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*धन-नाश योग--*

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💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को कर्ज लेना निषेध माना गया है। वहीं  बुधवार को कर्ज देना अशुभ है क्योंकि बुधवार को दिया गया कर्ज कभी नही मिलता। मंगलवार को कर्ज लेने वाला जीवनभर कर्ज नहीं चुका पाता तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह परेशानियां उठाती हैं।जन्म कुंडली के छठे भाव से रोग, ऋण, शत्रु, ननिहाल पक्ष, दुर्घटना का अध्ययन किया जाता है| ऋणग्रस्तता के लिए इस भाव के आलावा दूसरा भाव जो धन का है, दशम-भाव जो कर्म व रोजगार का है, एकादश भाव जो आय का है एवं द्वादश भाव जो व्यय भाव है, का भी अध्ययन किया जाता है| इसके आलावा ऋण के लिए कुंडली में मौजूद कुछ योग जैसे सर्प दोष व वास्तु दोष भी इसके कारण बनते हैं| इस भाव के कारक ग्रह शनि व मंगल हैं|* 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 *दूसरे भाव का स्वामी बुध यदि गुरु के साथ अष्टम भाव में हो तो यह योग बनता है| जातक पिता के कमाए धन से आधा जीवन काटता है या फिर ऋण लेकर अपना जीवन यापन करता है| सूर्य लग्न में शनि के साथ हो तो जातक मुकदमों में उल...

ग्रह और बीमारियाँ

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🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 ग्रह जब भ्रमण करते हुए संवेदनशील राशियों के अंगों से होकर गुजरता है तो वह उनको नुकसान पहुंचाता है। नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को ध्यान में रखकर आप अपने भविष्य को सुखद बना सकते हैं। वैदिक वाक्य है कि पिछले जन्म में किया हुआ पाप इस जन्म में रोग के रूप में सामने आता है। शास्त्रों में बताया है-पूर्व जन्मकृतं पापं व्याधिरूपेण जायते अत: पाप जितना कम करेंगे, रोग उतने ही कम होंगे। अग्नि, पृथ्वी, जल, आकाश और वायु इन्हीं पांच तत्वों से यह नश्वर शरीर निर्मित हुआ है। यही पांच तत्व 360 की राशियों का समूह है। इन्हीं में मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व, वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व, मिथुन, तुला और कुंभ वायु तत्व तथा कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। कालपुरुष की कुंडली में मेष का स्थान मस्तक, वृष का मुख, मिथुन का कंधे और छाती तथा कर्क का हृदय पर निवास है जबकि सिंह का उदर (पेट), कन्या का कमर, तुला का पेडू और वृश्चिक राशि का निवास लिंग प्रदेश है। धनु राशि तथा मीन का पगतल और अंगुलियों पर वास है। इन्हीं बारह राशियों को बारह भाव के ना...

Secret enemies

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~Namastey 😇🙏 Good evening all ! ••••Now-a-days this question  arise in our Mind & I would like to discuss about this !!! •••"Secret enemies " Are WHO  wants our downfall, Wheres known enemies to be seen from 6th(shatrusthana ) house from ascendent  #But the 12th house Traditionally considered as hidden enemies !!! ~~We know 12th house stand for many things like ~~ Loss and impediments, extravagance, expenses, investments, donations, charities,far  places, sorrow, sin, Misfortune, poverty, association, fraud, scandal, disgrace, secret sorrows, success through occult affairs, the feet, the left eye, the left ear, comforts of bed, debts, Moksha -final salvation, #secret enemies ETC ~~My particular topic is all about #secret #enemies who play secretly behind us !!! ~~~Known enemies can affect our body which is majorly caused by afflicted mars/6th house /weak ascendent! !! But secret enemies somewhere reason for #Malefic #Nodes (especially ketu )!!! ...

क्या आप चिन्ताओं से मुक्ति पाना चाहते हैं...

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🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 अगर आप चाहते हैं कि आपका पूरा दिन अच्छा गुजरे आपके सारे काम बनते चले जाएं तो चिन्ताओं को स्वयं से दूर रखनेका आप तुरन्त कारगर उपाय कीजिए। ........................................................................................... 1 प्रतिदिन नहाने के पश्चात एक सुंदर बर्तन में साफ जल भरकर उसमें सफेद फूल डालकर घर के मुख्य दरवाज़े पर रखें ताकि जब आप काम पर जाएं तो घर से निकलते समय आपकी नज़र उस पर पड़े देखिए कुछ ही दिनों में आपके सारे बिगड़े काम कैसे बनने लगते हैं। 2 घर का कोई नल टपक रहा हो अथवा छत पर रखी पानी की टंकी लीक कर रही हो तो उसे ठीक करवाएं क्योंकि इससे घर में धन नहीं रुकता और आप जो कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो जाता है। 3 मानसिक परेशानी जरूरत से ज्यादा बढ़ गयी हो तो आज से ही नित्य हनुमान चालीसा या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना शुरू करें। 4 अपनी पहनी हुई चप्पल या जूता शनिवार के दिन किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। 5 अगर आपकी बीमारी ठीक नहीं हो रही है, आप हमेशा रोगग्रस्त रहते हैं तो कुछ दिनों के लिए अपना सिरहाना पूर्व की तरफ़ कर लें। 6 अगर व्यवसाय में...

महाशिवरात्रि

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................................................................................... *4 मार्च को इस शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजन तो होगी भगवान शिव की विशेष कृपा* फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को महाशिवरात्रि पर्व होता है। इस वर्ष यह महापर्व 4 मार्च, सोमवार को श्रवण नक्षत्र और परिघ नामक महत्वपूर्ण योग में पड़ रहा है। शिवशाक्त में इस महापर्व का उल्लेख करते हुए ऋषियों की वाणी है कि ,शिवरात्रि पर साक्षात् शिव-शक्ति अर्थात् पार्वती के साथ त्रिलोक में विचरण करते हैं।तथा इसी दिन शिव-विवाह का प्रमाण भी प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि को कब करें शिव का पूजन शिवरात्रि को जन्म जन्मांतर तक भ्रमित जीव मात्र को शिव आराधना-पूजा से भय एवं शोक से मुक्ति मिलती है-'जन्तुजन्म सहस्रेषु भ्रमन्ते नात्र संशय:'। ज्‍योतिषाचार्य पंडित चक्रपाणि भट्ट के अनुसार इस वर्ष शिव-पूजन प्रारम्भ करने का शुभ विशेष मुहूर्त प्रातः 6 बजकर 43 मिनट से सायं 4 बजकर 18 मिनट तक सर्वार्थ योग में है। रात्रि पर्यंत रुद्राभिषेक करने से आराधक को शक्ति के साथ शिव का सायुज्य प्राप्त होता है। संकल्प के साथ शिव का षोडशोपचार पूजन कर...

successful journey

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😊Finally 3 Year Successfully Complete The Journey Of Our Narayan Jyotish Paramarsh With The Help & Support Of You , Hope All Of You Get Your Best From Me  & Always I Would Try To Do Our Best For You  With The Help Of Our Narayan Jyotish Paramarsh..For More Information Visit Our Astro Blog Website... www.narayanjyotishparamarsh.com & Contact To Me📞:-- +91-8788381356                        Narayan..😊🙏🏻🙏🏻

क्यों नहीं चढ़ाते शिव जी पर शंख से जल ?

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तो इस वजह से शंख से नहीं चढ़ाते शिवलिंग पर जल किसी भी भगवान की पूजा शुरू करने से पहले उन भगवान को जल जरूर अर्पित किया जाता है और जल को चढ़ाने के लिए लोग शंख का इस्तेमाल करते हैं. शंख के जरिए ही जल को भगवान की मूर्ति पर डाला जाता है. हालांकि शिव जी भगवान को कभी भी शंख के जरिए जल अर्पित नहीं किया जाता है और ना ही उनकी पूजा के दौरान शंख का इस्तेमाल करना सही माना जाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और क्यों शिव जी की पूजा के दौरान शंख के जरिए कभी भी उनका जलााभिषेक नहीं किया जाता है. दरअसल ऐसा करने के पीछे एक कथा है और उस कथा का उल्लेख शिवपुराण में किया गया है. शिवजी और शंख से जुड़ी कथा शिवपुराण में लिखी कई एक कथा के अनुसार दैत्यराम दंभ को कोई भी संतान नहीं थी और दैत्यराम दंभ ने संतान हासिल करने हेतु काफी तप किया था. दैत्यराम दंभ के तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इन्हें दर्शन दिए थे और इन्होंने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा था. मांगे गए वरदान में दैत्यराम दंभ ने विष्णु जी से एक ऐसी संतान मांगी थी जो तीनों लोकों के लिए अजेय हो. विष्णु जी ने दैत्यर...