*राजनीति में मंत्रिपद*



*पंचम भाव हमारी विद्या, बुद्धि, पुत्र और पुत्री, योजनाओ का आदि आदि होता है. पंचम भाव से हम देखते है की हम किसी भी चीज की कितनी योजनाये बना सकते है.अब देखिये जो ज्यादातर मंत्री होते है उनका ये भाव बलि रहता है.क्योंकि एक मंत्री एक जगह बैठ कर योजनाये बनाता है अब देखिये दसम भाव कर्म का और उसका मृत्यु भाव पंचम भाव और ६ भाव प्रतियोगिता और नोकरी का उसका नाश भाव पंचम तो इस तरह पंचम भाव दसम और षष्टम से बलि है तो ऐसा जातक या जातिका बैठ के योजनाये बनाने में निपुण होता है और एक मंत्री के लिए यही तो चाहिए.किसी भी विचारनीय भाव या गृह से पंचम भाव उसकी बुद्धि ,योजना और विद्या का होता है.जैसे दसम भाव कर्म का है तो हम उस कर्म को कितना जानते है उसके लिए २ भाव को देखिये २ भाव बलि है तो हम अपने काम को पूर्ण रूप से जानकार होंगे.जैसे कुछ लोग बोलते है न की में अपने काम की पूरी जानकार रखता हूँ।अपने काम का मास्टर हूँ.इसी तरह देखिये की २ भाव भोजन का है भोजन की योजना ६ भाव अतः ६ भाव में बैठे गृह या राशी बताएँगे की हमे खाने का क्या शौंक है।६ भाव में शनि चन्द्र या चन्द्र राहु शराब की तरफ धकेलते है.इसी तरह बता सकते है ६ भाव के हिसाब से हम क्या खाते है क्या नहीं अष्टम गूढ़ ज्ञान का अष्टम का विद्या स्थान १२ भाव अतः १२ भाव में शनि राहु या इनकी द्रष्टि हमें तंत्र की तरफ आकर्षित करती है.इसी तरह हम पंचम भाव से बहुत कुछ जान सकते है।*

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