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Marriage & sexual life. [Post 3]

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 पुरुषों की कुंडलियों में सातवें भाव का स्वामी बहुत बलवान और पाप ग्रहों से अदृष्ट होना चाहिए। सातवे  भाव का स्वामी के स्वामी से केन्द्र स्थान अग्नि तत्त्व वाला ग्रह नहीं होना चाहिए। सातवे भाव का कारक शुक्र भी पाप ग्रहों से दृष्ट एवम मंगल या शनि से घिरा रहना भी सुखी विवाहित जीवन की दृष्टि से ठीक नहीं है।           शुक्र का सातवें भाव के स्वामी के साथ होना सुखी विवाहित जीवन प्रकट करता है, लेकिन यहां अगर सप्तम भाव का स्वामी सूर्य, मंगल और शनि हो तो यह बात पूर्णतया लागू नहीं होगी, बल्कि वैवाहिक जीवन दुःखपूर्ण भी हो सकता है।     और आगे की जानकारी के लिए फॉलो करें तकी हमारी नए नए पोस्ट की नोटिफिकेशन आप तक आसानी से मिलसके,      @follow me                     

Marriage and sexual life [Post- 2]

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                           जी हाँ , आपने मेरे पहले पोस्ट जैसा की पढ़े और समझे है, आज फिर हम उसी विषय पर                                    अपनी नयी और दूसरी आर्टिकल प्रस्तुत कर रहें हैं।  पहली और सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है की हमे वर और वधु की अलग - अलग विशेस्ताओ की जाँच उनकी कुंडली के आधार पर करनी चाहिए।  पुरुष की कुंडली में उसकी आयु उसका सातवाँ भाव एवं विवाह और उसके बाद में आने वाली दसा -अन्तर्दशा का अध्ययन आवश्यक है।  आयु के लिए ग्रहयोग और दसा  दोनों प्रकार  विचार करना चाहिए।               अकाल मृत्यु , दुर्घटना , हृदयावरोध आदि अशुभ और मारक दशाओ में घटित होते है। प्राचीन भारतीय संस्कृत ग्रन्थों में 'कलत्र दोष '    से योग मिलते है ,  पुरुष की कुंडली में उनका परिहार आवश्यक है।  इस आर्टिकल का संकेड़ पार्ट के लिए आप हमे कमेंट में बताय और आप...

विवाह और यौन जीवन

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भारतीय समाज में विवाह अत्यंत महवपूर्ण धार्मिक एवं आवश्यक संस्कार है।       बहुत प्राचीन समय से विवाह के लिए कुंडलियों का मिलान करने की प्रथा चली आरही है।      इस प्रथा का आशय केवल परम्परा का निर्वाह ही नहीं हैं , अपितु गुण -धर्म -स्व्भाव और प्रकृति के अनुरूप उपुक्त जीवन -साथी की खोज भी है।                                         भारतीय ज्योतिष नक्षत्र , योग , ग्रह राशि अदि तत्वों के आधार पर व्यक्ति के स्व्भाव व गुण  का निस्चय करता है और बतलाता है की अमुक नक्षत्र ,ग्रह और राशि के प्रभाव में उत्पन्न नारी के साथी संबन्ध करना अनुकूल है। इस प्रकार कुंडलियों के मिलान की यह प्रथा वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृस्टि से  अत्यंत उपयुक्त और प्रभावसाली है।                                  भारतीय ज्योतिष मे जन्म-नक्षत्र के चरणों के आधारों पर कुंडली मिलान की परम्परा च...

शक्ति और आरोग्य के देवता हैं सूर्य देव

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🌹🕉श्री भुवन भाष्करायनमः🌹      भगवान सूर्य की साधना,आराधना एवं अर्चना के परम पवित्र एवं अक्षय फलदायी पर्व "सूर्य षष्ठी" के पावन उपलक्ष्य पर दो शब्द..................... ----------------------------------------    शक्ति और आरोग्य के देवता हैं सूर्य देव-- ----------------------------------------      🌷वैदिक काल से भगवान सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है। सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र बताया गया है। सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता हैं। सूर्यदेव की कृपा से ही पृथ्वी पर जीवन बरकरार है। ऋषि-मुनियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताते हुए सूर्य की साधना-आराधना को अत्यंत कल्याणकारी बताया है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। जिनकी साधना स्वयं प्रभु श्री राम ने भी की थी। विदित हो कि प्रभु श्रीराम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी सूर्य की उपासना करके ही कुष्ठ रोग दूर कर पाए थे।     सूर्य की साधना का महत्व -...

दीपावली के आश्चर्य जनक टोटके

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दोस्तों इस बार दीपावली के अवसर पर कुछ छोटे छोटे टोटके(उपाय) करिये और इनका आश्चर्य जनक परिणाम स्वयं देखिये। 1-दीपावली के पांच पर्व होते हैं (धनतेरस, चर्तुदशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया)। पांचों दिन दीपक (चार छोटे एक बड़ा) जरुर जलाएं। दीपक रखने से पहले आसन बिछाएं फिर खील, चावल रखें तथा उस पर दीपक रखें। धन की वृद्वि सदा बनी रहेगी। 2-यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250  ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें। 3-आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बाँध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर 'धनदा यन्त्र' को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेघ अर्पित करें, यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें. प्रतिदिन नहा धोकर यन्त्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें। 4-दीपावली के दिन सुबह तुलसी की माला बना कर मां लक्ष्‍मी के चरणों में चढ़ा दें, इससे आपको धन की बरकत हो...

How to please mahalakshmi?

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🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️ दीपावली पर महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए ये है 51 उपाय, एक उपाय जरूर अपनाएं .... हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं। छत्तीसगढ के ज्योतिष विद्या के जानकार मुंगेली के ज्योतिषी बता रहे है इस दीपावली क्या करे जिससे महालक्ष्मी होगी प्रसन्न। 1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां ध...

करवा चौथ : 17अक्टूबर 2019 विशेष

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती है। सुहागन महिलाओं के लिए चौथ महत्वपूर्ण है। इसलिए इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख की मनोकामना भी पूर्ण हो सकती है। करवा चौथ महात्म्य 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए। महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी ...