तुला लग्न की जातिकाये

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ज्योतिष चर्चा
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तुला लग्न राशि में उत्पन्न होने वाली लड़की का ऊंचा कद, सुंदर मुख और आयताकार आकृति कुछ लंबाई लिए हुए संतुलित खूबसूरत एवं आकर्षक शरीर रचना वाली होती है। नयन नक्श तीखे तथा अधिक आयु में भी प्रायः युवा दिखने वाली होती है। बाल्यकाल में कुछ दुबली किंतु आयु वृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य में सुधार होता है। राशि स्वामी शुक्र शुभस्थ हो तो तुला राशि जातिका विनम्र स्वभाव सहज मुस्कान लिए हुए हंसमुख मिलनसार, नए नए मित्र बनाने में कुशल, बुद्धिमान, न्याय प्रिय, व्यवहार कुशल, स्पष्टवादी, स्वाभिमानी एवं उत्साह शील प्रकृति की होगी। इसके अतिरिक्त सौंदर्य एवं कलात्मक अभिरुचिययो से युक्त अपने रहन-सहन के तरीके, उचित पहरावे एवं खानपान के प्रति विशेष सतर्क होगी। सौंदर्य एवं सजावट के प्रसाधनों श्रृंगार एवं कलात्मक वस्तुओं के संग्रह करने का शौक रखती है।
तुला जातिका स्वभावतः प्रिय भाषी, दयालु, उदार, परोपकारी, सामाजिक कार्य कलापों में सक्रिय होती है। किसी भी विषय पर गंभीर सोच विचार के उपरांत ही अंतिम निर्णय लेती है। कुंडली में यदि चंद्र शुक्र अथवा मंगल शुक्र का योग हो तथा उन पर गुरु की भी दृष्टि हो तो जातिका उच्च शिक्षित होती है। इन्हें साहित्य, लेखन, संगीत, नृत्य, नाट्य आदि ललित कलाओं की ओर भी विशेष अभिरुचि होती है। व्यवसायिक तौर पर इनके द्वारा लाभ भी प्राप्त होता है।
शुक्र के कारण तुला जातिका की कल्पना शक्ति प्रबल होती है। परंतु मन की केंद्रीय शक्ति अधिक देर तक नहीं रहती। जब तक किसी कार्य क्षेत्र में लगी रहे जब तक पूरे मनोयोग से और मजबूत दिल से करेगी। परंतु अपने विचार और योजना में भी परिस्थिति अनुसार परिवर्तन करने को तैयार हो जाती हैं। वैसे स्वभाव वश परिस्थितियों में स्वयं को ढाल लेने की क्षमता रखती है। तुला जातिका सामान्यतः वर्तमान में जीने का विश्वास रखती है। बाधाओं के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सफल हो जाती है। मंगल यदि शुभस्थ हो अथवा चंद्र शुक्र का योग हो
तथा उस पर गुरु की दृष्टि हो तो उच्च शिक्षा के पश्चात प्राध्यापक या अर्धसरकारी क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त कर लेती है

गृहस्थ जीवन👉 तुला जाति का प्रेम संबंधों एवं विवाह आदि के संबंध में स्वतंत्र विचार रखती हैं। यद्यपि माता पिता की आशा के विरुद्ध आचरण भी कम ही करती देखी गई है। विवाह के पश्चात अपने पति को गृहस्थी एवं व्यवसाय में अच्छा सहयोग प्रदान करती हैं। ग्रह की सजावट, सुंदर वस्त्र, उच्च स्तरीय सवारी, बड़ा सुंदर मकान, आदि की विशेष अभिलाषी होती हैं। परंतु अपने पति के प्रति वफादार एवं निष्ठावान रहती हैं। तुला जातिका के बच्चे सीमित संख्या में होते हैं। सप्तम भाव में यदि राहु केतु शनि सूर्य आदि अशुभ ग्रह हो या उनकी अशुभ दृष्टि हो तो वैवाहिक जीवन के सुख में कमी रहती है।

उपयुक्त जीवन साथी👉 तुला जातिका (राशि या लग्न) को मेष, मिथुन, तुला व कुंभ राशि वालों के साथ वैवाहिक संबंध शुभ एवं उत्तम। वृश्चिक, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर राशि लग्न वालों के साथ मध्यम फली तथा सिंह व मीन राशि वालों के साथ शुभ फल ही नहीं होंगे। यद्यपि इस संबंध में कुंडली मिलान संबंधी नियमों का भी अनुसरण करना चाहिए।

उपयुक्त व्यवसाय👉 तुला लग्न जातिका अपनी रुचि के अनुसार ही व्यवसाय में भी कलात्मक परिवर्तन लाने के प्रयास करती रहती है। तुला जातिका को फैशन डिजाइनिंग, कंप्यूटर, ब्यूटी पार्लर, सिलाई कढ़ाई, शिल्पकारी, मॉडलिंग, गृह साज सज्जा, रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, गायन, अभिनय, प्राध्यापक, वकालत, न्यायाधीश, बैंकिंग, सिनेमा, टेलीविजन, होटल, रेस्टोरेंट, फोटोग्राफी, खिलौनों आदि से संबंधित कार्यों में विशेष सफलता प्राप्ति के अवसर मिलते हैं
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पं:अभिषेक शास्त्री
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