.        ।। 🕉 ।।
    🌞 *सुप्रभातम्* 🌞
 ««« *आज का पंचांग* »»»
कलियुगाब्द.................5119
विक्रम संवत्...............2074
शक संवत्..................1939
मास.........................कार्तिक
पक्ष............................कृष्ण
तिथी....................अमावस्या
रात्रि 12.42 पर्यंत पश्चात प्रतिपदा
रवि.....................दक्षिणायन
सूर्योदय..........06.25.15 पर
सूर्यास्त..........05.58.03 पर
तिथि स्वामी...........विश्वदेव
नित्यदेवी.....................चित्रा
नक्षत्र...........................हस्त
प्रातः 07.26 पर्यंत पश्चात चित्रा
योग...........................वैधृति
दोप 03.58 पर्यंत पश्चात विषकुम्भ
करण........................चतुष्पद
दोप 12.24 पर्यंत पश्चात नाग
ऋतु.............................शरद
दिन...........................गुरुवार

🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :-
19 अक्तूबर सन 2017 ईस्वी ।

*श्री महालक्ष्मी पूजन - महाकाली पूजा |*

दीपावली पर्व का पौराणिक महत्व...

* त्रेतायुग में भगवान राम जब रावण को हराकर अयोध्या वापस लौटे, तब श्रीराम के आगमन पर दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया और खुशियां मनाई गईं।

* यह भी कथा प्रचलित है जब श्रीकृष्ण ने आततायी नरकासुर जैसे दुष्ट का वध किया, तब ब्रजवासियों ने अपनी प्रसन्नता दीपों को जलाकर प्रकट की।

* राक्षसों का वध करने के लिए मां देवी ने महाकाली का रूप धारण किया। राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ, तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर के स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्र रूप काली की पूजा का ही विधान है।



* विष्णु ने तीन पग में तीनों लोकों को नाप लिया। राजा बलि की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में भू-लोकवासी प्रत्येक वर्ष ‍दीपावली मनाएंगे।



* अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के ही दिन शुरू हुआ था।
अवसान लिया। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की।

*दीपावली पूजन मुहूर्त विचार :*
लक्ष्मी पूजा को करने के लिए चौघड़िया मुहूर्त देखना उपयुक्त नहीं क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय *प्रदोष काल* के दौरान होता है जब *स्थिर लग्न* प्रचलित होती है। ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है।

*प्रदोष काल मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) :-*
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = संध्या 07.26 से 08:25 तक
अवधि = 0 घण्टे 58 मिनट्स
प्रदोष काल = संध्या 05.54 से 08:25 तक
वृषभ काल = संध्या 07.26 से 09.24 तक

👁‍🗨 *राहुकाल* :-
दोपहर 01.36 से 03.02 तक ।

🚦 *दिशाशूल* :-
दक्षिणदिशा -
यदि आवश्यक हो तो दही या जीरा का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें।

☸ शुभ अंक.................1
🔯 शुभ रंग................पीला

✡ *चौघडिया* :-
प्रात: 06.28 से 07.53 तक शुभ
प्रात: 10.45 से 12.11 तक चंचल
दोप. 12.11 से 01.36 तक लाभ
दोप. 01.36 से 03.02 तक अमृत
सायं 04.28 से 05.54 तक शुभ
सायं 05.54 से 07.28 तक अमृत
रात्रि 07.28 से 09.02 तक चंचल |

💮 *आज का मंत्र* :-
*लक्ष्मी बीज मंत्र :-*
।। ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः।।

*महालक्ष्मी मंत्र :-*
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

*लक्ष्मीगायत्री मंत्र :-*
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

📢 *सुभाषितम्* :-
*अष्टावक्र गीता - अष्टादश अध्याय :-*
अकुर्वन्नपि संक्षोभाद्
व्यग्रः सर्वत्र मूढधीः।
कुर्वन्नपि तु कृत्यानि
कुशलो हि निराकुलः॥१८- ५८॥
अर्थात :- अज्ञानी पुरुष कुछ न करते हुए भी क्षोभवश सदा व्यग्र ही रहता है। योगी पुरुष बहुत से कार्य करता हुआ भी शांत रहता है॥५८॥


⚜ *आज का राशिफल* :-

*राशि फलादेश मेष* :-
रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। जमीन-जायदाद संबंधी बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। चिंता रहेगी।

🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। जल्दबाजी न करें। वाहनादि चलाते समय सावधानी रखें।

*राशि फलादेश मिथुन* :-
बुरी सूचना मिल सकती है। बेचैनी रहेगी। चिंता बनी रहेगी। दौड़धूप अधिक होगी। शांति बनाए रखें। आजीविका के क्षेत्र में लाभ होगा।

🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
प्रयास सफल रहेंगे। काम की प्रशंसा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। विवाद न करें। कुसंगति से बचें। जमीन संबंधी विवाद की आशंका रहेगी।

🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
प्रतिद्वंद्वी सक्रिय रहेंगे। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। पुराने संगी-साथी मिलेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। अप्रिय समाचार मानसिक अस्थिरता बढ़ाएगा।

🏻 *राशि फलादेश कन्या* :-
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। बेरोजगारी दूर होगी। नौकरी, निवेश व यात्रा मनोनुकूल लाभ देंगे। आप प्रसन्न व उत्साहित रहेंगे।

⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
विवाद न करें। जल्दबाजी घातक सिद्ध हो सकती है। कानूनी अड़चन सामने आएगी। फालतू खर्च होगा।कोई रुका काम बनने से प्रसन्नता होगी।

🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
रुका हुआ धन मिल सकता है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। उन्नति होगी। चिंता बनी रहेगी। अधिकारियों का विश्वास हासिल करेंगे।

🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
कार्यस्थल पर सुधार होगा। योजना फलीभूत होगी। पूछ-परख बढ़ेगी। निवेश व यात्रा मनोनुकूल रहेंगे। लाभदायी योजनाएं हाथ में आएंगी।

🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
अध्यात्म में आस्था बढ़ेगी। कानूनी सहायता मिलेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। घर में अशांति रहेगी। आपके द्वारा लिए निर्णय लाभप्रद रहेंगे।

🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
चोट, चोरी व विवाद से हानि संभव है। कुसंगति से हानि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। आवेश पर नियंत्रण रखें।

*राशि फलादेश मीन* :-
कानूनी बाधा दूर होगी। घर में प्रसन्नता रहेगी। धनलाभ होगा। ईष्ट मित्रों से मुलाकात होगी। लाभ होगा। नए अवसर प्राप्त होंगे।

☯नारायण ज्योतिष परामर्श
की ओर से,, आप सभी को दीपोत्सव पर खूब खूब बधाई... माँ महालक्ष्मी, श्री गणेश एवं माँ सरस्वती आपके मनवांछित को प्रदान करे |

- सदैव आपका
ज्ञान जी

।। *शुभम भवतु* ।।

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