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Showing posts from April, 2021

जन्मकुंडली में यदि शुक्र शुभ हो तो

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जन्मकुंडली में यदि शुक्र शुभ हो तो ऐसे जातक के शोक बड़े-बड़े होंगे और सभी शोक पूर्ण होंगे  आपके यदि जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत है प्रबल है और योग अच्छे सहयोग बन रहे हैं तो आप जीवन में सबसे सफल व्यक्ति हो सकते हैं यह हमारे व्यक्तिगत अनुभव है. • जातक अच्छा पहनने, घूमने फिरने, Shopping करने और अपने ऊपर पैसा ख़र्च करने वाला होगा l • शादीशुदा जीवन का सुख अच्छा होगा और दोनो जीवनसाथी अलग-अलग जगह पर घूमने के शोकीन होंगे  • जातक हसमुख स्वभाव का और सभी से अच्छे सम्बंध रखने वाला होगा l   #astronarayan #narayanjyotish #narayanjyotishparamarsh #bestastrologer #ASTRO #astronarayanjyotish   आप लोग भी अपने ग्रहों से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं जन्मकुंडली से जुड़ा हुआ किसी भी प्रकार से सलाह परामर्श प्राप्त करना चाहते हैं तो संपर्क करें।  जन्म कुंडली बनवाने के लिए संपर्क करें। http://www.astronarayan.com/

35 की उम्र के बाद इनके बिगडऩे लगते हैं?

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यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो सामान्यत: व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इस योग से लाभ भी हो सकते हैं। कालसर्प योग दो चरणों में होता है उत्तरार्ध और पूर्वार्ध।  वहीं कभी-कभी व्यक्ति जीवन में बहुत जल्द धन-संपत्ति और सुख-सुविधाएं प्राप्त कर लेता है, लेकिन इसके बाद अचानक 35 वर्ष की उम्र के बाद उसके सब काम बिगड़ जाते हैं। इसके चलते उसे धन और सुख की कमी हो जाती है, इसकी वजह भी कालसर्प योग हो सकती है।  यदि कालसर्प योग का बुरा असर व्यक्ति के जीवन पर शुरू हो गया है तो उसके जीवन में कुछ खास बातें होने लगती हैं। जिनसे हम समझ सकते हैं कालसर्प योग के कारण परेशानियां बढ़ रही हैं और काम बिगड़ रहे हैं।  ऐसे बनता है कुंडली में कालसर्प योग : जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सातों ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि आ जाते हैं तो कालसर्प योग बनता है।   #astronarayan #narayanjyotish #narayanjyotishparamarsh #bestastrologer #ASTRO #astronarayanjyotish Book an appointment with expert and get ahead. Trusted astrologer.✌️✌️✌️ https:/...

ग्रहों का प्रभाव

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  ग्रहों का प्रभाव देता है अच्छे व बुरे परिणाम   व्यक्ति जब जन्म लेता है तो उसी समय से उस पर ग्रहों का प्रभाव पडऩा शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक हर व्यक्ति के जीवन में जो अच्छे या बुरे परिणाम आते रहते हैं, यह सब ग्रहों का ही प्रभाव होता है। हर व्यक्ति की कुण्डली में ग्रहों के कुछ विशेष योग होते हैं।  ज्योतिषशास्त्र के माध्यम से इन योगों से व्यक्ति के जीवन में कब कैसा उतार चढ़ाव आएगा, इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जन्म कुण्डली में योग का अध्ययन करते समय योग बनाने वाले ग्रहों की स्थिति का आंकलन बहुत ही सूक्ष्मता पूर्वक किया जाना होता है। योग के दौरान जो ग्रह प्रबल होता है उसका फल ही प्रमुख रूप से प्राप्त होता है। अगर आप जानना चाहते हैं, अपने उज्जवल भविषय के बारे में तो संपर्क करें।   शास्त्री जी  http://astronarayan.com/

ग्रह योग

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  क्या होता है ग्रह योग  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  ग्रह योग की जब हम बात कर रहे हैं तो सबसे पहले यह जानना होगा कि ग्रह योग क्या है और यह बनता कैसे है। विज्ञान की भाषा में बात करें तो दो तत्वों के मेल से योग बनता है ठीक इसी प्रकार दो ग्रहों के मेल से योग का निर्माण होता है। ग्रह योग बनने के लिए कम से कम किन्हीं दो ग्रहों के बीच संयोग, सहयोग अथवा सम्बन्ध बनना आवश्यक होता है।  ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहों के बीच योग बनने के लिए कुछ विशेष स्थितियों का होना आवश्यक होता है।जैसे: दो या दो से अधिक ग्रह मिलकर एक दूसरे से दृष्टि सम्बन्ध बनाते हों। भाव विशेष में कोई अन्य ग्रह आकर संयोग करते हों। कारक तत्व शुभ स्थिति में हों।  कारक ग्रह का अकारक ग्रह से सम्बन्ध बन रहा हो। एक भाव दूसरे भाव से सम्बन्ध बना रहे हों। नीच ग्रहों से मेल हो अथवा शुभ ग्रहों से मेल हो। इन सभी स्थितियों के होने पर या कोई एक स्थिति होने पर योग का निर्माण होता है।