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दीपावली के आश्चर्य जनक टोटके

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दोस्तों इस बार दीपावली के अवसर पर कुछ छोटे छोटे टोटके(उपाय) करिये और इनका आश्चर्य जनक परिणाम स्वयं देखिये। 1-दीपावली के पांच पर्व होते हैं (धनतेरस, चर्तुदशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया)। पांचों दिन दीपक (चार छोटे एक बड़ा) जरुर जलाएं। दीपक रखने से पहले आसन बिछाएं फिर खील, चावल रखें तथा उस पर दीपक रखें। धन की वृद्वि सदा बनी रहेगी। 2-यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250  ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें। 3-आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बाँध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर 'धनदा यन्त्र' को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेघ अर्पित करें, यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें. प्रतिदिन नहा धोकर यन्त्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें। 4-दीपावली के दिन सुबह तुलसी की माला बना कर मां लक्ष्‍मी के चरणों में चढ़ा दें, इससे आपको धन की बरकत हो...

How to please mahalakshmi?

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🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃🍃☘️🍃☘️🍃☘️🍃☘️ दीपावली पर महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए ये है 51 उपाय, एक उपाय जरूर अपनाएं .... हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का सबसे अधिक महत्तव है। इस पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है। यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान से लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो अगली दीपावली तक लक्ष्मी कृपा से घर में धन और धान्य की कमी नहीं आती है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो दीपावली के दिन करने पर बहुत जल्दी लक्ष्मी की प्रसन्नता प्राप्त की जा सकती है। यहां लक्ष्मी कृपा पाने के लिए 51 उपाय बताए जा रहे हैं और ये उपाय सभी राशि के लोगों द्वारा किए जा सकते हैं। यदि आप चाहे तो इन उपायों में से कई उपाय भी कर सकते हैं या सिर्फ कोई एक उपाय भी कर सकते हैं। छत्तीसगढ के ज्योतिष विद्या के जानकार मुंगेली के ज्योतिषी बता रहे है इस दीपावली क्या करे जिससे महालक्ष्मी होगी प्रसन्न। 1. दीपावली पर लक्ष्मी पूजन में हल्दी की गांठ भी रखें। पूजन पूर्ण होने पर हल्दी की गांठ को घर में उस स्थान पर रखें, जहां ध...

करवा चौथ : 17अक्टूबर 2019 विशेष

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती है। सुहागन महिलाओं के लिए चौथ महत्वपूर्ण है। इसलिए इस दिन पति की लंबी उम्र के साथ संतान सुख की मनोकामना भी पूर्ण हो सकती है। करवा चौथ महात्म्य 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए। महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी ...

श्री राम रक्षा स्तोत्र

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 मित्रो आज हम आपको श्री राम रक्षा स्तोत्र भावार्थ सहित बतायेगें!!!!!! इस राम रक्षा स्तोत्र मंत्र के रचयिता बुध कौशिक ऋषि हैं, सीता और रामचंद्र देवता हैं, अनुष्टुप छंद हैं, सीता शक्ति हैं, हनुमान जी कीलक है तथा श्री रामचंद्र जी की प्रसन्नता के लिए राम रक्षा स्तोत्र के जप में विनियोग किया जाता हैं। ॥ अथ ध्यानम्‌ ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥ वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥ ध्यान धरिए — जो धनुष-बाण धारण किए हुए हैं,बद्द पद्मासन की मुद्रा में विराजमान हैं और पीतांबर पहने हुए हैं, जिनके आलोकित नेत्र नए कमल दल के समान स्पर्धा करते हैं, जो बाएँ ओर स्थित सीताजी के मुख कमल से मिले हुए हैं- उन आजानु बाहु, मेघश्याम,विभिन्न अलंकारों से विभूषित तथा जटाधारी श्रीराम का ध्यान करें | ॥ इति ध्यानम्‌ ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥ श्री रघुनाथजी का ...

जानें गणेश चतुर्थी तिथि

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 जानें गणेश चतुर्थी तिथि, डेट, टाइम, कथा और महत्व भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को गजानन, गजदंत, गजमुख जैसे नामों से भी जाना जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल हिन्दू पंचाग के भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को  मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुथी 2 सितंबर को शुरू हो रही है। दो सितंबर को ही लोग भगवान गणेश की मूर्ति स्थापति कर अगले 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाएंगे। गणेश चतुर्थी कथा - पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने से पहले चंदन का उपटन लगा रही थीं। इस उबटन से उन्होंने भगवान गणेश को तैयार किया और घर के दरवाजे के बाहर सुरक्षा के लिए बैठा दिया। इसके बाद मां पार्वती स्नान करने लगे। तभी भगवान शिव घर पहुंचे तो भगवान गणेश ने उन्हें घर में जाने से रोक दिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और गणेश सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती को जब इस बात...

रक्षा बंधन के त्यौहार को बनाए खास

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🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿 रक्षा बंधन के त्यौहार को बनाए खास, जानें कौन से रंग की राखी आपके भाई के लिए रहेगी शुभ ... भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन त्यौहर इस बार स्वतंत्रता दिवस यानी कि 15 अगस्त के दिन पड़ रहा है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की लंबी उम्र के लिए उन्हें रक्षा सूत्र बांधती है। राखी कौन से कलर की लेनी है, कैसी राखी लें वैसे तो ये बहनों की चॉइस पर निर्भर करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने भाई के जीवन में तरक्की के लिए आप उन्हें उनकी राशि अनुसार राखी बांध सकती हैं। क्योंकि हर एक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है। और हर ग्रह का एक पसंदीदा रंग भी होता है। बस उसी को देखते हुए आप अपने भाई के लिए राखी का रंग चुन सकती हैं… मेष राशि: जिस बहन के भाई की राशि मेष है उन्हें अपनी भाई को लाव रंग की राखी बांधनी चाहिए। क्योंकि इन राशि वालों का स्वामी ग्रह मंगल है। इससे आपके भाई के शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी। वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातकों को नीले रंग की राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा। क्योंकि आपकी राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। मिथुन राशि: मिथुन राशि का स्वामी ग्...

श्रावण में ग्रह के पूजन कर सकते हैं ?

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🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 श्रावण में जानिए ग्रह के अनुसार किस रोग के लिए क्या उपाय पूजन कर सकते हैं। सूर्य- से संबंधित कष्ट सिरदर्द, नेत्र रोग, अस्थि रोग आदि हों तो श्रावण मास में शिवलिंग का पूजन आक वृक्ष के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्वपत्रों से करने से इन रोगों में आराम मिलता है। चंद्रमा- से संबंधित बीमारी या कष्ट जैसे खांसी, जुकाम, नजला, मानसिक परेशानी, रक्तचाप की समस्या आदि हों तो शिवलिंग का रुद्री पाठ करते हुए काले तिल मिश्रित दूध धार से रुद्राभिषेक करने से आराम मिलता है। मंगल- से संबंधित बीमारी जैसे रक्तदोष हो तो गिलोय, जड़ी-बूटी के रस आदि से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बुध- से संबंधित बीमारी जैसे चर्म रोग, गुर्दे का रोग आदि हों तो विदारा या जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करने से आराम मिलता है। बृहस्पति- से संबंधित बीमारी जैसे चर्बी, आंतों, लिवर की बीमारी आदि हों तो शिवलिंग पर हल्दी मिश्रित दूध चढ़ाने से आराम मिलता है। शुक्र- से संबंधित बीमारी, वीर्य की कमी, मल-मूत्र की बीमारी, शारीरिक या शक्ति में कमी हो तो पंचामृत, शहद और घृत से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम ...