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*💥 कुंडली में द्वितीय भाव-💥* *कुंडली के दूसरे घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में धन स्थान कहा जाता है तथा किसी भी व्यक्ति की कुंडली में इस घर का अपना एक विशेष महत्त्व होता है। इसलिए किसी कुंडली को देखते समय इस घर का अध्ययन बड़े ध्यान से करना चाहिए। कुंडली का दूसरा घर कुंडली धारक के द्वारा अपने जीवन काल में संचित किए जाने वाले धन के बारे में बताता है तथा इसके अतिरिक्त यह घर कुंडली धारक के  द्वारा संचित किए जाने वाले सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात तथा इसी प्रकार के अन्य बहुमूल्य पदार्थों के बारे में भी बताता है। किन्तु कुंडली का दूसरा घर केवल धन तथा अन्य बहुमूल्य पदार्थों तक ही सीमित नहीं है तथा इस घर से कुंडली धारक के जीवन के और भी बहुत से क्षेत्रों के बारे में जानकारी मिलती है।*  *कुंडली का दूसरा घर व्यक्ति के बचपन के समय परिवार में हुई उसकी परवरिश तथा उसकी मूलभूत शिक्षा के बारे में भी बताता है। कुंडली के दूसरे घर के मजबूत तथा बुरे ग्रहों की दृष्टि से रहित होने की स्थिति में कुंडली धारक की बाल्यकाल में प्राप्त होने वाली शिक्षा आम तौर पर अच्छी रहती है। किसी भी व्यक्ति के बाल्य काल मे
.        ।। 🕉 ।।     🌞 *सुप्रभातम्* 🌞  ««« *आज का पंचांग* »»» कलियुगाब्द.................5119 विक्रम संवत्...............2074 शक संवत्..................1939 मास.........................कार्तिक पक्ष............................कृष्ण तिथी....................अमावस्या रात्रि 12.42 पर्यंत पश्चात प्रतिपदा रवि.....................दक्षिणायन सूर्योदय..........06.25.15 पर सूर्यास्त..........05.58.03 पर तिथि स्वामी...........विश्वदेव नित्यदेवी.....................चित्रा नक्षत्र...........................हस्त प्रातः 07.26 पर्यंत पश्चात चित्रा योग...........................वैधृति दोप 03.58 पर्यंत पश्चात विषकुम्भ करण........................चतुष्पद दोप 12.24 पर्यंत पश्चात नाग ऋतु.............................शरद दिन...........................गुरुवार 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- 19 अक्तूबर सन 2017 ईस्वी । *श्री महालक्ष्मी पूजन - महाकाली पूजा |* दीपावली पर्व का पौराणिक महत्व... * त्रेतायुग में भगवान राम जब रावण को हराकर अयोध्या वापस लौटे, तब श्रीराम के आगमन पर दीप जलाकर उनक

नारियल के प्रयोग

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नारियल के प्रयोग द्वारा केसे करें अपनी सभी परेशानियों का निदान. जानिए की नारियल के प्रयोग द्वारा केसे करें अपनी सभी परेशानियों का निदान जेसा की आप सभी जानते हें की नारियल एक ऐसी वस्तु है जो कि किसी भी सात्त्विक अनुष्ठान, सात्त्विक पूजा, धार्मिक कृत्यों तथा हरेक मांगलिक कार्यों के लिये सबसे अधिक महत्व पूर्ण सामग्री है. इसकी कुछ विभिन्न विधियों द्वारा हम अपने पारिवारिक, दाम्पत्य तथा आर्थिक परेशानियों से निजात पा सकते हैं.  ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पँ अभिषेक कुमार (ज्ञान जी) के अनुसार —–घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या हो तो—- एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वास्तिक का चिन्ह बनायें. कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़ चना) के साथ हनुमान जी के मन्दिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें. तत्काल लाभ प्राप्त होगा. —यदि कुण्ड़ली में शनि, राहू, केतु की अशुभ दृष्टि, इसकी अशुभ दशा , शनि की ढ़ैया या साढ़े साती चल रही तो- एक सूखे मेवे वाला नारियल लेकर उस पर मुँह के आकार का एक कट करें. उसमें पाँच रुपये का मेवा और पाँच रुपये

*🌷कुण्डली में होरा का महत्व🌷*

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *वैदिक ज्योतिष में कई वर्ग कुण्डलियों का अध्ययन किया जाता है. कुण्डली का अध्ययन करते समय संबंधित भाव की वर्ग कुण्डली का अध्ययन अवश्य करना चाहिए. जिनमें से कुछ वर्ग कुण्डलियाँ प्रमुख रुप से उल्लेखनीय है.* *होरा कुण्डली से जातक के पास धन-सम्पत्ति का आंकलन किया जाता है. इस कुण्डली को बनाने के लिए 30 अंश को दो बराबर भागों में बाँटते हैं जिसमें  15-15 अंश के दो भाग बनते हैं. कुण्डली को दो भागों में बाँटने पर ग्रह केवल सूर्य या चन्द्रमा की होरा में आती है. कुण्डली दो भागों, सूर्य तथा चन्द्रमा की होरा में बँट जाती है. समराशि में 0 से 15 अंश तक चन्द्रमा की होरा होगी. 15 से 30 अंश तक सूर्य की होरा होगी. विषम राशि में यह गणना बदल जाती है. 0 से 15 अंश तक सूर्य की होरा होगी. 15 से 30 अंश तक चन्द्रमा की होरा होती है.* *उदाहरण के लिए माना मिथुन लग्न 22 अंश का हो तो यह विषम लग्न होगा है. विषम लग्न में लग्न की डिग्री 15 से अधिक है तब होरा कुण्डली में चन्द्रमा की होरा उदय होगी अर्थात होरा कुण्डली के प्रथ

*🌷मंगल के बारह भाव का फल ओर उपाय🌷*

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*किसी भी जातक के कुंडली के विभिन्न भावों में नौ ग्रहों की दशा उस जातक के जीवन पर कई प्रकार के प्रभाव डालती है. भावों में जिस प्रकार चंद्रमा की दशा जातक के जीवन को प्रभावित करती है, उसी प्रकार मंगल की दशा भी जातक के स्वभाव का वर्णन करती है. कुंडली के 12 भावों में मंगल की दशा से पता लगता है कि जातक का स्वभाव कैसा होगा और जातक के जीवन में इसका क्या अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ज्योतिष शास्त्र में इन भावों में मंगल की दशा से उत्पन्न विसंगतियों को दूर करने के कुछ सरल उपाय बताए गये हैं. इन उपायों को अपनाकर जातक मंगल के दोष को दूर कर सकता है और जीवन में उत्पन्न परेशानियों को सरल बना सकता है. आइए जानते हैं 12 भावों में मंगल का प्रभाव और दोष निवारण....* *पहले भाव में मंगल* *कुण्डली के प्रथम भाव में अर्थात पहले खाने में मंगल बैठा हो तो जातक झूठा और मक्कार होता है. भाइयों का अनिष्टकारक होता है. इस भाव में मंगल होने से जातक की पत्नी की मृत्यु अग्नि दुर्घटना में होती है. दो विवाह का योग बनता है. जातक की पत्नी रोगग्रस्त होती है. जातक झगड़ालू और लड़ाकू होता है. अगर पहले भाव में मंग

शनि देव की कृपादृष्टि से करें धनार्जन

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उड़द का ये उपाय करेंगे तो शनि कृपा से बढ़ सकती है कमाई: --------------------------------------------- ---------------- यदि आपकी कुंडली में शनि या राहु-केतु से संबंधित कोई दोष है तो यहां कुछ उपाय बताए जा रहे हैं। ये उपाय उड़द की दाल से किए जाने हैं। शनि का सीधा असर सभी 12 राशियों पर होता है। ज्योतिष के अनुसार शनि को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। वर्तमान में तीन राशियों (कन्या, तुला और वृश्चिक) पर शनि की साढ़ेसाती और दो राशियों (कर्क और मीन) पर शनि की ढय्या चल रही है। इस प्रकार इन पांच राशियों पर शनि का सर्वाधिक असर बना हुआ है। यदि आप भी शनि की कृपा से धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति चाहते हैं तो यहां दिए जा रहे उपाय समय-समय पर करते रहें... --------धन लाभ की कामना करते हुए यह उपाय समय-समय पर करें.-------- किसी भी शनिवार की शाम को खड़ी उड़द के एक दाने पर थोड़ा सा दही और सिंदूर लगाएं और उसे किसी भी पीपल के नीचे रख आएं। वापस आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें। यह उपाय शनिवार से ही शुरू करना चाहिए। हर शनिवार यह उपाय करते रहें। निकट भविष्य में शनि कृपा से धन संबंधी कार्य

::: बगलामुखी शाबर मंत्र साधना :::

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====================================== माता बगलामुखी के कई शाबर मंत्र मिलते है | ये मंत्र रक्षा कारक, विरोधियो का स्तम्भन , ग्रह बाधा स्तम्भन , वशीकरण आदि प्रयोजन के लिए उत्तम है | शाबर मंत्र की शक्ति गुरु कृपा और व्यक्ति के आत्मबल के साथ उसकी आतंरिक उर्जा से चलती है | मंत्र की शक्ति पूर्व संस्कार और कर्मो पर भी निर्भर करती है | शाबर मंत्र स्वयम सिद्ध होते हैं और इनमें ध्यान प्रधान है | आप जितने गहरे ध्यान में जाकर जप करेगे उतनी शक्ति का प्रवाह होगा | शाबर मंत्र की सिद्धि की कुछ निशानी होती है जैसे जप के दौरान आँखों से पानी आना, निरंतर उबासी आना, सर भरी पड़ना और बहुत सी निशानी हैं जो ज्यादातर लोग जानते नहीं हैं और लम्बे चोडे विधान देते हैं | शाबर मंत्र के लिए यह कहा गया है की १००० जाप पे सिद्धि , ५००० जाप पे उत्तम सिद्धि और १०००० जाप पे महासिद्धि | मंत्र : ॐ मलयाचल बगला भगवती माहाक्रूरी माहाकराली राज मुख बन्धनं , ग्राम मुख बन्धनं , ग्राम पुरुष बन्धनं , काल मुख बन्धनं , चौर मुख बन्धनं , व्याघ्र मुख बन्धनं , सर्व दुष्ट ग्रह बन्धनं , सर्व जन बन्धनं , वशिकुरु हूँ फट स्वाहा || व

वास्तु दोष -के निवारण जाने,,,, कैसे करते हैं।

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========================================= घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है, परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में लगाए गए चित्र का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने वाली तस्वीरें ही लगाई जानी चाहिए। घर के अन्दर और बाहर सुन्दर चित्र , पेंटिंग , बेल- बूटे , नक्काशी लगाने से ना सिर्फ सुन्दरता बढती है , वास्तु दोष भी दूर होते है। 1- फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर लगाना शुभ होता है। इनसे जीवन में खुशहाली आती है। 2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से धन लाभ होने की संभावना अधिक होती है। 3- यदि आप पर्वत आदि प्राकृतिक दृश्यों की तस्वीरें लगाना चाहते हैं तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाएं। 4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगाना शुभ होता है। 5- वसुदेव द्वारा बाढग़्रस्त यमुना से श्रीकृष्ण को टोकरी में ले जाने वाली तस्वीर समस्याओ

धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।*

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*गुरुवार को धन की बरकत के लिए उपाय --अगर आप आर्थिक रुप से परेशान रहते हैं, अनावश्यक व्यय के कारण हर महीने आपका बजट बिगड़ रहा है तो गुरुवार के दिन धन के लिए ये उपाय आजमाने चाहिए।* 💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि गुरु धन का कारक ग्रह है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है--* *1.गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।* *2.शाम के समय केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर लड्डू या बेसन की मिठाई अर्पित करें और लोगों में बांट दें।* *3.गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के बाद केसर का तिलक लगाएं। अगर केसर उपलब्ध नहीं हो तब हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं।* *4.गुरु का प्रभाव धन पर होता है। अगर कोई गुरुवार के दिन आपसे धन मांगने आता है तो लेन देने से बचें। गुरुवार को धन देने से आपका गुरु कमजोर हो जाता है, इससे आर्थिक परेशानी बढ़ती है।* *5. रोज नही तो कम से कम गुरुवार के दिन माता पिता एवं

✡️ Third Eye - आज्ञा✡️

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🌘आज्ञा चक्र मस्तक के मध्य में, भौंहों के बीच स्थित है। इस कारण इसे "तीसरा नेत्र” भी कहते हैं। आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केन्द्र है। यह मानव और दैवी चेतना के मध्य सीमा निर्धारित करता है। 🌘यह ३ प्रमुख नाडिय़ों, इडा (चंद्र नाड़ी) पिंगला (सूर्य नाड़ी) और सुषुम्ना (केन्द्रीय, मध्य नाड़ी) के मिलने का स्थान है। जब इन तीनों नाडिय़ों की ऊर्जा यहां मिलती है और आगे उठती है, तब हमें समाधि, सर्वोच्च चेतना प्राप्त होती है। 🌘इसका मंत्र है ॐ। आज्ञा चक्र का रंग सफेद है। इसका तत्व मन का तत्व, अनुपद तत्त्व है। इसका चिह्न एक श्वेत शिवलिंगम्, सृजनात्मक चेतना का प्रतीक है। इसमें और बाद के सभी चक्रों में कोई पशु चिह्न नहीं है। इस स्तर पर केवल शुद्ध मानव और दैवी गुण होते हैं। 🌘आज्ञा चक्र के प्रतीक चित्र में दो पंखुडिय़ों वाला एक कमल है जो इस बात का द्योतक है कि चेतना के इस स्तर पर 'केवल दो', आत्मा और परमात्मा (स्व और ईश्वर) ही हैं। आज्ञा चक्र की देव मूर्तियों में शिव और शक्ति एक ही रूप में संयुक्त हैं। इसका अर्थ है कि आज्ञा चक्र में चेतना और प्रकृति पहले ही संयुक्त है, किन्तु

*🌷आइये जाने उच्च तथा नीच राशि के ग्रह—🌷*

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*ज्योतिष में रूचि रखने वाले लोगों के मन में उच्च तथा नीच राशियों में स्थित ग्रहों को लेकर एक प्रबल धारणा बनी हुई है कि अपनी उच्च राशि में स्थित ग्रह सदा शुभ फल देता है तथा अपनी नीच राशि में स्थित ग्रह सदा नीच फल देता है। उदाहरण के लिए शनि ग्रह को तुला राशि में स्थित होने से अतिरिक्त बल प्राप्त होता है तथा इसीलिए तुला राशि में स्थित शनि को उच्च का शनि कह कर संबोधित किया जाता है और अधिकतर ज्योतिषियों का यह मानना है कि तुला राशि में स्थित शनि कुंडली धारक के लिए सदा शुभ फलदायी होता है।* *किंतु यह धारणा एक भ्रांति से अधिक कुछ नहीं है तथा इसका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है और इसी भ्रांति में विश्वास करके बहुत से ज्योतिष प्रेमी जीवन भर नुकसान उठाते रहते हैं क्योंकि उनकी कुंडली में तुला राशि में स्थित शनि वास्तव में अशुभ फलदायी होता हैतथा वे इसे शुभ फलदायी मानकर अपने जीवन में आ रही समस्याओं का कारण दूसरे ग्रहों में खोजते रहते हैं तथा अपनी कुंडली में स्थित अशुभ फलदायी शनि के अशुभ फलों में कमी लाने का कोई प्रयास तक नहीं करते। इस चर्चा को आगे बढ़ाने से पहले आइए एक नज़र में ग्रहों

*🌷गणेश चतुर्थी🌷*

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💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥 *अमृत योग में आएगी गणेश चतुर्थी* *1. अमृत योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से रात्रि 08:32 तक* *2. रवि योग - 25 अगस्त 2017 - प्रातः 06:06 से दोपहर 02:35 तक* *25 अगस्त 2017 को मनाई जाएगी महागणपति चतुर्थी एवं कलंक चतुर्थी* *(चंद्र दर्शन नहीं करे)* *नोट : रात्रि 09 बजकर 18 मिनट तक चन्द्रदर्शन नहीं करे क्योंकि इस दिन कलंकचौथ है, मान्यता के अनुसार जो भी इस दिन चंद्र का दर्शन करता है, उस पर कोई न कोई कलंक अवश्य  लगता है।* *गणेश पूजन का समय :- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी दिनाङ्क 25 अगस्त 2017 को चतुर्थी तिथि रात्रि 08:31 तक रहेगी। अत: 25 अगस्त को चतुर्थी चन्द्रोदव्यापिनी होने से महागणपति चतुर्थी (गणेशचौथ) इसी दिन मनायी जाएगी। गणेश पूजन का श्रेष्ठ समय - चर का चौघडिय़ा प्रात: 06:05 से प्रात: 07:42 तक रहेगा। लाभ का चौघडिय़ा प्रात: 07:42 से प्रात: 09:17 तक, अमृत का चौघडिय़ा प्रात: 09:17 से प्रात: 10:53 तक, शुभ का चौघडिय़ा दोपहर 12:28 से दोपहर 02:04 तक, चर का चौघडिय़ा सायं 05:15 से सायं 06:51 तक तथा अभिजित

राहु मंगल का विध्वंसक योग

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10 दिन हो जाइये सावधान बन रहा है राहु मंगल का विध्वंसक योग राहु-मंगल-का-विध्वंसक-योग राहु मंगल का विध्वंसक योग (दस दिन के लिए रहे ये चार राशि वाले सावधान) बीते डेढ़ वर्ष से राहु सिंह राशि में गोचर कर रहा था जो की अब 18 अगस्त 2017 को राशि परिवर्तन कर कर्क राशि में प्रवेश कर गया है। 18 अगस्त को प्रातः राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है राहु का राशि परिवर्तन करना तो ज्योतिषीय गणनाओं में बहुत महत्वपूर्ण घटना होती ही है पर यहाँ जो एक विशेष स्थिति बन रही है। ◆ वो यह है के 18 अगस्त को राहु का कर्क राशि में प्रवेश हो गया है तथा मंगल पहले से ही अपनी नीच राशि कर्क में गोचर कर रहा है जिससे 18 अगस्त को राहु के कर्क में प्रवेश करते ही कर्क राशि में राहु और मंगल की युति बन गयी है जो की 27 अगस्त तक बनी रहेगी 27 अगस्त को मंगल के सिंह राशि में आने पर राहु मंगल का नकारात्मक योग समाप्त होगा। ◆ राहु मंगल के योग को ज्योतिष में एक विध्वंसकारी और नकारात्मक योग माना गया है, मंगल और राहु दोनों ही क्रोधी प्रवृति और उठा पटक कराने वाले ग्रह हैं। ◆ मंगल को दुर्घटना, एक्सीडे

धन लाभ विचार

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                            || ॐ || धनेश (व्दितीय भाव का अधिपति) यदि धन स्थान (व्दितीय भाव) में हो अथवा केंद्र (१, ४, ७, १०) भाव में हो तो जातक को “श्रम से सफलता” (शारीरिक / मानसिक श्रम) मिलती हैं तथा धन लाभ होता हैं | धन भाव में शुभ ग्रह धनप्रद (धन प्रदान करने वाले) तथा धन भाव में पाप ग्रह धन नाशक (धन हनी करने वाले) होते हैं | यदि धन स्थान पर शुभ ग्रह की दृष्टी या योग हो तब भी जातक को धन लाभ होता रहता हैं | धनवान योग :- धनेश यदि लाभ भाव (एकादश भाव) या लाभेश धन स्थान में हो अथवा धनेश तथा लाभेश (एकादश भाव अधिपति) दोनों ही केंद्र अथवा त्रिकोण (१, ४, ५, ७, ९, १०) में स्थित हो तो मनुष्य धनवान होता हैं | व्यय योग :- यदि धनेश त्रिक भाव (६, ८, १२) में स्थित हो तो जातक को आवक से ज्यादा खर्च की चिंता सताती हैं | || ॐ तत् सत् || जय श्री नारायण   पँ अभिषेक कुमार      9472998128

सूर्य ग्रहण

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                        जय श्री नारायण मित्रो नमस्कार 21,22/8/2017 को सूर्य ग्रहण है। और मेरे जिन मित्रो की जन्म कुंडली में सूर्य ग्रहण मतलब जिन की कुंडली में सूर्य और राहू एक साथ एक ही घर में बैठे हों या जिनकी कुंडली में राहू की दृष्टी सूर्य देव पर जाती हो उन मित्रो के लिए उपाय करने का सही समय है। मित्रो 21,22/8/2017 तारीख को 23:51 मिनट पर सूर्य ग्रहण का उपाय करने का सही समय है तो कृपया आप उपाय करके अपने बुरे समय को ठीक करें। करना इये है राहू का सामान जैसे नारियल साबुत बादाम आदि ग्रहण के मध्य काल जोकि कल 23:51 मिनट पर है सिर से 7 बार उसार कर तेज बहते पानी में जल प्रबाह कर दें। अब में आपको सूर्य ग्रहण बाले जातकों को होने बाली परेसानियां बताता हूँ। इस पोस्ट से में आज आप लोगों से कुछ कुंडलियों में पाये जाने बाले बुरे योगों में से एक सूर्य ग्रहण नामक बुरे योग के बारे में बताऊंगा । जब किसी की जन्म कुंडली में सूर्य देव के साथ राहु एक ही घर में बैठ जाएँ या राहू की दृष्टि सूर्य देव के ऊपर पड़ रही हो तो सूर्य ग्रहण नाम का बुरा योग बन जाता है। इस बुरे योग के कारण व्यकित को बहुत सी परेसा

*💥आज का राशिफल💥*

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                        *💥सुप्रभातम्💥* *दिनांक 18 अगस्त 2017, शुक्रवार, विक्रमी संवत 2074, शक संवत 1939, वर्षा ऋतु, दक्षिणायण अयन, भाद्रपद मास,  एकादशी तिथि(10:01 तक। 10:02 से द्वादशी तिथि चालू), कृष्ण पक्ष,आद्रा नक्षत्र, वज्र योग।*         *👹राहुकाल👹* *💥10:47 से 12:24💥* *❌राहुकाल में सभी कार्य वर्जित हैं।❌*         *💥 नोट💥* *👉राशिफल पड़ने के बाद आगे शेयर करें। आप जैसे किसी मित्र का मार्गदर्शन होगा।*      *🌞सुर्योदय-06:19🌞*      *🌝सूर्यास्त-19:05🌝* *💥हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।राम रामेति रामेति।रमे रामें मनोरमे॥ सहस्त्र नाम त तुल्यं। राम नाम वरानने।।आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्त्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है।* *💥आज एकादशी और गुरुवार को बाल नही कटवाने चाहिये।* *💥एकादशी के दिन चावल और साबूदाना खाना वर्जित है।एकादशी को शिम्बी (सेम) नही खाना चाहिये।*  *🐑मेष-आज के दिन किए गए दान-पुण्य के काम आपको मानसिक शान्ति और सुकून देंगे। दिन बहुत लाभदायक नहीं है- इसलिए अपनी जेब