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श्रावण में ग्रह के पूजन कर सकते हैं ?

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 श्रावण में जानिए ग्रह के अनुसार किस रोग के लिए क्या उपाय पूजन कर सकते हैं। सूर्य- से संबंधित कष्ट सिरदर्द, नेत्र रोग, अस्थि रोग आदि हों तो श्रावण मास में शिवलिंग का पूजन आक वृक्ष के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्वपत्रों से करने से इन रोगों में आराम मिलता है। चंद्रमा- से संबंधित बीमारी या कष्ट जैसे खांसी, जुकाम, नजला, मानसिक परेशानी, रक्तचाप की समस्या आदि हों तो शिवलिंग का रुद्री पाठ करते हुए काले तिल मिश्रित दूध धार से रुद्राभिषेक करने से आराम मिलता है। मंगल- से संबंधित बीमारी जैसे रक्तदोष हो तो गिलोय, जड़ी-बूटी के रस आदि से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बुध- से संबंधित बीमारी जैसे चर्म रोग, गुर्दे का रोग आदि हों तो विदारा या जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बृहस्पति- से संबंधित बीमारी जैसे चर्बी, आंतों, लिवर की बीमारी आदि हों तो शिवलिंग पर हल्दी मिश्रित दूध चढ़ाने से आराम मिलता है। शुक्र- से संबंधित बीमारी, वीर्य की कमी, मल-मूत्र की बीमारी, शारीरिक या शक्ति में कमी हो तो पंचामृत, शहद और घृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम ...

पति-पत्नी का दांपत्य सुख

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जनमकुंडली के 12वे घर से पति-पत्नी का सम्भोग सुख देखा जाता l जनमकुंडली में जब भी 12वे घर में नीच ग्रह यानि राहु जो 12वे घर में नीच का माना जाता वो बैठ जाए या 12वे घर में जो ग्रह अशुभ माने जाते जैसे सूर्य, चंद्र या बुध बैठे हो या 12 वे घर में एक से ज़्यादा ग्रह बैठ जाए जो आपस में दुश्मन माने गए है जैसे शनि और चंद्र ही बैठ जाए तो ऐसे में पति-पत्नी का सम्भोग सुख अच्छा नही होगा या बेडरूम में हमेशा लड़ाई-झगड़े होते रहेंगे l http://www.narayanjyotishparamarsh.com  Appointment Whtsapp-  +91-8788381356

Astrology information .

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 आपने देखा होगा जब भी आप किसी ज्योतिष के पास जाते हैं तो वह आपकी पत्रिका देखता है और उसका मूल्यांकन  करके आपको आपके जीवन के उन सभी विषयों के बारे में बताता है जो आप जानना चाहते हैं। शायद कभी आपके मन में यह सवाल भी आया हो कि आखिर क्या है ये जन्म पत्रिका जिसे जन्म कुंडली भी कहते हैं? और कैसे इस पत्रिका को देखकर एक ज्योतिष हमारे जन्म, स्वाभाव, कद काठी, धन, परिवार, पढाई लिखे, नौकरी, प्रेम, शादी, संतान और भी कई तरह की जानकारियां बता सकता है? कैसे एक जन्म पत्रिका हमारे पूरे जीवन का खाका तय कर सकती है और कैसे ये भविष्यवाणियां सही साबित हो सकती है? इस तरह के कई सवाल हैं जो एक सामान्य मनुष्य के दिमाग में आना स्वाभाविक है अगर वह ज्योतिष विधा के बारे में ज्यादा नहीं जानता। इस आलेख के माध्यम से मेरा प्रयास है कि अगर आपके दिमाग में भी इस तरह के प्रश्न हैं तो उनका उत्तर आपको दे सकूं। आप सभी एक्स-रे फिल्म के बारे में तो ज़रूर जानते होंगे...जिसके माध्यम से हम शरीर के अंदर किसी भाग कि स्थिति को यथावत देख पाते हैं। हमारी जन्मपत्रिका भी एक तरह कि एक्स-...

घर परिवार की खुशहाली के लिए औरतें सुबह उठतकर जरूर करें ये काम

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आपको बता दें, कि हिंदू धर्म शास्त्रों में लिखा हैं कि घर में खुशहाली की चाबी महिला के हाथ में होती हैं घर की औरत जैसा चाहे अपने घर को बना सकती हैं वही वास्तुशास्त्रों के मुताबिक अगर औरत कुछ चीजों को ध्यान में रखे तो घर की सभी परेशानियों और समस्याओं से मनुष्य को छुटकारा मिल सकता हैं वही ऐसा भी कहा जाता हैं कि जिस घर का​ निर्माण वास्तु के हिसाब से नहीं होता हैं वहां के लोगो को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं इसके साथ ही वास्तुशास्त्र में कुछ ऐसी बातें भी बताई गई हैं जिनका महिलाओं के द्वारा पालन करना लाभकारी माना जाता हैं तो आज हम आपको वास्तु शास्त्रों के हिसाब से घर की महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं। वास्तुशास्त्रों के मुताबिक घर की महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। सुबह उठकर घर की साफ सफाई करने के बाद भगवान की आरती उतारने से घर में मौजूद आलस्य और परेशानियां मीलों दूर हो जाती हैं वही साथ ही घर के लोगो का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता हैं। घर के मुखिया अगर सुबह उठकर तांबे के लोटे में पानी भरकर, मेन गेट ...

जन्मपत्रिका

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जन्मपत्रिका में राहु -केतु द्वारा निर्मित शुभाशुभ योग 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 १ अष्ट लक्ष्मी योग👉 जन्मांग में राहु छठे स्थान में और वृहस्पति केंद्र में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग बनता हैं। इस योग के कारण जातक धनवान होता हैं और उसका जीवन सुख शांति के साथ व्यतीत होता हैं। २ मोक्ष योग👉 जन्मांग में वृहस्पति और केतु का युति दृष्टि सम्बन्ध हो तो मोक्ष योग होता हैं। यदि केतु गुरु की राशी और वृहस्पति उच्च राशी कर्क में हो तो मोक्ष की सम्भावना बढ़ जाती हैं। ३ परिभाषा योग👉 तीसरे छठे, दसवे या ग्यारहवे भाव में राहु शुभ होकर स्थित हो तो परिभाषा योग का निर्माण करता हैं। ऐसा राहु जातक को कई प्रकार की परेशानियों से बचा लेता हैं। इनमे स्थित राहु दुसरे ग्रहों के अशुभ प्रभाव को भी कम करता हैं। ४👉 अरिष्ट भंग योग👉 मेष ,वृष या कर्क लग्न में राहु नवम, दशम या एकादश भाव में स्थित हो तो अरिष्ट भंग योग बनता हैं जो अपने नाम के अनुसार ही कई प्रकार के अरिष्टो का नाश करता हैं। ५ लग्न कारक योग👉 यदि लग्नेश अपनी उच्च राशी या स्वराशी में हो और राहु लग्नेश की राशी में स्थित हो तो लग्न कारक योग बनता हैं। यह ...

सूर्य अर्घ्य

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ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भारतीय शास्त्रों के अनुसाए सूर्य देव को जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. जी हां अक्सर आप अपनी समस्या लेकर जब किसी पंडित के पास जाते है, तो वो सबसे पहले सूर्य को अर्घ देने का उपाय ही सुझाते है. वही अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे सूर्य ग्रह मजबूत हो तो यह माना जाता है, कि वह व्यक्ति काफी गुणवान होता है. साथ ही समाज मे उसका बहुत मान सम्मान भी होता है. इसके इलावा वह बहुत प्रतिष्ठित भी होता है. ऐसे मे कुंडली मे सूर्य ग्रह को मजबूत रखना बेहद जरुरी है। वैसे महाभारत काल से ऐसा माना जाता है, कि कर्ण नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करते थे और सूर्य को जल का अर्घ भी देते थे. इसके इलावा सूर्य देव की पूजा के बारे मे भगवान् राम की कथा मे भी यह लिखा गया है, कि भगवान् राम हर रोज सूर्य देव की पूजा करते थे और अर्घ देते थे. वैसे कलयुग मे भी ऐसे बहुत से लोग है जो सूर्य देव को जल अर्पित करते है और उनकी पूजा करते है. गौरतलब है, कि सूर्य देव को अगर पूरी विधि के साथ जल चढ़ाया जाये तो इसके परिणाम और भी अच्छे होते है। यदि ह...

Gajendra Moksha

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          :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::          ‼️Gajendra Moksha- Significance ‼️ ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: The Bhagwat has many Kathas which explain some very important deep meanings to life and sufferings.Many of them are also indicative of Astrology or guidance to dealing with difficulties in life. Gajendra Moksha is a story of an elephant who was the king in his forest. While drinking water from the Lake he is suddenly attacked by a crocodile. He tries his best but he is not able to get his foot out of the crocodile s mouth. He is stuck and caught, the pain is immense and unbearable. When he just cannot take the suffering anymore he calls out to Vishnu.  His prayer is a powerful, beautiful stotra which can be chanted by anyone to relieve themselves of sufferings. Finally, Vishnu appears and takes Ganjendra with him to Vis...