|| व्यापार_योग ||

||#हतेली
_में_व्यापार_योग||                                             हतेली में बुध पर्वत पर तीन रेखाएं स्पष्ट खड़ी हो साथ ही बुध पर्वत ठीक तरह से विकसित हो बुध की ऊँगली(कनिष्का ऊँगली) सूर्य की ऊँगली(अनामिका ऊँगली)के तीसरे पोर तक जाती हो गुरु शनि पर्वत विकसित हो भाग्यरेखा चंद्र पर्वत या मणिबंध से निकालकर शनि पर्वत बिना किसी रुकाबट के बली होकर जाती हो तो ऐसे जातक व्यापार करते है और व्यापार में सफलता प्राप्त करते है।बुध पर्वत व्यापार का कारक है तो गुरु धन का तो शनि परिश्रम का कारक इन तीनो का हाथ में भाग्यरेखा सहित बली होना निश्चित ही व्यापार में सफलता देता है।बुध पर्वत पर तीन रेखाएं या कोई शुभ चिन्ह होना व्यापारिक सफलता के लिए जरूरी है या बुध रेखा हाथ में हो।जातक व्यापार किस चीज का करेगा यह भाग्यरेखा अंत में ओर की अंत में शाखाएं किस ग्रह की ओर जा रही है उस ग्रह से सम्बंधित जातक व्यापार करता है।यदि अन्य में भाग्यरेखा की कई शाखाये हो तब जातक कई चीजो का व्यापार करता है ग्रहो के कारक तत्व सम्बंधित विषय के अनुसार।यदि बुध गुरु शनि पर्वत अविकसित हो भाग्यरेखा दुर्बल हो तो ऐसे जातक को कभी व्यापार नही करना चाहिए।                                                                                              इन उपरोक्त ग्रहो हस्तरेखा योग के साथ हतेली में सूर्य रेखा का होना, सूर्य पर्वत का विकसित होना व्यापार सफलता में ज्यादा से ज्यादा सफलता देता है।

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