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Showing posts from May, 2019

सूर्य अर्घ्य

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ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भारतीय शास्त्रों के अनुसाए सूर्य देव को जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. जी हां अक्सर आप अपनी समस्या लेकर जब किसी पंडित के पास जाते है, तो वो सबसे पहले सूर्य को अर्घ देने का उपाय ही सुझाते है. वही अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे सूर्य ग्रह मजबूत हो तो यह माना जाता है, कि वह व्यक्ति काफी गुणवान होता है. साथ ही समाज मे उसका बहुत मान सम्मान भी होता है. इसके इलावा वह बहुत प्रतिष्ठित भी होता है. ऐसे मे कुंडली मे सूर्य ग्रह को मजबूत रखना बेहद जरुरी है। वैसे महाभारत काल से ऐसा माना जाता है, कि कर्ण नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करते थे और सूर्य को जल का अर्घ भी देते थे. इसके इलावा सूर्य देव की पूजा के बारे मे भगवान् राम की कथा मे भी यह लिखा गया है, कि भगवान् राम हर रोज सूर्य देव की पूजा करते थे और अर्घ देते थे. वैसे कलयुग मे भी ऐसे बहुत से लोग है जो सूर्य देव को जल अर्पित करते है और उनकी पूजा करते है. गौरतलब है, कि सूर्य देव को अगर पूरी विधि के साथ जल चढ़ाया जाये तो इसके परिणाम और भी अच्छे होते है। यदि ह

Gajendra Moksha

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          :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::          ‼️Gajendra Moksha- Significance ‼️ ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: The Bhagwat has many Kathas which explain some very important deep meanings to life and sufferings.Many of them are also indicative of Astrology or guidance to dealing with difficulties in life. Gajendra Moksha is a story of an elephant who was the king in his forest. While drinking water from the Lake he is suddenly attacked by a crocodile. He tries his best but he is not able to get his foot out of the crocodile s mouth. He is stuck and caught, the pain is immense and unbearable. When he just cannot take the suffering anymore he calls out to Vishnu.  His prayer is a powerful, beautiful stotra which can be chanted by anyone to relieve themselves of sufferings. Finally, Vishnu appears and takes Ganjendra with him to Vishnu Lok and all his suffering is over and he finds ema

How do karma ?

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    🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁🌿🌱🍁 We know very well. We will get the fruits of our deeds, yet we can not do good deeds, either You can say that if the fruit of the action done by us is not conducive to our situation then what will you do in Like this..........? Message directly on Whatsapp with your horoscope details.  WhatsApp no>+91~8788381356 Thank you.   To know, contact. 

काले तिल के टोटके

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काले तिल के 7 चमत्कारिक टोटके 🔸🔸🔹🔸🔸🔸🔸🔹🔸🔸 कार्यों में आ रही परेशानियों और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र की किताबों में कई तरह के टोटके या उपाय बताए गए हैं उन्हीं में से एक है काले तिल के असरकार और चमत्कारिक उपाय। आप भी जानिए... 1👉 राहु-केतु और शनि से मुक्ति हेतु 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️        कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रहा हो तो प्रत्येक शनिवार को बहते जल की नदी में काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।आप काले तिल भी दान कर सकते हैं। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृदोष आदि में भी यह उपाय कारगर है। 2.👉 धन की समस्या दूर करने हेतु  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️  हर शनिवार काले तिल, काली उड़द को काले कपड़े में बांधकर किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। इस उपाय से पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। धनहानि रोकने हेतु : मुठ्ठी भर काले तिल को परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसारकर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बं

*धन-नाश योग--*

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💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं  बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है| ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है| इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं| इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं|* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है| जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है| सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उलझा र

ग्रह और बीमारियाँ

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🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 ग्रह जब भ्रमण करते हुए संवेदनशील राशियों के अंगों से होकर गुजरता है तो वह उनको नुकसान पहुंचाता है। नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को ध्यान में रखकर आप अपने भविष्य को सुखद बना सकते हैं। वैदिक वाक्य है कि पिछले जन्म में किया हुआ पाप इस जन्म में रोग के रूप में सामने आता है। शास्त्रों में बताया है-पूर्व जन्मकृतं पापं व्याधिरूपेण जायते अत: पाप जितना कम करेंगे, रोग उतने ही कम होंगे। अग्नि, पृथ्वी, जल, आकाश और वायु इन्हीं पांच तत्वों से यह नश्वर शरीर निर्मित हुआ है। यही पांच तत्व 360 की राशियों का समूह है। इन्हीं में मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व, वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व, मिथुन, तुला और कुंभ वायु तत्व तथा कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। कालपुरुष की कुंडली में मेष का स्थान मस्तक, वृष का मुख, मिथुन का कंधे और छाती तथा कर्क का हृदय पर निवास है जबकि सिंह का उदर (पेट), कन्या का कमर, तुला का पेडू और वृश्चिक राशि का निवास लिंग प्रदेश है। धनु राशि तथा मीन का पगतल और अंगुलियों पर वास है। इन्हीं बारह राशियों को बारह भाव के ना