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बुध उत्पन्न करता है ?

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कमजोर बुध उत्पन्न करता है ये स्वास्थ समस्याएँ फलित ज्योतिष में बुध अपनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हमारे जीवन के बहुत विशेष घटकों को नियंत्रित करता है बुध को सबसे कम आयु का ग्रह माना गया है इस लिए इसे राजकुमार का पद दिया गया है, बुध का रंग हरा है वर्ण वैश्य  है बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है कन्या राशि बुध की उच्च राशि भी है और मीन राशि में बुध नीचस्थ अर्थात सबसे कमजोर होता है, शनि, शुक्र और राहु  बुध के मित्र ग्रह हैं और गोचरवश बुध किसी भी राशि में लगभग एक माह रहता है। ज्योतिष में बुध को वैसे तो बुद्धि, कैचिंग पॉवर, तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता, याददास्त, सोचने समझने की क्षमता,  वाणी, बोलने की क्षमता, उच्चारण, व्यव्हार कुसलता, सूचना, संचार, यातायात, व्यापार, वाणिज्य, गणनात्मक विषय, लेखन,  कम्युनिकेशन और गहन अध्ययन का कारक माना गया है और ये सभी घटक हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं विशेषतः बुद्धि क्षमता की तो आज के समय में सर्वाधिक और हर जगह आवश्यकता होती है। पर इन सब के अलावा बुध का हमारे स्वास्थ और शरीर पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है बु...

दिवाली विशेष यन्त्र रचना

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व्यापार वृद्धिकारक यन्त्र ================ इस यन्त्र की रचना दीवाली की आधी रात को की जाती है |इसको सिन्दूर या हिंगुल से दीवार पर [दूकान के बाहर ] लिखा जाता है |इसे भोजपत्र पर लिखाकर लटकाया भी जा सकता है अथवा धारण भी किया जा सकता है |दूकान में लटका कर नित्य धूप दीप करते रहना चाहिए | भोजपत्र पर यंत्र को पंचगंध से अनार की कलम से लिखना चाहिए |इसके बाद विधिवत पूजन कर दूकान में लगा देना चाहिए |इसे शीशे में फ्रेम भी किया जा सकता है |इसे नित्य धूप दीप दिखाना चाहिए |धारण करने के लिए इसे चांदी के कवच में बंद कर गले या बाजू में धारण किया जाता है|  यह यन्त्र व्यापार में उत्तरोत्तर वृद्धि देता है |कुदृष्टि से बचाव करता है |सुरक्षा देता है |यदि यह यन्त्र स्त्री के गले या बाजू में धारण करा दिया जाए तो इसके प्रभाव से गर्भ की रक्षा तथा संतान की प्राप्ति होती है 🔈🔉🔊 यदि आप भी चाहते है,,,की इस यन्त्र अपने घर या दुकान में स्थापित करें तो अवस्य सम्पर्क करें ☎. +918788381356

Vipareeta Raja yoga,

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world famous astrologer most powerful spiritualist from India.. all religious an expert pandit your service... Pt.abhishek sastri Contact no:-+918788381356 It must be noted that debilitation of some planets are desirable in a horoscope. They are the lords of the Dusthanas (6th/ 8th/ 12th). If the lords of the Dusthanas are placed in other Dusthanas in debilitation, then it confers Vipareeta raja yoga, whereby the native gains due to the loss of natural and functional significations of the planet causing the yoga. For example, if 8th lord Moon is involved in Vipareeta Raja yoga, by its debilitation in the 12th house, the native might enjoy rise in life, but the Mother (natural signification of Moon) and the marriage (8th house is the longevity of marriage) might suffer simultaneously. To enjoy the fruits of Vipareeta Raja yoga, the native must not strengthen such debilitated planets that confer the yoga. Click here   👇👇👇 https://www.narayanjyotishparamar...

आयुष्य योग

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Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=.  आयुष्य निर्णय पर ज्योतिष शास्त्र के सर्वमान्य सूत्रों के संकलन उदाहरण जैमिनी सूत्र की तत्वादर्शन नामक टीका में मिलता है। महर्षि मैत्रेय ने ऋषि पाराशर से जिज्ञासा वश प्रश्न किया कि हे मुन्हे आयुर्दाय के बहुत भेद शास्त्र में बतलाये गये है कृपाकर यह बतलायें कि आयु कितने प्रकार की होती है और उसे कैसे जाना जाता है,इस ज्योतिष के मूर्तिमंत स्वरूप ऋषि पराशर बोले - बालारिष्ट योगारिष्ट्मल्पमध्यंच दीर्घकम। दिव्यं चैवामितं चैवं सत्पाधायु: प्रकीर्तितम॥ हे विप्र आयुर्दाय का वस्तुत: ज्ञान होना तो देवों के लिये भी दुर्लभ है फ़िर भी बालारिष्ट योगारिष्ट अल्प मध्य दीर्घ दिव्य और अस्मित ये सात प्रकार की आयु संसार में प्रसिद्ध है। बालारिष्ट ज्योतिष शास्त्र में जन्म से आठ वर्ष की आयुपर्यंत होने वाली मृत्यु को बालारिष्ट कहा गया है। यथा लग्न से ६ ८ १२ में स्थान में चन्द्रमा यदि पाप ग्रहों से द्र्ष्ट हो तो जातक का शीघ्र मरण होता है। सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण का समय हो सूर्य चन्द्रमा राहु एक ही राशि में हों तथा लग्...

आप को किस क्षेत्र मे मिलेगी सफलता -

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Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=.  जन्मांग चक्र का दशम भाव कर्म भाव कहा जाता है। इसके स्वामी को दशमेश या कर्मेश कहा गया है। दशम भाव से व्यक्ति की आजीविका का विचार किया जाता है। अर्थात् व्यक्ति सरकारी नौकरी करेगा अथवा प्राइवेट, या व्यापार करेगा तो कौन सा, उसे किस क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी। आज अधिकांश लोग अपनी आजीविका से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कार्य क्षेत्र या कर्म का प्रकार उनके मन के अनुकूल नहीं है। अब प्रश्न उठता है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनोनुकूल कार्य कौन सा हो सकता है, उसका निर्धारण कैसे हो? मन का स्वामी चंद्र जिस राशि में हो उस राशि से स्वामी ग्रह की प्रकृति के आधार पर या चंद्र से उसके युति अथवा दृष्टि संबंध के आधार पर यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका (व्यापार नौकरी) का चयन करता है अथवा कार्यरत है तो वह कैरियर उसके मन पसंद का होगा। जन्मकुंडली में कोई ग्रह जब लग्नेश, पंचमेश या नवमेश होकर दशम भाव में स्थित हो, या दशमेश होकर किसी भी त्रिकोण (1, 5, 9 भावों) में, या अपने ही स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति की आजीविका के पर...

काला_सुरमा

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जीवन है तो समस्या है और समस्या है तो उपाय है, इन्ही में से अगर आप - आपकी उन्नति से जलने वालो से या आप पर बुरी नजर रखने वालों से परेशान है तो, शनिवार के दिन काला खड़ा सुरमा किसी भी पंसारी की दुकान से खरीदें और यह काला खड़ा सूरमा अपने घर के रोशनदान के ऊपर रख दें, ईश्वर ने चाहा तो मात्र इतने से सात्विक उपाय/ᵘᵖᵃᵃᵞᵉ आप दोनों प्रकार की समस्यायों से निज़ात पा जायंगे, श्री रामलल्ला आपको व् आपके अपनों को सदेव स्वस्थ रखे-संपन्न रखे इसी कामना के साथ, ॐ-शान्ति... विमल पाहुजा, रोल्स ˚ ˚ ˚ Call & whatsapp no+918788381356 https://www.narayanjyotishparamarsh.com/?m=1 #narayan#jyotish#paramarsh

प्रेम विवाह

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एक जमाना था जब समाज स्वीकार नहीं करता था प्रेम विवाह को आज है कि रोजमर्रा की बात है, समाज स्वीकार कर रहा है लेकिन ये जानना जरूरी है कि किसका प्रेम विवाह सफल होगा और किसका नहीं तो विवाह से पहले एक दोस्ती का दौर चलता है लडकी के लिये उसका दोस्त मंगल है लडके के लिये उसकी दोस्त बुध है और शादी के बाद गृहस्थी का सुख कारक शुक्र है तो जिनकी भी कुंडलियों में मंगल, शुक्र और बुध किसी भी तरह से संबंधित होते हैं वो विपरीत लिंगी की तरफ सहज ही खिंचते है अब अगर इसमें मंगल या बुध खराब हुये तो कुंडली में शुक्र कितना ही शुभ हो, गृहस्थी में समस्या आनी ही आनी है अब अलगाव न भी हो तो कोई और आर्थिक, शारीरिक या कोई और समस्या पैदा हो जायेगी जो गृहस्थ जिंदगी का मजा न लेने देगा | मंगल जहां शरीर और पैसे से मारता है वहीं बुध बेकार के झगडे लगाकर दूरियां बढा देता है  इसलिये, सावधान रहें और प्रेम विवाह से पूर्व अपनी कुंडली का अवलोकन अवश्य करवायें | जिनकी कुंडली में प्रेम विवाह शुभ फल दे रहा हो वो प्रेम विवाह अवश्य करें चाहे जमाना बैरी हो जाये क्योंकि प्रकृति के कुछ नियम हैं और आपकी जिंदगी के प्राकृति...