम नीच का माना जाता है।तथा कन्या राशि के १६° से २०° तक मूल त्रिकोणस्थ होता है।इसकी सूर्य-शुक्र के साथ मैत्री भाव , चंद्र के साथ शत्रु भावी, मंगल-गुरु-शनि के साथ समभाव रखता है।बुध एक राशि चक्र को लगभग १८ दिन में पूरा कर लेता है। कारकत्व👇 〰️〰️〰️ बुध बुद्धि-चातुर्य, वाक् शक्ति(वाणी), त्वचा, मित्र-सुख, विद्या, शिल्प, व्यवसाय, लेखन, गणित, कला आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त बुध से ज्योतिष, निपुणता, चिकित्सा, क़ानून, व्यापर, बंधु सुख, अध्यापन, संपादन, चित्रकला, चाची, मामी, मौसी, भानजा, भानजी, आदि बंधु वर्ग,भगवान् विष्णु संबंधी धार्मिक कार्य,विवेक, बुद्धि, तर्क-वितर्क, प्रकाशन, अभिनय, वकालत आदि बौद्धिक कार्यो का विच

शारदीय नवरात्र

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AstroSuccess

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जन्मकुण्डली में शनि

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  शनि का यदि अन्य ग्रहों से योग हो तो भिन्न भिन्न प्रकार के फल व्यक्ति को प्राप्त होते हैं. आईये उन्हें जानते हैं। ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***    ***   ***   ***   ***   ***   ***   ***  ज्योतिष संबंधित  समस्त जानकारी के लिए इस पेज को फॉलो करें लाइक करें और शेयर जरूर करें अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें। शनि + सूर्य – कुण्डली में शनि और सूर्य का योग बहुत शुभ नहीं माना गया है यह जीवन में संघर्ष बढ़ाने वाला योग माना गया है फलित ज्योतिष में सूर्य, शनि को परस्पर शत्रु ग्रह माना गया है कुंडली में शनि और सूर्य का योग होने पर व्यक्ति को आजीविका पक्ष में संघर्ष का सामना करना पड़ता है विशेष रूप से करियर का आरंभिक पक्ष संघर्षपूर्ण होता है और यदि शनि अंशों में सूर्य के बहुत अधिक निकट हो तो आजीविका में बार बार उत्तर चढाव रहते है, शनि और सूर्य का योग होने पर जातक को या तो पिता के सुख में कमी होती है या पिता के साथ वैचारिक मतभेद रहते हैं, यदि शनि और सूर्य का योग शुभ भाव में बन रहा हो तो ऐसे में संघर्ष के बाद सरकारी नौकरी का योग बनता है। शनि + चन्द्रम

हस्तरेखा शास्त्र:

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 हाथ की ये तीन रेखांए बताती हैं जीवन का पूरा हाल, आपने देखी क्या ... हथेली में कई ऐसी रेखांए होती है जो आपके पूरे जीवन का हाल बता देती हैं। जैसे आप मन से कैसे है,आपका दिमाग कितना तेज है, आपकी आयु कितनी है और आपको जीवन में प्रेम मिलेगा की नहीं । यह सब बातें हृदय रेखा , मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा से जानी जा सकती है। हथेली में कई ऐसी रेखांए होती है जो आपके पूरे जीवन का हाल बता देती हैं। जैसे आप मन से कैसे है,आपका दिमाग कितना तेज है, आपकी आयु कितनी है और आपको जीवन में प्रेम मिलेगा की नहीं । यह सब बातें हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा से जानी जा सकती है। आज के समय में हर किसी के पास ये इतना समय नहीं होता कि वो ज्‍योतिषी के पास जाकर अपने बारें में जान सकें। लेकिन आज हम आपको इन्ही सब रेखाओं के बारे में बतायेंगे। जीवन रेखा ... जीवन रेखा की बात करें तो यह तर्जनी एवं अंगूठे के मध्य से होकर गुजरती है या यह कह सकते है की जीवन रेखा गुरु पर्वत के नीचे से तथा मंगल पर्वत के ऊपर से निकलती है। जीवन रेखा शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबंध के पास तक जाती है। जीवन के लिए य

मेरा/आपका किचन !!

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↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭ जय श्री कृष्णा                मित्रों,आपके घर के वास्तु में किचन का महत्वपूर्ण स्थान है ।महिलाओं का अधिकतम समय किचन में ही बीतता है। वास्तुशास्त्र के मुताबिक यदि किचन का वास्तु सही न हो तो उसका विपरीत प्रभाव महिला पर फलस्वरूप घर पर भी पड़ता है। अतएव किचन बनवाते समय आपको इन बातों पर निश्चित रूप से ध्यान रखना चाहिए ।               सर्वप्रथम आपके किचन की ऊंचाई कम से कम10 से 11 फीट होनी चाहिए और गर्म हवा निकलने के लिए वेंटीलेटर की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। यदि  किचन की ऊँचाई  जरूरत से कम हो तो महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कभी भी किचन से लगा हुआ कोई जल स्त्रोत नहीं होना चाहिए इसलिए किचन के आसपास बोर, कुआँ, बाथरूम बनवाना अवाइड करें, सिर्फआप इसमे वाशिंग स्पेस दे सकते हैं। किचन के लिए सबसे  उपर्युक्त स्थान आग्नेय कोण अर्थात दक्षिण पूर्व दिशा हैं जो कि अग्नि का स्थान है ।अगर ऐसा संभव न हो तो उत्तर पश्चिम दिशा में भी किचन बनाया जा सकता है परन्तु ईशान कोण (उत्तर पूर्व) में किचन बनाने से बिल्कुल  परहेज करें । किचन का सबसे महत्

त्रिशूल रेखा

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बेहद खास व्यक्ति के हाथ में होते हैं त्रिशूल रेखा ...  यदि हस्तरेखा में त्रिशूल रेखा हो तो व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है तथा सामाजिक मान-सम्मान पद प्रतिष्ठा या उच्च पद की प्राप्ति होती है राजनीति या सरकारी या राज्य या केंद्र से जुड़ा हुआ अनेक प्रकार के लाभ होता है तथा समाज में अनेक प्रकार के भौतिक सुख सुविधा आदि की प्राप्ति होती है तथा धन संपदा से परिपूर्ण होता है आपके हाथ में भी इस तरह की किसी भी प्रकार की रेखाएं बन रही है तो आप संपर्क करें और हस्तरेखा से जुड़ा हुआ जानकारी प्राप्त करके जीवन में अनेकों लाभ लें और अधिक जानकारी समाधान उपाय विधि प्रयोग कुंडली विश्लेषण हस्तरेखा विश्लेषण यंत्र मंत्र तंत्र के लिए संपर्क करें ..   सम्पर्क सूत्र - +91-8788381356 परामर्श शुल्क 351 ₹           

अपने चेहरे के आकार से जानिए कितने भाग्‍यशाली हैं आप ...

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↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭ कहते हैं किसी का चेहरा पढ़कर आप उसके बारे में सारी बात जान सकते हैं लेकिन क्या आप जान सकते हैं किसी का चेहरा पढ़कर आप उसकी किस्मत के बारे में भी जान सकते हैं। तो कुल मिलाकर चेहरा इंसान के मन का ही नहीं, बल्कि उसकी किस्मत का भी आईना होता है। चेहरे से आप किसी भी व्यक्ति की किस्मत के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। चेहरे के आकार बताते है –  आपका चेहरा अंडाकार है, तिकोना है, चौकोर है या फिर गोल है इससे आप किस क्षेत्र में तरक्की करेंगे, आपके प्रेम संबध कैसे रहेंगे और आप किन लोगों की संगत में रहेंगे, ये सब आप जान सकते हैं।  आपका चेहरा आपकी किस्मत से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें भी बातें सकता है जो शायद कोई और ना बता पाएं। समुद्रशास्त्र में ऐसी बहुत ही बातों का ज़िक्र है। आइए जानते हैं चेहरे के आकार  के हिसाब से लोगों का भाग्य कैसा होता है – अंडाकार चेहरे वाले लोग .... अंडाकार चेहरे वाले लोगों का स्वभाव बहुत ही आकर्षक होता है। ये लोग फिल्म या मीडिया इंडस्ट्री में काफी नाम कमाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी ये होती है कि ये किसी भी सिचु

श्री गणेश की जी काल्पनिक कुंडली

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श्री गणेश की जी  काल्पनिक कुंडली से जानें उनके व्यक्तित्व को  सर्वप्रथम पूजनीय व हर कार्य में प्रथम माने जाने वाले भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी को मेष लग्न में हुआ। यह कुंडली कल्पना से बनाई गई है, जो गणेशजी के व्यक्तित्व पर आधारित है। लग्न को सिर माना गया है। लग्न में केतु है, शनि की चतुर्थ भाव से लग्न पर नीच की दृष्टि आ रही है। यानी शनि की कुदृष्टि पड़ने से उनका सिर धड़ से अलग हुआ। केतु पृथकता का कारक भी है। पौराणिक कथा के अनुसार माता का आदेश था कि किसी को भी स्नान करते वक्त नहीं आने दिया जाए। कर्क राशि, माता भाव में विराजमान है वहीं शनि भी है। शनि की दशम दृष्टि लग्न पर है  अत: शनि की कुदृष्टि के कारण सिर धड़ से अलग हुआ। यह उन्हीं के पिता भगवान शिव ने किया। ऐसा कुंडली के अनुसार देखें तो मंगल की दृष्टि लग्न व केतु पर पड़ रही है। शनि, मंगल का दृष्टि संबंध भी बन रहा है। चतुर्थ यानी माता व दशम यानी पिता भाव में स्थित ग्रहों के कारण यह संयोग बना। श्री गणेश माता-पिता के भक्त हैं। इसकी वजह सूर्य पर गुरु की कृपादृष्टि होना मान सकते हैं। उनका सिर हाथी क

श्री गणेश महोत्सव

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श्री गणेश चतुर्थी एवं श्रीगणेश महोत्सव  22 अगस्त से 1 सितंबर 2020 विशेष 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 सभी सनातन धर्मावलंबी प्रति वर्ष गणपति की स्थापना तो करते है लेकिन हममे से बहुत ही कम लोग जानते है कि आखिर हम गणपति क्यों बिठाते हैं ? आइये जानते है। हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है। लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था। अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपति जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की। गणपती जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपती जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा। महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला। अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ। वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा

हथेली में प्लस का निशान ?

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हथेली में यहां पर हो प्लस का निशान तो हो जाएं वारे न्यारे  हस्तेरखा विज्ञान में कई ऐसे शुभ चिन्हों के बारे में बताया गया है। ऐसे ही शुभ चिन्हों में से एक है प्लस यानी जोड़ का निशान। जोड़ का निशान हथेली में तर्जनी उंगली के नीचे यानी गुरु पर्वत पर हो तो बहुत ही शुभ फलदायी होता है। हस्तरेखा विज्ञान के जानकारों का कहना है कि, हथेली में गुरु पर्वत उभरा हुआ हो और किसी ओर झुका हुआ नहीं हो तो व्यक्ति महत्वाकांक्षी और ज्ञानी होता है। माय ज्योतिष के अनुभवी ज्योतिषाचार्यों द्वारा पाएं जीवन से जुड़ी विभिन्न परेशानियों का सटीक निवारण इस पर जोड़ का निशान भी नजर आए तो इसे सोने पर सुहागा समझना चाहिए। जिनकी हथेली में गुरु पर्वत उभरा और जोड़ के निशान साथ होता है तो व्यक्ति धनवान होता है। ऐसा व्यक्ति भौतिक सुख-सुविधा से पूर्ण जीवन का आनंद लेता है। यह जो भी काम करते हैं उनमें भाग्य का भरपूर सहयोग मिलता है। इनके बच्चे योग्य और माता-पिता की सेवा करने वाले होते हैं। आप अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें और दोनों हाथ की फोटो दिखा करके आप जीवन में अनेकों लाभ

नौकरी व्यापार

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नौकरी, व्यापार में स्थाई सफलता चाहते हैं तो आज ही आजमाएं ये आसान टोटका   ↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭ हर व्यक्ति का एक ही सपना होता है कि उसे जीवन स्थाई सफलता मिल जाएं और सफल होने के लिए वह तरह तरह के प्रयास भी करते रहता है, वैसे भी जीवन में कौन सफल नहीं होना चाहता है ?  कोई छोटा बिजनेसमैन हो, सरकारी नौकरी करता हो या फिर प्राइवेट फर्म में काम करता हो, हर कोई अपने जीवन में तरक्की चाहता है ।  अगर आप भी जीवव में स्थाई सफलता पाना चाहते हैं तो आज ही इन टोटकों को आजमा कर देखीये ये सरल व छोटे से टोटके आपके करियर को संवारने में भरपूर  मदद करेंगे कड़ी मेहनत के साथ-साथ ये उपाय आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा भरकर आपकी मदद जरूर करेंगे । इन उपायों को करने से पहले आपको अपने भीतर से डर और असुरक्षा नाम के दो बड़े शत्रुओं पर विजय पाना होगा तब ही यो टोटके भी आपकी कोई मदद कर पाएंगे, क्योकिं ये दोनों ही लोगों की उत्पादकता और खुशी दोनों पर ताला लगा देते हैं । अगर आप में सकारात्मक ऊर्जा का अभाव है तो स्वयं ईश्वर भी आपकी मदद नहीं कर पाएंगे । - सुबह उठते ही अपनी दोनों हथेलियों

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

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↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭↭ भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि मे श्री कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था इसलिए भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्मास्टमी  के नाम से जाना जाता है।  इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी एग्यारह अगस्त मंगलवार को है।  एग्यारह अगस्त मंगलवार को प्रातःकाल सवा छः बजे तक सप्तमी तिथि है उसके बाद अष्टमी तिथि है दूसरे दिन बारह अगस्त बुधवार को प्रातःकाल आठ बजकर एक मिनट तक, चुंकि अष्टमी तिथि मध्य रात्रि मे एग्यारह अगस्त मंगलवार को है इसलिए मंगलवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत किया जायेगा और रात्रि में जन्मोत्सव मनाया जायेगा।  इस बार भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र नहीं होगा,चुंकि नक्षत्र की अपेक्षा तिथि का ही अधिक महत्व है इसलिए एग्यारह अगस्त मंगलवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत होगा और उसी रात में भगवान का जन्मोत्सव मनाया जायेगा श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत दो दिन मनाया जाता है।  पहला दिन:- जिस दिन भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म होता है और दूसरा दिन:- रात्रि में भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म के बाद दूसरे द