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गोचर में बुध

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〰️〰️〰️〰️ जन्म या नाम राशि से २' ४' ६' ८' १० व ११ वें स्थान पर बुध शुभ फल देता है। शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है। जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग, चुगलखोरी, धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है। दूसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है। तीसरे👉 स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है। चौथे👉 स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है। पांचवें👉 स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है। छठे👉 स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता है लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है। सातवें👉 स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है। आठवें👉 स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्

बुध का सामान्य दशा फल

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध स्वग्रही, मित्र, उच्च राशि, नवांश का, शुभ भावाधिपति, षड्बली, शुभ युक्त, दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुद्धि की प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता, हास्य में रूचि, सुख-सौभाग्य, गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है। लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है। जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है। यदि बुध अस्त , नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार में हानि ,शेयरों में घाटा

बुद्ध ग्रह का आपके व्यक्तित्व पर प्रभाव

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〰️〰️〰️〰️〰️ जन्म कुंडली में बुध का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :- मेष👉 बुध हो तो जातक कृश देह वाला, धूर्त, विग्रह प्रिय, नास्तिक, दाम्भिक, मद्यपान करने वाला, जुआरी,,नृत्य संगीत में रूचि रखने वाला, असत्य भाषी ,लिपि का ज्ञाता, परिश्रम से प्राप्त धन को नष्ट करने वाला,रति प्रिय,ऋण व बंधन भोगने वाला,कभी चंचल तो कभी स्थिर स्वभाव का होता है। वृष👉 बुध  हो तो जातक कार्य में दक्ष, विख्यात, शास्त्र का ज्ञाता, वस्त्र अलंकार व सुगंध प्रेमी, स्थिर प्रकृति,उत्तम स्त्री व धन से युक्त, मनोहर वाणी वाला, हास्य प्रेमी व वचन का पालन करने वाला होता है। मिथुन👉   बुध हो तो जातक ,बहुत विषयों का ज्ञाता ,शिल्प कला में कुशल,धर्मात्मा,बुद्धिमान, प्रिय भाषी,कवि,अल्प रतिमान, स्वतंत्र, दानी,पुत्र-मित्र युक्त,प्रवक्ता एवम अधिक कार्यों में लीन होता है। कर्क👉 बुध हो तो जातक प्राज्ञ,विदेश निरत, रति व गीत संगीत में चित्त वाला,स्त्री द्वेष के कारण नष्ट धन वाला,कुत्सित,चंचल,अधिक कार्यों में रत,अपने कुल कि कीर्ति के कारण प्रसिद्ध,बहु प्रलापी जल से धन लाभ प्राप्त करने वाला तथा अपने बन्धु-बांधवों से द