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Showing posts from November, 2018

क्या है इस पूर्णिमा का महत्व?

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कार्तिक के महीने में पड़नेवाली पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान, त्रिपुरी पूर्णिमा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से उतना फल प्राप्त होता है, जितना पूरे साल गंगा स्नान से प्राप्त होता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर, शुक्रवार को है। 👉क्या है इस पूर्णिमा का महत्व? धर्म ग्रन्थों के अनुसार, कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि पर ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इसीलिए इस तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रोदय के समय भगवान शिव और कृतिकाओं की पूजा करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। 👉कुशा स्नान का है महत्व कार्तिक पूर्णिमा पर हाथ में कुशा लेकर स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। यदि गंगास्नान करना संभव चाहिए। ो इस दिन नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर और हाथ में कुशा लेकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए। 👉दान का है महत्व गंगा स्नान के बाद जरूरतमंदों को दान कर...

🌻 अचल लक्ष्मी के लिए मंत्र🌻

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कुबेर साधना और कुबेर मंत्र यंत्र तथा श्री यंत्र की घर मे स्थापना और श्री सूक्तं के पाठ से घर मे लक्ष्मी की स्थिरता बढ़ती है। आज कुबेर मंत्र दे रहे हैं।  स्थिर लक्ष्मी के लिए  प्राण प्रतिष्ठित कुबेर यंत्र पर इस मंत्र से अभिषेक करें। 🌻ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय दापय स्वाहा।।🌻 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 आधिक जानकारी या कुण्डली की विवेचना हेतु संपर्क करें पं:अभिषेक शास्त्री www.narayanjyotushparamarsh.com WhatsApp +918788381356 🌹🌹🌹🌹🌹🌹fees 551₹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

कैसे करें हम अपने को आगे?

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आप नौकरी करेंगे यदि निम्नलिखित योग आपकी कुंडली में  हैं..... ▪ यदि व्यय भाव का स्वामी  लग्न ,द्वितीय , पंचम , नवम अथवा दशम भाव मे हो, तो जातक नौकरी करता है। ▪❇ आप निम्न सरकारी नौकरी में सफल हो सकते है :- ▪🌼 यदि बुध बलवान होकर छठे भव से सम्बंधित हो तो, जातक कंप्यूटर आपरेटर होता है। ▪🌻 यदि दसवें  भाव का स्वामी मंगल हो तो , जातक सफल कुशल प्रशासक या सैनिक अधिकारी होता है , यही फळ तब भी होता है, जब मंगल दसवें भाव में वे हो। ▪🌻 यदि दूसरे भाव में शनि हो तो , जातक सैनिक अधिकारी होता है। ▪🌻 यदि गुरु , चन्द्र , बुध अथवा शुक्र की युति हो तो जातक अध्यापक बनता है। ▪🌻  यदि बुध, शनि की युति हो तो जातक शोध कर्ता होता है। ▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹 आप अपने जीवन में किस प्रकार से जीविका चलायेगे ? इसके कुछ योग निम्नानुसार है 👉यदि चन्द्र , और बुध की युति हो तो, जातक कवि, पत्रकार लेखक बनता है। 👉यदि सूर्य, शुक्र की युति हो तो, जातक कवि, नाटककार , लेखक, या साहित्यकार होता है। 👉 गुरू , शनि की युति जातक को बुद्धीजीवी बनाती है , किन्तु आय अधिक नहीं ह...

क्या शनि देव नही होंगे प्रसन्न?

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वर्तमान समय में शनि देव के विषय में बहुत सी भ्रांतियाँ लोगों में फैली हुई है. हर कोई शनि देव को प्रसन्न करने में जुटा है. शनिवार आया नहीं कि सुबह से ही तेल की धारा बहने लगती है. लेकिन कोई यह नहीं जानता कि किसे शनिदेव को प्रसन्न करना है और किसे नहीं. लगता है शनि मंदिर में जाने की एक होड़ सी लग गई है. हर कोई अपने तरीके से शनि महाराज को बस में करना चाहता है. शनिदेव को प्रसन्न करने की इस होड़ को बढ़ावा देने में सबसे अधिक योगदान तो मीडिया का है. उसी के माध्यम से सभी शनि महाराज का गाना गाते हैं और स्वयं को as a brand बनाकर पेश कर करते हैं. शनि का उपचार कौन करे – Who Will Cure Saturn शनि मंदिर में जाना कोई बुरी बात नही है. अवश्य जाना चाहिए लेकिन पहले यह समझे कि किसे जाना चाहिए और कब जाना चाहिए. कुंडली में मौजूद सभी ग्रह अच्छे या बुरे साबित हो सकते हैं. शनि यदि कुंडली में शुभ भावों के स्वामी हैं तब वह कभी बुरा फल नहीं देगें. यदि शनि आपकी कुंडली में बली है तब उसे और बल देने से कुछ नहीं होगा! यदि शनि शुभ होकर निर्बल है तब उसे बल देना आवश्यक है. यदि शनि कुंडली में बुरे भाव का स्वामी है तब उसे...

चंदन तिलक का महत्त्व

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〰〰🌼〰〰🌼〰〰 हमारे धर्मं में चन्दन के तिलक का बहुत महत्व बताया गया है। शायद भारत के सिवा और कहीं भी मस्तक पर तिलक लगाने की प्रथा प्रचलित नहीं है। यह रिवाज अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि मनुष्य के मस्तक के मध्य में विष्णु भगवान का निवास होता है, और तिलक ठीक इसी स्थान पर लगाया जाता है। भगवान को चंदन अर्पण 〰〰〰〰〰〰〰 भगवान को चंदन अर्पण करने का भाव यह है कि  हमारा जीवन आपकी कृपा से सुगंध से भर जाए तथा हमारा व्यवहार शीतल रहे यानी हम ठंडे दिमाग से काम करे। अक्सर उत्तेजना में काम बिगड़ता है। चंदन लगाने से उत्तेजना काबू में आती है। चंदन का तिलक ललाट पर या छोटी सी बिंदी के रूप में दोनों भौहों के मध्य लगाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण 〰〰〰〰〰〰 मनोविज्ञान की दृष्टि से भी तिलक लगाना उपयोगी माना गया है। माथा चेहरे का केंद्रीय भाग होता है, जहां सबकी नजर अटकती है। उसके मध्य में तिलक लगाकर, देखने वाले की दृष्टि को बांधे रखने का प्रयत्न किया जाता है।तिलक का महत्वहिन्दु परम्परा में मस्तक पर तिलक लगाना शूभ माना जाता है इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है । मस्तिष्क के भ्रु-मध्य ललाट...

तुला लग्न की जातिकाये

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#narayan#jyotish#paramarsh ज्योतिष चर्चा 〰️〰️🔸〰️〰️ तुला लग्न राशि में उत्पन्न होने वाली लड़की का ऊंचा कद, सुंदर मुख और आयताकार आकृति कुछ लंबाई लिए हुए संतुलित खूबसूरत एवं आकर्षक शरीर रचना वाली होती है। नयन नक्श तीखे तथा अधिक आयु में भी प्रायः युवा दिखने वाली होती है। बाल्यकाल में कुछ दुबली किंतु आयु वृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य में सुधार होता है। राशि स्वामी शुक्र शुभस्थ हो तो तुला राशि जातिका विनम्र स्वभाव सहज मुस्कान लिए हुए हंसमुख मिलनसार, नए नए मित्र बनाने में कुशल, बुद्धिमान, न्याय प्रिय, व्यवहार कुशल, स्पष्टवादी, स्वाभिमानी एवं उत्साह शील प्रकृति की होगी। इसके अतिरिक्त सौंदर्य एवं कलात्मक अभिरुचिययो से युक्त अपने रहन-सहन के तरीके, उचित पहरावे एवं खानपान के प्रति विशेष सतर्क होगी। सौंदर्य एवं सजावट के प्रसाधनों श्रृंगार एवं कलात्मक वस्तुओं के संग्रह करने का शौक रखती है। तुला जातिका स्वभावतः प्रिय भाषी, दयालु, उदार, परोपकारी, सामाजिक कार्य कलापों में सक्रिय होती है। किसी भी विषय पर गंभीर सोच विचार के उपरांत ही अंतिम निर्णय लेती है। कुंडली में यदि चंद्र शुक्र अथवा मंगल शुक्र ...

क्यो होरही विवाह में देरी?

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*विवाह में देरी का कारण और ज्योतिष* ✍🏻हर माता-पिता का सपना होता है की उनके बच्चों की शादी सही समय पर हो जाए। लेकिन कभी-कभी जातक की कुंडली में कुछ ऐसे योग होते है, जिनसे विवाह में देरी होती है। इन योगों के कारण सुयोग्य लड़के या लड़की की शादी में अकारण ही बाधाएं आती हैं और बहुत कोशिशों के बाद भी विवाह जल्दी नहीं हो पाता है। *यहां जानिए विवाह में देरी कराने वाले कुछ ऐसे ही योगों के बारे में.....* १.-कुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों हो तो विवाह की बातें होती रहती हैं, लेकिन विवाह काफी समय के बाद होता है..! २.-चौथा भाव या लग्न भाव में मंगल हो और सप्तम भाव में शनि हो तो व्यक्ति की रुचि शादी में नहीं होती है। ३.-सप्तम भाव में शनि और गुरु हो तो शादी देर से होती है। ४.-चंद्र से सप्तम में गुरु हो तो शादी देर से होती है। ५.-चंद्र की राशि कर्क से गुरु सप्तम हो तो विवाह में बाधाएं आती हैं। ६.-सप्तम में त्रिक भाव का स्वामी हो, कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो तो विवाह में देरी होती है। ७.-सूर्य, मंगल या बुध लग्न या लग्न के स्वामी पर दृष्टि डालते हों और गुरु बारहवें भाव में बैठा हो तो व्य...

शिव भक्त राहु

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हरण्यकश्यप की सिंहिका नामक पुत्री का विवाह विप्रचिति नामक दानव के साथ हुआ था उसी के गर्भ से राहु ने जन्म लिया। विप्रचिति हमेशा दानवी शक्तियों, आसुरी शक्तियों से दूर रहे और साथ ही समुद्र मंथन के समय अमृतपान के कारण राहु को अमरत्व एवं देवत्व की प्राप्ति हुई। तभी से शिव भक्त राहु अन्य ग्रहों के साथ ब्रह्मा जी की सभा में विराजमान रहते हैं इसलिए इन्हें ग्रह के रूप में मान्यता मिली। जन्मकुंडली में राहु पूर्व जन्म के कर्मों के बारे में बताता है। राहु परिवर्तनशील, अस्थिर प्रकृति का ग्रह माना जाता है। राहु में अंतर्दृष्टि भी होती है ताकि वह काल की रचनाओं के बारे में सोच सके बता सके। भौतिक दृष्टि से इसका कोई रंग, रूप, आकार नहीं है, इसकी कोई राशि, वार नहीं होता। वैदिक ज्योतिषियों ने इसकी स्वराशि, उच्च राशि और मूलत्रिकोण राशियों की कल्पना की है। जातक परिजात में राहु की उच्च राशि मिथुन, मूलत्रिकोण कुंभ और स्वराशि कन्या मानी गई है। राहु का व्यवहार अत्यंत प्रभावशाली देखा गया है। राहु पूर्वाभास की योग्यता भी विकसित करता है।  विशेषकर जब राहु जल राशियों कर्क, वृश्चिक, मीन में हो और उस प...

क्यों होती है छठ पूजा

!!छठ महापर्व कि अशेष शुभकामनाएं!!  छठ पूजा का पर्व सूर्य देव की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व साल में दो बार, चैत्र शुक्ल षष्ठी आैर कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथियों को मनाया जाता है। इनमे से कार्तिक की छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से बुलाया जाता है। क्यों होती है छठ पूजा शास्त्रों के अनुसार छठ पूजा आैर उपवास मुख्य रूप से सूर्य देव की अाराधना से उनकी कृपा पाने के लिये होता है। एेसी मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा हो जाये तो सेहत अच्छी रहती है, आैर धन-धान्य के भंडार भरे रहते हैं। एेसा भी कहा जाता है कि छठ माई की कृपा से संतान प्राप्त होती। ये व्रत रखने से सूर्य के समान तेजस्वी आैर आेजस्वी संतान के लिये भी रखा जाता है। इस पूजा आैर उपवास से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। षष्ठी की कथा छठ माता को सूर्य देव की बहन माना जाता है। वहीं छठ व्रत की एक कथा के अनुसार छठ देवी को ईश्वर की पुत्री देवसेना माना गया है। देवसेना के बारे में बताते हुए कर्इ स्थान पर उन्हीं के हव...

*राजनीति में मंत्रिपद*

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*पंचम भाव हमारी विद्या, बुद्धि, पुत्र और पुत्री, योजनाओ का आदि आदि होता है. पंचम भाव से हम देखते है की हम किसी भी चीज की कितनी योजनाये बना सकते है.अब देखिये जो ज्यादातर मंत्री होते है उनका ये भाव बलि रहता है.क्योंकि एक मंत्री एक जगह बैठ कर योजनाये बनाता है अब देखिये दसम भाव कर्म का और उसका मृत्यु भाव पंचम भाव और ६ भाव प्रतियोगिता और नोकरी का उसका नाश भाव पंचम तो इस तरह पंचम भाव दसम और षष्टम से बलि है तो ऐसा जातक या जातिका बैठ के योजनाये बनाने में निपुण होता है और एक मंत्री के लिए यही तो चाहिए.किसी भी विचारनीय भाव या गृह से पंचम भाव उसकी बुद्धि ,योजना और विद्या का होता है.जैसे दसम भाव कर्म का है तो हम उस कर्म को कितना जानते है उसके लिए २ भाव को देखिये २ भाव बलि है तो हम अपने काम को पूर्ण रूप से जानकार होंगे.जैसे कुछ लोग बोलते है न की में अपने काम की पूरी जानकार रखता हूँ।अपने काम का मास्टर हूँ.इसी तरह देखिये की २ भाव भोजन का है भोजन की योजना ६ भाव अतः ६ भाव में बैठे गृह या राशी बताएँगे की हमे खाने का क्या शौंक है।६ भाव में शनि चन्द्र या चन्द्र राहु शराब की तरफ धकेलते है.इसी तरह बता ...

💚सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त- 💚

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इस वर्ष दीपावली   पर्व दिनांक 07 नवंबर 2018 दिन बुधवार को है। दीपावली का पूजन प्रदोष काल और स्थिर लग्न में होता है। 💚वृष और सिंह स्थिर लग्न है। सिंह लग्न के समय अमावस्या का अभाव है। इस दिन स्वाति नक्षत्र सूर्योदय काल से लेकर 19.36 तक रहेगा तत्पश्चात विशाखा लग जायेगा 💚प्रदोष काल का समय गृहस्थ एवं व्यापारियों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रदोष काल का मतलब होता है दिन और रात्रि का संयोग काल। दिन भगवान विष्णु का प्रतीक है और रात्रि माता लक्ष्मी का प्रतीक है। धर्म सिंधु के अनुसार प्रदोष काल अमावस्या निहित दीपावली पूजन को सबसे शुभ मुहूर्त है ।  💙दीपावली का पूजन प्रदोष काल और स्थिर लग्न में होता है। वृष और सिंह स्थिर लग्न है। सिंह लग्न के समय अमावस्या का अभाव है। इस दिन स्वाति नछत्र सूर्योदय काल से लेकर 19.37 तक रहेगा तत्पश्चात विशाखा लग जायेगा। 1. 💚प्रदोष काल का समय- सायं 17.27 से 20.05 तक। इस मुहूर्त में एक सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें स्थिर लग्न वृषभ भी मिल जाएगा। वृष और प्रदोष दोनों मिल जाने से ये दीपावली पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। ----------------- ...

नौकरी_या_व्यापार_में_क्या_करें?

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👉सभी जानते हैं कि कुंड़ली में नौकरी या रोज़गार के लिए दसवां भाव महत्वपूर्ण है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दसवें के साथ साथ लग्न, सातवां और ग्यारहवां भाव भी बेहद महत्वपूर्ण होता है किसी भी नौकरी या व्यापार के लिए। 👉लग्न से हम अपनी काया यानि शरीर की मज़बूती देखते हैं कि हम ये काम कर भी पाएंगे या नहीं। दसवें से दसवां यानि कुंडली का सातवां भाव ये बताता है कि व्यापार अगर पार्टनर शिप में है तो ये दोस्ती चलेगी भी या नहीं मतलब साझेदार धोखा तो नहीं देगा कि व्यापार ही खत्म हो जाए। 👉अब बात आती है कि ग्यारवां भाव का क्या काम तो ग्यारवां भाव हमारी मनोकामना का भी होता है कि हमने जो सोचकर व्यापार किया वो फल मिलेगा भी या नहीं। और जो ग्रह ग्यारह भाव में है उसकी डिग्री या बल और राशि क्या है ? चर राशि में या स्थिर राशि में ??? मतलब बैठने वाला व्यापार या नौकरी अच्छी होगी या चलने वाली मतलब फील्ड वर्क टाइप। तो ये कुछ ऐसी चीजे हैं कि अगर थोडा ध्यान दिया जाए तो हमारा फायदा हो सकता है। ज्योतिर्विद:~~:पं:अभिषेक शास्त्री मोबाइल :~~:+918788381356

क्या है महत्व धनतेरस का?

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धनतेरस के कुछ मुख्य विन्दु-- ((संकलन कर्ता-- पं:अभिषेक कुमार शास्त्री  मोबाइल एवं वाट्स अप नंबर +918728381356)) ""क्यों मनाते हैं हम धनवंतरि जयंती धनतेरस? उत्तर-- कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से विश्व के प्रथम चिकित्सक श्री धन्वन्तरि भगवान का जन्म हुआ और  संसार से अमंगल दूर करने के लिएउनके हाथ में अमृत का कलश था"   **इसलिए आयु आरोग्य धन संपत्ति,वंश वृद्धि की प्राप्ति और अपने एवं अपने परिवार के आकस्मिक घटनाओं को दूर कर परिवार में हर प्रकार की मंगल कामना एवं अखंड सौभाग्य के साथ ही साथ खुखद दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए हम धनतेरस का पर्व मनाते हैं**  ""धनतेरस के दिन स्थिर लग्न वृष लग्न, सिंह लग्न वृश्चिक लग्न एवं कुंभ लग्न में श्री धन्वन्तरि भगवान की पूजा के साथ ही साथ माता महालक्ष्मी जी माता सरस्वती जी श्री गणेश भगवान एवं श्री कुबेर भगवान की भी पूजा करनी चाहिए" **तुला लग्न में भी धनतेरस और दीपावली पूजा शुभ मानी जाती है" **पुराने  या नये तिजोरी, मिट्टी या धातु के बैंक,बही खाता, आलमीरा,श्री यंत्र, कुबेर यंत्र आदि ...

Pt.abhishk shastri

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*Narayan jyotish paramarsh* Pt.abhishk sastri world famous astrologer most powerful spiritualist from India.. all religious an expert pandit your service... *past, present & future of your life...*sickness* education* employment *business *marriage *baby problem* secret matters *court *enemy Pt.abhishk shastri ☎+918788381356

कर्ज़दार नहीं बनने देंगे

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वास्तु उपाय जो कभी आपको #कर्ज़दार नहीं बनने देंगे #घर की दक्षिण-पूर्व दिशा को वास्तु अनुसार ठीक करवाएं। #घर का बेडरूम और किचन खराब होने से भी शुक्र खराब हो जाता है। #घर की साफ-सफाई को महत्व न देने से भी शुक्र खराब हो जाता है। #घर की दक्षिण-पूर्व दिशा के दूषित होने से भी शुक्र ग्रह खराब फल देने लगता है। #दक्षिण-पश्चिम दिशा की दीवार संभव हो तो इस तिजोरी को हमेशा दक्षिण या फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा की दीवार के पास ही रखें ताकि जब भी तिजोरी खुले तो उसका मुख उत्तर दिशा की ओर ही हो। क्योंकि शास्त्रों के अनुसार उत्तर दिशा में भगवान कुबेर का वास है जो कि धन के देवता माने जाते हैं। #दर्पण का करें प्रयोग लेकिन जब कभी लगे कि आपके जीवन में धन से संबंधित बाधाएं आनी शुरू हो गई हैं तो अपने घर या ऑफिस की उत्तर दिशा को परख लें। @घर की उत्तर दिशा हो सकता है कि यहां कोई अनचाही वस्तुएं जैसे कि कूड़ा-कबाड़ पड़ा हो, उसे फ़ौरन वहां से हटा दें। उत्तर दिशा में बिना वजह से पड़ी चीज़ें आर्थिक तंगी लाती हैं। एक और बात ध्यान देने योग्य है और वो यह कि कभी भी उत्तर दिशा में सीढ़ियां ना बनवाएं। यह भी धन-सम्पत्ति ...

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वास्तु आर्टिकल #narayan #jyotish #paramrsh ------------------------------------------- #क्या करें और क्या न करें #घर के एंट्रेंस पर हमेशा चमकदार रोशनी रखें, #लेकिन लाल लाइट्स से परहेज रखें। #शाम के वक्त घर के दरवाजे पर लाइट जरूर जलाएं। #घर के मुख्य द्वार के सामने कभी शीशा न रखें। #अगर जगह है तो एंट्रेंस को हरे पौधों से सजाएं। #घर का मुख्य द्वार 90 डिग्री में खुलना चाहिए, वो भी बिना किसी रुकावट के। दरवाजों के कब्जों में नियमित तौर पर तेल डालें और दरवाजों के सामान पर पॉलिश करें। एंट्रेंस में किसी भी तरह की टूट-फूट और चटकी हुई लकड़ी नहीं होनी चाहिए, न ही कोई पेच निकला होना चाहिए। #हमेशा नेम प्लेट लगाएं। #अगर घर का दरवाजा उत्तर और पश्चिम दिशा की ओर है तो धातु की नेम प्लेट लगाने की हमेशा सलाह दी जाती है। #अगर दक्षिण या पूर्व में है तो लकड़ी की नेम प्लेट लगाएं। ``````````````````````````````````````````````````````````````````````````` _____________________________________________ Vastu Shastra and Life varanasi(India) Contact for Vastu Counsultation  +91 8788381356 ...

Ketu ???

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Does Ketu destroy marriage in the 7th house? Not exactly, there are many other factors also in astrology which have to be seen, gives their impact in destroying the marriage. In reading a horoscope and predicting about an event only one planet is not seen. The total impact of the nine planets are studied and then taken into consideration before arriving at the prediction. In considering the planets, their positions in rashi their degree, aspects, significators etc are studied. In same way Ketu in 7th house has to be studied in term of its placement of rashi, degree and the nakshtra in which it is positioned in. The planets aspecting ketu is studied if its from a malefic or from a benefic planets. As ketu doesn't own any house in a horoscope, it acts as an agent of that house. So its depositors is studied and inference is generated about ketu. So to sum up, by only ketu’s placement in 7th house, a marriage in not destroyed. world famous astrologer most powerful spiritualist f...