क्या है इस पूर्णिमा का महत्व?


कार्तिक के महीने में पड़नेवाली पूर्णिमा बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे कार्तिक पूर्णिमा, गंगा स्नान, त्रिपुरी पूर्णिमा इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से उतना फल प्राप्त होता है, जितना पूरे साल गंगा स्नान से प्राप्त होता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर, शुक्रवार को है।

👉क्या है इस पूर्णिमा का महत्व?
धर्म ग्रन्थों के अनुसार, कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि पर ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इसीलिए इस तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चंद्रोदय के समय भगवान शिव और कृतिकाओं की पूजा करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं।

👉कुशा स्नान का है महत्व
कार्तिक पूर्णिमा पर हाथ में कुशा लेकर स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। यदि गंगास्नान करना संभव चाहिए।
ो इस दिन नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर और हाथ में कुशा लेकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए।

👉दान का है महत्व
गंगा स्नान के बाद जरूरतमंदों को दान करना चाहिए। इस दिन मौसमी फल, उड़द की काली दाल, चावल आदि का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा का अर्घ्य देना चाहिए।
👉इस दिन देवता काशी में मनाते हैं दीपावली
माना जाता है कि कार्तिक मास के इस दिन काशी में दीप दान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था। इसके अतिरिक्त आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को पुनः जागते हैं।

👉भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागरण से प्रसन्न होकर समस्त देवी-देवताओं ने पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्ज्वलित किए। यह दिन देवताओं की दीपावली है अतःइस दिन दीप दान व व्रत-पूजा आदि करके हम भी देवों की दीपावली में शामिल होते हैं,ताकि हम अपने भीतर देवत्व धारण कर सकें अर्थात सद्गुणों को अपने अंदर समाहित कर सकें,नर से नारायण बन सकें। देवों की दीपावली हमें आसुरी प्रवृत्तियों अर्थात दुर्गुणों को त्यागकर सद्गुणों को धारण करने के लिए प्रेरित करती हैं।

👉कार्तिक महीना भगवान कार्तिकेय द्वारा की गई साधना का माह माना जाता है। इसी कारण इसका नाम कार्तिक महीना पड़ा। नारद पुराण के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर संपूर्ण सद्गुणों की प्राप्ति एवं शत्रुओं पर विजय पाने के लिए कार्तिकेय जी के दर्शन करने का विधान है। पूर्णिमा को स्नान अर्घ्य, तर्पण, जप-तप, पूजन, कीर्तन एवं दान-पुण्य करने से स्वयं भगवान विष्णु पापों से मुक्त करके जीव को शुद्ध कर देते हैं।

👉पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद श्री सत्यनारायण की कथा का श्रवण, गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करने से प्राणी पापमुक्त-कर्जमुक्त होकर विष्णु की कृपा पाता है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस दिन आसमान के नीचे सांयकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीप प्रज्ज्वलित करने चाहिए, गंगा आदि पवित्र नदियों में दीप दान करना चाहिए।
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