मंगला गौरी व्रत

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श्रावण मास में जिस प्रकार सोमवार का महत्व होता है ठीक उसी प्रकार से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार का भी एक अलग महत्व है हमारे सनातन शास्त्र के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा करनी चाहिए संभव हो तो व्रत कीजिए या फिर पूजा अर्चना के बाद बिना लहसुन प्याज का वैष्णो भोजन कर लीजिए या मीठा भोजन कीजिए या फलाहार कर लीजिए.

मंगला गौरी व्रत वैसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनके जीवन में मंगल ग्रह के कारण मंगल दोष के कारण अशांति आर्थिक क्षति व्यवसायिक हानि बिना गलती किए दंड मिलते हैं और मंगल के कारण जिनका दांपत्य जीवन अच्छा नहीं चल रहा है अथवा मंगल ग्रह के दोष के कारण जिनके विवाह नहीं हो रहे हैं ऐसे लोग लड़के या लड़की दोनों हैं श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के मंगलवार को मंगला गौरी भगवती की पूजा अर्चना करें यह पूजा सबसे पहले माता जानकी ने त्रेता युग में किया था और अपने मनोवांछित पति श्री राम भगवान को पति रूप में प्राप्त किया था वही माता जानकी ने गया में मंगला गौरी भगवती की स्थापना की मंगला गौरी भगवती की पूजा दुर्गा जी के चित्र पर कर सकते हैं.
 या भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का जो चित्र है उस पर भी कर सकते हैं संभव हो तो आचार्य को बुला लीजिए अच्छे पंडित को बुला लीजिए अगर संभव नहीं हो जैसे दुर्गा जी की पूजा करते हैं फूल बिल्वपत्र चंदन धूप दीप नैवेद्य वस्त्र सिंदूर आज से पूजा कीजिए और मंगल ग्रह के कारण जो विवाह नहीं हो रहा है वैवाहिक जीवन में तनाव हो रहा है शारीरिक या व्यवसायिक हनी हो रही है उसको दूर करने के लिए मंगला गौरी भगवती से प्रार्थना कीजिए अमंगल को दूर करके भक्तों के जीवन में मंगल ही मंगल करने के लिए दुर्गा जी का नाम मंगला गौरी से जाना जाता है 21 जुलाई को मंगलवार है सावन मास का शुक्ल पक्ष का और फिर 28 जुलाई को मंगलवार है शुक्ल पक्ष का दोनों ही दिन मंगला गौरी भगवती की पूजा कीजिए।
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जय माता मंगलागौरी🙏🙏

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