:::::::राहू दोष निवारक कवच :::::::

                 

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राहू -केतु का नाम सुनते ही हर व्यक्ति को भय महसूस होता है |ऐसा इनके द्वारा उत्पन्न प्रभावों के कारण होता है |इससे अधिक आधुनिक ज्योतिषियों द्वारा इनके नाम पर भयादोहन भी है और इन्हें ही हर प्रकार की समस्या का कारण मानना भी है ,जबकि यह मात्र छाया ग्रह हैं और इनका ग्रहीय रूप से स्वतंत्र अस्तित्व नहीं हैं |इनके दुष्प्रभावों का कारण इनका अँधेरे का प्रतिनिधित्व करना है जबकि उस क्षेत्र में सूर्य अथवा चन्द्रमा का प्रकाश समाप्त हो जाता है और नाकारात्म शक्तियाँ प्रबल हो जाती हैं जिससे व्यक्ति के कष्ट बढ़ जाते हैं | इस दुनिया में हर व्यक्ति राहू से परिचित है और इसके दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |राहू की दशा ,अन्तर्दशा तो कष्ट देती ही है ,इसके द्वारा बनने वाले योग जीवन भर कष्ट प्रदान करते हैं ,जैसे गुरु चांडाल योग ,कालसर्प योग आदि | राहू अकेले कष्ट देता ही है ,शुभ ग्रहों के प्रभावों में तो कमी करता ही है यह यदि पाप या अशुभ ग्रहों के साथ हुआ तो उनका कष्ट प्रद प्रभाव कई गुना बढ़ा देता है |यही यही कारण है की राहू को कुंडली में सबसे कष्टकारक माना जाता है |इसके दुष्प्रभाव के कारण सभी कार्यों में बाधा ,शत्रुओं से परेशानी ,मुकदमो -विवादों में पराजय ,आर्थिक एवं शारीरिक कष्ट ,गंभीर प्राणघातक रोग ,रक्त विकार ,दाम्पत्य कष्ट ,संतान कष्ट ,मानसिक क्लेश ,पुत्रों- संतानों से कष्ट या संतान की कमी ,कलह ,आर्थिक तंगी ,कर्ज ,वायव्य बाधा ,भूत -प्रेत -अभिचार का शीघ्र प्रभावी होना ,विषैले जंतुओं अथवा शस्त्रों से खतरा ,स्वाभाव का खराब हो जाना ,दुर्व्यसन उत्पन्न होना ,आत्महत्या की प्रवृत्ति उत्पन्न होना ,नौकर -कर्मचारी -मजदूर वर्ग से समस्या उत्पन्न होती है |यह व्यक्ति को इस स्थिति में खड़ा कर देता है की ,व्यक्ति चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता |
राहू -केतु को शास्त्रीय रूप से छाया ग्रह माना गया है किन्तु इनके गंभीर दुष्प्रभावों के कारण इनके हजारों उपाय वैदिक और तांत्रिक रूप से मिलते हैं |कुछ बड़े और कठिन हैं तो कुछ सामान्य के लिए दुरूह |इन मामलों में तंत्र मूल सूत्र को पकड़ता है और व्यक्ति की मजबूती पर भी ध्यान देता है |तंत्र राहू आदि से सम्बंधित वनस्पतियों ,यंत्रों ,मन्त्रों और इन्हें प्रभावित करने वाले अथवा इनसे व्यक्ति में प्रतिरक्षा तंत्र विकसित करने वाले योग निर्मित करता है |इनके सम्मिलित प्रयोग से ऐसे ताबीज निर्मित किये जाते हैं जो अलौकिक ऊर्जा संपन्न तो हों ही जिससे राहू आदि की शान्ति हो सके ,इसमें ऐसे भी गुण हों की व्यक्ति भी इतना इनके प्रति प्रतिरोधक होता जाए की उस पर इनका प्रभाव कम हो सके |यह उग्र ग्रह को शांत और अशुभ को शुभ कर दें | ऐसे में यदि राहू शान्ति के अचूक उपाय के रूप में तंत्रोक्त विधि से निर्मित "राहू  दोष निवारक कवच "को अपने गले में धारण किया जाए तो चमत्कारिक लाभ देखने में आता है |राहू के दुष्प्रभाव के नाश हेतु ,कालसर्प दोष ,गुरु चांडाल योग आदि के पराभाव को कम करने और जीवन में सफलताओं ,भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए कवच लाभदायक होता है ,क्योकि राहू को यदि शांत और प्रसन्न रखा जाए अथवा इसके प्रभाव को कम कर दिया जाए तो महाअशुभकारक ग्रह कम प्रभावी हो सकता है |इतना तो अवश्य होता है की इसके दुष्प्रभावों में कमी आते ही ,इसकी शान्ति होते ही अथवा इसके बल में कमी आते ही अन्य ग्रह जिन्हें यह बल प्रदान कर रहा है ,उनके प्रभाव की अशुभता में परिवर्तन हो जाता है |शुभ ग्रहों के प्रभाव बढ़ जाते हैं और परिवर्तन दिखने लगता है |इस कवच को स्त्री अथवा पुरुष कोई भी धारण कर मनोवांछित लाभ प्राप्त कर सकता है |इस कवच में अनेक राहू से सम्बंधित वनस्पतियों ,उसे प्रभावित करने वाली वनस्पतियों ,मन्त्रों ,यंत्रों ,पदार्थों का विशेष संयोग होता है ,जिन्हें प्राणप्रतिष्ठित -पूजित करने के बाद राहू मन्त्र से अभिमंत्रित किया गया होता है ,जो राहू को शांत कर देता है ,उसके प्रभावों की दिशा बदल देता है |फलतः व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन आ जाता है |यह बड़े बड़े अनुष्ठान और बड़े खर्चों से भी बचाता है|

जय श्री नारायण
 पँ अभिषेक कुमार
9472998128

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