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राजनेता बनने के योग

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  आपकी कुंडली में हैं ये योग, तो आपको बड़ा राजनेता बनाकर छोड़ेगें।  व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है।  ज्योतिषशास्त्र एक ऐसी विद्या है जो लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को उजागर करने में सक्षम है। कुंडली अध्ययन के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु)के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। इसमें भी गगन या आकाश तत्व को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।    किसी की भी कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी माना जाता है, क्योंकि यह 'स्व' अर्थात स्वयं को सूचित करता है और इस पर आकाश तत्व का आधिपत्य होता है। जानकारों के मुताबिक ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के योगों का बड़ा महत्व है। पराशर से लेकर जैमनी तक सभी ने ग्रह योग को ज्योतिष फलदेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है। अपने कुंडली से संबधित और अधिक जानकारी के लिए कृपया पेज को सब्स्क्राइब करें।  और हमें कमेंट में

बुध अरिष्ट शांति के विशेष उपाय एवं टोटके

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〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ १👉 ब्रह्मी बूटी या तुलसी की जड़ हरे वस्त्र में रखकर बुध के नक्षत्रो (अश्लेशा,ज्येष्ठा, एवं रेवती) में बुध के बीज मंत्र की कम से कम ३ माला जप करने के बाद हरे रंग के धागे में गंगा जल के छींटे लगा कर पुरुष दाहिनी तथा स्त्री बाहिनी भुजा में धारण करने से बुध कृत अरिष्ट की शांति होगी। २👉 किसी भी शुक्ल पक्ष के  प्रथम बुधवार से शुरू करके लगातार २१ दिन तक श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ नियमित रूप से करें अंतिम दिन उद्यापन में पांच कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र ५ फल एवं मिठाई दक्षिणा सहित दान करने से बुध के शुभत्व में वृद्धि होती है। ३👉 विद्या में बाधा या वाणी में दोष होने की स्तिथि में सरस्वती स्त्रोत्र का शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ करके २१ दिन लगातार माँ सरस्वती को इलाईची, मिश्री एवं केले का भोग अर्पण करने के बाद पाठ करने से दोषों की शांति होती है। पाठ के बाद प्रसाद को बाँट कर स्वयं ग्रहण करे। सायं काल तुलसी जी के आगे घी का दीप जलाएं। ४👉 व्यापार में हानि अथवा संतान कष्ट की स्थिति में प्रत्येक बुधवार या प्रतिदिन गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ